NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
एक नेता जिनके बारे में मतदाता जानते हैं वो उनके वोटों का सौदा नहीं करेंगे
सादगी पसंद, बीएचयू से स्नाकोत्तर, विनोद सिंह झारखंड के सबसे कर्मठ नेता माने जाते हैं, अपने विधान सभा छेत्र से लेकर, रांची और दिल्ली तक आम लोगों का सवालों को उठाते हैं। विनोद सिंह तार्किक तरीके से बात रखने और अधिकारियों से काम लेने के लिए जाने जाते हैं
ई न्यूज़ रूम
05 Dec 2019
jharkhand election
Image courtesy: News Room

राँची: झारखंड की राजनीति की सबसे खास बात ये है कि यहाँ का शायद ही कोई विधायक और पूर्व विधायक ऐसा हो जिसने पार्टी नहीं बदली हो, चाहे चुनाव लड़ने के समय टिकट लेने के लिए या चुनाव जीतने के बाद सरकार बनाने के सवाल पर।
पर एक नेता ऐसा है, जिसे वोट देने वाले मतदाता और दूसरी तमाम पार्टियों के लोग जानते हैं कि वे कहीं नहीं जाएंगे। चाहे सरकार बनाने के मामला हो या राज्य सभा में वोटिंग का सवाल, वो न कभी पार्टी लाइन से अलग जाएंगे, न जनता के मतों का सौदा करेंगे।

यह नाम हैं—विनोद कुमार सिंह। बागोदर विधान सभा के सीपीआईएमएल के उम्मीदवार।

पर, 43 साल के विनोद सिंह की इतनी पहचान नहीं है। वो दो बार विधायक रह चूके हैं और उनको विरासत मिली है महेंद्र सिंह की। आज झारखंड के बाहर के लोग महेंद्र सिंह के नाम आते ही भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह की तस्वीर जेहन में ले आते हैं। पर, 2005 से पहले जब महेंद्र सिंह ज़िंदा थे तो झारखंड के लोगों के दिमाग में महेंद्र सिंह का नाम आते ही एक राजनेता का चेहरा उभरता था, वो थे बागोदर से 3 बार विधायक महेंद्र सिंह। वो एक मजबूत विपक्ष नेता के तौर पे जाने जाते थे।

16 जनवरी, 2005 को ठीक झारखंड के पहले विधान सभा चुनाव के दौरान, महेंद्र सिंह की हत्या हो जाती है, और फिर विनोद सिंह जो अपनी स्नाकोत्तर की पढ़ाई बनारस हिन्दू विश्वीद्यालय (बीएचयू) से पूरी किए थे उन्हे लौट कर नोमिनेश्न करना पड़ता है। और उनके राजनीतिक जीवन की शुरुआत होती है।

संदीप ने कुछ मामलों को विस्तार से बताया, “जीटी रोड के 6 लेन होने के काम में भी जब कंपनी ने सिर्फ घर के सामने के हिस्से के लिए मुआवजे की बात की तो विनोद जी मुख्यमंत्री रघुबर दास तक चले गए और फिर कानून के प्रावधानों के हिसाब से फैसला आया कि कंपनी को घर के पूरे हिस्सा की कीमत का मुआवजा देना होगा। GAIL पाइप लाइन के काम में भी जो रोड किनारे पड़ती जमीन आ रही है उसका मुआवजा पहले कोंपनी कुछ नहीं दे रही थी, अब विनोद जी के दखल के बाद 40 परसेंट देने को तैयार हुई है। NHAI के काम के दौरान ही बागोदर टाउन हाल का छज्जा टूटने पे कंपनी मात्र 85 हजार दे रही थी, जो विनोद जी ने 95 लाख दिलवाया और इलाके को अब एक नया टाउन हाल मिलेगा दूसरी जगह पर।”

विनोद सिंह, पहली बार 2005 में फिर दोबारा 2009 में विधायक चुने गए। 2014 नगेंद्र महतो से मात्र 3000 और कुछ वोटों से हार गए थे। उस वक्त भी उन्हे 70,000 मत मिले थे।

उस वक्त जीतने वाले विधायक का यह ब्यान कि अगर हमे वोट नहीं दोगे तो इस बार हमें कफन दे दो की खूब चर्चा हुई थी।
बागोदर के पूर्व विधायक को इस बात का भी श्रेय जाता है कि उन्होंने अपने 2009-14 के कार्यकाल में सबसे ज्यादा काम किया।

“वैसे तो भारत में ज्यादातर वोटर ये कहते हैं कि उनके एमएलए और एमपी जीतने के बाद काम ही नहीं करते, पर विनोद ने 2014 के चुनाव में हार के बाद भी सैकड़ों काम करवाए। पिछले 5 सालो में विनोद ने जैसे विधायक रहते प्रवासी भारतीयों के लिए काम किया, वैसा अभी भी करते आ रहे हैं। उन्होंने कई कंपनियो से मजदूरों के मौत और दुर्घटना के बाद मुआवजा दिलवाए” सीपीआईएमएल के युवा नेता संदीप  बताते हैं।

