NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
इज़रायली अदालत ने 126 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे फिलिस्तीनी बंदी की रिहाई की अपील ख़ारिज की
प्रशासनिक बंदी कायेद अल-फ़स्फौस को अपने लगातार भूख हड़ताल पर बैठने की वजह से गंभीर शारीरिक दुष्परिणामों का सामना करना पड़ रहा है, जिसमें वजन घटने, निम्न रक्तचाप और अनियमित दिल की धड़कन शामिल है। डाक्टरों ने उसके परिवार को सूचित कर दिया है कि उसके कभी भी अचानक से मौत का गंभीर खतरा बना हुआ है।
पीपुल्स डिस्पैच
19 Nov 2021
Israeli court rejects appeal for release of Palestinian detainee on hunger strike for 126 days
1 नवंबर को वेस्ट बैंक, हेब्रोन में फिलिस्तीनी कैदी कायेद फ़स्फौस की मां फवाजिया फ़स्फौस. (फोटो: हिशाम के.के. अबू शकरा/अनाडोलू एजेंसी/मिडिल ईस्ट मॉनिटर)

इजरायली उच्च न्यायालय ने मंगलवार, 16 नवंबर को विभिन्न समाचार पत्रों की खबरों के मुताबिक, प्रशासनिक बंदी कायेद अल-फ़स्फौस को तत्काल रिहा किये जाने की अपील को ख़ारिज कर दिया है, जो पिछले 126 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं। इस अपील को बंदियों और भूतपूर्व-बंदियों के मामलों के आयोग द्वारा दाखिल किया गया था, जिसने अल-फ़स्फौस की तत्काल रिहाई की मांग इसलिए की थी क्योंकि उनको डर है कि उसके स्वास्थ्य में गंभीर गिरावट के चलते वह अब मौत की कगार पर पहुँच चुका है। विभिन्न रिपोर्टों के मुताबिक, यह चौथी बार है जब इजरायली अदालतों ने स्वास्थ्य एवं मानवीय आधार पर उसकी रिहाई के लिए दाखिल की गई याचिका सुनवाई को ख़ारिज कर दिया है।

अल-फ़स्फौस की तबियत बिगड़ने के बाद उसे रामलेह जेल से इजरायली बर्ज़िलाई चिकित्सा केंद्र के इंटेंसिव केयर यूनिट में स्थानांतरित कर दिया गया था। वहां के डाक्टरों ने कथित तौर पर उसके परिवार को बताया था कि उसकी मौत किसी भी क्षण हो सकती है। वह वजन में अत्यधिक गिरावट, रुक-रुक कर चेतना शून्य हो जाने, अनियमित दिल की धड़कन, छाती में झुनझुनी सनसनाहट, निम्न रक्तचाप, गुर्दे और ह्रदय की जटिलताएं, शरीर में तरल पदार्थों की कमी, और बार-बार उठने वाले दर्द से जूझ रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, डाक्टरों ने पाया है कि उसके शरीर में खून के थक्के भी बनने शुरू हो चुके हैं, जिसके चलते उस पर जानलेवा चिकित्सकीय समस्याओं का गंभीर खतरा बना हुआ है।

34 वर्षीय अल-फस्फौस, कब्जे वाले वेस्ट बैंक के दक्षिण में हेब्रोन के पास के दुरा गाँव का रहने वाला है। उसे अक्टूबर 2020 को गिरफ्तार कर प्रशासनिक हिरासत में रखा गया था। जब उसकी अवैध प्रशासनिक हिरासत की अवधि को दूसरी बार के लिए नवीनीकृत कर दिया गया, ताकि प्रभावी तौर पर उसे कम से कम छह महीनों के लिए और जेल में रखा जा सके, तो इसे देखते हुए उसने इस साल 15 जुलाई से अपनी भूख हड़ताल शुरू कर दी थी। पिछले महीने, इजरायली पुलिस और गुप्तचर सेवाओं ने उसके खिलाफ प्रशासनिक हिरासत के आदेश को फिर से सक्रिय कर दिया था, इससे पहले कि इजरायली अदालत इस अपने आदेश को जारी करती, और एक इजरायली अदालत ने उसे एक प्रशासनिक बंदी के बजाय एक गैर-आधिकारिक कैदी के बतौर रखते हुए उसे एक और छह-महीने की सजा मुकर्रर कर दी थी। अल-फ़स्फौस के खिलाफ आदेश को फ्रीज करने अर्थ यह भी था कि जेल और पुलिस प्रशासन अब उसके जीवन और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए जिम्मेदार नहीं थे।

