NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
कोविड-19
भारत
राजनीति
गुजरात: सूरत की डायमंड  इंडस्ट्री आत्महत्या और मौत के कगार पर 
सूरत की डायमंड इंडस्ट्री में वित्तीय संकट की वजह से 16 श्रमिकों ने आत्महत्या कर ली है। इस महीने की शुरुआत में एक एसोसिएशन अध्यक्ष ने भी अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली थी। 
दमयन्ती धर
19 Sep 2020
Translated by महेश कुमार
गुजरात

पेशे से हीरा पॉलिश करने वाले दर्शनभाई रमेशभाई चौधरी के पास पिछले चार महीने से नौकरी नहीं थी। वे लगातार हर दिन काम पर रखे जाने की उम्मीद में सूरत के वराछा इलाके में जो डायमंड पॉलिशिंग का हब है, में खड़े रहते ताकि उन्हे कोई काम मिल जाए। इस साल मार्च में जब लॉकडाउन की घोषणा की गई थी, तो कई अन्य मजदूरों की तरह, दर्शन ने भी फिर से आजीविका कमाने की हसरत खो दी थी। मई में कथित तौर पर आत्महत्या करने से उनकी मृत्यु हो गई।

20 वर्षीय दर्शन गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र से सूरत आए थे। कई अन्य लोगों की तरह, उन्होंने भी नौकरी की उम्मीद की थी क्योंकि कृषि से मिलने वाली आय से वे गांव में अपने परिवार का पेट नहीं पाल सकते थे।

दर्शन द्वारा अपनी जीवन लीला समाप्त करने के कुछ दिनों बाद ही, सूरत में ही 20 वर्षीय युवक, भूपेंद्रसिंह धातमेंद्रसिंह इससे पहले कि लॉकडाउन के चलते अपने घर लौट पाते, ने भी कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। 
 
जून माह में, भावनगर के 43 वर्षीय भरतभाई सरवैया ने भी सूरत में अपने आवास पर खुद को फांसी लगा ली थी। सरवैया पंद्रह साल से सूरत में एक डायमंड पॉलिशर के रूप में काम कर रहा था, तब तक, जब तक कि उसे लगभग डेढ़ साल पहले नौकरी से निकाल नहीं दिया गया।
 
“वह सिर्फ हीरे चमकाना जानता था; उसे कोई और काम नहीं आता था। जब से उसने अपनी नौकरी खोई, तभी से हर रोज़ बाहर जाता और रोजगार की तलाश करता लेकिन सब व्यर्थ चला जाता। लॉकडाउन के बाद उनकी नौकरी की तलाश बंद हो गई थी, “निमिषबेन, उनकी पत्नी ने बड़े ही दुखी मन से बताया।

सरवैया की नौकरी छूटने के बाद, उनकी पत्नी एक दिन में दो काम करने लगी, लेकिन वह इस पर भी महीने में केवल 10,000 रुपये ही कमा सकीं। अपने पति की मृत्यु के बाद, निमिषबेन को चार लोगों के परिवार की देखभाल करनी पड़ रही है। और उसे लगभग 3 लाख रुपये का कर्ज़ भी वापस करना है, जिसे परिवार ने खुद को ज़िंदा रखने के लिए लिया था।

जुलाई में, हीरे के पॉलिश करने वाले 26 वर्षीय इरशाद जमादार ने अपनी पत्नी की डिलीवरी के लिए पैसे की व्यवस्था न कर पाने की वजह से सूरत में आत्महत्या कर ली, जो डिलीवरी उसी महीने होने वाली थी।

चूंकि मार्च में कोविड-19 के कारण लॉकडाउन को लागू किया गया था, उसके बाद सभी पॉलिशिंग और कटिंग इकाइयों को बंद करने के कारण 16 हीरा श्रमिकों को आत्महत्या करने पर मजबूर होना पड़ा। 

