NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
हिंसा के बाद बिहारः घटना को भूलकर साथ रहने लगे दोनों धर्म के लोग
न्यूज़क्लिक टीम नें बिहार के हिंसाग्रस्त इलाक़े का दौरा किया और राज्य में हुई घटना को गंभीरता से पेश करने का प्रयास किया।
सागरिका किस्सू
06 Apr 2018
नवाद

पिछले पखवाड़े में बिहार के 38 में से 9 ज़िलों में सांप्रदायिक हिंसा हुई जो लगातार सुर्खियां बनी रही। इस हिंसा को दो धर्म-विशेष के बीच सांप्रदायिक विभाजन बढ़ाने के लिए एक सचेत प्रयास के रूप में देखा जाता है। हिंदू-मुस्लिम शत्रुता की कोई घटना शायद ही चौंकाने वाली खबर होती है, लेकिन इस दुश्मनी की उग्रता का विश्लेषण करना बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य है। इन ज़िलों में हुई घटना की स्थिति को जानने के लिए न्यूज़क्लिक की टीम ने घटना स्थल का दौरा किया।

घनी आबादी वाले नवादाही इलाके में संकरी सड़कें हैं जिसके दोनों तरफ इमारतें खड़ी हैं। यह औरंगाबाद ज़िले में पड़ता है। ज्ञात हो कि ज़िला औरंगाबाद बिहार के सांप्रदायिक हिंसा से प्रभावित ज़िलों में से एक है। इस इलाक़े में हिंदू और मुस्लिम समुदायों के लोगों की काफी आबादी है। सांप्रदायिक हिंसा से पहले कोई भी आसानी से इस इलाक़े में बुर्क़ा पहने महिलाओं को जाते हुए देख सकता था। अब कोई पुलिसवाला मौजूद नहीं है, और धारा 144 (गैरक़ानूनी तरीक़े से इकटठा होने संबंधित) भी हटा दिया गया है। दूर से बाज़ार के शोरगुल को सुना जा सकता है। जब हम इस इलाके से गुज़रे तो हमने देखा कि घरों पर भगवा और हरे झंडे लगे थे जो घरों में रहने वाले लोगों की पहचान बता रहे थें।

जब हम इन घरों के पीछे गए तो हमने देखा कि अधेड़ उम्र के महिलाओं और पुरूषों का एक समूह एक जगह इकट्टा था। इन्हें मीडिया के आने की ख़बर मिल गई थी। लंबी दाढ़ी वाला एक दुबला पतला बूढ़ा व्यक्ति चमकती आंखों से मेरी तरफ देखा। जैसे ही हमने खुद के बारे में बताया वे हमें एक तरफ ले गए और घटना के बारे में बताया। उनके मुताबिक़ इस तरह की घटना इस इलाके में पहली बार हुई थी। उन्होंने कहा कि इस घटना के पहले तक ये इलाक़ा काफी शांतिपूर्ण था। हिंदू समाज के अपने पड़ोसियों के साथ दुश्मनी की कथित अफवाहों को ख़ारिज करते हुए वहां पर मौजूद लोगों ने इस घटना में बाहरी लोगों के शामिल होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बाहरी लोग इस इलाक़े के सामाजिक ताने बाने को बिगाड़ने की कोशिश कर रहे थे। अपनी हाथों ने भगवा झंडा लिए हुए उन्होंने तलवारें भाजी और भड़काऊ नारे लगाए। दुकानों में तोड़-फोड़ किया और उनमें आग लगा दी। इनमें से कुछ दुकानें हिंदू समाज के लोगों की भी थीं। इस इलाके में रामनवमी के मौक़े से निकली जुलूसों में ऐसी उग्रता कभी नहीं देखी गई। प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के अनुसार दोनों समुदाय के लोगों को गिरफ़्तार किया गया।

महत्वपूर्ण बात यह है कि औरंगाबाद की तरह अन्य ज़िलों की कहानी भी एक जैसी ही है। हालांकि इन जिलों में से कुछ ज़िलों के मामले में कुछ असामाजिक तत्वों ने भूमिका निभाई थी। नवादा में कथित तौर पर मुस्लिम समुदाय के सदस्यों द्वारा एक मूर्ति तोड़े जाने को लेकर झड़प हुई ती। तोड़े गए हिंदू देवता हनुमान की मूर्ति खुले मैदान में पुख्ता किए हुए स्थान पर खड़ी थी। यह रिहायसी इलाक़े से क़रीब पांच किलोमीटर की दूरी पर एक विवाह कक्ष के पास स्थित थी। दिलचस्प बात यह है कि रामनवमी के चार दिन बाद 30 मार्च को नवादा में जुलूस निकाली गई। क़रीब 200 अज्ञात और 20 ज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ प्राथमिकी दर्ज की गई थी जिसमें ज़्यादातर यादव और मुस्लिम शामिल थें।

