NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
‘ईश्वर के देश’ को ध्रुवीकृत्त करने की हिन्दुत्ववादी कोशिश
भाजपा देश के सभी क्षेत्रों में सम्प्रदायवाद और ब्राह्मणवाद को बढ़ावा दे रही है।
राम पुनियानी
27 Oct 2017
Translated by अमरीश हरदेनिया
yogi adityanath

कुछ समय पूर्व, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने केरल में दो सप्ताह की जन सुरक्षा यात्रा निकाली। उद्देश्य था राज्य में आरएसएस कार्यकर्ताओं की हत्याओं के प्रति देश का ध्यान आकर्षित करना। भाजपा के 12 केन्द्रीय मंत्री और पांच राज्यों के मुख्यमंत्रियों सहित कई शीर्ष नेताओं ने इस यात्रा में भागीदारी की। इनमें से सबसे प्रमुख थे उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। अमित शाह का आरोप है कि केरल में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम), राजनीतिक हिंसा कर रही है जिसमें आरएसएस के कार्यकर्ता मारे जा रहे हैं। उनका कहना है कि यह जिहादी-लाल आतंकवाद है। उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने केरल सरकार को प्रशासन चलाने और जनता को चिकित्सीय सुविधाएं उपलब्ध करवाने के संबंध में कुछ सलाहें भी दे डालीं। यह आदित्यनाथ की बेशर्मी ही कही जा सकती है। हाल में उनके ही क्षेत्र गोरखपुर में आक्सीजन की सप्लाई बाधित हो जाने के कारण एक अस्पताल में बड़ी संख्या में बच्चों की मृत्यु हो गई थी। जहां तक आमजन को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाने का प्रश्न है केरल देश के सबसे बेहतर राज्यों में से एक है। उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा ऐसे राज्य को बिन माँगी  सलाह देना हास्यास्पद ही कहा जा सकता है।

इस पूरे मामले में भाजपा जो बातें कह रही है वह उसकी राजनीति करने के तरीके की द्योतक है। आंकड़ें बताते हैं कि पिछले 17 वर्षों में केरल में जो राजनीतिक हत्याएं हुईं, उनमें मारे जाने वालों में से 85 सीपीएम के थे, 65 आरएसएस के और 11-11 मुस्लिम लीग और कांग्रेस के। केरल के कन्नूर इलाके में सीपीएम और आरएसएस के बीच गहरी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता है, जिसके चलते दोनों ही पक्ष एक दूसरे के खिलाफ हिंसा करते रहे हैं। शाह ऐसा बताने का प्रयास कर रहे हैं मानो हिंसा में केवल आरएसएस के कार्यकर्ता मारे जा रहे हैं, जबकि वे अच्छी तरह से जानते हैं कि मरने वालों में सीपीएम कार्यकर्ताओ की भी खासी संख्या है।

संघ परिवार ने देश भर में पहचान से जुड़े मुद्दों पर जो जुनून भड़काया है उसके कारण जमकर खून-खराबा होता आ रहा है। पुराने मुद्दों को हम छोड़ भी दें तो भी, केवल राममंदिर और पवित्र गाय के मुद्दों पर भड़की हिंसा में सैंकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है। संघ परिवार बड़ी धूर्तता से इस हिंसा के लिए पीड़ितों को ही दोषी ठहरा रहा है। वह केवल चुनिंदा तथ्यों को प्रस्तुत करता है और भावनाएं भड़का कर अपना उल्लू सीधा करता है।

मध्यप्रदेश में उसने कमाल मौला मस्जिद (भोजशाला) के मुद्दे पर शोर मचाया तो कर्नाटक में बाबा बुधनगिरी की मज़ार को दत्तापीठ बताकर वहां साम्प्रदायिक तनाव उत्पन्न किया। भावनात्मक मुद्दे उठाकर लोगों को भड़काने की कला में संघ परिवार माहिर है। क्या उसका यह खेल केरल में सफल हो सकेगा?