बता दें कि अल-फ़स्फौस के अलावा, वर्तमान में पांच अन्य बंदी भी इजराइल के द्वारा उन्हें अवैध प्रशासनिक हिरासत में रखे जाने के विरोधस्वरूप भूख हड़ताल पर हैं। इनमें: अला अल-अराज 101 दिनों से, हिशाम अबू हव्वाश (93 दिनों) से, अय्यद अल-हरिमी (54 दिनों)से, रातेब हरेबत (39 दिनों) से, और लोय अल-अशकर (37 दिनों) से भूख हड़ताल पर हैं। इन्हें इजराइल द्वारा बिना किसी आरोप या अदालती कार्यवाई के सिर्फ गुप्त साक्ष्यों के आधार पर कैद कर रखा है। इन गुप्त साक्ष्यों को उनके वकीलों तक से साझा नहीं किया जा रहा है। उनको हिरासत में रखे जाने की अवधि को भी हर 4-6 महीने के अंतराल पर कई दफा नवीनीकृत भी किया जा सकता है। पूर्व में इसी प्रकार के एक अन्य प्रशासनिक बंदी, मिकदाद अल-क़वास्मेह भी अपनी प्रशासनिक हिरासत को समाप्त किये जाने की मांग के साथ भूख हड़ताल पर बैठे थे, जिन्होंने अपनी भूख हड़ताल को तब समाप्त किया, जब उनकी इजरायली अधिकारियों के साथ फरवरी 2021 में उन्हें रिहा कर दिए जाने पर समझौता हो गया था। वर्तमान में कुल 4,600 से अधिक फिलिस्तीनी कैदियों में से इस समय लगभग 520 फिलिस्तीनियों को प्रशासनिक हिरासत वाली अवैध इजरायली नीति के तहत हिरासत में रखा गया है। 

साभार : पीपल्स डिस्पैच 

Israeli administrative detention
israeli apartheid
Israeli Occupation
Kayed al-Fasfous
occupied west bank
Palestinian cause
Palestinian prisoners on hunger strike
Palestinians in administrative detention
Prisoners of Conscience

Related Stories

दिल्ली : फ़िलिस्तीनी पत्रकार शिरीन की हत्या के ख़िलाफ़ ऑल इंडिया पीस एंड सॉलिडेरिटी ऑर्गेनाइज़ेशन का प्रदर्शन

इज़रायल को फिलिस्तीनी पत्रकारों और लोगों पर जानलेवा हमले बंद करने होंगे

अल-जज़ीरा की वरिष्ठ पत्रकार शिरीन अबु अकलेह की क़ब्ज़े वाले फ़िलिस्तीन में इज़रायली सुरक्षाबलों ने हत्या की

लैंड डे पर फ़िलिस्तीनियों ने रिफ़्यूजियों के वापसी के अधिकार के संघर्ष को तेज़ किया

141 दिनों की भूख हड़ताल के बाद हिशाम अबू हव्वाश की रिहाई के लिए इज़रायली अधिकारी तैयार

गाज़ा मत्स्य क्षेत्र का इस्तेमाल इज़रायल फ़िलिस्तीनीयों को सामूहिक सज़ा देने के लिए कर रहा है

गाज़ा के स्थानीय लोगों का सवाल, ‘हम कहां जाएं?’

गाज़ा पर इज़रायल के हमले में 36 लोगों की मौत

अगले महीने होने वाला फ़िलिस्तीनी चुनाव हो सकता है स्थगित

महमूद दरवेश : गलील से दुनिया तक का सफ़र


बाकी खबरें

  • general strike
    न्यूज़क्लिक टीम
    क्यों है 28-29 मार्च को पूरे देश में हड़ताल?
    27 Mar 2022
    भारत के औद्योगिक श्रमिक, कर्मचारी, किसान और खेतिहर मज़दूर ‘लोग बचाओ, देश बचाओ’ के नारे के साथ 28-29 मार्च 2022 को दो दिवसीय आम हड़ताल करेंगे। इसका मतलब यह है कि न सिर्फ देश के विशाल विनिर्माण क्षेत्र…
  • Bhagat Singh
    न्यूज़क्लिक टीम
    शहीद भगत सिंह के इतिहास पर एस. इरफ़ान हबीब
    27 Mar 2022
    'इतिहास के पन्ने मेरी नज़र से' के इस एपिसोड में नीलांजन ने बात की है इतिहासकार एस. इरफ़ान हबीब से भगत सिंह के इतिहास पर।
  • Raghav Chadha
    अनिल जैन
    ख़बरों के आगे-पीछे: पंजाब में राघव चड्ढा की भूमिका से लेकर सोनिया गांधी की चुनौतियों तक..
    27 Mar 2022
    हर हफ़्ते की प्रमुख ख़बरों को लेकर एकबार फिर हाज़िर हैं लेखक अनिल जैन…
  • jaunpur violence against dalits
    विजय विनीत
    उत्तर प्रदेश: योगी के "रामराज्य" में पुलिस पर थाने में दलित औरतों और बच्चियों को निर्वस्त्र कर पीटेने का आरोप
    27 Mar 2022
    आरोप है कि बदलापुर थाने में औरतों और बच्चियों को पीटने से पहले सीसीटीवी कैमरे बंद कर दिए गए। पहले उनके कपड़े उतरवाए गए और फिर बेरहमी से पीटा गया। औरतों और लड़कियों ने पुलिस पर यह भी आरोप लगाया कि वे…
  • सोनिया यादव
    अपने ही देश में नस्लभेद अपनों को पराया बना देता है!
    27 Mar 2022
    भारत का संविधान सभी को धर्म, जाति, भाषा, वेशभूषा से परे बिना किसी भेदभाव के एक समान होने की बात करता है, लेकिन नस्लीय भेद इस अनेकता में एकता की भावना को कलंकित करता है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License