संदीप ने कुछ मामलों को विस्तार से बताया, “जीटी रोड के 6 लेन होने के काम में भी जब कंपनी ने सिर्फ घर के सामने के हिस्से के लिए मुआवजे की बात की तो विनोद जी मुख्यमंत्री रघुबर दास तक चले गए और फिर कानून के प्रावधानों के हिसाब से फैसला आया कि कंपनी को घर के पूरे हिस्सा की कीमत का मुआवजा देना होगा। GAIL पाइप लाइन के काम में भी जो रोड किनारे पड़ती जमीन आ रही है उसका मुआवजा पहले कोंपनी कुछ नहीं दे रही थी, अब विनोद जी के दखल के बाद 40 परसेंट देने को तैयार हुई है। NHAI के काम के दौरान ही बागोदर टाउन हाल का छज्जा टूटने पे कंपनी मात्र 85 हजार दे रही थी, जो विनोद जी ने 95 लाख दिलवाया और इलाके को अब एक नया टाउन हाल मिलेगा दूसरी जगह पर।”

“सादगी पसंद विनोद सिंह जनता के बीच भरोसेमंद नेता हैं, सुख-दुख में निस्वार्थ खड़े रहते हैं। विनोद सिंह अपनी बात को पूरी तार्किक तरीके और दृढ़ता से रखते हैं। इस कारण जब उनका कोई मामला किसी अधिकारी के पास आता है तो वो उनको सुनने और ज्यादातर मामलों को उन अधिकारियों को मानने पर मजबूर कर देते हैं। आम आदमी एक नेता से यही चाहता है के उनका काम हो और विनोद सिंह की पहचान अब तक ये रही है कि उनका कोई काम रुकता नहीं। किसी नेता से आम आदमी को और क्या चाहिए!” राजनीतिक विश्लेषक कमल नयन ने ईन्यूज़रूम को बताया।

“झारखंड में अल्पसंख्यक वोटरों की समस्या ये भी होती है के वो जिनको नेता के तौर पर स्थापित करते हैं, वो देर-सबेर दूसरी विचार धारा वाली पार्टियों में चले जाते हैं। पर, हम जानते हैं कि विनोद सिंह ऐसा कभी नहीं करेंगे,” बागोदर के मोहम्मद शमीम कहते हैं।

माले नेता के मुरीद झारखंड के दुसरे पार्टी के लोग भी हैं, “इतना तो झारखंड के सियासत में लोग मानते हैं कि विनोद सिंह कभी पाला नहीं बदलेंगे, जो झारखंड में कम देखने को मिलता है,” काँग्रेस के नेता सतीश केडीया ने कहा।

“सादगी पसंद विनोद सिंह जनता के बीच भरोसेमंद नेता हैं, सुख-दुख में निस्वार्थ खड़े रहते हैं। विनोद सिंह अपनी बात को पूरी तार्किक तरीके और दृढ़ता से रखते हैं। इस कारण जब उनका कोई मामला किसी अधिकारी के पास आता है तो वो उनको सुनने और ज्यादातर मामलों को उन अधिकारियों को मानने पर मजबूर कर देते हैं। आम आदमी एक नेता से यही चाहता है के उनका काम हो और विनोद सिंह की पहचान अब तक ये रही है कि उनका कोई काम रुकता नहीं। किसी नेता से आम आदमी को और क्या चाहिए!” राजनीतिक विश्लेषक कमल नयन ने ईन्यूज़रूम को बताया।

विनोद सिंह के लिए ourdemocracy.in पे एक क्राउड़फंडिंग (जनता का वित्तीय सहयोग) कैम्पेन भी चल रहा है।

jharkhand elections
jharkhand voters
minorities
BJP
Congress
Mahendra Singh
Vinod Singh
CPIML

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

गुजरात: भाजपा के हुए हार्दिक पटेल… पाटीदार किसके होंगे?


बाकी खबरें

  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    राजस्थान : दलितों पर बढ़ते अत्याचार के ख़िलाफ़ DSMM का राज्यव्यापी विरोध-प्रदर्शन
    22 Mar 2022
    दलित शोषण मुक्ति मंच(DSMM) ने पूरे प्रदेश में विरोध-प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री का इस्तीफ़ा माँगा है और कहा राजस्थान सरकार कमजोर तबके की सुरक्षा में विफल रही है। 
  • एपी
    रूस-यूक्रेन अपडेट: सुरक्षा गांरटी मिलने पर नाटो की सदस्यता पर चर्चा को तैयार यूक्रेन
    22 Mar 2022
    यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने सोमवार देर रात कहा कि वह संघर्ष-विराम, रूसी सैनिकों की वापसी और यूक्रेन की सुरक्षा की गारंटी के बदले में उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) की सदस्यता नहीं…
  • उद्धव सेठ
    यहूदियों के नरसंहार को दर्शाता उपन्यास ‘माउस’ पर प्रतिबंध सिर्फ एक पाखंड है
    22 Mar 2022
    बच्चों के लिए चित्रकथा बनाने वाले भारतीय रचनाकारों और शिक्षाविदों के मुताबिक़, टेनेसी स्कूल की ओर से लगाया गया यह प्रतिबंध बच्चों को असली ज़िंदगी की नग्नता और नस्लवाद को देखने से नहीं रोक सकता।
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 1,581 नए मामले, 33 मरीज़ों की मौत
    22 Mar 2022
    देश में कोरोना से पीड़ित 98.74 फ़ीसदी यानी 4 करोड़ 24 लाख 70 हज़ार 515 मरीज़ों को ठीक किया जा चुका है।
  • सबरंग इंडिया
    कश्मीरी पंडितों ने द कश्मीर फाइल्स में किए गए सांप्रदायिक दावों का खंडन किया
    22 Mar 2022
    उस वक्त की हिंसा से बचे हुए लोग इस बात पर प्रकाश डालते हैं कि कैसे भारतीय मुसलमानों को पाकिस्तान प्रायोजित विद्रोही समूहों के कार्यों के लिए दोषी ठहराया जा रहा है और उन्हें बदनाम किया जा रहा है
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License