NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
संस्कृति
पुस्तकें
साहित्य-संस्कृति
भारतीय मैक्सिकाई लेखक सम्मिलन: साहित्य के अनुवाद से संस्कृतियों  का आदान-प्रदान
हर किसी के लिए हर भाषा सीखना संभव नहीं है। ऐसे में अनुवाद के माध्यम से दो देश एक दूसरे की सभ्यता-संस्कृति से परिचित होते हैं। और एक दूसरे देश की संस्कृति का आदान-प्रदान भी होता है।
प्रदीप सिंह
13 Nov 2019
maxican - indo meet

किसी भी देश के साहित्य में उस देश की भौतिक परिस्थियों के साथ ही वहां के रहन-रहन, वेशभूषा और कला-संस्कृति का इतिहास दर्ज होता है। दुनिया भर में हजारों भाषाओं के माध्यम से मनुष्य का कार्य-व्यापार चलता है। ऐसे में एक देश में क्या चल रहा है उससे दूसरे देश के लोग अपरिचित रहते हैं। हर किसी के लिए हर भाषा सीखना संभव नहीं है। ऐसे में अनुवाद के माध्यम से दो देश एक दूसरे की सभ्यता-संस्कृति से परिचित होते हैं। और एक दूसरे देश की संस्कृति का आदान-प्रदान भी होता है।

विश्व में साहित्य के अनुवाद की परंपरा पुरानी है। प्राचीन समय में भारत के ग्रंथों का अरबी, फारसी, चीनी, उर्दू, अंग्रेजी, यूनानी और जर्मन भाषाओं में अनुवाद हुआ है। लेकिन लंबे अर्से तक यह अनुवाद कुछ सीमित देशों और धार्मिक रचनाओं का ही होता रहा है। साहित्य अकादमी सिर्फ बड़े देशों और बड़ी भाषाओं के साहित्य का ही नहीं छोटे देशों के साहित्य का भी भारतीय भाषाओं में अनुवाद करा रहा है। जिसमें लैटिन अमेरिका के छोटे देशों में बोली जाने वाली भाषाएं भी शामिल हैं।

इसी को ध्यान में रखते हुए दिल्ली स्थित साहित्य अकादमी तथा भारत में मैक्सिको राजदूतावास के सहयोग से भारतीय मैक्सिकाई लेखक सम्मिलन का आयोजन किया गया। जिसमें एक दूसरे देश की संस्कृति को जानने के लिए दोनों देशों के उम्दा साहित्य का अनुवाद करने पर सहमति बनी है। कार्यक्रम में मैक्सिको राजदूतावास के सांस्कृतिक कार्य प्रमुख सेंटिआगो सहित स्पेनिश भाषा के छात्र-छात्राएं भी भारी संख्या में उपस्थित थे।

इस अवसर पर साहित्य अकादमी के सचिव के. श्रीनिवासराव ने कहा कि “दोनों देशों की संस्कृतियां बेहद प्राचीन है और दोनों देशों के संबंध भी हमेशा से रहे हैं। दोनों देश की भाषाओं में परस्पर अनुवाद के जरिए ही हम एक दूसरे के बीच संवाद स्थापित कर सकते हैं। दोनों ही देशों का प्राचीन साहित्य और स्वतंत्रता के बाद का साहित्य बेहद समृद्ध है और उसे विभिन्न विधाओं में बखूबी व्यक्त किया गया है।” अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि  साहित्य अकादमी ने अभी हाल ही में स्पेनिश साहित्य को प्रकाशित किया है। दोनों देशों के बीच यह आदान प्रदान लगातार चलता रहेगा।

जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय में स्पेनिश भाषा केन्द्र के अध्यक्ष रहे प्रो. एसपी गांगुली ने दोनों देशों के बीच विभिन्न भाषाओं में अनुवाद की प्राचीन परंपरा की जानकारी देते हुए कहा कि भारत में एक हजार से ज्यादा भाषाएं होने के कारण यहां की अनुवाद प्रक्रिया पश्चिमी देशों से बिल्कुल अलग है। उन्होंने बांग्ला और लैटिन अमेरिकी देशों के बीच अनुवाद की विशेष जानकारी देते हुए कहा कि बांग्ला कवियों शंख घोष से लेकर बुद्धदेव दास तक सभी वहां से प्रेरणा लेते रहे हैं और अनुवाद में भी सक्रिय रहे हैं। उन्होंने सेसार व्याख्यो की कविताओं के बांग्ला अनुवादों की चर्चा की, जिसे साहित्य अकादमी ने प्रकाशित किया है।

भारत में मैक्सिको के राजदूत फेदेरिको सालास लोत्फ़े ने मैक्सिको के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि "वहां चौसठ भाषाएं हैं और ये सभी स्वदेशी भाषाएं अपने अस्तित्व के लिए लड़ रही हैं। यूनेस्को द्वारा इस वर्ष को अंतर्राष्ट्रीय स्वदेशी भाषा वर्ष घोषित करने का जिक्र करते हुए कहा कि हमें इन भाषाओं को बचाने के लिए और महत्त्वपूर्ण काम करना है।”

कार्यक्रम के महत्व को रेखांकित करते हुए फेदेरिको सालास लोत्फ़े ने कहा कि यह कार्यक्रम दोनों भाषाओं के साथ ही दोनों देशों के बीच संवाद है। इस संवाद में हम तय कर पाएंगे कि आने वाले समय में हमें दोनों देशों के बीच आगे क्या करना है।

