NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
जनतंत्र का एक और सबक
केजरीवाल की बहुप्रचारित स्वच्छ छवि में ताजा दचक लगी है कि उन्होंने शिरोमणि अकाली दल के नेता पूर्व केंद्रीय मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया से लिखित माफी मांग ली है। पंजाब विधान सभा चुनावों के समय उन्होंने मजीठिया पर मादक पदार्थों की तस्करी के संगीन आरोप लगाये थे।
मनोज कुलकर्णी
20 Mar 2018
अरविन्द केजरीवाल
Image caurtsui PTI

भारतीय मानस में अवतारवाद कि गहरे तक पैठा है। दुःखों, कष्टों, अपराधों से मुक्ति दिलाने के लिए किसी मसीहा के इंतज़ार में बैठे लोग जरा भी चमक दिख जाने पर उसके महिमा-मण्डन में जुट जाते हैं। भाग्यवाद प्रतिभा को ईष्वर प्रदत्त और त्याग-बलिदान को दैवीय-मूल्य मानता हैं। हमारी शिक्षा-पद्धति में आधुनिकता और वैज्ञानिक-नजरिये के लिए समुचित सम्मान न होने से हमारा अहर्ता-संपन्न शहरी मध्यवर्ग भी मध्ययुगीन मानसिकता के लपेटे में है।
नैतिकताओं की सर्वमान्य परिभाषा या सार्वभौमिक मानदंड तो है नहीं। लिहाजा दुनियादारी में अपनी-अपनी सुविधा से प्रतिभाओं को प्रतिष्ठा और मूल्यों को मान्यता दे दी जाती है। जैसे कि वृद्धों, विधवाओं, लावारिसों या विकलांगों पर परोपकार से लगा कर प्याऊ खुलवाने या सांड छुड़वा़ने जैसे कामों के लिए दान-दक्षिणा देने वाले महाजनों को त्यागी मान लेना। धन हासिल करने के उनके जरियों और तरीकों की वैधता पर सवाल करने का कोई रिवाज़ नहीं है। इसी कारण प्राकृतिक-संसाधनों और उत्पादन के साधनों का बेरहम दोहन करने वाले त्यागियों की सूचियों में हमेशा ऊपर दिखते हैं।
इस पृष्ठभूमि में अपने संसदीय-जनतंत्र और राजनीतिक माहौल को परखना है। हमारे ‘संपूर्ण प्रभुत्व संपन्न धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक समाजवादी गणराज्य’ को स्थापित हुए चाहे अड़सठ बरस बीत चुके हमारे सत्ता-वर्ग की मानसिकता अब भी राजसी है। जनता औपनिवेशिक-रूढ़ियो के कब्जे में हैं। बहुसंख्यक ग्रामीण समाज तक शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, आवास, भोजन-पानी और परिवहन जैसी बुनियादी सुविधाएं तक नहीं पहुंची हैं, मगर आधुनिकता की कलगी लगा इठलाते शिक्षित शहरी मध्यम वर्ग की स्थिति क्या है ? जो न तो अपने जनतांत्रिक हकों के लिए सचेत है और ना ही नागरिक जि़म्मेदारियों की परवाह करता है ! अपने मौकापरस्त रवैये को ढांकने के लिए उसने कुछ दुष्मनों की कल्पना कर रखी है। मसलन अनपढ़ और गरीब ग्रामीण जनता और राजनीतिक-भ्रष्टाचार। देष-समाज की बदहाली की सारी जिम्मेदारी उन पर धकेल खुद को बरी मान लेने वाला यही दब्बूपन मसीहा की बांट देखता है।
आजादी-आंदोलन में अनेक कद्दावर नेता रहें। खुद उन्हें अपने अवतार होने का गुमान चाहे न रहा हो, उत्साही अनुयायिओं ने उन्हें महात्मा, लोकमान्य या लोकनायक घोषित कर दिया। बाद का परिदृष्य लेकिन बदलता गया। तमाम क्षेत्रों में जिस तेजी से सामूहिक चरित्र गिरता गया, किसी भी अतिउत्साही-अज्ञानी को बापू की चप्पल या चष्मा पहना देने का रिवाज़ बढ़ता गया।
समय-समय पर ऐसे कथित अवतारों और उनसे लगाई गई उम्मीदों के टूटने के अनेक उदाहरण हमारे सामने हैं। सारी उम्मीदे किसी व्यक्ति में केंद्रित कर देने के नतीजे अक्सर निराषा-जनक रहे हैं। जबरन फुलाये गुब्बारे की हवा कुछ कम होते ही उससे मोहभंग का दौर शुरू होने लगता है। मगर न तो उसमें हवा भरते वक्त और ना ही उसके पिलपिले होते जाने की प्रक्रिया में इस बात पर गौर किया जाता है कि बदलाव के लिए महज व्यक्तिगत ईमानदारी, कर्मठता और सादगी ही काफी नहीं है। परिवर्तन के लिए सुचिंतित विचारधारा और संभावित उपायों की एक ब्ल्यू-प्रिंट की भी दरकार होती है। 

