NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
झारखंडः गोड्डा लिंचिंग मामले को कमज़ोर करने कोशिश कर रही है पुलिस?
पीड़ितों के परिवारों को कथित तौर पर डराया और परेशान किया जा रहा है।
तारिक़ अनवर
06 Aug 2018
jharkhand

झारखंड के गोड्डा ज़िले में लिंचिंग मामले में निष्पक्ष जांच पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। ज्ञात हो कि लिंचिंग की ये घटना 13 जून को हुई थी जहां लोगों ने मवेशियों को चोरी करने के संदेह में दो लोगों को पीट पीट कर मार डाला था। पीड़ितों के परिवारों का आरोप है कि न्याय के लिए लड़ाई में अड़चन डालने के लिए पुलिस "डरा" रही है, "परेशान" कर रही है" और वे "जितना कर सकते हैं" कर रहे हैं। दोनों पीड़ित गोड्डा ज़िले के तलझारी के निवासी थे। ये गांव राज्य की राजधानी रांची से क़रीब 200 किमी दूर है।

चिरागुद्दीन अंसारी (45) और मुर्तजा अंसारी (35) को आदिवासी बहुल वाले दुल्लु गांव के निवासियों द्वारा पीटे जाने की ख़बर सुबह लगभग 6 बजे मिलने के बाद इमरान अंसारी और गफूर देवदार पुलिस स्टेशन गए और वहां मौजूद पुलिस अधिकारी को घटना के बारे में बताया। उनका दावा है कि उन्होंने अधिकारियों से पीड़ितों को बचाने के लिए अनुरोध किया। उनका आरोप है कि पुलिस ने कहा कि उनके गाड़ी में तेल नहीं है, इस पर उन्होंने पुलिस अधिकारी को फौरन 2,000 रुपए दिए।

तब वे घटना स्थल की तरफ रवाना हुए जहां चिरागुद्दीन और मुर्तजा पर क्रूरता से हमला किया जा रहा था और यह सोचकर कुछ दूरी पर रहकर इंतज़ार कर रहा था कि पुलिस बचाने के लिए आएगी। लेकिन वे उस वक्त काफी परेशान हुए जब पीड़ितों को बचाने के लिए पुलिस घंटों तक नहीं पहुंची और पीड़ितों को पीट पीट कर मार डाला गया।

चिरागुद्दीन के बेटे इमरान ने न्यूज़़क्लिक को बताया कि "घटना के बारे में हमें दुल्लु गांव के मुखिया ने फोन कर बताया। हम घटना स्थल पर पहुंचे। मुझे वहां देखकर बुरी तरह घायल मेरे पिता ने मुझसे पानी मांगा। जब हम आगे बढ़े तो हमलावरों ने हम पर चिल्लाया और हमें पकड़ने की कोशिश की और हमें भी चोर बताने लगे। हम वहां से भागने में कामयाब हुए और किसी तरह अपनी ज़िंदगी बचाई। हम सुबह 8 बजे पुलिस स्टेशन पहुंचे और पीड़ितों को बचाने का पुलिस से अनुरोध किया।"

उसने आगे आरोप लगाते हुए कहा, "उन्होंने (पुलिस) ने हमें बताया कि उनका आधिकारिक वाहन में ईंधन कम है। समय बर्बाद किए बिना हमने उन्हें 2,000 रुपए दिए, और उन्होंने हमें आश्वासन दिया कि वे कुछ समय में घटना स्थल पर पहुंच रहे हैं। हम घटना स्थल के लिए रवाना हो गए और घटना स्थल से दूर रह कर पुलिस के आने का इंतज़ार करने लगे, लेकिन वे दो-तीन घंटे तक घटना स्थल पर नहीं पहुंचे।"

दोनों चश्मदीदों ने आरोप लगाया कि मौक़े पर मौजूद लोगों की भीड़ उन दोनों को पीट रही थी। घटना स्थल पर पुलिस सुबह 11 बजे पहुंची तब तक पीड़ित मर चुके थे। उन्होंने आगे कहा कि "हमें पोस्टमॉर्टम के बाद लगभग 3 बजे शव दिया गया था।"

उनके वकील ने आरोप लगाया कि पुलिस असली अपराधियों को बचाने के उद्देश्य से इस मामले को कमज़ोर कर दिया है।

