NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अर्थव्यवस्था
इन्वेस्टमेंट सम्मिट्स: बने-ठने तो ख़ूब, मगर जइयो कहाँ ए हुजूर!
पिछले रिकॉर्ड उठाकर देखने से पता चल जाता है कि इन सम्मिट्स से कुछ नहीं होता- और इसके पीछे ठोस वजह भी हैंI
सुबोध वर्मा
24 Feb 2018
Translated by सोनाली
investment submmits
Newsclick Image by Nitesh Kumar

एक हज़ार एक अरेबियन नाइट्स की कहानियों में एक मशहूर कहानी बर्मकिद राजवंश के राजकुमार की थी जो एक भूखे आदमी को चिढ़ाने भर के लिए उसे दावत का न्यौता देता है I जबकि दस्तरखान पर कुछ भी पेश नहीं किया जाता, लेकिन राजकुमार सिलसिलेवार तौर पर नये-नये पकवान पेश करवाने का नाटक करता है, उनके बर्तनों और ज़ायके का बखान करता रहता है I साथ ही खाना खाने का नाटक करते हुए उस भूखे इंसान को भी बिस्मिलाह करने को कहता रहता हैI

आजकल हम भारत में भी कुछ ऐसा ही होते देख रहे हैंI मैग्नेटिक महाराष्ट्र, यूपी इन्वेस्टर्स समिट (“पावरिंग ए न्यू इंडिया”), बंगाल ग्लोबल बिज़नस समिट, एपी पार्टनरशिप समिट, ओडिशा स्टार्टअप समिट जैसे बड़े-बड़े आयोजनों ने हाल-फिलहाल में काफी सुर्खियाँ बटोरी हैंI प्रधानमंत्री मोदी और विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों की मौजूदगी में देश के आला कॉर्पोरेट इन्वेस्टमेंट के लक्ष्य- नये रोज़गार पैदा करने के- दावे करते थक नहीं रहे थेI यहाँ जुमलों की भरमार थी, राजनीतिक ताकतों के सदके में क़सीदे पढ़े गये, और ज़ाहिर है कि उजले भविष्य के वायदे उछाले गयेI

मैग्नेटिक महाराष्ट्र (19-20 फ़रवरी) के दौरान उद्योगपतियों ने 16 लाख करोड़ रूपये की इन्वेस्टमेंट का वायदा किया और 36.77 लाख रोज़गार देने का भीI यूपी समिट (21-22 फ़रवरी) में 4.28 लाख करोड़ रूपये की इन्वेस्टमेंट और 40 लाख नौकरियों का वायदा किया गयाI इससे पहले बंगाल ग्लोबल बिज़नस समिट (16-17 जनवरी) में 22 लाख करोड़ रूपये की इन्वेस्टमेंट और 20 लाख नौकरियों के सुनहरे ख़वाब दिखाए गये थेI एपी समिट (24-26 फ़रवरी) से पहले ही 2.26 लाख करोड़ रूपये उगाही का दावा पेश हैI पिछले साल हमनें रिसर्जेंट राजस्थान और हप्पेनिंग हरियाणा जैसे समिट देखे थे, और मोमेंटम झारखण्ड को हम कैसे भूल सकते हैंI 

बीजेपी ने जब से कई राज्यो में सरकारें बनायी हैं तब से ही यह मोदी का गुजरात मॉडल बाकि राज्यों में लागू किया जाने लगा हैI याद रखना चाहिए कि इस रिवायत की शुरुआत गुजरात से ही हुई थी, जहाँ  साल 2003 से एक के बाद एक आठ वाइब्रेंट गुजरात समिट हुएI 2017 के आखिरी समिट में तो 30 लाख करोड़ रूपये तक के वायदे किये गयेI

