NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
हाशिमपुरा नरसंहार : यूपी पीएसी के 16 जवानों को उम्रकैद
हाशिमपुर मामले में इंसाफ होते-होते बहुत देर हो गई। आज 31 बरस बाद ये फैसला आया है और मलियाना का इंतज़ार तो शायद कभी ख़त्म नहीं होगा। मेरठ के इन दो इलाकों के नाम जब भी ज़ुबां पर आते हैं बदन में ख़ौफ़ की एक लहर सी दौड़ जाती है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
31 Oct 2018
hashimpura 1987
हाशिमपुरा 1987। फोटो साभार : प्रवीण जैन

दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को मेरठ में 1987 हाशिमपुरा नरसंहार में 42 लोगों की हत्या के लिए उत्तर प्रदेश प्रोविंशियल आर्म्ड कॉन्स्टेबुलरी (पीएसी) के 16 जवानों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने निचली अदालत के मार्च 2015 के फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें निचली अदालत ने पीएसी के 16 जवानों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया था।

इस मामले में मूल रूप से 19 आरोपी थे, लेकिन तीन की मुकदमे के दौरान मौत हो गई।

पीड़ितों की हत्या मेरठ में एक दंगे के दौरान हुई। पीड़ितों को पीएसी की 41 बटालियन द्वारा हाशिमपुरा के पड़ोस से तलाशी अभियान के दौरान उठा लिया गया।

इस मामले में आरोपपत्र मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट गाजियाबाद के समक्ष 1996 में दाखिल किया गया था।

नरसंहार पीड़ितों के परिवारों की एक याचिका के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने मामले को सितंबर 2002 में दिल्ली स्थानांतरित कर दिया था।

दिल्ली की एक सत्र न्यायालय ने जुलाई 2006 में सभी आरोपियों के खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, साक्ष्यों से छेड़छाड़ व साजिश का आरोप तय किया।

हाशिमपुर नरसंहार मामले में आज 31 बरस बाद इंसाफ हुआ है, लेकिन मलियाना में बाकी है। मेरठ के इन दो इलाकों के नाम जब भी ज़ुबां पर आते हैं बदन में ख़ौफ़ की एक लहर सी दौड़ जाती है।

दरअसल 1986 में केंद्र सरकार ने बाबरी मस्जिद के ताले खोलने का आदेश दिया था। इसके बाद से ही पूरे यूपी खासकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सांप्रदायिक माहौल गरमा गया और मई 1987 आते-आते मेरठ में धार्मिक उन्माद अपने चरम पर पहुंच गया। 22 मई 1987 को यहां के हाशिमपुरा में मुस्लिम समुदाय के 42 लोगों की हत्या कर दी गई और इसके अगले ही दिन, 23 मई को मलियाना में भी भीषण दंगे भड़के जिनमें सौ से ज्यादा घर जले और 73 लोगों की हत्या कर दी गई।

उस समय ग़ाज़ियाबाद के एसपी रहे वरिष्ठ आईपीएस और लेखक विभूति नारायण राय ने इस बारे में अपने ब्लॉग और अन्य मंचों से कई बार चर्चा की है। “हाशिमपुरा : उत्तर प्रदेश पुलिस के इतिहास का एक काला अध्याय” नाम से उन्होंने अपने संस्मरण भी लिखे हैं। वे लिखते हैं कि “जीवन के कुछ अनुभव ऐसे होते हैं जो ज़िंदगी भर आपका पीछा नहीं छोडते। एक दु:स्वप्न की तरह वे हमेशा आपके साथ चलते हैं और कई बार तो क़र्ज़ की तरह आपके सर पर सवार रहते हैं। हाशिमपुरा भी मेरे लिए कुछ ऐसा ही अनुभव है। 22/23 मई, 1987 की आधी रात दिल्ली ग़ाज़ियाबाद सीमा पर मकनपुर गांव से गुज़रने वाली नहर की पटरी और किनारे उगे सरकंडों के बीच टॉर्च की कमज़ोर रोशनी में ख़ून से लथपथ धरती पर मृतकों के बीच किसी जीवित को तलाशना- सब कुछ मेरे स्मृति पटल पर किसी हॉरर फिल्म की तरह अंकित है।”

इस घटना की वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक व कूटनीतिक मामलों के जानकार सईद नकवी ने कभी स्रेब्रेनिका और रोहिंग्या जनसंहार से तुलना की थी। ‘आईएएनएस’ की ओर से फरवरी में जारी एक लेख में सईद नकवी लिख रहे हैं कि “पीठ पीछे दोनों हाथ बंधे और कतारबद्ध घुटनों के बल खड़े रोहिंग्या मुस्लिम युवाओं की तस्वीरें देखते ही मेरे मानस पटल पर ऐसी ही कुछ खौफनाक घटनाओं की यादें ताजा हो आईं। तस्वीरों में बंदूकों से लैस सैन्य पुलिस घात लगाए बैठी है। आखिरकार उनको मार गिराया गया।  यह खौफ की ऐसी तस्वीर है, जिसे दुनिया याद रखेगी। 

दूसरी वीभत्स घटना जो मेरे मानस पटल को कुरेदने लगी, वह 1995 में बोस्निया के स्रेब्रेनिका की घटना है। बेशक, मेरठ के हाशिमपुरा में 1987 का वाकया हमारी अपनी ही त्रासदी है।

हाशिमपुरा में 42 युवाओं को एक नहर के पास कतार में खड़ा कर उत्तर प्रदेश के सशस्त्र पुलिस के जवानों ने गोलियों से भून डाला था। पुलिस के ये जवान हिंदू थे। क्या उनके नाम बताए जा सकते हैं? जाहिर है कि नहीं, इत्तेहादुल मुस्लिमीन के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी जम्मू-कश्मीर में शहीद हुए जवानों को मुस्लिम बता रहे हैं, क्योंकि हालिया हिंसक घटनाओं में ज्यादातर मुस्लिम ही थे, जिनको आतंकियों ने मारा। 