INDO MEXICAN2.jpg  मैक्सिको से आई कवि नादिया लोपेज़ गार्सिया ने अपनी भाषा के अस्तित्व पर मंडरा रहे संकट और उसे बचाने में आ रही मुश्किलों का जिक्र किया। अपनी कविताओं के माध्यम से उन्होंने मैक्सिकाई भाषा के संकट को सबके सामने रखा। दूसरे मैक्सिको रचनाकारों कोस्में आल्वारेज़, गिल्येरमो चावेज़ कोनेख़ो ने भी अपनी कविताएं प्रस्तुत कीं।

इस कार्यक्रम में आए विभिन्न वक्ताओं और विद्वानों ने कहा कि सिर्फ भारत ही नहीं समूचे विश्व में छोटी भाषाओं के अस्तित्व पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। बड़ी भाषा छोटी भाषा को निगलने को आतुर है। बड़े अर्थव्यवस्था वाले बड़े देश अपनी भाषा और संस्कृति छोटे देशों पर थोप रहे हैं। एक भाषा के खत्म होने का अर्थ एक संस्कृति का भी समाप्त होना है। छोटी अर्थव्यवस्था और छोटे देशों के सामने यह संकट लगातार बढ़ रहा है।  

इस अवसर पर विश्व कविताओं पर भी चर्चा हुई। प्रख्यात मलयाली कवि एवं आलोचक के. सच्चिदानंदन ने स्वयं द्वारा अनूदित विश्व कवियों की कविताओं के अंग्रजी अनुवाद के पंद्रह खंडों की जानकारी देते हुए कहा कि इसमें लेटिन अमेरिकी कविताओं का स्वर सबसे अलग और मुखर है। उन्होंने अपनी कुछ रचनाओं का सस्वर पाठ भी किया। साहित्य अकादेमी युवा पुरस्कार विजेता कवि शुभ्र बंद्योपाध्याय ने अपनी कविताओं को प्रस्तुत किया तथा उनके स्पेनिश अनुवाद की जानकारी देते हुए कहा कि यह अनुभव स्वयं को बेहद समृद्ध करने वाला था।
कार्यक्रम में विभिन्न भारतीय भाषाओं के महत्त्वपूर्ण लेखकों-अनुवादकों सत्यव्रत शास्त्री, सुकृता पॉल कुमार, वरिष्ठ कवि मंगलेश डबराल, सुरेश ऋतुपर्ण, चंद्रमोहन और सविता सिंह उपस्थित थे। 

indian- maxican writers meet
indian writers
mexican writers
nadiya lopez garrcia
importance of transaltion in literature
. k. sachidanand

Related Stories


बाकी खबरें

  • Yoweri Museveni
    सिलजा फ़्रोलिच
    अफ़्रीका : तानाशाह सोशल मीडिया का इस्तेमाल अपनी सत्ता बनाए रखने के लिए कर रहे हैं
    11 Jan 2022
    युगांडा के राष्ट्रपति योवेरी मुसेवेनी पर फर्जी सोशल मीडिया एकाउंट्स के ज़रिये अपनी सत्ता को मज़बूत करने का आरोप है। लेकिन वे अफ़्रीका में अकेले नहीं हैं। क्या महाद्वीप में सोशल मीडिया लोकतंत्र के लिए…
  • Elizabeth Holmes
    प्रबीर पुरकायस्थ
    एलिज़ाबेथ होम्स फ़ैसला: अमरीका में ग्राहकों से ठगी जायज़, पर निवेशकों से झूठ नहीं चलेगा
    11 Jan 2022
    अमरीका का जाना-परखा न्याय यही कहता है, कि उपभोक्ता ठग होते हैं और उनको ठगने में कोई गुनाह नहीं है। लेकिन निवेशकर्ताओं के साथ ऐसा सलूक नहीं किया जा सकता है, वे बड़े धनपति जो हैं। 
  • covid
    दित्सा भट्टाचार्य
    भारत की कोविड-19 मौतें आधिकारिक आंकड़ों से 6-7 गुना अधिक हैं: विश्लेषण
    11 Jan 2022
    नए अध्ययन के मुताबिक भारत में 2020 में अपेक्षित मृत्यु दर से कम की तुलना में 2021 में उच्च कोविड मृत्यु दर इस विषय में और अधिक शोध की मांग करता है।
  • Anand
    सत्यम श्रीवास्तव
    मध्य प्रदेश आनंद विभाग: कर्मकांड और प्रचार से दूर 'आनंद' की हक़ीक़त
    11 Jan 2022
    हिंदुस्तान में यह पहली बार हुआ था कि किसी एक राज्य (मध्य प्रदेश) में अपने नागरिकों की खुशहाली को मापने और खुशहाली का प्रचार-प्रसार करने के लिए सांस्थानिक स्तर पर पहल की। लेकिन सरकार द्वारा किए गए काम…
  •  Kashmir’s apple industry
    न्यूज़क्लिक टीम
    कश्मीर के सेब व्यापारी अपने भविष्य के लिए चिंतित, सरकार की तरफ़ से नहीं मिल रही मदद
    11 Jan 2022
    क़रीब 8,000 करोड़ के कश्मीर के सेब उद्योग को इलाक़े की अर्थव्यवस्था की बैकबोन माना जाता है, जिससे 30 लाख से ज़्यादा लोग जुड़े हुए हैं। मौजूदा समय में, #कश्मीरघाटी में 2,400 करोड़ तक की लागत के सेब का बाज़ार…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License