आखिर इस सबसे बर्मकिद के दस्तरखान की याद क्यों आती है? क्योंकि देखने से तो लगता है कि ज़्यादातर राज्यों में इन इन्वेस्टमेंट के ‘प्रस्ताव’ और ‘इच्छा’ की नैया कुछ पल तैरीं और डूब गयींI पिछले साल आये एक अध्ययन से चौंकाने वाले आँकड़े सामने आये हैं कि जितनी इच्छाएँ ज़ाहिर की गयीं उसके अनुपात में प्रोजेक्ट पूरे नहीं हुएI

इन्वेस्टमेंट समिट

अगर गौर से सोचें तो यह कोई चौंकाने वाली स्थिति नहीं हैI यह इन्वेस्टमेंट के भव्य पंडाल दरअसल आँखों का धोखा भर है और कुछ नहीं- सिर्फ दूसरों का दिल खुश करने के लिए होने वाले करतबI सत्ताधारी पार्टी अपने राज्य के लोगों को रोज़गार के वायदों से खुश करने की फिराक़ में रहती हैI पार्टी की राज्य इकाईयाँ कॉर्पोरेट हुक्मरानों को अपने राज्य के सस्ते श्रमिक, सस्ते संसाधन, सस्ती ज़मीनों, टैक्स की कम दरों और शायद ढीले आयोगों वगरह से लुभाने की फिराक़ में रहती हैंI कॉर्पोरेट सरमाया अपनी वाक्पटुता व आँकड़ों से प्रधानमंत्री, मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों को लुभाने की फिराक़ में रहते हैंI पर्दे के पीछे सब एक-दूसरे से तिगड़म भिड़ाने की फिराक़ में रहते हैं क्योंकि बिज़नस तो भैया ऐसे ही होता हैI इस सबके बीच बिज़नस घराने अपने फायदे के लिए सरकार को जितना हो सके उतना चूस लेने की फिराक़ में रहते हैंI

हाल में हुए तमाम समिट से तो ऐसा लगता है कि देश में दीवानगी तारी होने को हैI मैग्नेटिक महाराष्ट्र समिट में वर्जिन हाइपरलूप ने असल में राज्य सरकार को मुंबई और पुणे के बीच एक हाइपरलूप के निर्माण के लिए क़रार पर राज़ी कर लिया हैI इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि इस तकनीक को दुनिया में कहीं भी टेस्ट नहीं किया गया हैI लेकिन इसके लिए पहले से ही सब हिसाब-किताब पक्का कर लिया गया: इससे तथाकथित तौर पर 4 घंटों का सफ़र 25 मिनट में पूरा कर लिया जायेगा, 1.50 करोड़ यात्री इसका इस्तेमाल करेंगे, 3,50,000 करोड़ रुपयों की बचत होगी!    

लेकिन इन खयाली पुलावों से निकलकर असल आँकड़ों पर नज़र डालते हैंI RBI के मुताबिक मई 2016 से दिसम्बर 2017 के बीच औद्योगिक उत्पाद के इंडेक्स में सिर्फ 7.24% की धीमी दर से ही बढ़ाI इसका मतलब सालाना यह दर 4.5% ही थीI जून 2014 से अक्टूबर 2017 के बीच उद्योगों को दिए जाने वाले कर्ज़ में सिर्फ 3.6% की बढ़ोत्तरी हुईI मतलब सालाना दर बस 1%! सही बात तो यह है कि पिछले कुछ महीनों में उद्योगों को बैंकों द्वारा दिए जाने वाले कर्ज़ में कमी आई हैI CSO के हिसाब से ग्रोस कैपिटल फार्मेशन की दर 2014-15 में 10.2% के मुकाबले 2015-16 में 6.3% और 2016-17 में 5.2% ही रह गयीI CMIE के मुताबिक बेरोज़गारी 5.7% से भी ज़्यादा है I इसकी मुख्य वजह है कि नयी इन्वेस्टमेंट में कोई बढ़त नहीं हो रही जिससे नये रोज़गार भी नहीं पैदा हो रहेI दूसरी तरफ आईटी जैसे कई क्षेत्रों में लोगों को नौकरी से निकाला जा रहा हैI

असल बात यही है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में माँग घटती ही जा रही हैI यही वजह है उद्योगों से जुड़े इन दुखदायी आँकड़ों कीI बड़े तिज़ारेदारों के खोखले वायदों से माँग नहीं बढ़ेगीI इसलिए ये तमाम समिट बस अथाह सहरा है और कुछ नहीं!