“सूरत का हीरा उद्योग दो वर्षों से मंदी की मार झेल रहा है। यहां नौकरी की कोई सुरक्षा नहीं है। राज्य में महामारी फैलने से पहले ही कई छोटी पॉलिशिंग इकाइयाँ बंद हो गई थीं और मध्यम या बड़ी इकाइयों ने कर्मचारियों की संख्या को घटा दिया था। हालांकि, बेरोजगार श्रमिक किसी न किसी दिन नौकरी पाने की उम्मीद में सूरत में डटे रहें। वैसी भी उनके पास कोई विकल्प भी नहीं था। डायमंड पॉलिशिंग इकाइयों के अधिकांश श्रमिक सौराष्ट्र के गाँवों से आते हैं जहाँ कृषि उनके परिवारों का पेट नहीं पाल सकती है,” उक्त बातें डायमंड वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष रमेश जिलारिया ने न्यूज़क्लिक को बताई।  

“जैसे ही हीरा उद्योग बंद हुआ, इसने मजदूरों को बिना आय/पैसे/बचत के घर जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं छोड़ा। उन्होंने बताया कि अधिकांश श्रमिक तो चार महीने से बेरोजगार हैं उन्हे मई के महीने के लिए आंशिक वेतन मिला या कोई वेतन ही नहीं मिला था।” 

जुलाई के अंत में, सूरत के वराछा में श्री शक्ति डायमंड फैक्ट्री के 70 श्रमिकों ने, हीरा कारीगरों की एक स्थानीय संस्था ‘रत्नालाकर विकास संघ’ को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें उन्होने दो महीने के अधिक समय से कोई वेतन न मिलने की शिकायत की है, इसमें लॉकडाउन से पहले का एक महीना भी शामिल है।  
 
अपने ज्ञापन में उन्होंने लिखा: कि “मजदूरों को दो महीने और पाँच दिनों का भुगतान नहीं किया गया है। मालिक का मोबाइल फोन और घर दोनों बंद है।"

बात नोट करने की है कि सूरत डायमंड पॉलिशर्स यूनियन के अध्यक्ष जयसुख गजेरा महीनों तक वित्तीय संकट से जूझने के बाद सितंबर में आत्महत्या करके मर गए।

देश भर में हीरे के निर्यातकों का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्था जेम एंड ज्वैलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (जीजेईपीसी) के अनुसार, सूरत में हीरा उद्योग पहले ही लगभग 30,000 करोड़ रुपये के घाटे में चल रहा है।

जीजेईपीसी के क्षेत्रीय अध्यक्ष दिनेश नेवडिया ने कहा, "वैश्विक मंदी के कारण आने वाले दिनों में उद्योग अनिवार्य रूप से अधिक नुकसान उठाएगा।"

“ऐसा नहीं लगता कि सूरत का हीरा उद्योग इस संकट से जल्द उबर पाएगा। हीरा लक्जरी आइटम हैं। सूरत डायमंड एसोसिएशन के सचिव बाबूभाई विद्या ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुधार होने से वर्तमान संकट दूर होगा।

सूरत का हीरा उद्योग दुनिया के सबसे बड़े डायमंड पॉलिशिंग, कटिंग और प्रोसेसिंग केंद्रों में से एक है, जिसमें मुख्य रूप से सौराष्ट्र से आने वाले छह लाख से अधिक मजदूर काम करते हैं और उनमें से बड़ी तादाद ओडिशा, बिहार और उत्तर प्रदेश से भी आती हैं।

diamond2.png

सूरत में लगभग 4,500 छोटी, मध्यम और बड़ी इकाइयों में से, लगभग 90 प्रतिशत छोटी, असंगठित और अक्सर अपंजीकृत इकाईयां हैं। यह ऐसी छोटी इकाइयाँ हैं जो कुल डायमंड के लगभग आधा को काटती, पोलिश करती हैं, उसके बाद इन अधिकांश हीरों को मुंबई भेजा जाता हैं और फिर अमेरिका, हांगकांग और चीन को निर्यात किया जाता हैं।

इस साल जून के अंत तक, दो महीने के लॉकडाउन के बाद जब हीरे की इकाइयां खुलने वाली थीं, तो 700 श्रमिकों को कोविड-19 के लिए पॉज़िटिव पाया गया जिसके कारण उद्योग फिर से बंद हो गया।

इसके बाद, अगस्त में, सूरत नगर निगम ने एक नोटिस जारी कर हीरे की इकाइयों को काम करने की अनुमति दे दी। हालांकि, केवल 50 से 60 प्रतिशत स्टाफ को सामाजिक दूरी के दिशानिर्देशों के साथ अनुमति मिली। नगर निगम ने सभी हीरा इकाईयों के मालिकों को अपने श्रमिकों का कोविड-19 की जांच कराना अनिवार्य कर दिया।