अज्ञात व्यक्तियों के ख़िलाफ़ एफआईआर भयभीत करने के लिए संदेह के आधार पर लोगों को घर से पकड़ने के लिए किया गया था। लोगों के ख़िलाफ़ इस तरह के एफआईआर करने का तरीक़ा छोटे इलाकों में क़ानून-व्यवस्था के दायरे को स्पष्ट करता है। जेडी (यू) नेता (बीजेपी की सहयोगी) और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृह ज़िले नालंदा की तरफ गुज़रने के दौरान वहां की असामान्य स्थिति ने हमारा ध्यान अपनी ओर खींचा। पुलिस थाना की दीवार पर श्रृंखलाबद्ध तरीक़े से भगवा झंडे लगे हुए थे। उनमें से एक पर लिखा था: 'जय श्री राम -बजरंग दल'। दिलचस्प है कि ये झंडा नीतीश कुमार की होर्डिंग के ठीक सामने लगा था। नीतीश कुमार के होर्डिंग पर दहेज़ को लेकर संदेश लिखे हुए थे। यहां से क़रीब एक किलोमीटर के बाद मुख्यमंत्री का ज़िला पूरी तरह भगवामय दिखा। जिस जगह पर हिंसा की घटना हुई थी उसे तलाशते हुए हम हैदरगंज कारा पहुंचे।

हैदरगंज मुस्लिम आबादी वाला इलाक़ा है जहां कुछ हिंदू सामज के लोग भी रहते हैं। इस इलाक़े में संकरी गलियां और एक कमरे वाले घर सामान्य हैं। सुनियोजित जुलूस की ख़बरें गांव में पहले ही फैल चुकी थी। ये ख़बर उस वक़्त पुष्ट हो गया जब हिंदू समाज के एक स्थानीय व्यक्ति संदीप ने पूर्व वार्ड आयुक्त मोहम्मद सफदर इमाम को इस कार्यक्रम के लिए निमंत्रण पत्र भेजा था। कई शांति बैठक होने के बाद फैसला लिया गया कि प्रत्येक समुदाय के पांच लोग जुलूस में शामिल होंगे। ज्ञात हो कि इस शांति बैठक में पुलिसवाले भी मौजूद थें। इस मामले में भी अनियंत्रित भीड़ ने दख़ल दिया जिसमें उग्र युवक शामिल थे। इन्हीं युवकों ने भड़काऊ नारे लगाते हुए पत्थर फेंकी और तलवारें लहराई।

हैदरगंज के अंदरूनी इलाक़े में बलिराम नाम के एक मोची के एक छोटी सी खुली दुकान है जो इस घटना के प्रत्यक्षदर्शी थे। इसे एक असामान्य घटना बताते हुए बलिराम ने कहा, "यह पहला मौक़ा था जब हमारे इलाक़े में इस तरह का जुलूस निकाला गया।" उन्होंने घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि भीड़ बाहरी लोग शामिल थें। दुकान से कुछ दूरी पर एक सत्तर वर्षीय वृद्ध व्यक्ति फटा हुआ कुर्ता पहने खड़े थें। उनका परिवार हैदरगंज में रहने वाले कुछ हिंदू परिवारों में से एक था। उनके बेटे को जुलूस की रात गिरफ़्तार किया गया था। उन्होंने कहा कि"मेरा बेटा (संजय) जुलूस में शामिल था। हम एक ग़रीब व्यक्ति है।" उन्होंने आगे कहा कि जुलूस के बाद उनके परिवार पर कुछ मुस्लिम लोगों ने उनके परिवार पर हमला किया।

संजय की पत्नी रेणुका के मुताबिक़ पुलिस ने उनके पति को पुलिस ने घर से पकड़ लिया। इसको लेकर रेणुका ने दुश्मनी के डर से कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई।

जुलूस के बाद से हैदरगंज में दोनों समुदायों के लोगों में भय का माहौल है। यहां के लोगों के चेहरे पर चिंता देखी जा सकती है। 34 वर्षीय गजनी ने कहा कि "हां, हिंसा हुई थी। कुछ शरारती मुस्लिम लड़कों ने इलाक़े के हिंदुओं पर हमला करने की कोशिश की।" ज्ञात हो कि गजनी उन लोगों में से एक है जिन्होंने रेणुका के परिवार को उस वक्त बचाया था जब कुछ लोग उनके घर पर पत्थर फेंकने की कोशिश की थी।

