NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
कोविड-19
भारत
राजनीति
गुजरात: सरकारी आंकड़ों से कहीं ज़्यादा है कोरोना से मरने वालों की संख्या!
सुप्रीम कोर्ट में गुजरात सरकार अपने ही हलफनामे से झूठी साबित हुई है। अब सरकार ने खुद आधिकारिक तौर पर इस बात को स्वीकार कर लिया है कि राज्य में कोरोना से मरने वालों की जितनी गिनती की गई थी, असली संख्या उससे कहीं ज्यादा है।
सोनिया यादव
15 Dec 2021
covid deaths

इस साल मई महीने में कोरोना महामारी जब अपने चरम पर थी, तब गुजराती अख़बार दिव्य भास्कर ने राज्य में कोरोना से हुई मौतों को लेकर एक रिपोर्ट छापी थी। इस रिपोर्ट में तमाम सरकारी दावों से इतर कोविड काल में लोगों की मौत का एक डेटा था, जो गुजरात सरकार पर लगभग 61,000 कोविड मौतें छिपाने का आरोप भी लगा रहा था। हालांकि तब मुख्यमंत्री विजय रुपाणी कोरोना से होने वाली मौतों को छिपाने के आरोपों से इनकार कर चुके थे। उन्होंने कहा था कि नियमों के तहत कोरोना से होने वाली मौतों को दर्ज किया जा रहा है।

लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट में गुजरात सरकार ने इस बात को खुद आधिकारिक तौर पर स्वीकर कर लिया है कि राज्य में कोरोना से मरने वालों की जितनी गिनती की गई थी, असली संख्या उससे कहीं ज्यादा है। इससे पहले राज्य सरकार के आंकड़े के अनुसार 10,092 लोगों की मौत कोरोना से हुई थी। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि आख़िर कोरोना से होने वाली मौतों के आंकड़ों को लेकर अबतक सरकार झूठ क्यों बोलती आई है।

अब इस नए आंकड़े से पूरे देश में कोरोना से हुई मौतों का आंकड़ा दो फीसदी बढ़ गया है। भारत में अब कोविड-19 से मरने वालों की कुल संख्या 4.85 लाख हो गई है।

क्या है पूरा मामला?

प्राप्त जानकारी के अनुसार गुजरात के आधिकारिक हेल्थ बुलेटिन के मुताबिक राज्य में कोरोना से 10,099 लोगों की मौत हुई थी। लेकिन राज्य सरकार ने सोमवार, 13 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उसे मुआवजे के लिए लगभग तीस हजार से अधिक आवेदन मिले हैं। यह सभी आवेदन कोविड से मरने वालों के निकट संबंधियों के हैं। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को यह भी बताया कि इनमें से ज्यादातर आवेदनों को स्वीकार भी कर लिया गया है। यानी हेल्थ बुलेटिन में दिए गए आंकड़ें से कहीं ज्यादा मौतें राज्य में हुई हैं। अब सरकार के यह मान लेने से ये आशंकाएं बढ़ गई हैं कि देश में जितनी मौतों की जानकारी दी गई थी असली आंकड़ा उससे कहीं ज्यादा है।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को गुजरात सरकार के वकील ने कहा कि राज्य में कोविड से जान गंवाने वालों के परिजनों को कुल 19,964 मामलों में मुआवजे की मंजूरी दी गई है। वकील ने कहा कि राज्य के ऑनलाइन पोर्टल को नौ दिसंबर तक मुआवजे के लिए 34,637 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं।

वकील ने जस्टिस एमआर शाह और बीवी नागरत्ना की दो-न्यायाधीशों की पीठ को यह भी बताया कि राज्य ने पहले ही डीबीटी योजना के माध्यम से 14,215 मामलों में मुआवजा बांट दिया है। अब इस हलफनामे को देखें तो राज्य में कुल 19,964 लोगों की मौत कोरोना से हुई है, जिन्हें मुआवजा दे दिया गया है, या इसकी मंजूरी मिल गई है।