हालाँकि, छोटी इकाइयाँ टी इसलिए भी बंद रहीं क्योंकि वे सौराष्ट्र से आने वाले सभी श्रमिकों के की जांच का खर्च नहीं उठा सकती थी। 

“कोविड-19 के डर से अभी भी काफी सारे श्रमिक वापस नहीं लौटे हैं। हालाँकि, जो वापस आ भी रहे हैं, महामारी उनके लिए एक नई समस्या बन गई है। अब जबकि सूरत नगर निगम ने अपनी मंजूरी दे दी है, बड़ी इकाइयां खुल रही हैं। छोटी इकाइयां या तो खोली नहीं गई हैं या बिना किसी दिशा-निर्देश के काम कर रही हैं, क्योंकि वे तंग और छोटे जगहों पर काम करती हैं, जहां सामाजिक दूरी बनाए रखना संभव नहीं है,” जिलारिया ने कहा।

“सूरत का हीरा उद्योग छह लाख से अधिक श्रमिकों को रोजगार देता है। अब तक लगभग दो से तीन लाख श्रमिकों के पद रिक्त पड़े है। जिलारिया कहते हैं, "कम से कम तीन लाख श्रमिक बेरोजगार हैं।"

“भले ही किसी व्यक्ति को काम मिल भी जाए, लेकिन उसे जो वेतन मिलना चाहिए उसे उसका केवल आधा ही मिलता है। यानि एक श्रमिक जो प्रतिदिन 400 रुपये कमाता था, वह अब 200 से 250 रुपये प्रतिदिन कमा रहा है, ”सूरत के एक हीरा पॉलिशर ने कहा।

इस लेख इस लेख को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें।

Gujarat: Of Death Knells and Suicide in Surat’s Diamond Industry

Gujarat COVID-19
Surat
Surat Diamond Industry
Diamond Industry
Recession
Economic slowdown

Related Stories


बाकी खबरें

  • Russia Draws Red Lines for US
    एम. के. भद्रकुमार
    रूस ने अमेरिका के सामने खींची लाल लकीर 
    18 Oct 2021
    मान्यता देने से पहले हम कुछ क्षेत्रीय पहल की उम्मीद कर सकते हैं। मान्यता के लिए मानदंड आमतौर पर पूरे देश पर सरकार का प्रभावी नियंत्रण होना ज़रूरी होता है।
  • ald
    सरोजिनी बिष्ट
    आख़िर जनांदोलनों से इतना डर क्यों...
    17 Oct 2021
    लखीमपुर खीरी हत्याकांड के विरोध में, उत्तर प्रदेश और केंद्र की सरकार से सवाल करने का दम रखने वाली संघर्षशील ताकतें लगातार सड़कों पर उतर रही हैं तो उनके ख़िलाफ़ संविधान के विरुद्ध जाकर बेहद दमनात्मक…
  • press freedom
    न्यूज़क्लिक टीम
    आज़ाद पत्रकारिता से सत्ता को हमेशा दिक्कत रही
    17 Oct 2021
    हाल के सालों में भारत में प्रेस की आज़ादी कमज़ोर होती गई हैI इतिहास के पन्ने के इस अंक में लेखक नीलांजन मुखोपाध्याय ने पत्रकार मासूम मुरादाबादी और जयशंकर गुप्ता से खास चर्चा की जिसमें प्रेस की आज़ादी…
  • संदीपन तालुकदार
    चीन द्वारा चाँद से धरती पर लाए पत्थरों से सामने आया सौर मंडल का नया इतिहास
    17 Oct 2021
    वैज्ञानिकों ने चंद्रमा की सतह से एकत्र किए गए पत्थरों के नमूनों के निष्कर्षों को साझा किया है, जिससे इसके कुछ आवश्यक पहलुओं के बारे में नई चीज़ें पता चली हैं।
  • अज़हर मोईदीन
    केरल बीजेपी में बदलाव से भी नहीं कम हुए बढ़ते फ़ासले
    17 Oct 2021
    हाल ही में संगठनात्मक नेतृत्व में फेरबदल और पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में प्रत्याशियों की घोषणा ने भाजपा की केरल इकाई के भीतर दरार को और बढ़ा दिया है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License