इन्वेस्टमेंट समिट
मोदी सरकार
कॉर्पोरेट जगत
वाइब्रेंट गुजरात
गुजरात मॉडल

Related Stories

बड़ी फार्मा कंपनियों का असली चेहरा: अधिकतम आय, न्यूनतम ज़वाबदेही

किसान आंदोलन के नौ महीने: भाजपा के दुष्प्रचार पर भारी पड़े नौजवान लड़के-लड़कियां

सत्ता का मन्त्र: बाँटो और नफ़रत फैलाओ!

जी.डी.पी. बढ़ोतरी दर: एक काँटों का ताज

5 सितम्बर मज़दूर-किसान रैली: सबको काम दो!

रोज़गार में तेज़ गिरावट जारी है

लातेहार लिंचिंगः राजनीतिक संबंध, पुलिसिया लापरवाही और तथ्य छिपाने की एक दुखद दास्तां

माब लिंचिंगः पूरे समाज को अमानवीय और बर्बर बनाती है

अविश्वास प्रस्ताव: दो बड़े सवालों पर फँसी सरकार!

क्यों बिफरी मोदी सरकार राफेल सौदे के नाम पर?


बाकी खबरें

  • yogi
    एम.ओबैद
    सीएम योगी अपने कार्यकाल में हुई हिंसा की घटनाओं को भूल गए!
    05 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज गोरखपुर में एक बार फिर कहा कि पिछली सरकारों ने राज्य में दंगा और पलायन कराया है। लेकिन वे अपने कार्यकाल में हुए हिंसा को भूल जाते हैं।
  • Goa election
    न्यूज़क्लिक टीम
    गोवा चुनाव: राज्य में क्या है खनन का मुद्दा और ये क्यों महत्वपूर्ण है?
    05 Feb 2022
    गोवा में खनन एक प्रमुख मुद्दा है। सभी पार्टियां कह रही हैं कि अगर वो सत्ता में आती हैं तो माइनिंग शुरु कराएंगे। लेकिन कैसे कराएंगे, इसका ब्लू प्रिंट किसी के पास नहीं है। क्योंकि, खनन सुप्रीम कोर्ट के…
  • ajay mishra teni
    भाषा
    लखीमपुर घटना में मारे गए किसान के बेटे ने टेनी के ख़िलाफ़ लोकसभा चुनाव लड़ने का इरादा जताया
    05 Feb 2022
    जगदीप सिंह ने दावा किया कि समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस ने उन्हें लखीमपुर खीरी की धौरहरा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की पेशकश की थी, लेकिन उन्होंने यह कहते हुए मना कर दिया कि वे 2024 के लोकसभा…
  • up elections
    भाषा
    उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव पहला चरण: 15 निरक्षर, 125 उम्मीदवार आठवीं तक पढ़े
    05 Feb 2022
    239 उम्मीदवारों (39 प्रतिशत) ने अपनी शैक्षणिक योग्यता कक्षा पांच और 12वीं के बीच घोषित की है, जबकि 304 उम्मीदवारों (49 प्रतिशत) ने स्नातक या उससे ऊपर की शैक्षणिक योग्यता घोषित की है।
  • election
    न्यूज़क्लिक टीम
    "चुनाव से पहले की अंदरूनी लड़ाई से कांग्रेस को नुकसान" - राजनीतिक विशेषज्ञ जगरूप सिंह
    05 Feb 2022
    पंजाब में चुनाव से पहले मुख्यमंत्री पद के दावेदार की घोषणा करना राहुल गाँधी का गलत राजनीतिक निर्णय था। न्यूज़क्लिक के साथ एक खास बातचीत में राजनीतिक विशेषज्ञ जगरूप सिंह ने कहा कि अब तक जो मुकाबला…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License