NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
झारखंड : फिर एक बार मॉबलिंचिंग का वार, आदिवासी हुए शिकार
चुनाव के संवेदनशील माहौल में आम हिन्दू वोटरों की नाराजगी का खतरा कोई पार्टी नहीं मोल लेना चाहती । दूसरे , जिस प्रकार से रामगढ़ मॉबलिंचिंग कांड के अभियुक्तों को फास्ट ट्रैक कोर्ट से सज़ा होने के पश्चात हाईकोर्ट से जमानत दिये जाने पर भाजपा के केंद्रीय मंत्री द्वारा सार्वजनिक रूप से अभिनन्दन किया गया , इसने अपराध करनेवालों को बेलगाम बना दिया।
अनिल अंशुमन
16 May 2019
jharkhnd

आखिरकार राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग को राज्य के गुमला ज़िला स्थित डुमरी प्रखण्ड के जुरमु गाँव के आदिवासियों पर हुए ‘ मॉबलिंचिंग   कांड ‘ पर संज्ञान लेकर 8 मई को झारखंड डीजीपी व ज़िला एसपी से 15 दिनों के अंदर जवाब मांग है । बीते 11 अप्रैल को तथाकथित गौ – रक्षकों की संगठित हत्यारी जमात ने मरे हुए बैल का मांस काट रहे आदिवासियों पर ‘ जय श्री राम और जय बजरंगबली ‘ का नारा लगाते हुए हमला बोल दिया । जिसमें चार आदिवासी गंभीर रूप से घायल हो गए जिसमें से एक की मौत हो गयी। इस सुनियोजित कांड पर संज्ञान लेकर दोषियों को सज़ा देने की मांग को लेकर  सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने आयोग में याचिका दायर की थी । आयोग के नोटिश दिये जाने पर भी प्रशासन का गंभीर नहीं होना यह दर्शाता है कि पिछले अन्य कांडों की तरह इस कांड के मुजरिमों को भी भाजपा शासन का संरक्षण मिला हुआ है । जबकि आसपास के स्थानीय लोगों व आदिवासियों में घटना को लेकर काफी आक्रोश है जो सिर्फ चुनावी माहौल के कारण फिलहाल दबा हुआ है । 

मौबलिंचिंग 1_0.PNG
  उक्त कांड के शिकार जेनेरियस मिंज के अनुसार 11 अप्रैल को साप्ताहिक हाट(बाजार )का दिन था । उनके कहे अनुसार हमलोग ( प्रकाश लकड़ा , पीटर लकड़ा , बेलासियुस तिर्की व मैं )गाँव के ही एक आदिवासी के बैल की दुर्घटनावश मृत्यु हो जाने पर  गाँव की नदी किनारे उस बैल का मांस काटकर चमड़ा निकाल रहे थे । जिसे देखकर के जैरागी गाँव के साहूकार परिवार व कई अन्य लोगों के हथियारबंद समूह ने गौ हत्या का आरोप लगाकर हमलोगों पर हमला बोल दिया । हमारे बार बार कहते रहने के बाद भी कि हम गाय नहीं बल्कि मरे हुए बैल को काट रहे हैं , किसी ने एक नहीं सुनी और पीटने लगे । ये जानते हुए भी कि हम ईसाई समाज के हैं फिर भी हमलोगों से ‘ जय  श्रीराम और जय  बजरंगबली ‘ के नारे लगवाये गए और नहीं बोलने पर खूब पीटा गया । घंटों पीटने के बाद हमें घसीटकर अपने गाँव ले गए और वहाँ भी काफी पिटाई करके देर रात बस में लादकर डुमरी थाना के पास छोड़ आए । पिटाई से बुरी तरह घायल हुए प्रकाश लकड़ा की सांसें उस समय चल रहीं थी और यदि समय पर इलाज हो जाता तो वह नहीं मरता । सुबह में बाइक से दो हमलावर आए और थाना में कहा कि – चार गौकशी करनेवालों को पड़कर लाये हैं ... तब पुलिसवाले आए और मृतक प्रकाश समेत हम सबों को अस्पताल ले गए । पुलिस ने डाक्टर से रिपोर्ट में प्रकाश लकड़ा को ज़िंदा लिखने को कहा लेकिन डाक्टर ने मना कर दिया । इस दौरान हमें देखने पँहुचे हमारे परिजनों को हमलोगों से नहीं मिलने दिया गया । पुलिस ने हमलावारों पर कोई कार्रवाई करने की बजाय स्थानीय चौकीदार के नाम से झूठा बयान दर्ज़ कर हम सबों पर गौ हत्या का मुकादमा कर दिया । सूचना है कि घायल आदिवासियों ओर से मुकदमा दर्ज किए जाने पर दो नामजद हमलावरों को गिरफ्तार करने की औपचारिकता हुई है । 

