NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
झारखण्ड: जल-जंगल-ज़मीन की आवाज़ उठानेवाले हैं देशद्रोही?
अबकी बार ,झारखण्ड सरकार का सोशल एक्टिविस्टों पर वार!
अनिल अंशुमन
02 Aug 2018
pathalgadi jharkhand

“...मैं, नाम राजेश प्रसाद रजकIIIखूंटी थाना पुलिस निरीक्षक सह थाना प्रभारी, आज दिनांक 26.7.18 को 11:30 बजे खूंटी थाना कार्यालय कक्ष में अपना ब्यान दर्ज करता हूँ – 26.6.18 को घाघरा गाँव में पत्थलगड़ी समर्थकों द्वारा की गयी घटना के बाद से नियमित रूप से ऐसी गुप्त सूचना प्राप्त हो रही थी कि आदिवासी महासभा ए०सी० भारत सरकार कुटुंब परिवार के नाम से...लोगों को बहला-फुसलाकर धोखे में रखकर भारतीय संविधान में दिए गए प्रावधानों की गलत व्याख्या कर भोले-भाले ग्रामीणों को राष्ट्र विरोधी भाषण देकर एवं राष्ट्र विरोधी क्रिया कलापों के द्वारा बहकाकर ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम सभा एवं उसके अधिकार एवं कर्तव्यों की गलत व्याख्या की हैI…”                          

20 पन्नों की एफआईआर में लिखी बातें दर्शा रही हैं कि कैसे झारखण्ड की भाजपा सरकार अब राज्य में जल-जंगल और ज़मीन की लूट का विरोध करने वाले बौद्धिक व सामाजिक कार्यकर्त्ताओं को निशाना बनाने पर आमादा हैI पिछले 28 जुलाई को सरकार ने खूंटी थाना प्रभारी के नाम से जल-जंगल-ज़मीन का सवाल उठाने वाले 20 सोशल एक्टिविस्टों पर “देशद्रोह” का मुकदमा थोप दिया हैI बहाना बनाया है कि उक्त लोगों ने फेसबुक पर लिखे पोस्ट से ‘पत्थलगड़ी’ के लिए भोले भाले आदिवासियों को भड़काने का राष्ट्रविरोधी कृत्य किया हैI गौरतलब है कि यही धाराएँ पत्थलगड़ी अभियान के लोगों पर लगाकर उन्हें भी देशद्रोह का आरोपी बनाया गया हैI  

जिन 20 सामाजिक कार्यकर्त्ता – बुद्धिजीवियों पर देशद्रोह का मुकदमा किया गया है, सरकार द्वारा दर्ज FIR में इनमें के खिलाफ पत्थलगड़ी के किसी कार्यक्रम में शामिल होने का तथ्य नहीं प्रस्तुत किया गया हैI बल्कि आरोपित लोग मानवाधिकार कार्यकर्त्ता, लेखक, सरकारीकर्मी, बैंककर्मी, युवा सामाजिक कार्यकर्त्ता और जनप्रतिनिधि हैंI जिन्होंने अपने राज्य के एक जागरूक नागरिक की हैसियत से कभी कोई असामाजिक कार्य नहीं किया और अपने–अपने दायरे में सामाजिक मुद्दों के लिए आवाज़ उठाते रहें हैंI विशेषकर सात दशकों से भी अधिक समय की लम्बी लड़ाई से हासिल अपने झारखण्ड राज्य में जारी जल–जंगल-ज़मीन और खनिज की बेलगाम लूट और यहाँ के आदिवासियों व आम जन को विस्थापन–पलायन और बदहाली का शिकार बनानेवाली सरकार की नीतियों का विरोध करते रहें हैंI सरकार द्वारा देशद्रोही घोषित किये गए फादर स्टेन स्वामी लम्बे समय से झारखण्ड के जन आन्दोलनों से जुड़े हैं और वरिष्ठ मानवाधिकार कार्यकर्त्ता के रूप में जाने जाते हैंI वहीं विनोद कुमार, जो जाने–माने साहित्यकार होने के साथ-साथ आदिवासी सवालों को हमेशा लोकतान्त्रिक स्वर देते रहें हैंI इस प्रकार से अन्य सभी लोगों का यही अपराध है कि वे अपने राज्य और यहाँ के निवासियों की सरकार की जन विरोधी नीतियों से हो रही सुनियोजित दुर्दशा से क्षुब्ध हैंI जिसका इज़हार इन्होंने न तो कभी सड़क के हंगामे से किया और न ही कभी कोई अराजक–असामाजिक गतिविधि की, बस फेसबुक और सोशल साईट पर अपनी भावनाएँ व प्रतिक्रियाएँ व्यक्त कींI

