NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
हापुड़ लिंचिंग मामला : पीड़ित के परिजनों ने कहा पुलिस ने ढंगसे दर्ज़ नहीं की FIR
ये पहली बार नहीं है कि पुलिस और प्रशासन ने ऐसा किया हो, इससे पहले गाय के नाम पर हत्या और सांप्रदायिक हिंसा के कई मामलों को इस तरह कमज़ोर करने की कोशिश की गयी है। 
ऋतांश आज़ाद
23 Jun 2018
hapud lynching

18 जून 2018 को उत्तर प्रदेश के हापुड़ गाँव में गौ हत्या के आरोप पर पीटे गए शख्स समीउद्दीन के घर वालों का कहना है कि पुलिस ने उनके बयान के बिनाह पर FIR दर्ज़ नहीं की है। इस मामले में दोनों पीड़ितों, जिसमें कासिम और समीउद्दीन शामिल हैं, के घरवालों का आरोप है कि पुलिस इस मामले को सम्प्रदाय विशेष के खिलाफ किये गए अपराध के बजाये सड़क पर हुई लड़ाई की तरह पेश कर रही है। 
 
दरअसल, 18 जून को मदापुर गाँव के क़ासिम को किसी अनजान शख्स का कॉल आया था जिसने बताया कि उनके गाँव में किसी को मवेशी बेचना है और क्योंकि वह यही काम करते थे तो वह पास के गाँव ये सौदा करने चले गए। बताया जा रहा है कि इसके बाद वहाँ कई लोगों ने उन्हें एक खेत में लकड़ियों से बुरी तरह पीटा और उनकी मौके पर ही मौत हो गयी। दूसरी तरफ एक वृद्ध व्यक्ति समीउद्दीन जो कि मदापुर के ही हैं वहाँ मवेशियों के लिए चारा काट रहे थे।  जब उन्होंने ये सब होते देखा और बीच बचाव करने का प्रयास किया तो उन्हें भी भीड़ ने बेरामी से पीटा।  इसके बाद पुलिस के आने पर उन्हें अस्पताल ले जाया  गया, जहाँ उनका इलाज चल रहा है।  
 
इस मामले में अब समीउद्दीन के भाई का कहना कि पुलिस ने उनके बयान के हिसाब से FIR दर्ज़ नहीं की है। समीउद्दीन के बड़े भाई मेहरुद्दीन का कहना  है कि जब उनके छोटे भाई यासीन ने अपना बयान लिखकर दिया तो पुलिस ने उसमें बार-बार बदलाव करने को कहा। उनका कहना है कि क्योंकि उन्हें कानून का ज़्यादा समझ नहीं है इसलिए पुलिस ने ढंग से उनका बयान नहीं लिया बल्कि उन्हें एक स्टेटमेंट लिख कर दिया जिसपर उनसे दस्तखत करवा लिए गए।  
 
वहीं दूसरी तरफ इस घटना में मारे गए शख्स कासिम, जिनकी उम्र 45 साल बताई जा रही है, के भाई मोहम्मद नदीम ने कहा कि उन्हें इसीलिए मारा  गया क्योंकि गाँव वालों ने उन्हें कसाई समझा था। नदीम ने कहा कि क़ासिम मवेशियों के लिए जब चारा लेने गए तो उन्हें कसाई समझा गया और उनकी मौत मुस्लमान  होने की वजह से हुई। उन्हें अंतिम समय में पानी तक इसीलिए नहीं दिया गया क्योंकि लोगों को शक था कि उन्होंने गौ हत्या की है। क़ासिम के घर वालों का कहना है कि कासिम मवेशियों का व्यापार करते थे। 
 
वहीं कासिम के छोटे भाई मोहम्मद सलीम, जो कि इस मामले में गवाह हैं, ने कहा कि कासिम और समीउद्दीन बाइक पर बछेड़ा खुर्द गाँव से जा रहे थे जब उनकी टक्कर किसी से हुई। इसके बाद जिन लोगों से उनकी टक्कर हुई उन्होंने बाकी गाँव वालों को वहाँ  बुलाया और दोनों लोगों को बुरी तरह पीटा। सलीम का  कहना है कि ये हत्या गाय काटने की वजह से नहीं बल्कि कासिम की मुस्लिम पहचान की वजह से हुई। 
 
इस घटना के बाद मृत कासिम के शव को हाथ पाँव से लटकाकर लोगों के साथ ले जाते हुए पुलिस अफसरों की फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हुई।  जिसके बाद पुलिस प्रशासन पर काफी सवाल उठने लगे लेकिन बाद में उत्तर प्रदेश के डीजीपी ने इस घटना के लिए माफ़ी माँगी और इस मामले में जाँच के आदेश दिए। 
 
