NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
स्वास्थ्य
विज्ञान
भारत
अंतरराष्ट्रीय
भारतीय शोधकर्ता की टीम ने कोविड-19 की जांच के लिये सस्ता, विद्युतरहित सेंट्रीफ्यूज़ बनाया
यह नए कोरोना वायरस की जांच के लिये किसी मरीज की लार के लिये गए नमूनों से घटकों को अलग कर सकता है। इस खोज से दुनिया के गरीब क्षेत्रों में कोविड-19 के निदान की पहुंच बढ़ सकती है।
भाषा
04 Jul 2020
covid-19

न्यूयॉर्क : एक भारतीय वैज्ञानिक के नेतृत्व में शोधकर्ताओं ने एक सस्ता, विद्युत रहित सेंट्रीफ्यूज विकसित किया है जो नए कोरोना वायरस की जांच के लिये किसी मरीज की लार के लिये गए नमूनों से घटकों को अलग कर सकता है। इस खोज से दुनिया के गरीब क्षेत्रों में कोविड-19 के निदान की पहुंच बढ़ सकती है।

अमेरिका के स्टेनफोर्ड विश्वविद्याल के मनु प्रकाश समेत वैज्ञानिकों का कहना है कि ‘हैंडीफ्यूज’ उपकरण ट्यूब में रखे नमूनों को बेहद तेज गति से घुमाता है जो मरीज के लार के नमूने से वायरस के जीनोम (जीन के समूह) को अलग करने के लिये पर्याप्त है वह भी बिना विद्युत के।

मेडरिक्सिव नाम के डिजिटल मंच पर प्रकाशित इस अध्ययन की अभी विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा नहीं हुई है लेकिन शोधकर्ताओं का कहना है कि सस्ते सेंट्रीफ्यूज को पहले से उपलब्ध घटकों का उपयोग करके प्रति इकाई पांच डॉलर से भी कम की लागत में तैयार किया जा सकता है।

सेंट्रीफ्यूज या अपकेंद्रित्र दरअसल ऐसे उपकरण को कहते हैं जिसमें अपकेंद्री बल के इस्तेमाल से विभिन्न घनत्व के पदार्थों को अलग-अलग किया जाता है। इसी के इस्तेमाल से लार के नमूनों से कोविड-19 के जीनोम को अलग किया जा सकता है।

वैज्ञानिकों ने कहा कि यह तकनीक नैदानिक जांच से जुड़े लोगों और वैज्ञानिकों को एक त्वरित और सस्ती जांच की तकनीक उपलब्ध कराती है जिसे ‘एलएएमपी’ जांच कहते हैं और इससे मरीज की लार के नमूनों में कोरोना वायरस के जीनोम की मौजूदगी की पहचान की जा सकती है।

शोधकर्ताओं के मुताबिक ‘एलएएमपी’ व्यवस्था सरल है, इसमें किसी विशेष उपकरण की जरूरत नहीं है, त्वरित है (नमूना लेने से नतीजे आने तक में करीब एक घंटे लगते हैं) और सस्ती है। जांच में जहां यह फायदे हैं वहीं वैज्ञानिकों ने कहा कि लार के नमूनों में वायरस के जीनोम की पहचान के नैदानिक तरीकों के कारण नतीजों में विभिन्नता हो सकती है।

उन्होंने कहा कि ऐसा लार युक्त पदार्थ की वजह से है जो नैदानिक अभिकर्मकों को बाधित कर सकते हैं।

वैज्ञानिकों ने अध्ययन में लिखा, “निष्क्रिय किये गए नमूनों से प्रतिक्रिया अवरोधकों को अलग करने के लिये अपकेंद्रित्र (सेंट्रीफ्यूगेशन) को एक विश्वसनीय एलएएमपी प्रवर्धन के तरीके के तौर पर दर्शाया गया है।”

उन्होंने कहा कि कुछ मिनटों तक 2000 चक्कर प्रति मिनट (आरपीएम) की आवश्यक गति सुरक्षित तरीके से प्राप्त करने में सक्षम सेंट्रीफ्यूज में सैकड़ों डॉलर की लागत आती है और उसमें विद्युत आपूर्ति की भी आवश्यकता पड़ती है।