ओवैसी का मुद्दा साधारण है। दरअसल, भारतीय मुसलमानों की देशभक्ति को लगातार चुनौती मिली रही है। धर्मनिरपेक्षता के आधार पर टेलीविजन चैनलों पर प्राइम टाइम की बहस में उनको गलत बताया जा रहा है। लेकिन सुंजवान के सैनिक शिविर में शहीद हुए सात सैनिकों में पांच मुस्लिम थे। खबरों में यह बात क्यों नहीं आती है? इन खबरों से सांप्रदायिकता का दरार कुछ कम होगा। लेकिन नहीं, प्रस्तोतागण एक ही स्वर में बोले, "ओवैसी सेना का सांप्रदायीकरण कर रहे हैं।" लेकिन कैसे? "क्या यह बताकर कि शिविर में शहीद हुए सात सैनिकों में पांच मुस्लिम थे।" मुसलमानों को शहीदी में हिंदू सैनिकों को कभी पीछे नहीं छोड़ना चाहिए? 

इस प्रवृति से हाशिमपुरा में मारे गए 42 मुसलमानों को महज धर्मनिरपेक्ष राज्य के निमित्त के तौर पर देखा जाना चाहिए। 
 

(कुछ इनपुट आईएएनएस)

meerut
hashimpura massacre
Hashimpura killing
Delhi High court
maliyana

Related Stories

दिल्ली उच्च न्यायालय ने क़ुतुब मीनार परिसर के पास मस्जिद में नमाज़ रोकने के ख़िलाफ़ याचिका को तत्काल सूचीबद्ध करने से इनकार किया

बग्गा मामला: उच्च न्यायालय ने दिल्ली पुलिस से पंजाब पुलिस की याचिका पर जवाब मांगा

ख़ान और ज़फ़र के रौशन चेहरे, कालिख़ तो ख़ुद पे पुती है

मैरिटल रेप : दिल्ली हाई कोर्ट के बंटे हुए फ़ैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, क्या अब ख़त्म होगा न्याय का इंतज़ार!

मेरठ : जागरण की अनुमति ना मिलने पर BJP नेताओं ने इंस्पेक्टर को दी चुनौती, कहा बिना अनुमति करेंगे जागरण

मेरठ: वेटरनरी छात्रों को इंटर्नशिप के मिलते हैं मात्र 1000 रुपए, बढ़ाने की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे

मेरठ: चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के भर्ती विज्ञापन में आरक्षण का नहीं कोई ज़िक्र, राज्यपाल ने किया जवाब तलब

दिल्ली दंगों के दो साल: इंसाफ़ के लिए भटकते पीड़ित, तारीख़ पर मिलती तारीख़

अदालत ने ईडब्ल्यूएस श्रेणी के 44 हजार बच्चों के दाख़िले पर दिल्ली सरकार से जवाब मांगा

ग्राउंड रिपोर्ट : जिस ‘हैंडलूम और टेक्सटाइल इंडस्ट्री' को PM ने कहा- प्राइड, वो है बंद होने की कगार पर


बाकी खबरें

  • Harnaaz Sandhu
    भाषा
    भारत की हरनाज संधू ने मिस यूनिवर्स 2021 का ख़िताब जीता
    13 Dec 2021
    संधू से पहले सिर्फ दो भारतीय महिलाओं ने मिस यूनिवर्स का खिताब जीता है। अभिनेत्री सुष्मिता सेन को 1994 में और लारा दत्ता को 2000 में यह ताज पहनाया गया था।
  • Madras High Court
    गौरी आनंद
    ट्रांसजेंडर लोगों के समावेश पर बनाए गए मॉड्यूल को वापस लेने पर मद्रास हाई कोर्ट ने सीबीएसई को फटकार लगाई
    13 Dec 2021
    पिछले दिनों सीबीएसई ने अपनी वेबसाइट से ट्रांसजेंडर बच्चों की शिक्षा से संबंधित एक शिक्षक प्रशिक्षण नियमावली को हटा दिया था, मद्रास हाईकोर्ट ने इसपर चिंता जताई है।
  • Julian Assange
    जॉन पिल्गेर
    जूलियन असांज का न्यायिक अपहरण
    13 Dec 2021
    हम में से कौन-कौन जूलियन असांज के साथ लम्बे समय तक चल रहे न्यायिक उपहास जैसे इस न्यायिक अपहरण के सिलसिले में महज़ तमाशाई बने रहने के बजाय उनके साथ खड़े होने के लिए तैयार हैं?
  • property card
    अनिल अंशुमन
    झारखंड: ‘स्वामित्व योजना’ लागू होने से आशंकित आदिवासी, गांव-गांव किए जा रहे ड्रोन सर्वे का विरोध
    13 Dec 2021
    आदिवासी समाज बनाम प्रशासन के इस तनाव का मूल कारण बन रहा है, प्रधानमंत्री द्वारा घोषित ‘स्वामित्व योजना’ लागू किये जाने के लिए पूरे इलाके के लोगों के गांव-घरों का ड्रोन से सर्वे कराया जाना। प्रशासन के…
  • jobs
    सुबोध वर्मा
    मोदी जी, शहरों में नौकरियों का क्या?
    13 Dec 2021
    पिछले कुछ वर्षों से 7-8 प्रतिशत की बेरोज़गारी दर के चलते शहरों में नौकरी चाहने वाले असहाय और निराश हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License