हाल के बरसों में अरविेद केजरीवाल इसी तरह उछले। उनकी खासियते वे थी, जिनके पीछे अमेरिकी वैभव का आकांक्षी हमारा शिक्षित शहरी मध्यमवर्ग पागल है। प्रोद्योगिकी के विषिष्ट सुविधा संपन्न शिक्षण-संस्थानों और रसूखदार प्रषासनिक सेवाएं। केजरीवाल आई.आई.टी. से दीक्षित हैं। केंद्रीय राजस्व सेवाओं के आला अधिकारी की नौकरी छोड़ कर वे जनसेवा में आए हैं। मध्यमवर्ग द्वारा निर्मित खांचे के हिसाब से प्रतिभा और त्याग, दोनो का संयोग!

 खुद की ईमानदारी और सादगी के उनके घनघोर आत्मप्रचार का जादू न केवल दिल्ली की जनता बल्कि अनेक सामाजिक कार्यकर्ताओं तक के सिर चढ़ कर बोला। सार्वजनिक-जीवन से भ्रष्टाचार समाप्त कर देने का एक ही टोटका है - लोकायुक्त। यह कह कर उन्होंने अपनी छवि चमकायी थी । अण्णा हजारे के चेहरे पीछे उस एकल-मुद्दा आंदोलन को किसने नियंत्रित-निर्देषित किया था, षुरू से ही संदिग्ध था। पहले अण्णा को माया-मण्डित किया गया। हालांकि तथ्य ये थे कि अपनी पंचायत में वे अलोकतांत्रिक और मनमानी न्याय-प्रणाली चलाते रहे हैं। खान-पान संबंधी उनके दकियानुसी आग्रहों को भी सफाई से छिपाया गया था। उनकी ग्रामीण बनक और रालेगण सिद्धी जैसे एक गांव को चमन बना देने की कथाओं के अति बखान से निर्मित उनकी मूर्ति जल्द ही धराषायी हुई।

 पहले राजनीति को गरियाते हुए आखिर में सनसनीखेज अंदाज़ में केजरीवाल ने एक राजनीतिक दल बनाया। जिसमें जन-सहभागिता का डंका तो खूब पीटा गया किंतु जो पहले ही दिन से हाईकमान-छाप राजनीतिक संस्कृति की परस्ती में था। अतिवामपंथियों, लोहियावादियों, गांधीवादियों, उदारवाद-समर्थक पत्रकारों से लगा कर दक्षिणपंथी भावनाओं को पोसने वाले मंचीय-कविता के तुकबाजों  से सजे उस दल को तब भानुमति का पिटारा कहने पर षहरी मध्यमवर्ग खूब मज्जमत करता था। आजादी की लड़ाई के दौरान बने-संवरे कांग्रेस का हवाला दिया जाता था। जिसमें हर रंग की विचारधारा समाहित थी। दावा था कि यह दल बदलाव का हरकारा होने जा रहा है।

केजरीवाल के पास समस्याओं से निपटने का कोई कारगर वैचारिक खाका नहीं है। महज अच्छी मंषा, आत्मप्रचारित ईमानदारी या सादगी किसी आमूलचूल बदलाव के लिए नाकाफी है। छोटे और अमीर यूरोपीय देषों के विकास-माॅडल पर बेतरह समस्याओं से ग्रस्त विविध-रंगी भारतीय समाज का उद्धार संभव है, यह दावा भी अतिरंजित और अव्यवहारिक है। इन तथ्यों की अनदेखी की जाती रही। दिल्ली विधानसभा में केजरीवाल के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी को मिला बंपर समर्थन जल्द ही जाया होने लगा। योजनाओं और कामों को लेकर बनाया गया शुरूआती उत्साह न केवल दरकने लगा बल्कि भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद, गुटबाजी के आरोपों और समर्थ प्रतिद्वंद्वियों को दरकिनार कर देने, मनचाहे उम्मीदवारों को राज्यसभा भेज देने जैसे भारतीय राजनीति के बदनाम दृष्य भी वहां प्रगट होते गये।

केजरीवाल की बहुप्रचारित स्वच्छ छवि में ताजा दचक लगी है कि उन्होंने शिरोमणि अकाली दल के नेता पूर्व केंद्रीय मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया से लिखित माफी मांग ली है। पंजाब विधान सभा चुनावों के समय उन्होंने मजीठिया पर मादक पदार्थों की तस्करी के संगीन आरोप लगाये थे। जिससे मजीठिया ने उनके विरूद्ध मानहानि का मुकदमा ठोक दिया था। यह माफीनामा इशारा करता है कि आरोप लगाते वक्त केजरीवाल सनसनी फैला रहे थे। उनके पास पुख्ता प्रमाण न थे। केजरीवाल के इस कदम का उनकी पार्टी की पंजाब इकाई और उसके पदाधिकारियों ने खुल कर विरोध किया है। आरोप दाग देने के चलते वे पहले भी मानहानि के मुकदमों और वकील की फीस को लेकर विवादों में रहे हैं।