इस मामलों में पुलिस शुरू से ही गाय के नाम पर किये गए अपराध या संप्रदाय विरोधी हिंसा की जगह सिर्फ वाहनों की टक्कर के बाद हुई लड़ाई के तौर पर पेश कर रही है। पुलिस  इस मामले में दर्ज़  FIR में भी इसी को मुख्य मुद्दा  बनाया है। मामले में पुलिस ने अब तक दो लोगों को गिरफ्तार किया है। 
 
पुलिस के रवैये से लगता है कि वह इस कहानी में से साम्प्रदायिकता के निष्कर्ष को हटाना चाहती है। लेकिन ये पहली बार नहीं है कि पुलिस और प्रशासन ने ऐसा किया हो इससे पहले गाय के नाम पर हत्या और सांप्रदायिक हिंसा के कई मामलों को इस तरह कमज़ोर करने की कोशिश की गयी है। 
 
पिछले साल जून में एक 16 साल के मुस्लिम लड़के जुनैद को दिल्ली से मथुरा जा रही ट्रेन में चाकुओं से गोदकर मार डाला गया और उसके बाद ट्रेन से फेंक दिया गया था। जुनैद के साथ उसके दो भाईयों को भी बेरहमी से मारा गया था। उनके भाइयों के मुताबिक जुनैद और उन्हें उनकी मुस्लिम पहचान की वजह से मारा गया और हमला करते वक़्त उन्हें सांप्रदायिक गालियाँ भी दी गयी थी। जब कि पुलिस का कहना है कि ये सिर्फ सीट पर विवाद के बाद शुरू लड़ाई थी। हरियाणा रेलवे पुलिस ने इस मामले में अगस्त में जो चार्जशीट दायर की उसमें दँगा करने, गैरकानूनी ढंग से इक्कठा होने और एक ही मकसद होने के आरोपों को 6 में से 4 आरोपियों के ऊपर से हटा दिया था। इसमें से 5 को ज़मानत मिल गयी है और मुख्य आरोपी नरेश कुमार अब भी जेल में है। ये  आरोप भी लगाया गया है कि  मामले में आरोपी पक्ष के वकील के मदद प्रशासन द्वारा की जा रही है। जुनैद के परिवार वाले काफी लम्बे समय से माँग कर रहे हैं कि इस मामले को सीबीआई  सौंपा जाए क्योंकि पुलिस इसे कमज़ोर  करने  प्रयास कर रही है।  मामले में 17 अप्रैल को आये एक निर्णय में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने कहा है कि ये मामला सीट के विवाद का ही है, जहाँ जाति संबंधी गालियाँ दी गयी, लेकिन सम्प्रदाय के खिलाफ किसी इरादे से कुछ नहीं किया गया। 
इस मामले की तरह ही राजस्थान के पहलु खान का मामला है। पिछले साल 1 अप्रैल को राजस्थान के अलवर ज़िले में एक पशु पालक पहलू खान को भीड़  ने गौ हत्या के आरोप में पीट -पीट कर मौत के घाट उतार दिया। मामला बाहर आने के बाद सरकार और पुलिस दोनों ही आरोपियों को बचाने और पीड़ित को गाय तस्कर साबित करने में जुट गयी।  पिछले साल अक्टूबर में  मामले में 6 मुख्य आरोपियों को पुलिस ने क्लीन चिट देकर बरी कर दिया था।  इसके बाद सिविल सोसाइटी और वकीलों की एक टीम ने इस मामले में एक फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट निकली जिसमें  चौंकाने  वाले तथ्य  सामने आये। रिपोर्ट में बताया गया कि कैसे FIR दर्ज़  करने में पुलिस ने 4 घंटे  की देरी की, पुलिस थाना  2 किलोमीटर दूर होने पर भी कोई कार्यवाही नहीं की गयी , उस पुलिस वाले को गवाह नहीं बनाया  गया जो पहलू खान को अस्पताल लेकर गया , पहलू खान ने जिन 6 लोगों का नाम लिया उनका  नाम FIR में शामिल ही नहीं किया गया।  इसी तरह पहलू खान ने इन सभी लोगों के संगठन का नाम भी बताया लेकिन उसे दर्ज़  नहीं किया गया , पुलिस ने सरकारी अस्पताल के बयान पर ध्यान नहीं दिया जिसमें  लिखा था पहलू की हत्या पीटे जाने से आयीं चोटों से हुई बल्कि एक निजी अस्पताल की रिपोर्ट का संज्ञान लिया जिसमें मौत का कारण दिल का दौरा बताया गया था। पुलिस ने FIR में हत्या की कोशिश का यानि धारा 307 के अंतर्गत मामला दर्ज़  ही नहीं किया।  मुख्य  आरोपियों को बरी करने  के बाद अलवर  पुलिस ने 1 फरवरी को पहलू खान और उनके 2 पीड़ित साथियों पर ही गाय तस्करी का मामला  दर्ज़  कर दिया। 
 