दरअसल हाल के वर्षों में ‘अच्छे दिन’ और ‘सबका साथ, सबका विकास’ नारे के झांसे से सत्ता में काबिज़ होने वाली राजनीतिक धारा विकास के नाम पर जिस तरह की कवायाद में लिप्त है, उसमें उससे असहमति रखनेवाला हर शख्स “देशद्रोही” हैI आदिवासी समुदाय की जिस पत्थलगड़ी और उसे करने वालों को ये सरकार मीडिया से लेकर हर स्तर पर राष्ट्रविरोधी और संविधान विरोधी साबित करने पर तुली हैI इसे साबित करने के लिए कोई संवैधानिक सबूत तक नहीं प्रस्तुत कर सकी हैI जिन ग्रामीण आदिवासियों को यह गुमराह बताया जा रहा है, बार–बार उन्होंने सरकार को ग्राम सभा में आ कर अपनी बात साबित करने को बुलायाI लेकिन इसका कोई सकारात्मक जवाब देने की बजाय गांवों में पुलिस भर दी गयीI इन सारी कारगुजारियों को फेसबुक और सोशल साईट के ज़रिये हो रहे भंडाफोड़ से बौखलायी सरकार अब अभिव्यक्ति के इस रास्ते पर भी प्रतिबन्ध लगाना चाह रही हैI ताकि यहाँ जो कुछ भी हो रहा अथवा किया जा रहा है, उसकी सही खबर लोगों तक न जा सके और सरकार मीडिया के ज़रिये जो कुछ कहे या दिखाए, उसे ही सच माना जायेI इसलिए देशद्रोह का आरोप लगाने के पीछे एकमात्र मकसद है मनोवैज्ञानिक तौर पर लोगों में सत्ता का डर बैठनाI

सरकार के इस दमनकारी रवैये के खिलाफ आज झारखण्ड के व्यापक सामाजिक जन संगठन व उसके कार्यकर्त्ताओं के साथ–साथ सभी विपक्षी दल भी आवाज़ उठा रहें हैंI ‘देशद्रोह’ के मुकदमे की अविलम्ब वापसी तथा जन आन्दोलनों व सामाजिक कार्यकर्त्ताओं को फर्ज़ी मुकदमों में फँसाने और राज्य दमन को एक प्रमुख सवाल बनाकर सरकार को घेरने की मुहीम शुरू हो गयी हैI 

pathalgadi
Jharkhand
tribal rights

Related Stories

झारखंड: बोर्ड एग्जाम की 70 कॉपी प्रतिदिन चेक करने का आदेश, अध्यापकों ने किया विरोध

झारखंड : नफ़रत और कॉर्पोरेट संस्कृति के विरुद्ध लेखक-कलाकारों का सम्मलेन! 

झारखंड की खान सचिव पूजा सिंघल जेल भेजी गयीं

झारखंडः आईएएस पूजा सिंघल के ठिकानों पर छापेमारी दूसरे दिन भी जारी, क़रीबी सीए के घर से 19.31 करोड़ कैश बरामद

खबरों के आगे-पीछे: अंदरुनी कलह तो भाजपा में भी कम नहीं

आदिवासियों के विकास के लिए अलग धर्म संहिता की ज़रूरत- जनगणना के पहले जनजातीय नेता

‘मैं कोई मूक दर्शक नहीं हूँ’, फ़ादर स्टैन स्वामी लिखित पुस्तक का हुआ लोकार्पण

झारखंड: पंचायत चुनावों को लेकर आदिवासी संगठनों का विरोध, जानिए क्या है पूरा मामला

झारखंड : हेमंत सोरेन शासन में भी पुलिस अत्याचार बदस्तूर जारी, डोमचांच में ढिबरा व्यवसायी की पीट-पीटकर हत्या 

झारखंड रोपवे दुर्घटना: वायुसेना के हेलिकॉप्टरों ने 10 और लोगों को सुरक्षित निकाला


बाकी खबरें

  • yogi bulldozer
    सत्यम श्रीवास्तव
    यूपी चुनाव: भाजपा को अब 'बाबा के बुलडोज़र' का ही सहारा!
    26 Feb 2022
    “इस मशीन का ज़िक्र जिस तरह से उत्तर प्रदेश के चुनावी अभियानों में हो रहा है उसे देखकर लगता है कि भारतीय जनता पार्टी की तरफ से इसे स्टार प्रचारक के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है।”
  • Nagaland
    अजय सिंह
    नगालैंडः “…हमें चाहिए आज़ादी”
    26 Feb 2022
    आफ़्सपा और कोरोना टीकाकरण को नगालैंड के लिए बाध्यकारी बना दिया गया है, जिसके ख़िलाफ़ लोगों में गहरा आक्रोश है।
  • women in politics
    नाइश हसन
    पैसे के दम पर चल रही चुनावी राजनीति में महिलाओं की भागीदारी नामुमकिन
    26 Feb 2022
    चुनावी राजनीति में झोंका जा रहा अकूत पैसा हर तरह की वंचना से पीड़ित समुदायों के प्रतिनिधित्व को कम कर देता है। महिलाओं का प्रतिनिधित्व नामुमकिन बन जाता है।
  • Volodymyr Zelensky
    एम. के. भद्रकुमार
    रंग बदलती रूस-यूक्रेन की हाइब्रिड जंग
    26 Feb 2022
    दिलचस्प पहलू यह है कि यूक्रेन के राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने ख़ुद भी फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से सीधे पुतिन को संदेश देने का अनुरोध किया है।
  • UNI
    रवि कौशल
    UNI कर्मचारियों का प्रदर्शन: “लंबित वेतन का भुगतान कर आप कई 'कुमारों' को बचा सकते हैं”
    26 Feb 2022
    यूनाइटेड न्यूज ऑफ इंडिया ने अपने फोटोग्राफर टी कुमार को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान कई पत्रकार संगठनों के कर्मचारी भी मौजूद थे। कुमार ने चेन्नई में अपने दफ्तर में ही वर्षों से वेतन न मिलने से तंग आकर…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License