बोल के लब आज़ाद हैं तेरे के इस एपिसोड में वरिष्ठ पत्रकार अभिसार शर्मा मौजूदा भारतीय मीडिया की तुलना रेडियो रवांडा से कर रहे हैं। उनका कहना है कि1994 में रवांडा में नरसंहार हुआ था और उसके पीछे जिस प्रकार रेडियो रवांडा का हाथ था। उसी प्रकार आज का भारतीय मीडिया नफ़रत का प्रोपेगंडा फैला रहा है।
बोल के लब आज़ाद हैं तेरे के इस एपिसोड में वरिष्ठ पत्रकार अभिसार शर्मा मौजूदा भारतीय मीडिया की तुलना रेडियो रवांडा से कर रहे हैं। उनका कहना है कि1994 में रवांडा में नरसंहार हुआ था और उसके पीछे जिस प्रकार रेडियो रवांडा का हाथ था। उसी प्रकार आज का भारतीय मीडिया नफ़रत का प्रोपेगंडा फैला रहा है।