NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
झारखण्ड: रसोईयाकर्मियों की मांगों को अनसुना कर रही है सरकार
यदि 22 अक्टूबर को झारखण्ड की रघुवर सरकार रसोईयाकर्मियों की मांगों पर गंभीरता से विचार कर कोई सकारात्मक फैसला नहीं करेगी, तो इसके बाद ‘रोजगार का अधिकार दो या मौत दो!’ का आखिरी रास्ता अपनाया जायेगाI
अनिल अंशुमन
21 Oct 2018
Jharkhand midday meal workers' protest

त्योहारों के मौसम में जब सर्वत्र भव्य पूजा पंडालों में कार्यक्रम हो रहे थे तो झारखण्ड राज्य के मुख्यमंत्री जी राजधानी से जाकर अपने क्षेत्र जमशेदपुर के कई स्थानों पर खुद पूजा–अर्चना कर लोगों से धार्मिक भावनाओं का आदान–प्रदान रहे थेI लेकिन राज्य की राजधानी स्थित राजभवन के समक्ष धरने पर बैठी राज्य की रसोईयाकर्मी महिलाओं के दुर्गा पूजन कार्यक्रम को उन्होंने झांकना तक गंवारा नहीं हुआI शायद इसलिए कि वे जानते थे कि अगर वहाँ गए तो सवालों की बौछारों का सामना करना पड़ेगा कि आखिर क्यों उनकी चुप्पी के कारण त्यौहार के समय पर अपने घर–परिजनों से दूर रहकर राजभवन के सामने धरना देना पड़ रहा हैI 17 अक्टूबर को रसोईयाकर्मी महिलाओं ने अपने आन्दोलन को दुर्गा पूजन का रूप देते हुए ‘कन्या पूजन’ भी किया और 22 अक्टूबर तक शांतिपूर्ण धरना देते हुए अराधना कार्यक्रम भी चलाने की घोषणा की I  

झारखण्ड रसोईया/संयोजिका संघ के बैनर तले अपनी 15 सूत्री मांगों को लेकर राज्य के सभी सरकारी प्राइमरी स्कूलों में कार्यरत रसोईयाकर्मी/सहायिका महिलाएं पिछले 25 सितम्बर से राजभवन के समक्ष धरना दे रही हैंI इस दौरान विभागीय मंत्रालय से लेकर राज्य के मुख्यमंत्री कार्यालय तक ज्ञापनों की भरमार लगाने के बावजूद आज तक कोई सकारात्मक आश्वासन नहीं पा सकी हैंI सरकार और विभागीय चुप्पी से झुंझलाकर सड़कों पर आक्रोश प्रदर्शित करने का साहस किया तो पुलिसिया दमन करने में तनिक भी देर नहीं की गयीI जिसका उदाहरण पिछले 9 अक्तूबर को उस समय दिखा जब सैकड़ों रसोईयाकर्मी महिलाओं का जुलूस मुख्यमंत्री आवास तक अपनी फरियाद लेकर जाना चाहा तो पुरुष पुलिसवालों ने रास्ते में ही रोककर बुरी तरह पीट दियाI घायल और अपमानित इन महिलाओं से न तो सरकार का कोई प्रतिनिधि मिलने आया और न ही विभागीय आला अधिकारियों में से किसी ने हाल चाल तक पूछाI जिससे क्षुब्ध होकर 10 अक्तूबर से राज्य के सभी सरकारी स्कूलों में खाना बनाने की हड़ताल की घोषणा कर दी गयीI साथ ही यह कहना पड़ा कि इस बार वे दशहरा राजभवन के सामने धरने पर बैठकर ही मनाएंगी और दुर्गा पूजा भी वहीं करेंगीI फलतः पूजा की छुट्टी होने के पूर्व ही सभी सरकारी प्राइमरी स्कूलों में ग्रामीण बच्चों को मिलने वाला मध्यान भोजन बंद हो गया लेकिन तब भी सरकार की हठधर्मिता कायम रहीI