स्टेनफोड विश्वविद्यालय में जैवआभियांत्रिकी के प्रोफेसर प्रकाश ने कहा कि हैंडीफ्यूज से इस कमी से पार पाया जा सकता है। उनकी प्रयोगशाला पूर्व में सस्ता ‘‘ओरीगामी सुक्ष्मदर्शी’’ बना चुकी है जिसे ‘फोल्डस्कोप’ नाम दिया गया।

वैज्ञानिकों ने अपने अध्ययन में लिखा, “उपयोगकर्ता सेंट्रीफ्यूज की धुरी से जुड़े एक छोटे मुक्त चक्र को घुमाने के लिये हैंडल पर बार-बार दबाव देता है।”

उन्होंने कहा कि तय समय के बाद पर्याप्त ट्यूब में रखे नमूने पर पर्याप्त अपकेंद्र बल लगता है जिससे एक अलग तरल परत मिलती है जो रसायनों से मुक्त होती है जिसमें कोरोना वायरस के जीन तत्व, उसके आरएनए प्रदर्शित हो सकते हैं।

शोधकर्ताओं ने लिखा, “सतह पर आ जाने वाले तत्वों का इस्तेमाल तब सार्स-सीओवी-2 की पहचान के लिये एलएएमपी विधि से किया जा सकता है या अन्य विषाणुओं की पहचान के लिये ‘राबे’ या ‘सेप्को’ जांच की जा सकती है।”

अध्ययन के मुताबिक, हैंडीफ्यूज-एलएएमपी जांच हार्वर्ड विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक ब्रायन राबे और कांस्टेंस सेप्को द्वारा विकसित नैदानिक विधि के तरीकों के इस्तेमाल के आधार पर काम करती है।

Coronavirus
COVID-19
Corona test

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के मामलों में 35 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, 24 घंटों में दर्ज हुए 3,712 मामले 

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में 2,745 नए मामले, 6 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में नए मामलों में करीब 16 फ़ीसदी की गिरावट

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2,706 नए मामले, 25 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,685 नए मामले दर्ज

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 2,710 नए मामले, 14 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा


बाकी खबरें

  • UMAR KHALID
    तारिक अनवर
    दिल्ली हिंसा: उमर ख़ालिद के परिवार ने कहा ज़मानत नहीं मिलने पर हैरानी नहीं, यही सरकार की मर्ज़ी है
    25 Mar 2022
    उमर ख़ालिद के पिता ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि अभियोजन पक्ष के आरोपों को साबित कर पाने में पूरी तरह नाकाम होने के बावजूद अदालत ने "मनगढ़ंत साज़िश के सिद्धांत" पर यक़ीन किया।
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 1,685 नए मामले, 83 मरीज़ों की मौत
    25 Mar 2022
    देश में अब तक कोरोना से पीड़ित 98.75 फ़ीसदी यानी 4 करोड़ 24 लाख 78 हज़ार 87 मरीज़ों को ठीक किया जा चुका है।
  • एम. के. भद्रकुमार
    बाइडेन ने फैलाए यूक्रेन की सीमा की ओर अपने पंख
    25 Mar 2022
    यदि बाइडेन यूक्रेन में नाटो के हस्तक्षेप के अपने प्रस्ताव के लिए यूरोप का समर्थन पाने में सफल हो जाते हैं, तो युद्ध नाटकीय रूप से परमाणु हथियारों से जुड़े विश्व युद्ध में तब्दील हो सकता है।
  • पीपल्स डिस्पैच
    यमन के लिए यूएन का सहायता सम्मेलन अकाल और मौतों की चेतावनियों के बीच अपर्याप्त साबित हुआ
    24 Mar 2022
    यूएन के यमन के लिए किए गए प्लेजिंग कांफ्रेंस में सऊदी अरब और यूएई जैसे खाड़ी देश कोई सहायता प्रदान करने में असफल हुए हैं।
  • abhisar
    न्यूज़क्लिक टीम
    भाजपा सरकार के प्रचार का जरिया बना बॉलीवुड
    24 Mar 2022
    बोल के लब आज़ाद हैँ तेरे के आज एक एपिसोड में वरिष्ठ पत्रकार अभिसार बॉलीवुड की चर्चा कर रहें हैँ औऱ साथ ही सवाल कर रहे हैँ की क्या ऐसी फ़िल्में बननी चाहिए जो किसी राजनैतिक पार्टी के एजेंडे को बढ़ावा…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License