NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अर्थव्यवस्था
IL&FS संकट : 'हज़ारों करोड़ की पीएफ राशि पर ख़तरा'
सीटू के महासचिव तपन सेन ने केंद्रीय श्रम मंत्री को पत्र लिखकर आईएल एंड एफएस से जुड़े ईपीएफ फंड के निवेश ऋण जोखिम का विवरण साझा करने का आग्रह किया है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
15 Feb 2019
IL&FS

भविष्य निधि और पेंशन फंड ट्रस्ट जिन्होंने सामूहिक रूप से संकटग्रस्त इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनांसिंग कंपनी आईएल एंड एफएस के बॉन्ड में हज़ारों करोड़ का निवेश किया है। इसने अब राष्ट्रीय कंपनी क़ानून अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) में याचिकाएं दायर कर हस्तक्षेप किया है। इसे डर है कि यह अपने पैसा गंवा देगी क्योंकि ये बांड असुरक्षित ऋण के अधीन आ गया है।

जोख़िम की सटीक राशि ज्ञात नहीं है क्योंकि इनमें से कई व्यापारिक साधन हैं। हालांकि निवेश करने वाले बैंकरों का अनुमान है कि ये हज़ारों करोड़ रुपए हो सकता है चूंकि 'ट्रिपल ए' रेट वाली इस बुनियादी ढांचा कंपनी के बांड को सेवानिवृत्ति फंडों द्वारा प्राथमिकता दी गई थी जो कम जोखिम वाली प्रवृत्ति है लेकिन फिर भी ब्याज दर कम होने पर भी आश्वस्त रिटर्न प्राप्त करना है।

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों जैसे एमएमटीसी, इंडियन ऑयल, सिडको, हुडको, आईडीबीआई, एसबीआई और गुजरात और हिमाचल प्रदेश के बिजली बोर्डों के कर्मचारियों के एक्जेम्‌पेड ट्रस्ट मैनेजिंग फंड उनमें से एक हैं जिन्होंने याचिका दायर की है। हिंदुस्तान यूनिलीवर और एशियन पेंट्स जैसी निजी कंपनियों के पीएफ भी शामिल हैं।

अपने आवेदनों में इन फंडों ने खुद रिज़ॉल्यूशन प्रक्रिया पर चिंता ज़ाहिर की है। इस प्रक्रिया में इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड की धारा 53 भी शामिल है जो प्रक्रिया के आय के वितरण की प्राथमिकता के क्रम को बताती है।

इस रिपोर्ट के अनुसार “पीएफ दाखिल करने की याचिकाओं की संख्या बढ़ने की संभावना है क्योंकि आवेदन करने के लिए उनके पास 12 मार्च तक का समय है। अब तक 50 से अधिक निधियों, 14 लाख से अधिक कर्मचारियों के मैनेजिंग रिटायरमेंट बेनिफिट्स को आईएल एंड एफएस के लिए ऋण जोखिम को माना जाता है। जब आईएल एंड एफएस के प्रवक्ता शरद गोयल से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि कंपनी इस मुद्दे पर कोई टिप्पणी नहीं करेगी।”

निवेशकों के लिए चिंता का कारण जो है वह ये कि आईएल एंड एफएस ने अपनी समूह की कंपनियों को हरा, अम्बर और लाल के तीन-स्तर में वर्गीकृत किया है।

आईएल एंड एफएस ने कहा है कि समूह की 302 संस्थाओं में से 169 भारतीय कंपनियां हैं और इनमें से केवल 22 को ही उनके सभी शर्तों (हरा) को पूरा करने की स्थिति में होने की पहचान की गई है। अन्य 10 कंपनियां अपने सुरक्षित लेनदारों (अंबर) को पुनः चुका सकती हैं और 38 कंपनियां परेशान हैं और अपने शर्तों (लाल) को पूरा नहीं कर सकती हैं जबकि अन्य 100 कंपनियों का अभी आकलन किया जा रहा है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में कहा गया है कि "अगर भुगतान सुरक्षित लेनदारों तक ही सीमित है तो केवल बैंक ही अपना बकाया प्राप्त करेंगे जबकि असुरक्षित बॉन्डधारकों को असहाय स्थिति में छोड़ दिया जाएगा।"

