NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
झारखंड : दल-बदल के सियासी कीचड़ में खिला ‘कमल’
झारखंड विधानसभा के स्पीकर ने विधानसभा न्यायाधिकरण के अध्यक्ष की हैसियत से महज 2 मिनट में दलबदल कानून का सामना कर रहे 6 आरोपी विधायकों को ‘क्लीन चिट’ दे दी।
अनिल अंशुमन
27 Feb 2019
jharkhand assembly
Image Courtesy: jharkhandstatenews.com

प्राकृतिक रूप से यदि कीचड़ में कमल खिले तो सबको भाए। लेकिन जब मामला सियासत में फैली ‘क्षुद्र राजनीति’ के कीचड़ का हो तब इसमें किसी भी कमल का खिलना, लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी है। 20 फरवरी को झारखंड के वर्तमान स्पीकर महोदय के कारनामे ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया। जिन्होंने विधानसभा न्यायाधिकरण के अध्यक्ष की हैसियत से महज 2 मिनट में दलबदल कानून का सामना कर रहे 6 आरोपी विधायकों को ‘क्लीन चिट’ दे दी। जिससे न सिर्फ इन सबों की विधायकी बचा दी बल्कि दल–बदल के अवसरवादी सियासी कीचड़ में “स्थिर सरकार” के कमल को पूरी मजबूती से खिलाए रखा।

ज्ञात हो कि 2014 के झारखंड विधानसभा चुनाव में किसी भी एक दल को पूर्ण बहुमत नहीं मिल सका था। आदर्श संसदीय मर्यादा की सदैव दुहाई देनेवाली भाजपा ने ‘जोड़–तोड़ की राजनीतिक डील’ से झारखंड विकास मोर्चा के 6 विधायकों को तोड़कर सदन में बहुमत साबित कर लिया। दिखावे के तौर पर 9 फरवरी ‘15 को इनके द्वारा स्पीकर के पास लिखित आग्रह करवा दिया कि उन्हें सदन में अलग से बैठने की अनुमति दी जाय। योजनानुसार स्पीकर महोदय ने भी फौरन संज्ञान लेकर अनुमति दे दी। इसके खिलाफ झारखंड विकास मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष और महासचिव ने विधानसभा न्यायाधिकरण में अपील दायर कर से इन सभी विधायकों पर ‘दल बदल कानून’ के तहत कार्रवाई करने की मांग की। लोकतान्त्रिक तक़ाज़ों के निर्वाहन के तहत न्यायाधिकरण में 12 फरवरी ‘15 से 12 दिसंबर ‘18 तक इस मामले की सुनवाई भी की गयी। जिसमें झारखंड विकास मोर्चा (जेवीएम) की ओर से इन विधायकों के दल–बदल से जुड़े सारे साक्ष्य पेश किए गए। जबकि दल छोड़ने वाले विधायकों की ओर से यह तर्क दिया गया कि उन्होंने जेवीएम का भाजपा में विलय कर दिया है। हैरानी की बात है कि सुनवाई कर रहे न्यायाधिकरण के अध्यक्ष जी ने आरोपी विधायकों के ही तर्कों को सही करार देकर जेवीएम नेताओं के सभी तर्कों व सबूतों को अमान्य कर दिया।  

