NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
हाईकोर्ट से जेएनयू प्रशासन को झटका, शिक्षकों को राहत
दिल्ली उच्च न्यायालय ने जेएनयू प्रशासन की ओर से जारी नोटिफिकेशन पर रोक लगा दी, जिसमें संकाय (फैकल्टी) को उपस्थिति दर्ज करना अनिवार्य किया गया था।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
15 Jan 2019
jnu

सोमवार, 14 जनवरी को दिल्ली उच्च न्यायालय ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) प्रशासन की ओर से जारी नोटिफिकेशन पर रोक लगा दी, जिसमें संकाय (फैकल्टी ) को उपस्थिति दर्ज करना अनिवार्य किया गया था। इस नोटिफिकेशन के अनुसार किसी शिक्षक ने अगर समय पर अपनी उपस्थति नहीं दर्ज की तो उसकी छुट्टी के अनुरोध या उनके प्रस्तावों पर विचार नहीं किया जाएगा, भले ही वह विदेश में किसी शैक्षिणिक सम्मेलनों और सेमिनारों में शामिल होना हो, किसी भी सूरत में उनका छुट्टी का अनुरोध स्वीकार नहीं किया जाएगा।

जेएनयू के शिक्षक काफी लंबे समय से उप-कुलपति के अनिवार्य  उपस्थति के निर्णय के खिलाफ संघर्ष कर रहे थे। उनका कहना था कि शिक्षण कोई सरकारी बाबू का काम नहीं है कि ऑफिस में बैठकर किया जाए। शिक्षण एक शोध का विषय है जिसके लिए लगतार सेमिनार और सम्मेलन में जाना होता है। ऐसे में न्यायालय का ये फैसला जेएनयू के शिक्षकों के लिए एक बड़ी जीत है। साथ ही शिक्षा और शोध के के हित में है। ये शिक्षकों के लंबे आंदोलन और क़ानूनी संघर्ष का ही परिणाम है कि प्रशासन को अपने अनिवार्य उपस्थिति के फैसले को वापस लेना पड़ेगा।

इस पूरे मामले में तब एक बड़ा विवाद खड़ा हुआ जब जेएनयू  प्रशासन ने उन शिक्षकों को छुट्टी देने से इंकार करना शुरू कर दिया जो अपनी उपस्थिति को दर्ज नहीं कर रहे हैं और अपने छात्रों के उपस्थिति रिकॉर्ड भी जमा नहीं कर रहे थे। शिक्षकों का आरोप है कि प्रशासन ने उन्हें तब भी छुट्टी देने से इंकार कर दिया जब उन्होंने विदेश में अपने शोध पेपर प्रस्तुत करने के लिए हफ्तों पहले आवेदन किया था।

दिल्ली उच्च न्यायलय के न्यायमूर्ति सुरेश कैत ने 13 नवंबर, 2018 के जेएनयू प्रशासनिक अधिकारियों के नोटिफिकेशन जिसको जेएनयू के एक शिक्षक ने चुनौती दी थी, पर जेएनयू प्रशसन से जवाब तलब किया है।

कोर्ट इस मामले को लेकर 3 मई को अगली सुनवाई करेगा। नोटिफिकेशन को प्रोफेसर अर्चना प्रसाद ने चुनौती दी थी, वे जेएनयू के असंगठित क्षेत्र और श्रम अध्ययन सेंटर में फैकल्टी हैं, उन्हें  6-16 दिसंबर, 2018 से दक्षिण अफ्रीका में एक सम्मेलन में भाग लेना था और इसके लिए उन्होंने पिछले साल 9 अक्टूबर को छुट्टी का आवेदन भेजा दिया था, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन ने 13 नवंबर के नोटिफिकेशन का हवाला देते हुए उनके आवेदन को अस्वीकार कर दिया था। अर्चना प्रसाद ने फिर 13 दिंसबर को छुट्टी के लिए आवेदन किया जब उन्हें 21 दिसंबर से 25 जनवरी तक एक कार्यक्रम के लिए द सैम मोयो अफ्रीकन इंस्टीट्यूट फॉर एग्रेरियन स्टडीज से निमंत्रण मिला था। इसके बाद उन्होंने 20 से 27 जनवरी तक छुट्टी के लिए आवेदन किया परन्तु इसे 2 जनवरी को "अनिवार्य उपस्थिति के नियमों का पालन नहीं करने" के आधार पर खारिज कर दिया गया, जिसे उन्होंने कोर्ट में चुनौती दी। 

जेएनयू प्रशासन के फैसले को चुनौती देते हुए शिक्षक अर्चना प्रसाद के वकील मानव कुमार साह ने न्यूज़क्लिक से बात करते हुए बतया कि उन्होंने कोर्ट से अपील की कि वो 13 नवंबर के नोटिफिकेशन को रद्द करे। उन्होंने कहा कि प्रसाद कि छुट्टी एक वैध और जरूरी शैक्षणिक उद्देश्य के लिए थी। इसे केवल अनिवार्य उपस्थति के आधार पर खारिज़ नहीं किया जा सकता है।

जेएनयू प्रशासन कि तरफ से उपस्थित वकील ने कोर्ट में कहा कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग और जेएनयू के नियमों के अनुसार शिक्षकों की उपस्थिति अनिवार्य है, जबकि अर्चना प्रसाद ने अपनी याचिका में इसे भेदभावपूर्ण और अवौध बताते हुए कहा कि प्रशासन इसे अपनी सत्ता को कायम रखने और मनमाने तरीके से कार्य करने के लिए प्रयोग कर रहा है। सुनवाई के बाद कोर्ट ने जेएनयू प्रशासन के नोटिफिकेशन पर रोक लगात हुए इसे तीन दिन के भीतर हल करने को कहा।

