NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
शिक्षा
भारत
केंद्रीय विश्वविद्यालयों में अध्यापक नहीं होंगे तो पढ़ाई कहां से होगी?
बीते तीन-चार सालों का आंकड़ा देखें तो केंद्रीय विश्वविद्यालयों में करीब साढ़े पांच से छह हजार पद लगातार खाली पड़े हैं। सरकार हर साल इसे जल्दी से जल्दी भरने की बातें तो करती है लेकिन जमीनी हक़ीकत सरकार के नीयत और नीति पर बड़े सवाल खड़े कर रही है।
सोनिया यादव
04 Aug 2021
Universities

   "ये स्वाभाविक चिंता है कि अगर अध्यापक नहीं होंगे तो पढ़ाई कहां से होगी। उसकी कुछ वैधानिक कठिनाइयां थीं इन वैधानिक कठिनाइयों को दूर कर लिया गया है। हम युद्धस्तर पर इनको करेंगे।"

ये बयान 12 जुलाई 2019 को तत्कालिन मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने लोकसभा में दिया था। इसके साथ ही उन्होंने अगले छह महीने के भीतर देश के सभी केंद्रीय विश्वविद्यालय के सभी नियुक्त पदों को भरने की बात भी कही थी। हालांकि इस बात को अब दो साल से ज्यादा का समय बीत गया, मंत्रालय का नाम बदल कर शिक्षा मंत्रालय हो गया, खुद मंत्री जी भी बदल गए लेकिन नियुक्तियों की स्थिति टस से मस नहीं हुई।

साल 2021: केंद्रीय विश्वविद्यालयों में छह हज़ार से अधिक शैक्षिक पद खाली

आपको बता दें कि बीते महीने 22 जुलाई को राज्यसभा में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बताया था कि केंद्रीय विश्वविद्यालयों में कुल स्वीकृत 18,911 शैक्षिक पदों में से 6,136 पद खाली हैं। सबसे ज्यादा 846 पद दिल्ली विश्वविद्यालय में खाली हैं। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में 598 और बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी में 422 पद खाली हैं।

इसके बाद मंगलवार, 3 अगस्त यानी ठीक 12 दिन बाद इस संबंध में एक और डेटा संसद के समक्ष आया। लोकसभा में एम सेल्वराज के प्रश्न के लिखित उत्तर में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय उच्च शिक्षण संस्थानों में कैटेगरी के अनुसार रिक्त शैक्षिक पदों के बारे में जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि देश के 45 केंद्रीय विश्वविद्यालयों, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय, भारतीय विज्ञान, शिक्षा और अनुसंधान संस्थान तथा भारतीय विज्ञान संस्थान में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग में कुल 8,773 आरक्षित श्रेणी के पद रिक्त हैं।

ये आंकड़ा तो इस साल का है यानी ये भी कहा जा सकता है कि कोरोना संकट के चलते सरकार नियुक्तियां नहीं कर पाई लेकिन क्या इससे पहले की स्थिति बेहतर थी या महामारी के पहले देश में शिक्षण संस्थानों में न्युक्तियां बराबर हो रहीं थी। तो इसका जवाब नहीं है। सरकार द्वारा जारी सरकारी आंकड़ें ही इस बात का सबूत हैं कि देश में शिक्षा व्यवस्था पर कितना ध्यान दिया जा रहा है।

साल 2018: केंद्रीय विश्वविद्यालयों में साढ़े पांच हज़ार से अधिक शैक्षिक पद खाली

23 जुलाई 2018 यानी तीन साल पहले लोकसभा में तत्कालीन मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री डॉ. सत्यपाल सिंह ने एक सवाल के जवाब में केंद्रीय विश्वविद्यालयों में खाली पड़े शिक्षक पदों मतलब असिस्टेंट प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर के पद के बारे में जानकारी दी थी। उस जानकारी के मुताबिक 1 अप्रैल 2018 तक देश के 40 केंद्रीय विश्वविद्यालयों में कुल स्वीकृत 17,092 शैक्षिक पदों में से 5,606 शैक्षिक पद खाली थे।

