NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
‘हमें नियामगिरी के लिए मौत स्वीकार है’: नियामगिरी के आदिवासी ओडिशा में वेदांता के विरोध उतरे
नियामगिरी में वहां के लोगों का संघर्ष और अभियान पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील नियमगिरी में एल्यूमीनियम रिफाइनरी को बंद करने के लिए 2003 से जारी रहा है, तमिलनाडु के थूथुकुडी में 13 लोगों की हत्या के बाद इस आन्दोलन ने गति पकड़ ली है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
15 Jun 2018
Translated by महेश कुमार
तमिलनाडु

जबसे थूथुकुडी का विरोध हाल ही में सुर्खियों में आया है, ओडिशा में नियमगिरी आदिवासी भी अपनी आजीविका की रक्षा के लिए लंबे समय से वेदांत के खिलाफ संघर्ष करते रहे हैं और 'प्रदूषक और हत्यारे वेदांत, भारत छोडो का नारा देते रहे हैं। तुतीकोरिन के शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए'- आदिवासी और कार्यकर्ता राज्य में नियामगिरी पहाड़ियों में वेदांत द्वारा बॉक्साइट खनन का सामूहिक रूप से विरोध करने के लिए उड़ीसा के नियामगिरी पर्वत के लांजीगढ़ गांव में इकट्ठे हुए।

2003 से जारी रहे पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील नियमगिरी में एल्यूमीनियम रिफाइनरी को बंद करने के लिए नियमगिरी लोगों के संघर्ष और अभियान में तमिलनाडु में 13 लोगों की हत्या के बाद तेज़ी आ गयी है - जो वेदांत की सहायक कंपनी तांबे स्मेल्टर स्टरलाइट इंडस्ट्रीज के खिलाफ तमिलनाडु की थूथुकुडी में विरोध कर रहे थे और राज्य की पुलिस ने उनकी जान ले ली।

लांजीगढ़ के सुदूर शहर में रिफाइनरी के पास एक रैली में भीड़ को संबोधित करते हुए आदिवासी नेता लाडो सिकका ने कहा, "हम नियमगिरी के लिए अपना खून बहा देंगे, हम नियामगिरी के लिए मर जाएंगे।" नियमगिरी पहाड़ी राज्य के रायगडा और कालाहांडी जिलों में फैले 160 गांवों में रहने वाले 15,000 से अधिक कोंड जनजातियों (डोंग्रिया और कुटिया) का घर है। ये जनजातियां पहाड़ियों को पवित्र मानते हैं और पहाड़ी की पूजा करते हैं, इसे 'नियम राजा' कहते हैं।

नेता ने कहा, "वेदांत केवल कुछ ही नौकरियां दे सकता हैं, लेकिन ‘नियम राजा’ ने हमें सब कुछ दिया है।" "हम अंत तक लड़ाई जारी रखेंगे। हम अपने आंदोलन को तेज करेंगे। "

नियमगिरी के निवासियों का डर है कि कंपनी, जो आयातित बॉक्साइट पर निर्भर करती है, नियामगिरी पहाड़ियों के नीचे उच्च गुणवत्ता वाले बॉक्साइट जमा को निकाल लेगी। लोगों के भय को बढाने के लिए, वेदांत के अधिकारियों में से एक ने बताया था कि नियमगिरि में खनन इसका दीर्घकालिक उद्देश्य है।

राज्य सरकार के स्वामित्व वाली ओडिशा खनन निगम को नियामगिरी पहाड़ियों से वेदांत रिफाइनरी में निकाले गए बॉक्साइट को प्रदान करना था। पहाड़ियों में 80 मिलियन टन से अधिक बॉक्साइट मौजूद है। हालांकि, 18 अप्रैल, 2013 को, सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि गांव परिषदों का ही फैसला होगा कि वे राज्य के स्वामित्व वाली खनन निगम को बॉक्साइट के लिए पहाड़ियों का खनन कर सकता है या नहीं। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के मद्देनजर, सभी गांव परिषदों या ग्राम सभाओं ने खनन के खिलाफ मतदान किया था।

दूसरी तरफ, रॉयटर्स को दिए एक बयान में, वेदांत ने कहा कि वे ओडिशा में नई बॉक्साइट खानों की किसी भी नीलामी में भाग लेंगे। रिफाइनरी की क्षमता का विस्तार करने के लिए कंपनी ने सालाना 6 मिलियन टन एल्यूमीनियम का उत्पादन करने के लिए पर्यावरण मंजूरी और अन्य मंजूरी हासिल कर ली है। नियमगिरी पहाड़ियों में बड़े पैमाने पर बॉक्साइट रिजर्व पर नजर रखते हुए, कंपनी ने राज्य में कुल रिसाइनरी और एल्यूमीनियम स्मेल्टर बनाने के लिए 9 अरब डॉलर से अधिक खर्च किए हैं, जिसमें देश के कुल बॉक्साइट रिजर्व का 70 प्रतिशत हिस्सा मौजूद है।

अब तक, स्थानीय लोगों द्वारा उनकी आजीविका के लिए कई संघर्षों को नियमगिरी बेल्ट में देखा जा चूका है, जबकि राज्य लोगों के संघर्ष को बाधित करने का प्रयास कर रही है। अप्रैल 2017 में, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अयोधगिरी सुरक्षा समिति (एनएसएस) को माओवादियों से जोड़ने का की कोशिश की थी। अपनी वार्षिक रिपोर्ट में, मंत्रालय ने लिखा: "नियमगिरी हिल्स क्षेत्र (जिलों रायगडा और कालाहांडी, ओडिशा) में, संगठन [माओवादियों] ने नियमगिरी सुरक्षा समिति की गतिविधियों का मार्गदर्शन जारी रखा"। देश भर में पर्यावरण और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सरकार के इस कदम का विरोध किया और इसे निराधार माना।