केजरीवाल का उफान अब उतर रहा है। उनकी चमक बहुत तेजी से फीकी पड़ रही है।  अपने जन्म के पांच बरसों में ही वैकल्पिक राजनीति की उम्मीद बता दिया जाने वाला राजनीतिक-दल पर अस्तित्व का संकट है। ऊंट के बैठने की करवट तो आगामी दिनों में साफ होगी, मगर इस प्रसंग से एक बार फिर आम लोगों के सामने एक सबक ग्रहण करने का मौका है कि जनतंत्र में व्यक्ति नहीं नीतियां और उन्हें लागू करने के तरीके मौजू होते हैं। वोट का उपयोग करते समय इस कसौटी का उपयोग ज़रूर किया जाना चाहिए।
 

अरविन्द केजरीवाल
दिल्ली विधान सभा चुनाव
AAP
पंजाब

Related Stories

मुंडका अग्निकांड: 'दोषी मालिक, अधिकारियों को सजा दो'

मुंडका अग्निकांड: ट्रेड यूनियनों का दिल्ली में प्रदर्शन, CM केजरीवाल से की मुआवज़ा बढ़ाने की मांग

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

‘आप’ के मंत्री को बर्ख़ास्त करने से पंजाब में मचा हड़कंप

हार्दिक पटेल का अगला राजनीतिक ठिकाना... भाजपा या AAP?

मुंडका अग्निकांड: सरकारी लापरवाही का आरोप लगाते हुए ट्रेड यूनियनों ने डिप्टी सीएम सिसोदिया के इस्तीफे की मांग उठाई

मुंडका अग्निकांड के लिए क्या भाजपा और आप दोनों ज़िम्मेदार नहीं?

मुंडका अग्निकांड: लापता लोगों के परिजन अनिश्चतता से व्याकुल, अपनों की तलाश में भटक रहे हैं दर-बदर

जम्मू में आप ने मचाई हलचल, लेकिन कश्मीर उसके लिए अब भी चुनौती

शाहीन बाग़ : देखने हम भी गए थे प तमाशा न हुआ!


बाकी खबरें

  • hafte ki baat
    न्यूज़क्लिक टीम
    सिंघू बार्डर हत्याकांड, भारत की भूख और राहुल शरणम् कांग्रेस
    16 Oct 2021
    किसान आंदोलन का सदरमुकाम समझे जाने वाले सिंघू बार्डर पर शुक्रवार की सुबह जिस व्यक्ति की नृशंस ढंग से हत्या हुई, वह तरनतारन से कुछ दिनों पहले कैसे निहंगो के टेंट में आया और क्यों आया; इसे कोई नहीं…
  • Essential Commodities Act
    न्यूज़क्लिक टीम
    Essential Commodities Act में संशोधन सलाह के बाद होने चाहिए थे
    16 Oct 2021
    पूर्व कृषि सचिव और भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण के चेयरमैन आशीष बहुगुणा ने न्यूज़क्लिक से एक ख़ास बातचीत में कहा कि केंद्र सरकार को स्टेकहोल्डरों से सलाह करने के बाद ही Essential…
  • Savarkar and Gandhi
    राजेंद्र शर्मा
    गांधी तूने ये क्या किया : ‘वीर’ को कायर कर दिया
    16 Oct 2021
    “गांधी जी ने दक्षिण अफ्रीका में बैठे-बैठे ही ताड़ लिया था कि उनके राष्ट्रपिता के आसन के लिए अगर किसी से खतरा हो सकता था, तो वीर सावरकर से ही हो सकता था। अगले ने सावरकर की वीरता में ही खोट डलवा दिया…
  • Urban Company
    न्यूज़क्लिक टीम
    Urban Company: बिज़नेस मॉडल पर उठते सवाल
    16 Oct 2021
    होम सर्विस मुहैया करवाने वाले प्लेटफॉर्म अर्बन कंपनी के खिलाफ बीती 8 अक्टूबर को महिला कर्मचारियों का एक बड़ा प्रदर्शन देखने को मिला. अर्बन कंपनी, इन महिलाओं को कर्मचारी न मानकर 'पार्टनर्स' की श्रेणी…
  • hunger
    अजय कुमार
    भारत वैश्विक भूख सूचकांक में शामिल 116 देशों के बीच 101 वें पायदान पर
    16 Oct 2021
    केवल 15 देश भारत से बुरे हाल में हैं जिनमें अफगानिस्तान, नाइजीरिया, मोजांबिक, सोमालिया जैसे देश शामिल हैं। 
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License