 इस जघन्य कांड की खबर प्रसारित करते हुए बीबीसी ने सत्ताधारी भाजपा समेत विपक्ष के राजनीतिक दलों व उनके नेताओं के वहाँ नहीं पहुँचने पर काफी हैरानी जताई  । साथ ही सवाल भी उठाया कि इस कांड समेत राज्य में गौ रक्षा व सांप्रदायिक हिंसा के नाम पर अबतक कई निर्दोषों की जानें लीं जा चुकी हैं तो इसे झारखंड में लोकसभा चुनाव 2019 का मुद्दा क्यों नहीं बनाया जा रहा ? जबकि बीजेपी खुलकर सांप्रदायिक ध्रुवीकरण से राज्य में मुस्लिम – ईसाई व आदिवासियों को लिंचिंग का शिकार बना रही है । 
ये  चिंता वाजिब है और इस संकट के समाधान हेतू विपक्ष और तथाकथित धर्मनिरपेक्ष कहलाने वाले राजनीतिक दलों के नेताओं से उनकी भूमिका को लेकर जवाब मांगा ही जाना चाहिए । क्योंकि इसके पूर्व में भी बालूमाथ कांड से लेकर रामगढ़ मॉबलिंचीग  कांड व सांप्रदायिक हिंसा की सरकार संरक्षित  दर्जनों घटनाएँ हो चुकी हैं । जिसके खिलाफ विपक्ष व सेक्युलर दलों के नेताओं के निंदा के बयान व औपचारिक विरोध कार्यक्रम तो हुए लेकिन जमीनी स्तर पर कोई बड़ा सामाजिक जनदबाव खड़ाकर दोषियों को सज़ा नहीं दिलाई जा सकी । 
चर्चा यही है कि चुनाव के संवेदनशील माहौल में आम हिन्दू वोटरों की नाराजगी का खतरा कोई पार्टी नहीं मोल लेना चाहती । दूसरे , जिस प्रकार से रामगढ़ मॉबलिंचीग कांड के अभियुक्तों को फास्ट ट्रैक कोर्ट से सज़ा होने के पश्चात हाईकोर्ट से जमानत दिये जाने पर भाजपा के केंद्रीय मंत्री द्वारा सार्वजनिक रूप से अभिनन्दन  किया गया , इसने अपराध करनेवालों को बेलगाम बना दिया । 
इसके अलावे तीसरा और सबसे चिंताजंक पहलू है , राज्य की आदिवासी व अन्य सामाजिक समुदायों के बढ़ते आपसी अलगाव की स्थिति का होना । जो अपराध करनेवालों को सामाजिक तौर पर रोकने में पूरी तरह असफल दिख रहा है । उदाहरण के तौर पर, जब बालूमाथ में मुस्लिमों के साथ मॉबलिंचिंग  कांड हुआ तो स्थानीय से लेकर राजधानी तक अधिकांश प्रमुख आदिवासी सामाजिक संगठन व कार्यकर्ता खामोश रहे । लेकिन वहीं जब इस बार गुमला में आदिवासियों के साथ मॉबलिंचिंग  कांड हुआ तो आदिवासी संगठन व सामाजिक कार्यकर्त्ता सड़कों पर उतरे तो मुस्लिम खामोश रहे । जाहिर है कि ऐसे में शासन – प्रशासन द्वार संरक्षित इन कांडों के खिलाफ कोई भी व्यापक और बड़े जन दबाव का खड़ा होना मुश्किल है ।
 हालांकि वामपंथी दल व संगठनों तथा व्यापक नज़रिये वाले कई सामाजिक संगठन व कार्यकर्त्ताओं के सामाजिक एकता आधारित विरोध खड़ा करने की कोशिशें जारी हैं । लेकिन विभाजनकारी व हत्यारी ताकतों के संगठित और सुनियोजित हमलों के खिलाफ अलग अलग सामुदायों में बंटकर विरोध कर रही सामाजिक ताकतों के वृहत एकीकरण कि चुनौती अब भी सबसे महत्वपूर्ण कार्य बना हुआ है । अन्यथा सुनियोजित हादसों को झेलते रहना सबकी नियति ही बनी रहेगी। 
 