आईएल एंड एफएस पीएफ के बीच पसंदीदा रहा है क्योंकि देखा गया था कि इस कंपनी को सार्वजनिक क्षेत्र द्वारा समर्थन किया जा रहा था। इस कंपनी को भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) और भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) जैसे दिग्गजों द्वारा सहायता किया गया था। इसके अलावा इस कंपनी ने पीएफ की आवश्यकताओं के अनुरूप बॉन्ड का निर्माण किया।

कुछ लोगों का मानना है कि ये रिजॉल्यूशन ऐसे समय में हो रहा जब लोकसभा चुनाव काफी नज़दीक है और पीएफ जो कि श्रमिकों की गाढ़ी कमाई हुई रक़म है ऐसे में राजनीतिक रंग ले सकता है।

सीटू ने श्रम मंत्री को लिखा पत्र

इस बीच राज्यसभा सांसद और भारतीय व्यापार संघ (सीटू) के महासचिव तपन सेन ने श्रम मंत्री संतोष गंगवार को पत्र लिखकर मीडिया रिपोर्ट पर उनका ध्यान खींचा है। सेन ने कहा कि आईएल एंड एफएस समूह में पारंपरिक बांड में निवेश किए गए कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) के हजारों करोड़ रुपये का नुकसान होने के कगार पर है क्योंकि इस समूह की कंपनियां दिवालिया होने की दहलीज पर हैं और इनसॉल्वेंसी बैंकरप्सी कोड एक्ट (आईबीसी) की धारा 53 के तहत नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) में समाधान प्रक्रियाओं से गुज़र रही हैं।

इस रिपोर्ट का हवाला देते हुए सेन ने कहा कि पीएसयू और निजी क्षेत्र की कई दिग्गजों कंपनियों के 50 ईपीएफ निधियों से अधिक ईपीएफ के तहत सेवानिवृत्ति के बाद की बचत और लाभ में शामिल हैं। इन कंपनियों के आईएलएंड एफएस में अपने ऋण जोखिम के बाद 15 लाख से अधिक कर्मचारियों पर ख़तरा बना हुआ है।

पत्र में लिखा गया है, “कृपया ध्यान दीजिए ईपीएफओ के केंद्रीय न्यासी बोर्ड (सीबीटी) में श्रमिकों के प्रतिनिधि किसी भी अव्यवहार्य व्यापार योग्य साधनों में ईपीएफ फंड के निवेश का लगातार विरोध करते रहे हैं लेकिन भारत सरकार ने श्रमिकों के प्रतिनिधियों के सर्वसम्मत विरोध को दबा दिया और अव्यवहार्य साधनों में निवेश के लिए ईपीएफ फंड का एक हिस्सा चैनलाइज किया। अब आप परिणाम देखेंगे क्योंकि प्रभावित प्रतिष्ठानों के संबंधित कर्मचारियों और श्रमिकों के ईपीएफ में नौकरी की बचत को लेकर कोई चर्चा नहीं करता है।"

सीटू ने कहा कि केंद्र सरकार को उन कर्मचारियों/प्रतिष्ठानों की ईपीएफ बचत की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी लेनी चाहिए जिन्हें पहले से ही ब्याज के साथ आईएल एंड एफएस समूह के ऋण जोखिम में आने के कारण उनके नुकसान का ख़तरा बना हुआ है।

सेन ने गंगवार से आईएलएफ और एफएस बांड के साथ ईपीएफ निधियों के निवेश जोखिम का विवरण साझा करने का भी आग्रह किया है। उन्होंने केंद्रीय भविष्य निधि आयोग के तहत और इकाई वार रियायती प्रतिष्ठानों के तहत निधियों को साझा करने का आग्रह किया है "ताकि वास्तविक स्थिति का पता लगाया जा सके और निष्पक्षता, पारदर्शिता और स्वामित्व के हित में पारदर्शी तरीके से निपटा जा सके।"

IL&FS
EPF
MMTC
TOI
indian oil
SBI
IDBI
CITU
Tapan Sen
HUDCO

Related Stories

मुंडका अग्निकांड: 'दोषी मालिक, अधिकारियों को सजा दो'

