NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
स्वास्थ्य
विज्ञान
राजनीति
SARS-CoV-2 संरचना की खोज ने एंटीवायरल दवा को संभव बनाया
चीनी शोधकर्ताओं के एक समूह ने वायरल एंजाइम की संरचना को सफलतापूर्वक डिकोड किया है जिसकी वजह से नोवेल कोरोना वायरस ज़िंदा रहता है।
संदीपन तालुकदार
18 Apr 2020
कोरोना वायरस

आणविक जीव विज्ञान (मॉलिक्यूलर बायोलॉजी) में संरचनाएं एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। प्रमुख प्रोटीन (एंजाइम) की क्रिया संरचनाओं पर निर्भर करती है। परिणामस्वरूप प्रोटीन विभिन्न एमीनो एसिड से बने होते हैं और एक विशेष प्रोटीन में एमीनो एसिड एक विशेष जीन द्वारा निर्देशित होते हैं। अपने परिपक्व और कार्यात्मक रूपों में प्रोटीन अपनी विशेष 3 डी संरचना बना लेते हैं। प्रोटीन की संरचना में परिवर्तन कई रोगजनक स्थितियों को जन्म दे सकता है, जिसे प्रोटिओपैथी के रूप में जाना जाता है।

जहां तक प्रोटीन की कार्यक्षमता का सवाल है यदि संरचना का खास महत्व है तो इसके विपरीत एक प्रमुख प्रोटीन की संरचना की विकृति जो एक रोगज़नक़ के अस्तित्व और गुणन के लिए आवश्यक है ऐसे में रोगज़नक़ की बहुलता को भी रोक सकती है। अन्यथा,इस तरह के प्रोटीन की संरचना को जानने से शोधकर्ताओं को इसे रोकने और इसे निष्क्रिय करने के लिए कुछ अणुओं (दवा) को विकसित करना पड़ सकता है।

COVID-19 महामारी के पीछे की वजह SARS-CoV-2 में भी इसके अस्तित्व के लिए ऐसे प्रमुख प्रोटीन हैं और इसकी संरचना को जानकर भविष्य में होने वाले मर्ज का इलाज तैयार किया जा सकता है। इस वायरस का एक ऐसा महत्वपूर्ण एंजाइम आरएनए पर निर्भर आरएनए पोलीमरेज़ (आरडीआरपी, जिसे एनएसपी 12 भी कहा जाता है) है। यह एंजाइम कोरोनावायरस के रिप्लिकेशन और ट्रांसक्रिप्सन के लिए महत्वपूर्ण है। दूसरे शब्दों में,एनएसपी12 की संरचना को जानने से यह समझने में मदद मिल सकती है कि दवा का अणु कैसा होना चाहिए।

एक कदम आगे बढ़ते हुए चीनी शोधकर्ताओं के एक समूह ने इसके अस्तित्व के लिए प्रमुख वायरल एंजाइम की संरचना को सफलतापूर्वक डिकोड किया है।

इस संरचना से पता चलता है कि एनएसपी12 की मुख्य संरचना अन्य वायरल पॉलिमर के समान है। इसके अलावा, एनएसपी12 के पास एक नया पहचाना गया क्षेत्र है जिसे बीटा हेयरपिन डोमेन के रूप में जाना जाता है। 10 अप्रैल को जर्नल साइंस में प्रकाशित अध्ययन में यह तथ्य भी शामिल है कि बहुप्रचारित एंटी वायरल रेमेडिसविर इस पॉलीमरेज़ से जुड़ सकता है।

इस अध्ययन में, वायरल पोलीमरेज़ के साथ, इसकी सह-कारक (को-फैक्टर) संरचनाएं भी निर्धारित की गईं। सह कारक गैर-प्रोटीन रासायनिक यौगिक या आयन हैं जो एक एंजाइम से चिपके रहते हैं और एंजाइम का उचित कार्य सुनिश्चित करते हैं। सह कारकों के साथ मिश्रित पोलीमरेज़ की समग्र संरचना SARS-CoV की संरचना के समान है।

नोवल कोरोनावायरस पर रेमडिसिविर का कार्य

रेमडिसिविर एक एंटी-वायरल दवा है जिसे मूल रूप से इबोला संक्रमण के इलाज के लिए विकसित किया गया था। यह एंटी-वायरल एजेंट वायरस के आरएनए-डिपेंडेंट आरएनए पोलीमरेज़ के साथ दखल के पश्चात कार्य करता है। यह इस तरह से दखल देता है कि वायरल आरएनए का उत्पादन कम हो जाता है, इस प्रकारभोजनदायी शरीर ( host’s body) के अंदर वायरस के प्रसार को अवरुद्ध करता है। साल 2015 में, यह पाया गया कि रेमडिसिविर ने प्री-क्लिनिकल परीक्षणों में रीसस बंदरों में इबोला वायरस को रोक दिया।

प्रमुख वायरल पोलीमरेज़ की संरचना का पता लगाने के साथ, चीनी शोधकर्ता यह भी पता लगाने में लगे हैं कि रेमडिसिविर नोवल कोरोनवायरस के पॉलीमरेज़ को कितना प्रभावी रूप से रोक सकता है और इसकी क्रिया को बाधित कर सकता है। पोलीमरेज़ के अवरोध का अर्थ है कि वायरल आरएनए के उत्पादन को कम करना और इस तरह इसे अवरुद्ध करना। उनके विश्लेषण से पता चला कि रेमडिसिविर पोलीमरेज़ का एक संभावित अवरोधक हो सकता है क्योंकि यह महत्वपूर्ण स्थिति में इसे रोक सकता है।