मालूम हो कि कई मीडिया संगठन शवदाह गृहों और श्मशानघाटों से मिली जानकारी के आधार पर पहले ही दावा कर चुके थे कि गुजरात समेत कई राज्यों ने अप्रैल से जून के बीच आई दूसरी लहर के दौरान मरने वालों का सही आंकड़ा नहीं दिया है। अदालतों की सख्ती के बाद आपदा असल में कितनी बड़ी थी इसका पता लगाने के लिए कई राज्यों को दोबारा जांच के आदेश दिए हैं।

अस्पतालों में बिस्तरों और ऑक्सीजन की भारी कमी की वजह से कई लोगों की घर पर ही मृत्यु हो गई और संभव है कि ये मौतें आधिकारिक आंकड़ों में शामिल न हो पाई हों। वैसे कई मीडिया रिपोर्ट्स में गुजरात सरकार को मिले इन आवेदनों की संख्या 40,000 से ज्यादा बताई जा रही है। राज्य सरकार की कोविड मुआवजा नीति के तहत इन सभी परिवारों को 50,000 रुपए दिए जाएंगे।

विपक्ष का क्या कहना है?

मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस का कहना है कि उसके अनुमान के अनुसार असली संख्या इससे भी ज्यादा है। गुजरात कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता मनीष दोशी ने बताया कि पार्टी के अपने सर्वेक्षणों में मरने वालों की संख्या कम से कम 55,000 पाई गई है।

दोशी ने आगे कहा, "हम शुरू से कह रहे हैं कि गुजरात सरकार कोविड-19 के मामले और मौतों को कम कर के बता रही है। मुआवजा गुजरात का राजस्व मंत्रालय दे रहा है। राजस्व मंत्री राजेंद्र त्रिवेदी ने टिप्पणी के लिए किए गए अनुरोध का जवाब नहीं दिया।"

गौरतलब है दिव्य भास्कर ने राज्य में कोरोना से हुई मौतों को लेकर जो रिपोर्ट छापी थी, उसमें राज्य के अलग-अलग जिला और नगर पंचायत की तरफ से जारी डेथ सर्टिफिकेट का डेटा दिया गया था। डेटा तमाम सरकारी दावों से इतर कोविड काल में लोगों की मौत की एक अलग ही कहानी बयां कर रहा था। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद गुजरात सरकार पर लगभग 61,000 कोविड मौतें छिपाने का आरोप भी लगा था।

सरकारी आंकड़ें और जनता का भ्रम

इस रिपोर्ट में विस्तार से बताया गया था कि राज्य में पिछले साल की तुलना में इस साल एक मार्च से 10 मई के बीच लगभग 65,000 अधिक मृत्यु प्रमाण पत्र जारी हुए हैं, जबकि सरकार ने कोरोना से होने वाली मौतों का आंकड़ा तब 4,200 बताया था। ऐसे में सवाल उठ रहे थे कि लगभग 61,000 अन्य मौतें कैसे हुईं? क्या ये मौतें कोरोना से हुई थी, जिन्हें सरकार छिपा रही थी? इससे पहले भी कई मीडिया संस्थान इस सच को उजागर कर चुके हैं कि राज्य में कोविड से होने वाली मौतों की संख्या सरकारी आंकड़ों से कहीं अधिक है।

इसे भी पढ़ें: गुजरात: ‘विकास मॉडल’ नहीं ‘बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था’, सरकार पर कोविड मौतें छिपाने का आरोप!

इससे पहले न्यूयॉर्क टाइम्स ने भी अपनी रिपोर्ट में गुजरात के अलग-अलग श्मशान घाटों में काम करने वाले लोगों के हवाले से बताया था कि राज्य में कोविड से मरने वालों का आंकड़ा सरकारी आंकड़े से चार से पांच गुना अधिक है। अब अगर दिव्य भास्कर की रिपोर्ट पर नजर डालें तो असल आंकड़ा चार से पांच गुना नहीं, बल्कि 10 से 15 गुना तक था। हालांकि तब गुजरात सरकार कोरोना से होने वाली मौतों को छिपाने के आरोपों से इनकार कर रही थी।