मुंडका अग्निकांड: ट्रेड यूनियनों का दिल्ली में प्रदर्शन, CM केजरीवाल से की मुआवज़ा बढ़ाने की मांग

झारखंड-बिहार : महंगाई के ख़िलाफ़ सभी वाम दलों ने शुरू किया अभियान

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

मुंडका अग्निकांड: सरकारी लापरवाही का आरोप लगाते हुए ट्रेड यूनियनों ने डिप्टी सीएम सिसोदिया के इस्तीफे की मांग उठाई

मुंडका अग्निकांड: लापता लोगों के परिजन अनिश्चतता से व्याकुल, अपनों की तलाश में भटक रहे हैं दर-बदर

तमिलनाडु: छोटे बागानों के श्रमिकों को न्यूनतम मज़दूरी और कल्याणकारी योजनाओं से वंचित रखा जा रहा है

LIC के कर्मचारी 4 मई को एलआईसी-आईपीओ के ख़िलाफ़ करेंगे विरोध प्रदर्शन, बंद रखेंगे 2 घंटे काम

रोहतक : मारुति सुज़ुकी के केंद्र में लगी आग, दो कर्मियों की मौत

सार्वजनिक संपदा को बचाने के लिए पूर्वांचल में दूसरे दिन भी सड़क पर उतरे श्रमिक और बैंक-बीमा कर्मचारी


बाकी खबरें

  • एसकेएम की केंद्र को चेतावनी : 31 जनवरी तक वादें पूरे नहीं हुए तो 1 फरवरी से ‘मिशन उत्तर प्रदेश’
    मुकुंद झा
    एसकेएम की केंद्र को चेतावनी : 31 जनवरी तक वादें पूरे नहीं हुए तो 1 फरवरी से ‘मिशन उत्तर प्रदेश’
    16 Jan 2022
    संयुक्त किसान मोर्चा के फ़ैसले- 31 जनवरी को देशभर में किसान मनाएंगे "विश्वासघात दिवस"। लखीमपुर खीरी मामले में लगाया जाएगा पक्का मोर्चा। मज़दूर आंदोलन के साथ एकजुटता। 23-24 फरवरी की हड़ताल का समर्थन।
  • cm yogi dalit
    रवि शंकर दुबे
    यूपी चुनाव और दलित: फिर पकाई और खाई जाने लगी सियासी खिचड़ी
    16 Jan 2022
    चुनाव आते ही दलित समुदाय राजनीतिक दलों के लिए अहम हो जाता है। इस बार भी कुछ ऐसा ही हो रहा है। उनके साथ बैठकर खाना खाने की राजनीति भी शुरू हो गई है। अब देखना होगा कि दलित वोटर अपनी पसंद किसे बनाते हैं…
  • modi
    अनिल जैन
    ख़बरों के आगे-पीछे : झुकती है सरकार, बस चुनाव आना चाहिए
    16 Jan 2022
    बीते एक-दो सप्ताह में हो सकता है आपसे कुछ ज़रूरी ख़बरें छूट गई हों जो आपको जाननी चाहिए और सिर्फ़ ख़बरें ही नहीं उनका आगा-पीछा भी मतलब ख़बर के भीतर की असल ख़बर। वरिष्ठ पत्रकार अनिल जैन आपको वही बता  …
  • Tribute to Kamal Khan
    असद रिज़वी
    कमाल ख़ान : हमीं सो गए दास्तां कहते कहते
    16 Jan 2022
    पत्रकार कमाल ख़ान का जाना पत्रकारिता के लिए एक बड़ा नुक़सान है। हालांकि वे जाते जाते भी अपनी आंखें दान कर गए हैं, ताकि कोई और उनकी तरह इस दुनिया को देख सके, समझ सके और हो सके तो सलीके से समझा सके।…
  • hafte ki baat
    न्यूज़क्लिक टीम
    योगी गोरखपुर में, आजाद-अखिलेश अलगाव और चन्नी-सिद्धू का दुराव
    15 Jan 2022
    मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ के अयोध्या से विधानसभा चुनाव लडने की बात पार्टी में पक्की हो गयी थी. लेकिन अब वह गोरखपुर से चुनाव लडेंगे. पार्टी ने राय पलट क्यों दी? दलित नेता चंद्रशेखर आजाद की पार्टी अब…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License