जब हम हैदरगंज के इलाक़े से निकल रहे थे तो बलिराम ने हमें कुछ जानकारी साझा करने के लिए बुलाया। उन्होंने कहा, "रामनवमी के इस जुलूस का आयोजन बाहरी लोगों द्वारा किया गया था। ये सरकार सांप्रदायिक विभाजन करने की कोशिश कर रही है। मैं अनपढ़ हूं लेकिन हम इसे समझते हैं। पहले ऐसा कभी नहीं हुआ था।" उन्होंने आगे कहा कि "यह सब बाहरी लोगों का कराया हुआ था। इसी ज़िले के बाहरी लोग थें लेकिन वे दूर-दराज़ इलाक़े के थें।"

केंद्र में मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद से ध्रुवीकरण करने के लिए लिंचिंग और हिंसा की घटना और बढ़ गई है। यहां तक कि नीतीश कुमार, जो कि सांप्रदायिकता को रोकने के लिए जाने जाते थे, के ज़िले की कहानी कुछ और ही वास्तविकता बयां कर रही है। समाज का सांप्रदायिक ताना-बाना ख़त्म कर दिया गया है लेकिन सौभाग्य से यह मुज़फ़्फ़रनगर या कासगंज जैसा बुरा नहीं है। लोग अभी भी एक साथ रह रहे हैं। इन सभी स्थानों पर तालमेल दिखा। ये अनुभव बुरी तरह महसूस ही नहीं किया गया बल्कि ज़ाहिर तौर पर महसूस किया गया और लोगों को पता था कि लोकसभा चुनाव को कुछ ही दिन बचे हैं।

साम्प्रदायिक दंगे
बिहार दंगे
जेडी(यु)
नितीश कुमार
बिहार

Related Stories

महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय: आनिश्चित काल के लिए हुआ बंद

मध्यप्रदेश: एक और आश्रयगृह बना बलात्कार गृह!

मुज़फ्फरपुर सुधारगृह कांड: बिहार सरकार ने मुख्य आरोपी के अखबार को दिये थे लाखों के विज्ञापन

बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था के खस्ता हाल

यूपी-बिहार: 2019 की तैयारी, भाजपा और विपक्ष

बिहार: सामूहिक बलत्कार के मामले में पुलिस के रैवये पर गंभीर सवाल उठे!

नई नीति बिहार में सरकारी स्कूलों की वास्तविकता को उज़ागर करती हैं

बिहार: मंदिर निर्माण से होगा महिला सशक्तिकरण ?

दिन में भाजपा की आलोचना की और शाम को जदयू से एमएलसी का टिकट लिया

बिहार चुनावों में संघ परिवार का घातक गठजोड़


बाकी खबरें

  • union budget
    नेसार अहमद
    केंद्रीय बजट: SDG लक्ष्यों में पिछड़ने के बावजूद वंचित समुदायों के लिए आवंटन में कोई वृद्धि नहीं
    03 Feb 2022
    कुछ क्षेत्रों में मामूली वृद्धि को छोड़कर, कुल मिलाकर, बजट में वंचित समुदायों के सशक्तिकरण के लिए समर्पित योजनाओं और व्यापक (अम्ब्रेला) कार्यक्रमों के लिए आवंटन में कोई उल्लेखनीय वृद्धि नहीं की गई है…
  • NTPC
    ओंकार सिंह
    छात्रों-युवाओं का आक्रोश : पिछले तीन दशक के छलावे-भुलावे का उबाल
    03 Feb 2022
    इस साल के बजट में बेरोजगारी के हल के लिए किसी तरह की ठोस योजना नहीं।
  • Julian Assange
    अनीश आर एम
    ज़ोर पकड़ती  रिहाई की मांग के बीच जूलियन असांज नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित
    03 Feb 2022
    संयुक्त राज्य अमेरिका में प्रत्यर्पण के ख़िलाफ़ लड़ते हुए एक ब्रिटिश जेल में 1,000 से ज़्यादा दिन बिता चुके विकिलीक्स के संस्थापक को तीसरी बार नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया है।
  • Aaj Ki Baat
    न्यूज़क्लिक टीम
    बजट का संदेश: सरकार को जनता की तनिक परवाह नहीं!
    03 Feb 2022
    केंद्रीय बजट की आर्थिकी पर काफी चर्चा हो रही है. लेकिन इस बजट की हैरतंगेज राजनीति अपने ढंग की अनोखी और अविश्वसनीय है! बजट देश की आम जनता के हितों को नज़रंदाज़ करता है. किसी लोकतंत्र में ऐसा कम देखा…
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 1.72 लाख से ज़्यादा नए मामले, 1,008 मरीज़ों की मौत
    03 Feb 2022
    देश में कोरोना संक्रमण के मामलों की संख्या बढ़कर 4 करोड़ 18 लाख 3 हज़ार 318 हो गयी है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License