एक मामला जो देश भर में गाय के नाम पर हिंसा के मामलों में सबसे ज़्यादा  चर्चित रहा है ,की भी  कहानी है।  28 सितम्बर 2015 को उत्तर प्रदेश के दादरी  में 55 वर्ष के अख़लाक़ और उनके बेटे  डेनिश  को उनके घर से निकाल पर भीड़  ने बुरी तरह पीटा।  इसके बाद अख़लाक़  की मौत हो गयी पर बेटा बच गया।  भीड़  का वही आरोप था अख़लाक़ के घर में गाय का मांस था।  बाद में दो फॉरेंसिक रिपोर्टें  आयी एक ने कहा  वह मटन  था दूसरी ने कहा वह गाय  का मांस  था।  इस मामले में सभी 20 आरोपी  29 सितम्बर 2017 की एक रिपोर्ट के हिसाब से बेल पर बहार थे। पुलिस ने मामले में उल्टा सभी घर वालों को गाय काटने  का आरोप लगते हुए FIR दर्ज़  की , ये मामला अब  भी चल रहा है।  इसके आलावा अख़लाक़ को के क़त्ल  के एक आरोपी रवि सिसोदिया की 4 अक्टूबर 2017 को जेल में मौत हो गयी , जिसके बाद गॉव में भड़काऊ भाषण  दिए गए।  चौकाने  वाली बात ये थी कि हत्या के इस आरोपी की तिरंगे  में लपेटा गया था। 

इससे पहले न्यूज़क्लिक से बात करते हुए वकील और Human Rights Law Network के संथापक कोलिन गोन्साल्वेज़ ने बताया था कि लिंचिंग के करीब 30 मामलों में पुलिस आरोपियों की तरफदारी करती हुए दिखाई पड़ी है साथ ही उन्होंने ये आरोप भी लगाया कि सरकारें भी मामलों को कमज़ोर करने  की कोशिश करती रहीं हैं। 

hapur lynching
Uttar pradesh
Gau Rakshaks
BJP
BJP-RSS
police

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

आजमगढ़ उप-चुनाव: भाजपा के निरहुआ के सामने होंगे धर्मेंद्र यादव

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !


बाकी खबरें

  • Chhattisgarh
    रूबी सरकार
    छत्तीसगढ़: भूपेश सरकार से नाराज़ विस्थापित किसानों का सत्याग्रह, कांग्रेस-भाजपा दोनों से नहीं मिला न्याय
    16 Feb 2022
    ‘अपना हक़ लेके रहेंगे, अभी नहीं तो कभी नहीं’ नारे के साथ अन्नदाताओं का डेढ़ महीने से सत्याग्रह’ जारी है।
  • Bappi Lahiri
    आलोक शुक्ला
    बप्पी दा का जाना जैसे संगीत से सोने की चमक का जाना
    16 Feb 2022
    बप्पी लाहिड़ी भले ही खूब सारा सोना पहनने के कारण चर्चित रहे हैं पर सच ये भी है कि वे अपने हरफनमौला संगीत प्रतिभा के कारण संगीत में सोने की चमक जैसे थे जो आज उनके जाने से खत्म हो गई।
  • hum bharat ke log
    वसीम अकरम त्यागी
    हम भारत के लोग: समृद्धि ने बांटा मगर संकट ने किया एक
    16 Feb 2022
    जनवरी 2020 के बाद के कोरोना काल में मानवीय संवेदना और बंधुत्व की इन 5 मिसालों से आप “हम भारत के लोग” की परिभाषा को समझ पाएंगे, किस तरह सांप्रदायिक भाषणों पर ये मानवीय कहानियां भारी पड़ीं।
  • Hijab
    एजाज़ अशरफ़
    हिजाब के विलुप्त होने और असहमति के प्रतीक के रूप में फिर से उभरने की कहानी
    16 Feb 2022
    इस इस्लामिक स्कार्फ़ का कोई भी मतलब उतना स्थायी नहीं है, जितना कि इस लिहाज़ से कि महिलाओं को जब भी इसे पहनने या उतारने के लिए मजबूर किया जाता है, तब-तब वे भड़क उठती हैं।
  • health Department
    एम.ओबैद
    यूपी चुनाव: बीमार पड़ा है जालौन ज़िले का स्वास्थ्य विभाग
    16 Feb 2022
    "स्वास्थ्य सेवा की बात करें तो उत्तर प्रदेश में पिछले पांच सालों में सुधार के नाम पर कुछ भी नहीं हुआ। प्रदेश के जालौन जिले की बात करें तो यहां के जिला अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सक पिछले चार साल से…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License