केरल एक ऐसा राज्य है जहाँ तीनों प्रमुख धार्मिक समुदायों के सदस्यों की बड़ी आबादी है। वहाँ हिन्दुओं, मुसलमानों और ईसाईयों तीनों की खासी जनसंख्या है। भारत में ईसाई सबसे पहले केरल के मलाबार तट पर पहुंचे। सेंट थॉमस 52 ईस्वी में केरल आए और उसके बाद से केरल में चर्चों का निर्माण शुरू हुआ। इसी तरह, वहाँ सातवीं सदी से अरब देशों से व्यापारी आते रहे हैं। देश की पहली मस्ज़िद, जिसका नाम चेरामन जुम्मा था, केरल में बनी थी। अमित शाह एक ऐसे राज्य के लोगों को धार्मिक आधार पर विभाजित करने का प्रयास कर रहे हैं, जिसका सांप्रदायिक सौहार्द का इतना लंबा इतिहास है।

केरल समाज सुधार में भी देश के अन्य हिस्सों से आगे रहा है। समाज सुधारक नारायण गुरू ने जाति-मुक्त समाज के निर्माण और सभी जातियों के लोगों को एक समान दर्जा देने का अभियान चलाया था। उन्होंने वहाँ ऐसे मंदिर बनवाए जिनमें सभी जातियों के लोगों को प्रवेश करने की इजाजत थी। नारायण गुरू ने ही पहली धार्मिक संसद का आयोजन किया ताकि धार्मिक विभेदों से ऊपर उठकर मानवता को मज़बूत किया जा सके। केरल में मुख्यमंत्री नम्बूदरीपाद की कम्युनिस्ट सरकार ने वहाँ भू-सुधार किए, जिससे भूमिहीन कृषकों को बहुत लाभ हुआ। इन्हीं सब कारणों से केरल आज सामाजिक विकास सूचकांकों के मामले में देश में प्रथम स्थान पर है।

भाजपा-आरएसएस लंबे समय से राज्य का सांप्रदायिकीकरण करने का प्रयास कर रहे हैं। वे लव जिहाद के मुद्दे को ज़ोर शोर से उठाते रहे हैं। केरल में पुलिस द्वारा की गई कई जाँचों में यह सामने आया है कि लव जिहाद जैसी कोई चीज़ नहीं है और हिन्दू व ईसाई महिलाओं को प्रेमजाल में फँसाकर उन्हें इस्लाम कुबूल करवाने का कोई संगठित प्रयास नहीं हो रहा है। हाँ, अंतरधार्मिक विवाह होते हैं परंतु उनके पीछे कोई षड़यंत्र नहीं होता। अमित शाह और उनकी टीम इस सांप्रदायिक सद्भाव को छिन्नभिन्न कर देना चाहती है। वे चाहते हैं कि उन निर्दोष लड़कियों और लड़कों को प्रताड़ित किया जाए जो अपने जीवनसाथी का चुनाव स्वयं करते हैं या करना चाहते हैं।

अमित शाह न केवल विभिन्न धार्मिक समुदायों के बीच शत्रुता को बढ़ावा दे रहे हैं वरन वे हिन्दू धर्म के ब्राह्मणवादी संस्करण का प्रचार-प्रसार भी कर रहे हैं। केरल के सबसे बड़े त्यौहार ओणम के अवसर पर उन्होंने वहां ऐसे पोस्टर लगवाए जिसमें ओणम को वामन जयंती बताते हुए केरलवासियों को बधाई दी गई थी। किंवदंती यह है कि राजा महाबली को भगवान विष्णु के अवतार वामन ने धोखे से मारा था। ऐसा कहा जाता है कि ओणम के दिन राजा महाबली अपनी प्रजा से मिलने आते हैं। यह भी माना जाता है कि महाबली एक नीची जाति के व्यक्ति थे और वे सभी जातियों के लोगों को समान दृष्टि से देखते थे।

भाजपा देश के सभी क्षेत्रों में सम्प्रदायवाद और ब्राह्मणवाद को बढ़ावा दे रही है। परंतु इस बात की बहुत कम संभावना है कि केरल जैसे राज्य में, जहाँ के लोग अत्यंत जागरूक हैं, जहाँ सामाजिक और नागरिक सेवाओं की पर्याप्त उपलब्धता है और जहाँ के लोग आपस में मिलजुल कर रहते आए हैं, वहाँ शाह की यह चाल कामयाब हो सकेगी। वे केरल में हो रही हिंसा को लाल-जिहादी हिंसा बताकर एक तीर से दो निशाने लगाना चाहते हैं। केरल में खासी मुस्लिम आबादी है और जिहादी शब्द के उपयोग का उद्देश्य उसका दानवीकरण करना है। ऐसा लगता है कि केरल में भाजपा की यह चाल कामयाब नहीं होगी और उसे मुँह की खानी पड़ेगी। यद्यपि केरल में आरएसएस की मौजूदगी लंबे समय से है तथापि संघ की राजनीतिक संतान भाजपा वहां अपनी जड़े नहीं जमा सकी है। राज्य विधानसभा में भाजपा का केवल एक सदस्य है। आने वाले समय में भाजपा वहाँ चुनावों में किस हद तक सफलता प्राप्त करती है यह इस बात पर निर्भर करेगा कि मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी और अन्य वामपंथी पार्टियां भाजपा की कुत्सित चालों का कैसे मुकाबला करती हैं।

