NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
विज्ञान
भारत
राजनीति
इंडियन साइंस कांग्रेस : विज्ञान का मज़ाक!
ऑल इंडिया पीपुल्स साइंस नेटवर्क ने मांग की है कि राष्ट्रपति, पीएमओ के वैज्ञानिक सलाहकार, तीन भारतीय विज्ञान अकादमी और भारतीय विज्ञान कांग्रेस एसोसिएशन फर्जी विज्ञान और तर्कहीनता फैलाने के लिए 2014 से इंडियन साइंस कांग्रेस के निरंतर दुरुपयोग को समाप्त करने के लिए कदम उठाएं।
संदीपन तालुकदार
08 Jan 2019
protest
Image Courtesy : Scroll.in

भारतीय पौराणिक कथाओं के बारे में वैज्ञानिक धारणाओं की गलत व्याख्या भारतीय विज्ञान कांग्रेस (आईएससी) में काफी समय से एक नियम बन गया है। वैज्ञानिक विचार, खोज और वैज्ञानिक प्रवृत्ति को पीछे की तरफ धकेला जा रहा है। इस वर्ष का आईएससी भी इससे कोई अछूता नहीं है। आईएससी में एक एक्टिंग वाइस चांसलर के व्याख्यान सहित दो व्याख्यानों ने इस देश के विज्ञान समाज में विवादों को जन्म दे दिया है।

आंध्र विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर और अकार्बनिक रसायन विज्ञान के प्रोफेसर जी नागेश्वर राव ने दावा किया कि भारतीय पौराणिक महाकाव्य महाभारत के कौरव स्टेम सेल शोध तथा टेस्ट ट्यूब निषेचन प्रक्रिया से पैदा हुए थे। राव ने कहा, “यह हजारों साल पहले हुआ था। इस देश में यह विज्ञान था। महाभारत के अनुसार, 100 अंडे निषेचित किए गए थे और 100 मिट्टी के बर्तन में रखे गए थे। क्या वे टेस्ट ट्यूब बेबी नहीं हैं? इस देश में स्टेम सेल शोध हजारों साल पहले मौजूद था।”

वह यहीं नहीं रुकते बल्कि इससे आगे कहते हैं कि रामायण के पात्र रावण के पास 24 विभिन्न प्रकार के विमान थे और उस समय श्रीलंका में हवाई अड्डे भी थे। विकास को लेकर भी उनके सिद्धांत थे जहां उन्होंने डार्विनियन सिद्धांत को चुनौती दी और दावा किया कि भगवान विष्णु के दस अवतार "दशावतार" विकास को समझाने में काफी योग्य थे। राव ने ये बयान एक ऐसे सत्र में दिया जिसमें ज्यादातर बच्चे शामिल थे।

इसी सत्र में एक अन्य वैज्ञानिक के जे कृष्णन ने आइंस्टीन और न्यूटन के सिद्धांतों की व्याख्या की। उन्होंने कहा की कि न्यूटन और आइंस्टीन को भौतिकी के बारे में कम जानकारी थी और उन्होंने अपने सिद्धांतों से दुनिया को गुमराह किया। उन्होंने गुरुत्वाकर्षण घटना के अपने सिद्धांत का दावा किया और कहा कि भविष्य में यह अधिक प्रासंगिक साबित होगा और जब इसे स्वीकार कर लिया जाएगा तो दुनिया अब जिसे गुरुत्वाकर्षणीय तरंगों के रूप में जानती है उसे "नरेंद्र मोदी तरंग" के रूप में जाना जाएगा और गुरुत्वाकर्षणीय लेंसिंग "हर्षवर्धन प्रभाव” के रूप में जाना जाएगा।

आईएससी 2019 में दिए गए अवैज्ञानिक बयानों के खिलाफ आईआईएससी बैंगलोर के समक्ष विरोध प्रदर्शन