General elections2019
Jharkhand
jharkhand tribals
mob lynching
Cow Vigilante
cow terrorism

Related Stories

भारत में धार्मिक असहिष्णुता और पूजा-स्थलों पर हमले को लेकर अमेरिकी रिपोर्ट में फिर उठे सवाल

झारखंड: बोर्ड एग्जाम की 70 कॉपी प्रतिदिन चेक करने का आदेश, अध्यापकों ने किया विरोध

झारखंड : नफ़रत और कॉर्पोरेट संस्कृति के विरुद्ध लेखक-कलाकारों का सम्मलेन! 

झारखंड की खान सचिव पूजा सिंघल जेल भेजी गयीं

सिवनी मॉब लिंचिंग के खिलाफ सड़कों पर उतरे आदिवासी, गरमाई राजनीति, दाहोद में गरजे राहुल

मध्यप्रदेश: गौकशी के नाम पर आदिवासियों की हत्या का विरोध, पूरी तरह बंद रहा सिवनी

झारखंडः आईएएस पूजा सिंघल के ठिकानों पर छापेमारी दूसरे दिन भी जारी, क़रीबी सीए के घर से 19.31 करोड़ कैश बरामद

खबरों के आगे-पीछे: अंदरुनी कलह तो भाजपा में भी कम नहीं

आदिवासियों के विकास के लिए अलग धर्म संहिता की ज़रूरत- जनगणना के पहले जनजातीय नेता

‘मैं कोई मूक दर्शक नहीं हूँ’, फ़ादर स्टैन स्वामी लिखित पुस्तक का हुआ लोकार्पण


बाकी खबरें

  • Nishads
    अब्दुल अलीम जाफ़री
    यूपी चुनाव: आजीविका के संकट के बीच, निषाद इस बार किस पार्टी पर भरोसा जताएंगे?
    07 Mar 2022
    निषाद समुदाय का कहना है कि उनके लोगों को अब मछली पकड़ने और रेत खनन के ठेके नहीं दिए जा रहे हैं, जिसके चलते उनकी पारंपरिक आजीविका के लिए एक बड़ा खतरा उत्पन्न हो गया है।
  • Nitish Kumar
    शशि शेखर
    मणिपुर के बहाने: आख़िर नीतीश कुमार की पॉलिटिक्स क्या है...
    07 Mar 2022
    यूपी के संभावित परिणाम और मणिपुर में गठबंधन तोड़ कर चुनावी मैदान में हुई लड़ाई को एक साथ मिला दे तो बहुत हद तक इस बात के संकेत मिलते है कि नीतीश कुमार एक बार फिर अपने निर्णय से लोगों को चौंका सकते हैं।
  • Sonbhadra District
    तारिक अनवर
    यूपी चुनाव: सोनभद्र के गांवों में घातक मलेरिया से 40 से ज़्यादा लोगों की मौत, मगर यहां के चुनाव में स्वास्थ्य सेवा कोई मुद्दा नहीं
    07 Mar 2022
    हाल ही में हुई इन मौतों और बेबसी की यह गाथा भी सरकार की अंतरात्मा को नहीं झकझोर पा रही है।
  • Russia Ukraine war
    एपी/भाषा
    रूस-यूक्रेन अपडेट: जेलेंस्की ने कहा रूस पर लगे प्रतिबंध पर्याप्त नहीं, पुतिन बोले रूस की मांगें पूरी होने तक मिलट्री ऑपरेशन जारी रहेगा
    07 Mar 2022
    एक तरफ रूस पर कड़े होते प्रतिबंधों के बीच नेटफ्लिक्स और अमेरिकन एक्सप्रेस ने रूस-बेलारूस में अपनी सेवाएं निलंबित कीं। दूसरी तरफ यूरोपीय संघ (ईयू) के नेता चार्ल्स मिशेल ने कहा कि यूक्रेन के हवाई…
  • International Women's Day
    नाइश हसन
    जंग और महिला दिवस : कुछ और कंफ़र्ट वुमेन सुनाएंगी अपनी दास्तान...
    07 Mar 2022
    जब भी जंग लड़ी जाती है हमेशा दो जंगें एक साथ लड़ी जाती है, एक किसी मुल्क की सरहद पर और दूसरी औरत की छाती पर। दोनो ही जंगें अपने गहरे निशान छोड़ जाती हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License