यह प्रसन्नता की बात है कि वामपंथी पार्टियों ने वहां जनजागृता यात्रा शुरू की है। कांग्रेस (यूडीएफ) भी यात्रा निकालने पर विचार कर रही है। अब समय आ गया है कि गैर-भाजपा दल इस तथ्य को समझें कि अगर उन्हें साम्प्रदायिक सद्भाव बनाए रखना है तो उन्हें इसके लिए परस्पर समन्वय से काम करना होगा। 

केरल
सीपीआईएम

Related Stories

नीति आयोग का स्वास्थ्य सूचकांक: नहीं काम आ रहा 'डबल इंजन’, यूपी-बिहार सबसे नीचे

त्रिपुरा: वाम किले में सेंध लगाना आसान नहीं

कट्टरवादी राजनीति के दौर में प्रेम

आर.एस.एस.-बीजेपी के खिलाफ़ सीपीआईएम ने दिल्ली में किया प्रदर्शन

माल्दा, मुसलमान और कुछ सवाल!---------

धर्म और जनतंत्र

चावेज़ की याद में


बाकी खबरें

  • russia attack on ukrain
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूक्रेन पर हमला, रूस के बड़े गेम प्लान का हिस्सा, बढ़ाएगा तनाव
    25 Feb 2022
    'पड़ताल दुनिया भर की' में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने बात की न्यूज़क्लिक के प्रधान संपादक प्रबीर पुरकायस्थ से। यूक्रेन पर रूस हमला, जो सरासर अंतर्राष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन है, के पीछे पुतिन द्वारा…
  • News Network
    न्यूज़क्लिक टीम
    आख़िर क्यों हुआ 4PM News Network पर अटैक? बता रहे हैं संजय शर्मा
    25 Feb 2022
    4PM News नामक न्यूज़ पोर्टल को हाल ही में कथित तौर पर हैक कर लिया गया। UP की राजधानी लखनऊ का 4PM News योगी सरकार की नीतियों की आलोचनात्मक रिपोर्टिंग के लिए जाना जाता है। 4PM News का आरोप है कि योगी…
  • Ashok Gehlot
    सोनिया यादव
    राजस्थान : कृषि बजट में योजनाओं का अंबार, लेकिन क़र्ज़माफ़ी न होने से किसान निराश
    25 Feb 2022
    राज्य के बजटीय इतिहास में पहली बार कृषि बजट पेश कर रही गहलोत सरकार जहां इसे किसानों के हित में बता रही है वहीं विपक्ष और किसान नेता इसे खोखला और किसानों के साथ धोखा क़रार दे रहे हैं।
  • ADR Report
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    यूपी चुनाव छठा चरणः 27% दाग़ी, 38% उम्मीदवार करोड़पति
    25 Feb 2022
    एडीआर की रिपोर्ट के अनुसार छठे चरण में चुनाव लड़ने वाले 27% (182) उम्मीदवारों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं वहीं 23% (151) उम्मीदवारों पर गंभीर प्रकृति के आपराधिक मामले हैं। इस चरण में 253 (38%) प्रत्याशी…
  • up elections
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूपी चुनाव 2022: मोदी सभा में खाली कुर्सियां, योगी पर अखिलेश का तंज़!
    25 Feb 2022
    बोल के लब आज़ाद हैं तेरे के इस एपिसोड में वरिष्ठ पत्रकार अभिसार शर्मा बात करेंगे आवारा पशुओं के बढ़ते हुए मुद्दे की, जो यूपी चुनाव में बीजेपी की मुश्किलें बढ़ा सकता है। उसके साथ ही अखिलेश यादव द्वारा…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License