हाईकोर्ट की लगातार फटकार के बावजूद गुजरात सरकार के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही थी। आलम ये था कि कोरोना से होने वाली मौतों के लिए श्मशान घाटों और शवदाह गृहों पर लाइनें लग रही थी। लोकल गुजराती अखबार लगातार आधिकारिक आंकड़ों की तुलना में कोविड से होने वाली मौतों को ज्यादा बता रहे थे। विपक्ष सरकार से सवाल कर रहा था और सरकार टाल-मटोल करने में व्यस्त थी। लेकिन अब जब खुद सरकार अपने आंकड़ों के खेल में फेल हो गई है तो, इसकी जवाबदेही तो बनती है कि आख़िर सरकार ने लोगों के सामने अबतक सही आंकड़ें क्यों नहीं रखे, क्या ये सरकार द्वारा उसकी विफलता छुपाने का प्रयास था या सरकार जानबूझकर लोगों को गुमराह करने में लगी थी।

Gujarat
COVID-19
Covid Death Data
VIJAY RUPANI
COVID 19 in India

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के मामलों में 35 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, 24 घंटों में दर्ज हुए 3,712 मामले 

कोरोना अपडेट: देश में नए मामलों में करीब 16 फ़ीसदी की गिरावट

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2,706 नए मामले, 25 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,685 नए मामले दर्ज

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 2,710 नए मामले, 14 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा

महामारी में लोग झेल रहे थे दर्द, बंपर कमाई करती रहीं- फार्मा, ऑयल और टेक्नोलोजी की कंपनियां


बाकी खबरें

  • श्याम मीरा सिंह
    यूक्रेन में फंसे बच्चों के नाम पर PM कर रहे चुनावी प्रचार, वरुण गांधी बोले- हर आपदा में ‘अवसर’ नहीं खोजना चाहिए
    28 Feb 2022
    एक तरफ़ प्रधानमंत्री चुनावी रैलियों में यूक्रेन में फंसे कुछ सौ बच्चों को रेस्क्यू करने के नाम पर वोट मांग रहे हैं। दूसरी तरफ़ यूक्रेन में अभी हज़ारों बच्चे फंसे हैं और सरकार से मदद की गुहार लगा रहे…
  • karnataka
    शुभम शर्मा
    हिजाब को गलत क्यों मानते हैं हिंदुत्व और पितृसत्ता? 
    28 Feb 2022
    यह विडम्बना ही है कि हिजाब का विरोध हिंदुत्ववादी ताकतों की ओर से होता है, जो खुद हर तरह की सामाजिक रूढ़ियों और संकीर्णता से चिपकी रहती हैं।
  • Chiraigaon
    विजय विनीत
    बनारस की जंग—चिरईगांव का रंज : चुनाव में कहां गुम हो गया किसानों-बाग़बानों की आय दोगुना करने का भाजपाई एजेंडा!
    28 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश के बनारस में चिरईगांव के बाग़बानों का जो रंज पांच दशक पहले था, वही आज भी है। सिर्फ चुनाव के समय ही इनका हाल-चाल लेने नेता आते हैं या फिर आम-अमरूद से लकदक बगीचों में फल खाने। आमदनी दोगुना…
  • pop and putin
    एम. के. भद्रकुमार
    पोप, पुतिन और संकटग्रस्त यूक्रेन
    28 Feb 2022
    भू-राजनीति को लेकर फ़्रांसिस की दिलचस्पी, रूसी विदेश नीति के प्रति उनकी सहानुभूति और पश्चिम की उनकी आलोचना को देखते हुए रूसी दूतावास का उनका यह दौरा एक ग़ैरमामूली प्रतीक बन जाता है।
  • MANIPUR
    शशि शेखर
    मुद्दा: महिला सशक्तिकरण मॉडल की पोल खोलता मणिपुर विधानसभा चुनाव
    28 Feb 2022
    मणिपुर की महिलाएं अपने परिवार के सामाजिक-आर्थिक शक्ति की धुरी रही हैं। खेती-किसानी से ले कर अन्य आर्थिक गतिविधियों तक में वे अपने परिवार के पुरुष सदस्य से कहीं आगे नज़र आती हैं, लेकिन राजनीति में…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License