NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
स्वास्थ्य
भारत
राजनीति
कोरोना आपदा में बुजुर्गों को लेकर सरकार और समाज का रवैया कैसा है?
दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को आप सरकार से कहा कि कोरोना वायरस का संक्रमण फैलने से रोकने के लिए लागू लॉकडाउन के दौरान बुजुर्गों की समस्याओं को दूर करने और उन्हें सहायता देने के लिए वह एक हेल्पलाइन शुरू करे।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
23 Apr 2020
बुजुर्ग
Image courtesy: Let'sch Focus

दिल्ली: कोरोना वायरस का संक्रमण देश में लगातार बढ़ रहा है। दुनिया भर में कोरोना संक्रमण से सबसे ज्यादा खतरा सीनियर सिटीजन को है। ऐसे में सबसे ज्यादा ख्याल उन्हीं का रखने की जरूरत है। दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को आप सरकार से कहा कि कोरोना वायरस का संक्रमण फैलने से रोकने के लिए लागू लॉकडाउन के दौरान बुजुर्गों की समस्याओं को दूर करने और उन्हें सहायता देने के लिए वह एक हेल्पलाइन शुरू करे।

न्यायमूर्ति हिमा कोहली और न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह कहा। याचिका में मांग की गई थी कि लॉकडाउन के दौरान वरिष्ठ नागरिकों को बैंकिंग, स्वास्थ्य, किराना तथा अन्य मूलभूत सुविधाएं उनके घर पर उपलब्ध करवाई जाएं। पीठ ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया कि वह तत्काल प्रभाव से एक हेल्पलाइन नंबर शुरू करे और इसका व्यापक प्रचार करे।

इससे पहले सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की ओर से देश के सीनियर सिटीजन के लिए एडवायजरी जारी की गई थी जिसमें लॉकडाउन के समय सीनियर सिटीजन को सलाह दी गई है कि वे घर से बाहर न निकलें। खुद को साफ रखें और अपने आसपास सफाई रखें। घर के भीतर रहकर खुद को एक्टिव रखें। योग व हल्के व्यायाम करते रहें। नाक-मुंह ढंककर रखें।

गर्मी में पर्याप्त पानी पीते रहें। समय-समय पर हाथ धोते रहें। चश्मा व रोजाना काम में आने वाली अन्य चीजें भी साफ करते रहें। घर का बना पौष्टिक खाना खाएं और इम्यूनिटी मजबूत बनाए रखने के लिए ताजा जूस पीते रहें।

लेकिन क्या इस कठिन दौर में यह एडवायजरी जारी करने से बुर्जुगों के लिए सरकार के कर्तव्य पूरे हो गए? क्या इस समय उनका अतिरिक्त ख्याल रखने की जरूरत नहीं है?

कोरोना से सीनियर सिटीजन को ख़तरा कितना बड़ा है इसका अंदाजा स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा 19 अप्रैल को जारी एक आंकड़े से हो जाता है। मंत्रालय के अनुसार भारत में कोविड 19 के संक्रमण से होने वाली कुल मौत में 75.3 प्रतिशत लोगों की उम्र 60 साल से ज्यादा है। उम्र के साथ साथ इस संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। अभी तक कुल मौतों में से 42.2 प्रतिशत लोगों की उम्र 75 साल से ज्यादा है।

ऐसे में सवाल यह है कि सरकार 60 की उम्र पार कर गए लोगों के लिए अलग क्या कर रही है तो जवाब आएगा कि कुछ नहीं। दरअसल हर व्यक्ति को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना सरकार की जिम्मेदारी है, लेकिन भारत के बुजुर्ग राम भरोसे हैं। इनकी संख्या भी बढ़ती जा रही है पर ऐसे बुजुर्ग मुफलिसी में जीवन गुजारने को मजबूर हैं।

गौरतलब है कि भारत में बुजुर्गों की आबादी साल 2011 में 10.4 करोड़ थी, 2016 में तकरीबन 11.6 करोड़ थी और साल 2026 में यह 17.9 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। इसी तरह एक अनुमान के मुताबिक 2050 तक पूरी दुनिया में करीब एक अरब लोग 65 साल के आसपास के होंगे। इनमें से ज्यादातर बूढ़े भारत जैसे विकासशील देशों में होंगे क्योंकि यहां जनसंख्या ज्यादा है। इनमें भी औरतों की संख्या ज्यादा होगी क्योंकि वे पुरुषों से ज्यादा जीती हैं।