इसके अलावा, गृह मंत्रालय ने झारखंड के विस्थान विरोधी जन विकास आंदोलन (वीवीजेवीएम) को "सीपीआई (माओवादी) के मंच के तौर पर प्रसिद्द किया था। वीवीजेवीएम राज्य में विस्थापित किसानों के अधिकारों के लिए काम करता है।

मंत्रालय के फैसले के मजबूत विरोध के बीच, मई 2017 में, एनएसएस के सह-संयोजक की बहू को ओडिशा पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। इससे पहले और बाद में, आदिवासियों के अधिकारों के लिए काम करने वाले कई आदिवासियों और कार्यकर्ताओं को माओवादियों के साथ उनके कथित संबंध के कारण गिरफ्तार कर लिया गया था। 30 अक्टूबर, 2014 को, अखिल भारतीय किसान मजदूर सभा के सदस्य हरिबंधू कद्रक, जो आदिवासियों के भूमि अधिकारों के लिए काम करते थे, कथित तौर पर माओवादी होने के कारण गिरफ्तार किया गया था।

 

Niyamgiri Protest
vedanta
Odisha
Thoothukudi
VVJVM
Kondh Tribes

Related Stories

लाखपदर से पलंगपदर तक, बॉक्साइड के पहाड़ों पर 5 दिन

ओडिशा के क्योंझर जिले में रामनवमी रैली को लेकर झड़प के बाद इंटरनेट सेवाएं निलंबित

विज्ञापन में फ़ायदा पहुंचाने का एल्गोरिदम : फ़ेसबुक ने विपक्षियों की तुलना में "बीजेपी से लिए कम पैसे"  

स्पेशल रिपोर्ट: पहाड़ी बोंडा; ज़िंदगी और पहचान का द्वंद्व

आरटीआई अधिनियम का 16वां साल: निष्क्रिय आयोग, नहीं निपटाया जा रहा बकाया काम

ओडिशा माली पर्वत खनन: हिंडाल्को कंपनी का विरोध करने वाले आदिवासी एक्टिविस्टों को मिल रहीं धमकियां

माली पर्वत बचाओ: अपनी जमीन बचाने के लिए एक और संघर्ष की तैयारी में ओडिशा के आदिवासी

स्टील से भी सख्त: ओडिशा के ग्रामीण दशकों से अपनी जमीन का रक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं

ओडिसा: जबरन जमीन अधिग्रहण का विरोध कर रही आदिवासी महिला नेता को किया नज़रबंद

निजी स्कूलों की तुलना में सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की संख्या काफी कम : रिपोर्ट


बाकी खबरें

  • Sameer Wankhede illegally tapped phones: Nawab Malik
    भाषा
    समीर वानखेड़े ने गैरकानूनी तरीके से फोन टैप कराए: नवाब मलिक का आरोप
    26 Oct 2021
    मलिक ने कहा, ‘‘समीर वानखेड़े मुंबई और ठाणे के दो लोगों के जरिए कुछ लोगों के मोबाइल फोन पर गैरकानूनी तरीके से नजर रख रहे हैं।’’ मलिक अपने दामाद की गिरफ्तारी के बाद से लगातार वानखेड़े पर निशाना साध रहे…
  • SC
    भाषा
    लखीमपुर खीरी हिंसा: सुप्रीम कोर्ट का यूपी सरकार को गवाहों के संरक्षण का निर्देश
    26 Oct 2021
    शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार को पत्रकार की पीट-पीटकर हत्या करने के मामले से जुड़ी दो शिकायतों के संबंध में रिपोर्ट दाखिल करने का भी निर्देश दिया। पीठ ने कहा, ‘‘ राज्य को इन मामलों में अलग-अलग जवाब…
  • Defence Unions
    रौनक छाबड़ा
    रक्षा कर्मचारी संघों का केंद्र सरकार पर वादे से मुकरने का आरोप, आंदोलन की चेतावनी 
    26 Oct 2021
    कर्मचारी महासंघों ने ने केंद्र को उनकी सेवा शर्तों के साथ हेराफेरी नहीं करने के अपने वादे से मुकरने का दोषी ठहराया है।जिसे देखते हुए श्रमिक संघों ने अपनी 11 मांगों को सूचीबद्ध करते हुए “आंदोलन का…
  • cricket
    भाषा
    आईसीसी आचार संहिता के उल्लंघन के आरोप में कुमारा और दास पर जुर्माना
    26 Oct 2021
    मैदान पर तीखी बहस के बाद दोनों क्रिकेटर एक दूसरे पर प्रहार करने की कोशिश में थे जिससे अंपायरों और बाकी खिलाड़ियों को दखल देना पड़ा ।
  • diwali
    भाषा
    दिल्ली सरकार का 27 अक्टूबर से ‘पटाखे नहीं दीया जलाओ’ अभियान
    26 Oct 2021
    मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 15 सितंबर को पटाखों पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा करते हुए कहा था कि यह ‘‘जीवन बचाने के लिए आवश्यक’’ है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License