वकील इनाम खान ने कथित तौर पर कहा, "यह एक जघन्य अपराध था जिसमें दो लोग मारे गए। पुलिस द्वारा दायर मामला उतना मज़बूत नहीं है जितना होना चाहिए। पुलिस ने चालाकी से इस घटना को भैंस की चोरी से जोड़ दिया। एफआईआर में कहा गया कि चार-पांच लोगों ने उक्त दोनों को पकड़ लिया और भैंस चोरी की अफवाहों पर उन्हें मारना शुरू कर दिया। पुलिस ने उक्त दोनों के बयान के मुताबिक उनकी शिकायत दर्ज नहीं की थी। चूंकि सूचना देने वाले अशिक्षित है और गंभीर रूप से ज़ख़्मी था इसलिए बयान को पढ़े बिना दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कर दिया।"

उन्होंने आगे कहा, "जिन लोगों को एफआईआर में दर्ज किया गया है उसे शिकायतकर्ता नहीं जानते हैं। पुलिस ने वीडियो और फोटो के आधार पर अभियुक्त का नाम लिया। मुख्य अपराधियों को एफआईआर में भी दर्ज नहीं किया गया है। यह सोची समझी साज़िश के तहत किया गया जिससे मामला अदालत में कमज़ोर पड़ जाए।"

उन्होंने कहा कि गांव के मुखिया जिन्होंने परिवार को सूचना दिया था उन्होंने अपने इलाक़े में हुए अपराध के बारे में पुलिस को ख़बर क्यों नहीं किया। उन्होंने कहा, "इसका मतलब है कि इस घटना से वे भी जुड़े हुए है। हमलावरों की पहचान के लिए अब तक उनसे सवाल क्यों नहीं किया गया है? "

झारखंड पुलिस ने इस आरोप को ख़ारिज कर दिया और कहा कि वह निष्पक्ष जांच कर रही है और अपराधियों को बख्शा नहीं जाएगा।

झारखंड पुलिस के अतिरिक्त महानिदेशक और प्रवक्ता आरके मलिक ने कहा, "ये केवल आरोप हैं। जब अदालत में मुकदमा चलेगा और दोष साबित हो जाएगा तो सबकुछ साफ़ हो जाएगा।

जब रिश्वत के आरोपों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, "हमारे अधिकारियों ने तीन बार पीड़ितों के घरों का दौरा किया, वे ईद के मौके पर भी गए थें लेकिन ऐसी कोई शिकायत नहीं मिली। वे अब इस तरह के आरोपों लगा रहे हैं। वे दूसरों के उकसावे पर ऐसे बयान दे रहे हैं।"

इस बीच सभी चार आरोपी मुंशी मुर्मू, कलेश्वर सोरेन, जोहन किस्कू और किशन राय की ज़मानत याचिकाओं को हाल ही में ज़िला और सत्र न्यायाधीश गोड्डा ने ख़ारिज कर दिया है।

पीड़ितों के घर पर छापा मारा गया, परिवार के सदस्यों पर हमला किया गया

इमरान ने कथित तौर पर कहा कि "हमारे ख़िलाफ़ क्रूरतापूर्ण और ग़ैर-क़ानूनी कार्रवाई की गई। 19 जुलाई को जब पुलिस ने रात 11 बजे हमारे घर पर जब छापा मारा तो परिवार के सदस्यों के साथ दुर्व्यवहार किया गया और उन्हें मारा गया जिनमें महिलाएं भी शामिल हैं। वे उस वक्त भाग गए जब हमारे परिवार के सदस्यों और गांव वालों ने उनकी इस कार्रवाई का विरोध किया।"

पुलिस के ख़िलाफ लगे इस आरोप पर किसी भी पुलिस अधिकारी ने कोई टिप्पणी नहीं की।

बीजेपी सांसद आरोपियों के क़ानूनी खर्च का बोझ उठाएंगे

झारखंड के एक बीजेपी सांसद ने कहा है कि वे चारों आरोपियों के क़ानूनी खर्चों का बोझ उठाएंगे। इसे "व्यक्तिगत निर्णय" कहते हुए निशिकांत दुबे जो गोड्डा निर्वाचन क्षेत्र के सांसद हैं उन्होंने कहा कि वह क़ानूनी लड़ाई में उनके खर्चों को वहन करेंगे क्योंकि उनका मानना है कि उक्त चार लोगों को लिंचिंग के लिए "ग़लत तरीके से निशाना" बनाया जा रहा था।