प्रदेश के 37,000 सरकारी प्राइमरी स्कूलों के बच्चों को 1 लाख 20 हज़ार रसोईयाकर्मियों द्वारा प्रतिदिन मध्यान भोजन खिलाया जाता हैI हाल ही में राज्य सरकार द्वारा ग्रामीण इलाकों के 10 हज़ार से भी अधिक प्राइमरी स्कूलों को बंद कर दूसरे स्कूलों में मर्ज़ किये जाने से इन सभी स्कूलों में कार्यरत रसोईयाकर्मी जिनमें से अधिकाँश ग्रामीण महिलायें हैं, सबके सामने भूखों मरने की नौबत आ गयीI सरकार द्वारा इन स्थितियों से आँखें मूंद लेने के पीछे आरोप यही लगाए जा रहें हैं कि सरकार अब सभी सरकारी स्कूलों में बच्चों को खाना खिलाने का काम निजी कंपनियों को देने की साज़िश कर रही हैI जैसा बगल के भाजपा शासित राज्य छत्तीसगढ़ में रमण सरकार कर रही हैI जिन्होंने अपने राज्य के सभी सरकारी प्राइमरी स्कूलों में खाना बनाने का ठेका निजी कंपनियों को दे रखा हैI झारखण्ड रसोईया/सहायिका संघ ने अपनी 15 सूत्री मांगों में बंद किये गए स्कूलों की बेरोज़गार कर दी गयीं सभी रसोईयाकर्मियों को अविलम्ब नौकरी में फिर से बहाल करने, तामिलनाडू की तर्ज़ पर रसोइया को चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी में शामिल किया जाये, केंद्र सरकार द्वारा अनुशंसित 18,000 रु प्रतिमाह मानदेय देना तथा साल में दो वर्दी देने जैसी ने कई प्रमुख मांगें रखी हैंI

आन्दोलन का नेतृत्व कर रहे झारखण्ड रसोईया/सहायिका संघ के नेता अजित प्रजापति का कहना है कि, “मात्र 88 रसोईया को ही नियमित और स्थायी मानदेय देकर सरकार झूठ का ढिंढोरा पीट रही है कि सबको उचित पैसा दिया जा रहा हैI जबकि ज़मीनी सच्चाई ये है कि सभी रसोईया को मिलने वाला प्रतिदिन 40 रु. का मानदेय भी पिछले कई महीनों से बंद पड़ा हैI जिससे हर दिन स्कूल में दूसरों के बच्चों को खाना बनाकर खिलाने वाली रसोईयाकर्मियों को अपने बच्चों को भरपेट भोजन देने के लाले पड़ रहे हैंI इन्हीं त्रासद स्थितियों ने उन्हें मजबूर कर दिया है कि उन्हें राजभवन के सामने धरना पर बैठकर सरकार से गुहार लगानी पड़ रही हैI” उन्होंने यह भी कहा कि “ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में कम छात्र होने का बहाना दिखाकर सरकार द्वारा 10 हज़ार स्कूलों को बंद कर देने के पीछे दरअसल ग्रामीण स्कूली व्यवस्था के निजीकरण की साज़िश हैI इसीलिए सरकार हमारी मांगों को सुनना ही नहीं चाहती हैI”

देखा जाए तो भाजपा शासित प्राय: सभी राज्यों में मानदेय पर काम करने वाले महिला व पुरुषकर्मियों की हालत गुलामों जैसी ही कर दी गयी हैI जिनके सामने आज ‘करो या मरो’ की स्थिति हो हैI आवाज़ न उठाने पर बेकारी है और आवाज़ उठाने पर राज्य के प्रकोप का खतरा हैI यही कारण है कि आज जब झारखण्ड प्रदेश की रसोईया/सहायिकाएं अपने स्थायी रोज़गार और उचित वेतन की मांगों को लेकर आंदोलनरत हैं, तो राज्य के पैरा-शिक्षक संघ व सरकारी मित्रक संघ समेत अन्य सभी मानदेयकर्मी तबकों के कर्मचारी संगठन भी खुलकर साथ और समर्थन दे रहे हैंI वहीं एक्टू समेत कई अन्य राष्ट्रीय स्तर की मज़दूर यूनियन भी इनके आन्दोलन के समर्थन में सड़कों पर उतरे हैंI आन्दोलनरत रसोईयाकर्मियों का कहना है कि यदि 22 अक्टूबर को झारखण्ड की रघुवर सरकार इनकी मांगों पर गंभीरता से विचार कर कोई सकारात्मक फैसला नहीं करेगी तो इसके बाद –- ‘रोजगार का अधिकार दो या मौत दो!’ का आखिरी रास्ता अपनाया जायेगाI