साल 2019: केंद्रीय विश्वविद्यालयों में साढ़े छह हज़ार से अधिक शैक्षिक पद खाली

इसके बाद 2019 में लोकसभा चुनाव में जीत कर सत्ता पर दोबारा काबिज होने वाली एनडीए के नए मानव संसाधन मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक बने। 24 जून 2019 को लोकसभा में डॉ. निशंक ने जानकारी दी कि 1 अप्रैल 2019 तक देश के सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों में 17,834 शिक्षकों के स्वीकृत पदों पर 11,115 शिक्षक काम कर रहे हैं और बाकी के 6,719 पद खाली हैं।

साल 2020: केंद्रीय विश्वविद्यालयों में छह हज़ार से अधिक शैक्षिक पद खाली

फिर साल बदलता है और मानव संसाधन मंत्रालय का नाम बदलकर शिक्षा मंत्रालय कर दिया जाता है लेकिन हालात अभी भी नहीं बदलते। 14 सितंबर 2020 को शिक्षा मंत्री डॉ. निशंक एक बार फिर लोकसभा में केंद्रीय विश्वविद्यालयों में खाली पड़े शैक्षिक पदों के बारे में आंकड़े पेश करते हैं। वे बताते हैं कि 1 सितंबर 2020 तक 42 केंद्रीय विश्वविद्यालयों में खाली पड़े शैक्षिक पदों की संख्या 6,210 हैं।

पढ़ने वाले और पढ़ाने वाले दोनों के भविष्य से एक साथ खिलवाड़

अब साल 2021 का डेटा आपके सामने है। यानी पिछले तीन-चार सालों का आंकड़ा देखें तो मोटा-माटी करीब साढ़े पांच से छह हजार पद लगातार खाली पड़े हैं। सरकार खुद जल्दी से जल्दी पद भर लेने की बातें करती है लेकिन जमीनी हक़ीकत सरकार के नीयत और नीति पर बड़े सवाल खड़े कर रही है। 2018 में प्रकाश जावड़ेकर फिर रमेश पोखरियाल निशंक और अब धर्मेंद्र प्रधान मंत्री बन गए लेकिन केंद्रीय विश्वविद्यालयों में खाली पड़े शैक्षिक पदों की भर्ती पर कोई असर नहीं पड़ा।

साल दर साल सरकार का वही जवाब सरकार के ही भारत को विश्वगुरु बनाने के दावों पर प्रश्नचिन्ह खड़े कर रहा है। सरकार यूनिवर्सिटी ऑफ एक्सीलेंस की बात करती है, देश के शैक्षणिक संस्थानों को विश्वस्तर का बनाने के सपने दिखाती है लेकिन शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हमारे विश्वविद्यालय कैसे दुनिया भर के शानदार संस्थानों के साथ होड़ कर पाएंगे, इसका जवाब नहीं देती।

वैसे ये भी विडंबना ही है कि जिस देश में आए दिन हजारों युवा रोज़गार और नौकरी को लेकर सड़क पर प्रदर्शन कर रहे हो, वहां अकेले शिक्षा विभाग में इतने पद खाली हो और किसी को नौकरी न मिल रही हो, सरकार वैकेंसी ही न निकाल रही हो। जाहिर है सरकार पढ़ने वाले और पढ़ाने वाले दोनों के भविष्य से एक साथ खेलती नज़र आ रही है।   

University
VACANCIES
central university
Higher education

Related Stories

बच्चे नहीं, शिक्षकों का मूल्यांकन करें तो पता चलेगा शिक्षा का स्तर

डीयूः नियमित प्राचार्य न होने की स्थिति में भर्ती पर रोक; स्टाफ, शिक्षकों में नाराज़गी