देश की संसदीय प्रणाली परंपरा में यह एक अजूबा ही कहा जाएगा कि एक राजनीतिक दल जिसकी ज़मीनी सक्रियता सदन और उसके बाहर एक विपक्ष की रूप में होने के बावजूद उसे सत्ता पक्ष का अंग घोषित कर दिया गया। भाजपा के प्रवक्तागण इन विडम्बनापूर्ण स्थितियों के लिए हमेशा झारखंड प्रदेश के निर्दलीय विधायकों और विपक्षी दलों को ज़िम्मेवार बताते रहे हैं। साथ ही उन पर ‘खरीद–फरोख्त और अवसरवादी जोड़–तोड़ की राजनीति’ करने का भी आरोप लगाते रहे हैं। क्योंकि इस प्रदेश की पिछली कई सरकारें जोड़–तोड़ की अवसरवादी राजनीति से ही बनतीं और टूटतीं रहीं हैं। लेकिन राज्य की जनता के सामने यह भी एक खुला हुआ सच है कि इस गंदी राजनीति का सफल खेल सबसे अधिक भाजपा ने ही खेला है। मिसाल के तौर पर 2003 में सबने देखा कि किस प्रकार से बहुमत हासिल करने के लिए भाजपा द्वारा 4 विधायकों को रातों रात निजी प्लेन से जयपुर ले जाया गया था। जहां उनसे ‘डील’ तय होने बाद ही वापस लाया गया और अर्जुन मुंडा की सरकार का बहुमत कराया गया। इसी घटना से प्रदेश की सत्ता–सियासत में जोड़–तोड़ से सरकार बनाने की अवसरवादी राजनीति की शुरुआत हुई। जिसका खामियाजा सबसे पहले भाजपा को ही भुगतना पड़ा क्योंकि कुछ महीनों में उन्हीं विधायकों ने भाजपा से सीखा हुआ दांव उसी पर चलाकर दूसरी सरकार बनवा दी। हालांकि अवसरवादी सत्ता सियासत के इस खेल में भाकपा-माले को छोडकर कांग्रेस समेत प्रायः सभी विपक्षी दलों ने खुलकर भाग लिया। इस खेल में हुई पराजय से बौखलाई भाजपा ने एक स्वर से जोड़–तोड़ से बनी विपक्षी सरकारों को कोसते हुए स्वयं को आदर्श राजनीति का संत घोषित कर राज्य की बदहाली का सारा ठीकरा इन्हीं पर फोड़ने लगी। 2014 का विधानसभा चुनाव ‘स्थिर सरकार’ के नारे पर लड़ा गया लेकिन बात तब भी नहीं बनी और सदन में बहुमत का आंकड़ा नहीं मिल सका। हालांकि आजसू के समर्थन से सरकार तो किसी तरह बन गयी थी लेकिन झारखंड विकास मोर्चा के 6 विधायकों को तोड़ लेने के बाद ही जाकर भाजपा की “स्थिर सरकार” कायम हो सकी।

झारखंड संभवतः देश का पहला ऐसा प्रदेश होगा, जिसके गठन के महज 18 वर्षों में सात बार सरकारें बन चुकी हैं। दल–बदल की अवसरवादी राजनीति के हमाम में यहाँ सबसे अधिक बेपर्दा होनेवाली राजनीतिक पार्टी भाजपा ही रही है। विधानसभा न्यायाधिकरण में अबतक दर्ज़ हुए दल-बदल के 28 मामलों में सबसे अधिक मामले भाजपा गठबंधन की सरकारों से ही जुड़े रहें हैं। वर्तमान की जिस ‘स्थिर सरकार’ के विकास की चर्चा खुद देश के प्रधानमंत्री घूम घूम कर कर रहें हैं, इसके गठन में 6 दल बदलू विधायकों की ‘डील’ के मामले को गायब कर देते हैं। जिनपर तत्काल मामला दर्ज़ होने के बावजूद चार बरस दो महीने तक सिर्फ सुनवाई ही होती रही। अब जबकि वर्तमान विधानसभा की अवधि समाप्त होने को है तो नतीजा भाजपा के पक्ष में सुनाकर न्यायाधिकरण की औपचारिकता पूरी कर दी गयी। इन्हीं संदर्भों में लोकतांत्रिक मूल्यों और नैतिक आदर्शों की हमेशा दुहाई देने वाली भाजपा की असलियत झारखंड में ही आसानी से देखी–समझी जा सकती है।

Jharkhand
jharkhand assembly
BJP Govt
Raghubar Das
DAL-BADAL
Defection

Related Stories

झारखंड: बोर्ड एग्जाम की 70 कॉपी प्रतिदिन चेक करने का आदेश, अध्यापकों ने किया विरोध

झारखंड : नफ़रत और कॉर्पोरेट संस्कृति के विरुद्ध लेखक-कलाकारों का सम्मलेन! 