अब बड़ा सवाल ये है कि क्या बुजुर्गों को सरकारी स्कीम की मदद मिल रही है, और अगर मिल रही है तो उनकी सभी जरूरतें इस मदद से पूरी हो रही हैं? एक बुजुर्ग को केंद्र सरकार 200 रुपये प्रति महीने पेंशन देती है। 12 साल से इस राशि में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है। यानी इस बीच महंगाई में कितना इजाफा हो गया लेकिन बुर्जुगों की पेंशन राशि में कोई बदलाव नहीं किया गया है। महंगाई के हिसाब से देखें तो साल 2007 में तय किए गए 200 रुपये की कीमत आज मात्र 92 रुपये से कम रह गई है।

गौरतलब है कि इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना के अंतर्गत केंद्र सरकार वृद्धों को पेंशन के तहत 200 रुपये पेंशन का मामूली अंशदान करती है जो 80 साल या उससे अधिक उम्र के बुजुर्ग के लिए 500 रुपये महीना है। यह राशि बताती है कि सरकारें वृद्धों के साथ कितना क्रूर मजाक कर रही हैं। एक बार जरा सोचकर देखिये कि एक 60 या 80 साल का बूढ़ा आदमी जो यूपी-बिहार में किसी सुदूर गांव में रहता है, उसे पेंशन के लिए 50 किलोमीटर दूर अपने ब्लॉक पर जाना होता है, उसे पेंशन लेने के लिए कितना परेशान होना पड़ता होगा और 200 या 500 रुपये में उसके पास कितना बचता होगा।

हालांकि कुछ राज्यों ने अपनी तरफ से धनराशि जोड़कर इसे 2000 तक कर दिया है लेकिन ऐसे राज्यों में गोवा, दिल्ली, केरल और हरियाणा जैसे छोटे राज्य शामिल हैं।

इससे इतर पेंशन परिषद की रिपोर्ट के मुताबिक केंद्र सरकार सहित कई राज्यों और संगठित क्षेत्र से उपलब्ध आंकड़ें बताते हैं कि भारत में तकरीबन 2 करोड़ 20 लाख लोगों को पेंशन मिल रही है। बहुत सारे राज्यों में केंद्र सरकार की तरफ से केवल उन्हीं लोगों को पेंशन दी जाती है जो गरीबी रेखा से नीचे निवास करते हैं। इन सब को जोड़ देने के बाद भी तकरीबन 5 करोड़ 80 लाख लोगों को पेंशन नहीं मिलती है। यानी वृद्धों की तकरीबन आधी आबादी पेंशन से महरूम रह जाती जाती है।

बुर्जुगों के आर्थिक हालत की यह स्थिति है। अब सामाजिक हालत की बात करते हैं। बड़े शहरों में सीनियर सिटीजन का मतलब ही असुरक्षित नागरिक बन गया है। कोरोना से इतर आम दिनों में अखबार में बुजुर्गों की हत्याओं की खबरें आपको हर दो चार दिन में जरूर पढ़ने को मिल जाएंगी। यह प्रवृत्ति पिछले कुछ सालों में बढ़ी है।

आम तौर पर ऐसे बुजुर्गों को निशाना बनाया जा रहा है जो अकेले रहते हैं। या फिर घर में बस पति-पत्नी ही हैं। ऐसी बहुत सी हत्याएँ ऐसी कॉलोनियों में हुई हैं जहां गेट पर पहरा रहता है। किसी भी आने-जाने वाले की शिनाख़्त होती है। इससे अंदाज़ा लगता है कि यह हत्याएं जान-पहचान वालों ने की हैं। यानी जिनके आने पर घर के लोग बिना किसी शक शुब्हे के दरवाज़ा खोल देते हैं। इसके अलावा बूढ़े हो चुके मां बाप से दुव्यर्वहार और उन्हें अकेले छोड़ देने की खबरें भी अब आम हो चली हैं। मतलब साफ है कि बूढ़े लोगों की एक बड़ी आबादी सामाजिक रूप में असुरक्षित है।