बीएचयू: लाइब्रेरी के लिए छात्राओं का संघर्ष तेज़, ‘कर्फ्यू टाइमिंग’ हटाने की मांग

नई शिक्षा नीति का ख़ामियाज़ा पीढ़ियाँ भुगतेंगी - अंबर हबीब

बीएचयू: 21 घंटे खुलेगी साइबर लाइब्रेरी, छात्र आंदोलन की बड़ी लेकिन अधूरी जीत

शिक्षाविदों का कहना है कि यूजीसी का मसौदा ढांचा अनुसंधान के लिए विनाशकारी साबित होगा

शिक्षा बजट: डिजिटल डिवाइड से शिक्षा तक पहुँच, उसकी गुणवत्ता दूभर

शिक्षा बजट पर खर्च की ज़मीनी हक़ीक़त क्या है? 

विश्वविद्यालयों का भविष्य खतरे में, नयी हकीकत को स्वीकार करना होगा: रिपोर्ट

पुडुचेरी विवि में 2 साल पहले के प्रदर्शन में शामिल होने के लिए 11 छात्रों को सज़ा


बाकी खबरें

  • नदियों के संरक्षण के लिए ज़रूरी धन के प्रवाह में अब भी बड़ी बाधाएं
    भरत डोगरा
    नदियों के संरक्षण के लिए ज़रूरी धन के प्रवाह में अब भी बड़ी बाधाएं
    14 Sep 2021
    हर साल नदियों का प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। लेकिन नमामि गंगे जैसे बहुप्रचारित-प्रसारित परियोजनाओं के बावजूद, नदी संरक्षण के लिए आवंटन और ख़र्च में कमी बरक़रार है।
  • daily
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूपी चुनाव और योगी की सांप्रदायिकता, बंगाल के किसानों ने एमएसपी की मांग और अन्य ख़बरें
    13 Sep 2021
    न्यूज़क्लिक के डेली राउंडअप में आज हमारी नज़र रहेगी यूपी चुनाव से पहले योगी आदित्यनाथ का सांप्रदायिक खेल, बंगाल के किसानों की एमएसपी की मांग और अन्य ख़बरों पर।
  • महिला आरक्षण बिल के 25 साल पर कोई नतीजा नहीं
    न्यूज़क्लिक टीम
    महिला आरक्षण बिल के 25 साल पर कोई नतीजा नहीं
    13 Sep 2021
    देश की अनेक महिला संगठन कई सालों से 33 % महिला आरक्षण की मांग कर रही हैं पर 25 साल से अनेक सरकारें आयी और गयी पर बिल पर कोई फैसला नहीं हुआ है।
  • पंजाब विधानसभा चुनाव: परंपरागत सियासत पर सवाल खड़े करती जनता 
    शिव इंदर सिंह
    पंजाब विधानसभा चुनाव: परंपरागत सियासत पर सवाल खड़े करती जनता 
    13 Sep 2021
    “किसान आंदोलन पंजाब के लोगों के लिए सिर्फ़ आंदोलन नहीं है, बल्कि एक विश्वविद्यालय है जिसमें उन्होंने बहुत कुछ सीखा भी है और सीखे हुए को वे व्यवहारिक रूप देने की कोशिश भी कर रहे हैं।”
  • मेरठ: मौसेरी बहनों को समलैंगिक बता टीचर ने की पिटाई, स्कूल में घुमाकर किया अपमानित!
    ज़ाकिर अली त्यागी
    मेरठ: मौसेरी बहनों को समलैंगिक बता टीचर ने की पिटाई, स्कूल में घुमाकर किया अपमानित!
    13 Sep 2021
    मेरठ के एक गर्ल्स इंटर कॉलेज में दो बहनें एक साथ लंच कर रही थीं, आरोप है कि उनकी टीचर ने दोनों पर समलैंगिक संबंध बनाने का आरोप लगाकर पिटाई कर दी और कॉलेज परिसर में घुमाकर अपमानित किया।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License