झारखंड की खान सचिव पूजा सिंघल जेल भेजी गयीं

झारखंडः आईएएस पूजा सिंघल के ठिकानों पर छापेमारी दूसरे दिन भी जारी, क़रीबी सीए के घर से 19.31 करोड़ कैश बरामद

खबरों के आगे-पीछे: अंदरुनी कलह तो भाजपा में भी कम नहीं

आदिवासियों के विकास के लिए अलग धर्म संहिता की ज़रूरत- जनगणना के पहले जनजातीय नेता

‘मैं कोई मूक दर्शक नहीं हूँ’, फ़ादर स्टैन स्वामी लिखित पुस्तक का हुआ लोकार्पण

झारखंड: पंचायत चुनावों को लेकर आदिवासी संगठनों का विरोध, जानिए क्या है पूरा मामला

झारखंड : हेमंत सोरेन शासन में भी पुलिस अत्याचार बदस्तूर जारी, डोमचांच में ढिबरा व्यवसायी की पीट-पीटकर हत्या 

झारखंड रोपवे दुर्घटना: वायुसेना के हेलिकॉप्टरों ने 10 और लोगों को सुरक्षित निकाला


बाकी खबरें

  • Sudan
    पवन कुलकर्णी
    कड़ी कार्रवाई के बावजूद सूडान में सैन्य तख़्तापलट का विरोध जारी
    18 Jan 2022
    सुरक्षा बलों की ओर से बढ़ती हिंसा के बावजूद अमेरिका और उसके क्षेत्रीय और पश्चिमी सहयोगियों के साथ-साथ संयुक्त राष्ट्र भी बातचीत का आह्वान करते रहे हैं। हालांकि, सड़कों पर "कोई बातचीत नहीं, कोई समझौता…
  • CSTO
    एम. के. भद्रकुमार
    कज़ाख़िस्तान में पूरा हुआ CSTO का मिशन 
    18 Jan 2022
    रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की बुधवार को क्रेमलिन में रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगु के साथ कज़ाख़िस्तान मिशन के बारे में कलेक्टिव सिक्योरिटी ट्रीट ऑर्गनाइजेशन की “वर्किंग मीटिंग” के बाद दी गई चेतावनी…
  • election rally
    रवि शंकर दुबे
    क्या सिर्फ़ विपक्षियों के लिए हैं कोरोना गाइडलाइन? बीजेपी के जुलूस चुनाव आयोग की नज़रो से दूर क्यों?
    18 Jan 2022
    कोरोना गाइडलाइंस के परवाह न करते हुए हर राजनीतिक दल अपनी-अपनी तरह से प्रचार में जुटे हैं, ऐसे में विपक्षी पार्टियों पर कई मामले दर्ज किए जा चुके हैं लेकिन बीजेपी के चुनावी जुलूसों पर अब भी कोई बड़ी…
  • Rohit vemula
    फ़र्रह शकेब
    स्मृति शेष: रोहित वेमूला की “संस्थागत हत्या” के 6 वर्ष बाद क्या कुछ बदला है
    18 Jan 2022
    दलित उत्पीड़न की घटनायें हमारे सामान्य जीवन में इतनी सामान्य हो गयी हैं कि हम और हमारी सामूहिक चेतना इसकी आदी हो चुकी है। लेकिन इन्हीं के दरमियान बीच-बीच में बज़ाहिर कुछ सामान्य सी घटनाओं के प्रतिरोध…
  • bank
    प्रभात पटनायक
    पूंजीवाद के अंतर्गत वित्तीय बाज़ारों के लिए बैंक का निजीकरण हितकर नहीं
    18 Jan 2022
    बैंकों का सरकारी स्वामित्व न केवल संस्थागत ऋण की व्यापक पहुंच प्रदान करता है बल्कि पूंजीवाद की वित्तीय प्रणाली की स्थिरता के लिए भी आवश्यक है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License