प्रोफेसर अर्चना प्रसाद ने न्यूज़क्लिक से बात करते हुए कहा की कोर्ट का ये निर्णय शिक्षक समुदाय के लिए एक बड़ी जीत है। उन्होंने कहा की  प्रशासन अपनी अधिसूचना के बाद से शिक्षको के साथ पूरी तरह से असहयोग कर रहा था जिस कारण शिक्षक किसी प्रकार के शोध पेपर पूरा नहीं कर पा रहे थे। यह सीधे तौर पर उच्च शिक्षा पर हमला था। उन्होंने  यह भी कहा कि जेएनयू प्रशासन का यह कहना कि यूजीसी का नियम है कि शिक्षकों को रोज उपस्थति दर्ज करनी पड़ेगी, यह पूरी तरह से गलत है। ऐसा कोई भी नियम नहीं है।

इसको लेकर अभी कुछ दिनों पहले जेएनयू शिक्षक संघ ने विश्व के 21 देशों के 75  विश्वविद्यालयो का सर्वे किया था लेकिन किसी में भी शिक्षकों की रोजाना उपस्थिती दर्ज नहीं होती है केवल एक बायोमेट्रिक तरीके से पहचान की जाती है, वो भी सुरक्षा कारणों से, न कि उपस्थति के लिए। 

कोर्ट में दायर याचिका में पिछले साल के 29 नवंबर के सर्कुलर को भी चुनौती दी गई है  जिसमें फैकल्टी  उपस्थति की अनिवार्यता और शिक्षकों द्वारा उपस्थति को दर्ज न करने पर  सैलरी काटने का नियम बनाया गया है।

 

JNU
JNU TA
JNU VC
Delhi
Delhi High court
attendance
University Grants Commission

Related Stories

दिल्ली उच्च न्यायालय ने क़ुतुब मीनार परिसर के पास मस्जिद में नमाज़ रोकने के ख़िलाफ़ याचिका को तत्काल सूचीबद्ध करने से इनकार किया

मुंडका अग्निकांड: 'दोषी मालिक, अधिकारियों को सजा दो'

मुंडका अग्निकांड: ट्रेड यूनियनों का दिल्ली में प्रदर्शन, CM केजरीवाल से की मुआवज़ा बढ़ाने की मांग

धनशोधन क़ानून के तहत ईडी ने दिल्ली के मंत्री सत्येंद्र जैन को गिरफ़्तार किया

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा

बग्गा मामला: उच्च न्यायालय ने दिल्ली पुलिस से पंजाब पुलिस की याचिका पर जवाब मांगा

मैरिटल रेप : दिल्ली हाई कोर्ट के बंटे हुए फ़ैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, क्या अब ख़त्म होगा न्याय का इंतज़ार!

मुंडका अग्निकांड के लिए क्या भाजपा और आप दोनों ज़िम्मेदार नहीं?

मुंडका अग्निकांड: लापता लोगों के परिजन अनिश्चतता से व्याकुल, अपनों की तलाश में भटक रहे हैं दर-बदर

मुंडका अग्निकांड : 27 लोगों की मौत, लेकिन सवाल यही इसका ज़िम्मेदार कौन?


बाकी खबरें

  • सोनिया यादव
    क्या पुलिस लापरवाही की भेंट चढ़ गई दलित हरियाणवी सिंगर?
    25 May 2022
    मृत सिंगर के परिवार ने आरोप लगाया है कि उन्होंने शुरुआत में जब पुलिस से मदद मांगी थी तो पुलिस ने उन्हें नज़रअंदाज़ किया, उनके साथ दुर्व्यवहार किया। परिवार का ये भी कहना है कि देश की राजधानी में उनकी…
  • sibal
    रवि शंकर दुबे
    ‘साइकिल’ पर सवार होकर राज्यसभा जाएंगे कपिल सिब्बल
    25 May 2022
    वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने कांग्रेस छोड़कर सपा का दामन थाम लिया है और अब सपा के समर्थन से राज्यसभा के लिए नामांकन भी दाखिल कर दिया है।
  • varanasi
    विजय विनीत
    बनारस : गंगा में डूबती ज़िंदगियों का गुनहगार कौन, सिस्टम की नाकामी या डबल इंजन की सरकार?
    25 May 2022
    पिछले दो महीनों में गंगा में डूबने वाले 55 से अधिक लोगों के शव निकाले गए। सिर्फ़ एनडीआरएफ़ की टीम ने 60 दिनों में 35 शवों को गंगा से निकाला है।
  • Coal
    असद रिज़वी
    कोल संकट: राज्यों के बिजली घरों पर ‘कोयला आयात’ का दबाव डालती केंद्र सरकार
    25 May 2022
    विद्युत अभियंताओं का कहना है कि इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 की धारा 11 के अनुसार भारत सरकार राज्यों को निर्देश नहीं दे सकती है।
  • kapil sibal
    भाषा
    कपिल सिब्बल ने छोड़ी कांग्रेस, सपा के समर्थन से दाखिल किया राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन
    25 May 2022
    कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे कपिल सिब्बल ने बुधवार को समाजवादी पार्टी (सपा) के समर्थन से निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल किया। सिब्बल ने यह भी बताया कि वह पिछले 16 मई…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License