कोरोना जैसे संकट के दौर में यह खतरा और भी बढ़ गया है। एक लोक कल्याणकारी राज्य के तौर भारत सरकार की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह वृद्धों की उपेक्षित होते जीवन पर ध्यान दे। जब इस वायरस का खतरा सबसे ज्यादा बूढ़ों को है तो उनके लिए अलग से टास्क फोर्स का गठन किया जाय। अकेले रहने वाले सीनियर सिटीजन की मदद के लिए गैरसरकारी संस्थाएं भी आगे आएं। दरअसल कोरोना से लड़ाई बूढ़े लोगों को साथ में ही लेकर जीती जा सकती है। सरकार और समाज को इसमें बड़ी भूमिका निभानी होगी। 

Coronavirus
COVID-19
Corona Crisis
Policies for Elder
Old People
Delhi High court
Indira Gandhi National Old Age Pension Scheme
old aged
Old Age Peoples
Senior Citizens

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के मामलों में 35 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, 24 घंटों में दर्ज हुए 3,712 मामले 

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में 2,745 नए मामले, 6 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में नए मामलों में करीब 16 फ़ीसदी की गिरावट

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2,706 नए मामले, 25 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,685 नए मामले दर्ज

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 2,710 नए मामले, 14 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा


बाकी खबरें

  • विकलांग स्त्रियों पर जबरन नसबंदी थोपना गैरकानूनी है!
    अल्मास शेख
    विकलांग स्त्रियों पर जबरन नसबंदी थोपना गैरकानूनी है!
    22 Jul 2021
    तमाम कानूनों के बावजूद भारत में विकलांग महिलाओं एवं लड़कियों पर जबरन नसबंदी के कई उदाहरण हैं और ऐसा करने के पीछे की वजह के तौर पर मासिक-धर्म स्वच्छता प्रबंधन और बलात्कार की वजह से गर्भावस्था के भय को…
  • राशन वितरण के दौरान वृद्ध, विधवा, विकलांग और अभावग्रस्त व्यक्तियों को प्राथमिकता दी गई। फोटो: नरेश बिस्वास
    शिरीष खरे
    कोरोना लॉकडाउन में घने वनों से घिरे बैगाचक में बांटा गया परंपरागत खाद्य पदार्थ, दिया पोषण-सुरक्षा का मॉडल
    22 Jul 2021
    आदिवासी बहुल बैगाचक में काम करने वाले राहत-कार्य समूह से जुड़े लोगों ने डिंडौरी और पड़ोसी जिले अनूपपुर के लगभग साढ़े चार सौ जरूरतमंद परिवारों को जो राशन-किट दी उसमें मुख्य रुप से कोदो-कुटकी रखी गई थी।
  • उत्तर प्रदेश जनसंख्या नियंत्रण विधेयक महिलाओं की जिंदगी पर सबसे ज्यादा असर डालेगा!
    कुमुदिनी पति
    उत्तर प्रदेश जनसंख्या नियंत्रण विधेयक महिलाओं की जिंदगी पर सबसे ज्यादा असर डालेगा!
    22 Jul 2021
    उत्तर प्रदेश में 2015 में 31 लाख 52 हजार महिलाओं ने गर्भपात रिपोर्ट किया था। संख्या इससे कहीं अधिक होगी क्योंकि केवल 11 प्रतिशत ने स्वास्थ्य केंद्र में गर्भपात करवाया था।
  • लोकसभा
    अनिल जैन
    दलबदल विरोधी क़ानून का मखौल उड़ाने में अब लोकसभा अध्यक्ष भी शामिल!
    22 Jul 2021
    जन-प्रतिनिधियों के दल-बदल और खरीद-फरोख्त के रोकथाम के लिए कोई साढ़े तीन दशक पहले दलबदल निरोधक कानून अस्तित्व में आया था। उम्मीद जताई गई थी कि इस कानून के जरिए भारतीय लोकतंत्र इस बीमारी से निजात पा…
  • सड़क संसद में किसान। भास्कर पर इनकम टैक्स छापे।
    न्यूज़क्लिक टीम
    सड़क संसद में किसान, भास्कर पर इनकम टैक्स छापे
    22 Jul 2021
    मोदी सरकार ने अब सारी हदें पार कर दी हैं। सत्ता से सवाल पूछने वाले अखबार दैनिक भास्कर और उत्तर प्रदेश स्थित भारत समाचार पर इनकम टैक्स रेड मारी गयी है। याद रहे ऐसे ही न्यूज़ क्लिक के दफ्तर पर भी ED ने…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License