इन बयानों को लेकर विज्ञान समाज के लोगों ने अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं और विरोध किया है। रविवार को आईटी पेशेवर, छात्र, शिक्षक और वैज्ञानिक आईएससी में किए गए अवैज्ञानिक दावों का विरोध करने के लिए बैंगलोर में आईआईएससी के मुख्य द्वार के सामने इकट्ठा हुए। इस विरोध प्रदर्शन का आयोजन ब्रेकथ्रू साइंस सोसाइटी, ऑल इंडिया पीपुल्स साइंस नेटवर्क, अखिला कर्नाटक विचारावदिगला वेदिक और अन्य संगठनों द्वारा संयुक्त रूप से किया गया था।

Breakthrough Science Society.jpg

Image Source: News minute

इस विरोध प्रदर्शन के दौरान लोग अपने हाथों में तख्ती लिए हुए थें जिस पर अंग्रेजी में कुछ वाक्य लिखे थे जिसका हिंदी अनुवाद है "भारत में विज्ञान को बदनाम मत करो", "विज्ञान के नाम पर अवैज्ञानिक विचारों को फैलाना बंद करो", "भारत में विज्ञान का बचाव करनी ही सही देशभक्ति है" आदि। प्रदर्शनकारियों ने आईएससी में दिए गए तर्कहीन बयानों की निंदा की। इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाले लोगों में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स के प्रोफेसर जयंत मूर्ति और ब्रेकथ्रू साइंस सोसायटी के प्रदेश अध्यक्ष सतीश कुमार शामिल थे।

विज्ञान और वैज्ञानिक प्रकृति के प्रचार में सक्रिय संगठन ब्रेकथ्रू साइंस सोसाइटी ने कहा कि युवाओं के सामने प्राचीन भारत के बारे में किए गए "चौंकाने वाले दावे" काफी परेशान करने वाले थे। संगठन ने एक बयान में कहा, "पौराणिक पद्य और महाकाव्य कविता संबंधी, आनंददायक, नैतिक तत्व वाले और कल्पना में समृद्ध हैं लेकिन वैज्ञानिक रूप से मान्य नहीं हैं।"

ऑल इंडिया पीपुल्स साइंस नेटवर्क ने अपने प्रेस वक्तव्य में मांग की है कि राष्ट्रपति, पीएमओ के वैज्ञानिक सलाहकार, तीन भारतीय विज्ञान अकादमी और भारतीय विज्ञान कांग्रेस एसोसिएशन फर्जी विज्ञान और तर्कहीनता फैलाने के लिए 2014 से इंडियन साइंस कांग्रेस के निरंतर दुरुपयोग को समाप्त करने के लिए कदम उठाएं।

इस प्रेस वक्तव्य में यह भी कहा गया कि "वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री द्वारा भारतीय विज्ञान कांग्रेस में किए गए दावे (गणेश प्लास्टिक सर्जरी के प्रतीक हैं), वर्ष 2018 में विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. हर्षवर्धन (स्टीफन हॉकिंग को उद्धृत करते हुए कहा कि मास एनर्जी इक्वीवैलेंस का संबंध वेदों से है) और अन्य आमंत्रित वक्ता (वर्ष 2015 में आनंद बोडास ने कहा प्राचीन भारत में विमान परिचालन होता था; वर्ष 2016 में पांडे ने पर्यावरणविद् के रूप में शिव को बताया, शर्मा ने कहा शंख बजाने से स्वास्थ्य लाभ मिलता है) के दावे वैज्ञानिक प्रकृति को विकसित करने की आवश्यकता के संबंधन में संविधान के निर्देशित सिद्धांतों की भावना के ख़िलाफ़ हैं। इसके अलावा भारतीय विज्ञान कांग्रेस का निर्दिष्ट विचार "आम लोगों के बीच वैज्ञानिक प्रकृति को बढ़ाना" है।”

प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार का कहना है कि आईएससी के एजेंडे को तय करने में सरकार की कोई भूमिका नहीं है :

सरकार के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार के विजय राघवन ने कहा कि सरकार आईएससी के वक्ताओं या उसके एजेंडा को तय करने में कोई भूमिका नहीं निभाती है। उन्होंने कहा, "इंडियन साइंस कांग्रेस एसोसिएशन (आईएससीए) के पास फ़िल्टर करने का यंत्र नहीं है और सरकार की "इस मामले में कोई भूमिका नहीं है।"