रेमडिसिविर के अलावा, अन्य संभावित ड्रग सैम्पल हो सकते हैं, उदाहरण के लिए फेविपिराविर, जो क्लिनिकल ट्रायल में प्रभावी साबित हुआ है। वायरल पोलीमरेज़ एनएसपी12 पर विचार की जाने वाली सभी चीजें भविष्य की चिकित्सा के लिए एक अच्छे लक्ष्य की तरह दिखते हैं और जैसा कि यह संरचना अब उपलब्ध है यह उम्मीद की जा सकती है कि इस तरह के एक चिकित्सा संबंधी या ड्रग एजेंट का विकास बहुत जल्द संभव हो सकता है। इसके अलावा, यह अध्ययन करने में मदद कर सकता है कि पहले से मौजूद दवा सैम्पल भोजनदायी शरीर के अंदर वायरस के प्रसार को रोकने में किसी भी तरह की मदद कर सकते हैं या नहीं।

अंग्रेज़ी में लिखे मूल आलेख को आप यहाँ पढ़ सकते हैं।

How Discovering the Structure of SARS-CoV-2 Makes Antiviral Drug Design Possible

RNA dependent RNA polymerase
Nsp12
remdesivir
Structure of RNA dependent RNA polymerase of COVID19 Virus
Favipiravir
COVID19
Coronavirus
Study on coronavirus
coronavirus structure

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में 2,745 नए मामले, 6 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में आज फिर कोरोना के मामलों में क़रीब 27 फीसदी की बढ़ोतरी

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के घटते मामलों के बीच बढ़ रहा ओमिक्रॉन के सब स्ट्रेन BA.4, BA.5 का ख़तरा 

कोरोना अपडेट: देश में ओमिक्रॉन वैरिएंट के सब स्ट्रेन BA.4 और BA.5 का एक-एक मामला सामने आया

कोरोना अपडेट: देश में फिर से हो रही कोरोना के मामले बढ़ोतरी 

कोविड-19 महामारी स्वास्थ्य देखभाल के क्षेत्र में दुनिया का नज़रिया नहीं बदल पाई

कोरोना अपडेट: अभी नहीं चौथी लहर की संभावना, फिर भी सावधानी बरतने की ज़रूरत

कोरोना अपडेट: दुनियाभर के कई देशों में अब भी क़हर बरपा रहा कोरोना 

कोरोना अपडेट: देश में एक्टिव मामलों की संख्या 20 हज़ार के क़रीब पहुंची 

देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, PM मोदी आज मुख्यमंत्रियों संग लेंगे बैठक


बाकी खबरें

  • LAW AND LIFE
    सत्यम श्रीवास्तव
    मानवाधिकारों और न्याय-व्यवस्था का मखौल उड़ाता उत्तर प्रदेश : मानवाधिकार समूहों की संयुक्त रिपोर्ट
    30 Oct 2021
    29 अक्तूबर को जारी हुई एक रिपोर्ट ‘कानून और ज़िंदगियों की संस्थागत मौत: उत्तर प्रदेश में पुलिस द्वारा हत्याएं और उन्हें छिपाने की साजिशें’ हमें उत्तर प्रदेश में मौजूदा कानून व्यवस्था के हालात को बेहद…
  • migrant
    सोनिया यादव
    महामारी का दर्द: साल 2020 में दिहाड़ी मज़दूरों ने  की सबसे ज़्यादा आत्महत्या
    30 Oct 2021
    एनसीआरबी के आँकड़ों के मुताबिक़ पिछले साल भारत में तकरीबन 1 लाख 53 हज़ार लोगों ने आत्महत्या की, जिसमें से सबसे ज़्यादा तकरीबन 37 हज़ार दिहाड़ी मजदूर थे।
  • UP
    लाल बहादुर सिंह
    आंदोलन की ताकतें व वाम-लोकतांत्रिक शक्तियां ही भाजपा-विरोधी मोर्चेबन्दी को विश्वसनीय विकल्प बना सकती है, जाति-गठजोड़ नहीं
    30 Oct 2021
    पिछले 3 चुनावों का अनुभव गवाह है कि महज जातियों के जोड़ गणित से भाजपा का बाल भी बांका नहीं हुआ, इतिहास साक्षी है कि जोड़-तोड़ से सरकार बदल भी जाय तो जनता के जीवन में तो कोई बड़ी तब्दीली नहीं ही आती, संकट…
  • Children playing in front of the Dhepagudi UP school in their village in Muniguda
    राखी घोष
    ओडिशा: रिपोर्ट के मुताबिक, स्कूल बंद होने से ग्रामीण क्षेत्रों में निम्न-आय वाले परिवारों के बच्चे सबसे अधिक प्रभावित
    30 Oct 2021
    रिपोर्ट इस तथ्य का खुलासा करती है कि जब अगस्त 2021 में सर्वेक्षण किया गया था तो ग्रामीण क्षेत्रों में केवल 28% बच्चे ही नियमित तौर पर पठन-पाठन कर रहे थे, जबकि 37% बच्चों ने अध्ययन बंद कर दिया था।…
  • climate change
    संदीपन तालुकदार
    जलवायु परिवर्तन रिपोर्ट : अमीर देशों ने नहीं की ग़रीब देशों की मदद, विस्थापन रोकने पर किये करोड़ों ख़र्च
    30 Oct 2021
    रिपोर्ट के अनुसार, विकसित देश भारी हथियारों से लैस एजेंटों को तैनात करके, परिष्कृत और महंगी निगरानी प्रणाली, मानव रहित हवाई प्रणाली आदि विकसित करके पलायन को रोकने के लिए एक ''जलवायु दीवार'' का…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License