mid day meal workers
Workers' Protest
Anti Labour Policies
Jharkhand
raghuvar govt
minimum wage
BJP
scheme workers

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

गुजरात: भाजपा के हुए हार्दिक पटेल… पाटीदार किसके होंगे?


बाकी खबरें

  • LAW AND LIFE
    सत्यम श्रीवास्तव
    मानवाधिकारों और न्याय-व्यवस्था का मखौल उड़ाता उत्तर प्रदेश : मानवाधिकार समूहों की संयुक्त रिपोर्ट
    30 Oct 2021
    29 अक्तूबर को जारी हुई एक रिपोर्ट ‘कानून और ज़िंदगियों की संस्थागत मौत: उत्तर प्रदेश में पुलिस द्वारा हत्याएं और उन्हें छिपाने की साजिशें’ हमें उत्तर प्रदेश में मौजूदा कानून व्यवस्था के हालात को बेहद…
  • migrant
    सोनिया यादव
    महामारी का दर्द: साल 2020 में दिहाड़ी मज़दूरों ने  की सबसे ज़्यादा आत्महत्या
    30 Oct 2021
    एनसीआरबी के आँकड़ों के मुताबिक़ पिछले साल भारत में तकरीबन 1 लाख 53 हज़ार लोगों ने आत्महत्या की, जिसमें से सबसे ज़्यादा तकरीबन 37 हज़ार दिहाड़ी मजदूर थे।
  • UP
    लाल बहादुर सिंह
    आंदोलन की ताकतें व वाम-लोकतांत्रिक शक्तियां ही भाजपा-विरोधी मोर्चेबन्दी को विश्वसनीय विकल्प बना सकती है, जाति-गठजोड़ नहीं
    30 Oct 2021
    पिछले 3 चुनावों का अनुभव गवाह है कि महज जातियों के जोड़ गणित से भाजपा का बाल भी बांका नहीं हुआ, इतिहास साक्षी है कि जोड़-तोड़ से सरकार बदल भी जाय तो जनता के जीवन में तो कोई बड़ी तब्दीली नहीं ही आती, संकट…
  • Children playing in front of the Dhepagudi UP school in their village in Muniguda
    राखी घोष
    ओडिशा: रिपोर्ट के मुताबिक, स्कूल बंद होने से ग्रामीण क्षेत्रों में निम्न-आय वाले परिवारों के बच्चे सबसे अधिक प्रभावित
    30 Oct 2021
    रिपोर्ट इस तथ्य का खुलासा करती है कि जब अगस्त 2021 में सर्वेक्षण किया गया था तो ग्रामीण क्षेत्रों में केवल 28% बच्चे ही नियमित तौर पर पठन-पाठन कर रहे थे, जबकि 37% बच्चों ने अध्ययन बंद कर दिया था।…
  • climate change
    संदीपन तालुकदार
    जलवायु परिवर्तन रिपोर्ट : अमीर देशों ने नहीं की ग़रीब देशों की मदद, विस्थापन रोकने पर किये करोड़ों ख़र्च
    30 Oct 2021
    रिपोर्ट के अनुसार, विकसित देश भारी हथियारों से लैस एजेंटों को तैनात करके, परिष्कृत और महंगी निगरानी प्रणाली, मानव रहित हवाई प्रणाली आदि विकसित करके पलायन को रोकने के लिए एक ''जलवायु दीवार'' का…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License