हालांकि राघवन ने जी नागेश्वर राव की आलोचना की और कहा कि स्टेम सेल शोध और कौरवों के बारे में उनके दावे "वैज्ञानिक रूप से अपुष्ट हैं"। राघवन ने यह भी कहा कि आंध्र विश्वविद्यालय के चांसलर को वीसी राव के खिलाफ औपचारिक रूप से शिकायत करनी चाहिए।

विजय राघवन ने एक ब्लॉग में कहा, "वैज्ञानिक अगर निरर्थक बात करते हैं तो वे इस समुदाय का आक्रोश झेलेंगे। यह वास्तव में दुर्भाग्यपूर्ण है कि प्रदेश के एक बड़े विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर कुछ ऐसा कहते हैं जो वैज्ञानिक रूप से पूरी तरह से अपुष्ट है।"

जालंधर के लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में आयोजित 106 वें भारतीय विज्ञान कांग्रेस 2019 का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था।

Indian Science Congress
ISC
Scientific ideas
discoveries
scientific temperament
mythologies
G Nageswara Rao
K J Krishnan
Breakthrough Science Society

Related Stories

क्या भारतीय समाज में वैज्ञानिक नज़रिया ख़त्म हो रहा है?


बाकी खबरें

  • sever
    रवि शंकर दुबे
    यूपी: सफ़ाईकर्मियों की मौत का ज़िम्मेदार कौन? पिछले तीन साल में 54 मौतें
    06 Apr 2022
    आधुनिकता के इस दौर में, सख़्त क़ानून के बावजूद आज भी सीवर सफ़ाई के लिए एक मज़दूर ही सीवर में उतरता है। कई बार इसका ख़ामियाज़ा उसे अपनी मौत से चुकाना पड़ता है।
  • सोनिया यादव
    इतनी औरतों की जान लेने वाला दहेज, नर्सिंग की किताब में फायदेमंद कैसे हो सकता है?
    06 Apr 2022
    हमारे देश में दहेज लेना या देना कानूनन अपराध है, बावजूद इसके दहेज के लिए हिंसा के मामले हमारे देश में कम नहीं हैं। लालच में अंधे लोग कई बार शोषण-उत्पीड़न से आगे बढ़कर लड़की की जान तक ले लेते हैं।
  • पटनाः डीजल-पेट्रोल से चलने वाले ऑटो पर प्रतिबंध के ख़िलाफ़ ऑटो चालकों की हड़ताल
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    पटनाः डीजल-पेट्रोल से चलने वाले ऑटो पर प्रतिबंध के ख़िलाफ़ ऑटो चालकों की हड़ताल
    06 Apr 2022
    डीजल और पेट्रोल से चलने वाले ऑटो पर प्रतिबंध के बाद ऑटो चालकों ने दो दिनों की हड़ताल शुरु कर दी है। वे बिहार सरकार से फिलहाल प्रतिबंध हटाने की मांग कर रहे हैं।
  • medicine
    ऋचा चिंतन
    दवा के दामों में वृद्धि लोगों को बुरी तरह आहत करेगी – दवा मूल्य निर्धारण एवं उत्पादन नीति को पुनर्निर्देशित करने की आवश्यता है
    06 Apr 2022
    आवश्यक दवाओं के अधिकतम मूल्य में 10.8% की वृद्धि आम लोगों पर प्रतिकूल असर डालेगी। कार्यकर्ताओं ने इन बढ़ी हुई कीमतों को वापस लेने और सार्वजनिक क्षेत्र के दवा उद्योग को सुदृढ़ बनाने और एक तर्कसंगत मूल्य…
  • wildfire
    स्टुअर्ट ब्राउन
    आईपीसीसी: 2030 तक दुनिया को उत्सर्जन को कम करना होगा
    06 Apr 2022
    संयुक्त राष्ट्र की नवीनतम जलवायु रिपोर्ट कहती है कि यदि​ ​हम​​ विनाशकारी ग्लोबल वार्मिंग को टालना चाहते हैं, तो हमें स्थायी रूप से कम कार्बन का उत्सर्जन करने वाले ऊर्जा-विकल्पों की तरफ तेजी से बढ़ना…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License