'हमसे है ज़माना' के एपिसोड में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह बता रही हैं कि किस तरह से नफ़रत और कोरोना ख़ौफ़ के बीच इंसानियत को ज़िंदा रखने का काम चल रहा है। कोरोना लॉकडॉउन से प्रभावित होने वाले भारतीयों की मदद के लिए आम नागरिक सामने आए हैं, सिविल सोसायटी आगे आई है।
'हमसे है ज़माना' के एपिसोड में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह बता रही हैं कि किस तरह से नफ़रत और कोरोना ख़ौफ़ के बीच इंसानियत को ज़िंदा रखने का काम चल रहा है। कोरोना लॉकडॉउन से प्रभावित होने वाले भारतीयों की मदद के लिए आम नागरिक सामने आए हैं, सिविल सोसायटी आगे आई है। लोग घरों में कढ़ी चावल, पूड़ी सब्जी, चावल आदि बना कर ज़रूरतमंदों में बांट रहे हैं। ऐसा पूरे भारत में हो रहा है और पूरी दुनिया में भी। यही सबसे बड़ी आशा की किरन है, जो इंसानियत और मानवता को बचाये हुए है।
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