उन्होंने कहा कि जब पूरे गांव के लोग इस घटना में शामिल थें तो इन्हीं चार लोगों को क्यों निशाना बनाया जा रहा है।

godda lynching
Jharkhand
BJP Govt

Related Stories

झारखंड: बोर्ड एग्जाम की 70 कॉपी प्रतिदिन चेक करने का आदेश, अध्यापकों ने किया विरोध

झारखंड : नफ़रत और कॉर्पोरेट संस्कृति के विरुद्ध लेखक-कलाकारों का सम्मलेन! 

झारखंड की खान सचिव पूजा सिंघल जेल भेजी गयीं

झारखंडः आईएएस पूजा सिंघल के ठिकानों पर छापेमारी दूसरे दिन भी जारी, क़रीबी सीए के घर से 19.31 करोड़ कैश बरामद

खबरों के आगे-पीछे: अंदरुनी कलह तो भाजपा में भी कम नहीं

आदिवासियों के विकास के लिए अलग धर्म संहिता की ज़रूरत- जनगणना के पहले जनजातीय नेता

‘मैं कोई मूक दर्शक नहीं हूँ’, फ़ादर स्टैन स्वामी लिखित पुस्तक का हुआ लोकार्पण

झारखंड: पंचायत चुनावों को लेकर आदिवासी संगठनों का विरोध, जानिए क्या है पूरा मामला

झारखंड : हेमंत सोरेन शासन में भी पुलिस अत्याचार बदस्तूर जारी, डोमचांच में ढिबरा व्यवसायी की पीट-पीटकर हत्या 

झारखंड रोपवे दुर्घटना: वायुसेना के हेलिकॉप्टरों ने 10 और लोगों को सुरक्षित निकाला


बाकी खबरें

  • poverty
    अरुण कुमार त्रिपाठी
    जनादेश-2022: रोटी बनाम स्वाधीनता या रोटी और स्वाधीनता
    11 Mar 2022
    राष्ट्रवाद और विकास के आख्यान के माध्यम से भारतीय जनता पार्टी और उसके नेताओं ने रोटी और स्वाधीनता के विमर्श को रोटी बनाम स्वाधीनता बना दिया है।
  • farmer
    सुरेश गरीमेल्ला
    सरकारी इंकार से पैदा हुआ है उर्वरक संकट 
    11 Mar 2022
    मौजूदा संकट की जड़ें पिछले दो दशकों के दौरान अपनाई गई गलत नीतियों में हैं, जिन्होंने सरकारी कंपनियों के नेतृत्व में उर्वरकों के घरेलू उत्पादन पर ध्यान नहीं दिया और आयात व निजी क्षेत्र द्वारा उत्पादन…
  • सोनिया यादव
    पंजाब : कांग्रेस की हार और ‘आप’ की जीत के मायने
    11 Mar 2022
    कांग्रेस को जो नुक़सान हुआ, उसका लगभग सीधा लाभ 'आप' को मिला। मौजूदा वक़्त में पंजाब के लोगों में नाराज़गी थी और इस कारण लोगों ने बदलाव को ही विकल्प मानते हुए आम आदमी पार्टी पर भरोसा किया है।
  • विजय विनीत
    यूपी चुनाव : पूर्वांचल में हर दांव रहा नाकाम, न गठबंधन-न गोलबंदी आया काम !
    11 Mar 2022
    उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में विपक्ष के पास मुद्दों की भरमार रहने के बावजूद समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव मोदी-योगी का जादू बेअसर नहीं कर सके। बार-बार टिकटों की अदला-बदली और लचर रणनीति ने स
  • LOOSERES
    रवि शंकर दुबे
    यूपी चुनाव: कई दिग्गजों को देखना पड़ा हार का मुंह, डिप्टी सीएम तक नहीं बचा सके अपनी सीट
    11 Mar 2022
    उत्तर प्रदेश में एक बार फिर भाजपा की वापसी हो गई है, हालांकि इस प्रचंड जीत के बावजूद कई दिग्गज नेता अपनी सीट नहीं बचा पाए हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License