NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
जम्मू-कश्मीर : क्षेत्रीय दलों ने परिसीमन आयोग के प्रस्ताव पर जताई नाराज़गी, प्रस्ताव को बताया जनता को शक्तिहीन करने का ज़रिया
महबूबा मुफ़्ती का कहना है कि बीजेपी गांधी के भारत को गोडसे के भारत में बदलना चाहती है। इस लक्ष्य के लिए जम्मू-कश्मीर को प्रयोगशाला के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है।
अनीस ज़रगर
08 Feb 2022
jammu and kashmir
Image Courtesy: Flickr

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती ने बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि परिसीमन आयोग का प्रस्ताव आश्चर्यजनक नहीं है, क्योंकि यह जम्मू और कश्मीर में लोकतंत्र पर व्यापक हमले का का हिस्सा मात्र था।

श्रीनगर में अपनी पार्टी मुख्यालय के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए पीडीपी नेता ने कहा कि परिसीमन आयोग का लक्ष्य बीजेपी के हितों के लिए हर किसी को शक्तिविहीन कर देना था। 

उन्होंने कहा, "बीजेपी अपनी विधानसभाओं को मजबूत करना चाहती है और बहुसंख्यक समुदायों को शक्तिविहीन।" महबूबा ने यह भी कहा कि बीजेपी नाथूराम गोडसे के एजेंडे पर चल रही है। 

महबूबा ने कहा, "वे इस देश में किसी भी बात नहीं सुन रहे हैं और गोडसे के एजेंडे का पालन कर रहे हैं। वे गांधी के भारत को गोडसे के भारत में बदलना चाहते हैं और कश्मीर इसके लिए प्रयोगशाला बन गया है।"

पीडीपी अध्यक्ष ने चेतावनी देते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर में की जा रही परिसीमन की कवायद उस वक्त पूरे देश में करवाई जाएगी, जब बीजेपी के लिेए वक़्त मुफ़ीद होगा। बता दें परीसीमन आयोग द्वारा दूसरे मसौदे को अपने सदस्यों के साझा करने के बाद महबूबा मुफ़्ती की यह प्रतिक्रिया आई है। पीडीपी समेत सभी क्षेत्रीय पार्टियों ने इसका विरोध किया है। 

नेशनल कॉन्फ्रेंस के जनरल सेक्रेटरी अली मुहम्मद सागर ने रविवार को मसौदे के प्रस्ताव का निंदा करते हुए कहा कि उनकी पार्टी जम्मू-कश्मीर के लोगों को विभाजित करने की कोशिशों को नहीं मानेगी। 

मंत्री रह चुके मुहम्मद सागर ने कहा, "मसौदे में दिए गए सुझाव विचित्र हैं। पैनल ने उसमें अपने मनमुताबिक़ सुझाव शामिल किए हैं। यह प्रतिनिधित्व के सर्वमान्य और सैद्धांतिक सिद्धांतों का माखौल है।"

परिसीमन आयोग को मार्च, 2020 में केंद्र शासित जम्मू-कश्मीर में विधानसभा सीटों के परिसीमन के लिए बनाया गया था। इसकी एक साल की समय-सीमा तय की गई थी। लेकिन इस साल इसकी समयसीमा मार्च तक बढ़ा दी गई थी। लेकिन जस्टिस (रिटायर्ड) रंजन प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाले आयोग द्वारा पेश किए गए शुरुआती दो मसौदों की खूब आलोचना हुई है। आयोग ने विधानसभा क्षेत्रों में भारी बदलाव की अनुशंसा की है, जिसके तहत भौगोलिक तौर पर विभाजित पीर पंजाल घाटी इलाकों को अनंतनाग संसदीय सीट में जोड़ा गया है। कई लोगों को यह बदलाव बेहद उग्र लग रहे हैं। 

पीडीपी और नेशनल कॉन्फ्रेंस दोनों ने कहा है कि वे विधानसभाओं से जानकारी लेने के बाद वे इन मसौदों के जवाब में विस्तृत प्रस्ताव पेश करेंगी। सिर्फ़ पीडीपी और नेशनल कॉन्फ्रेंस ने ही नहीं, बल्कि सज्जाद लोन की अध्यक्षता वाली पीपल्स कॉन्फ्रेंस, जो पहले बीजेपी के साथ रह चुकी है, उसने भी एक वक्तव्य जारी कर कहा है कि पार्टी का मानना है कि पूरी कवायद कश्मीर के लोगों को "शक्तिविहीन और मताधिकार" से वंचित करने की साजिश है। 

पार्टी के आधिकारिक प्रवक्ता ने वक्तव्य पढ़ते हुए कहा, "परिसीमन आयोग द्वारा अपने पुराने प्रावधानों में बदलाव ना करना हैरानी भरा नहीं है। कश्मीरियों के घावों पर नमक रगड़ते हुए, हमें इसमें दक्षिण कश्मीर और राजौरी जैसे दो अलग-अलग भूभागों को एकसाथ लाकर नया संसदीय क्षेत्र देखने को मिला है।"

वक्तव्य में कहा गया है कि इन दो इलाकों के रहवासियों की आकांक्षाएं पूरी तरह अलग-अलग हैं। उनकी समस्याएं और चुनौतियां भिन्न हैं, उनकी भौगोलिक बनावट भी अलग है। लेकिन आयोग ही जाने कि कौन सी वज़ह से दो इतने अलग क्षेत्रों को मिलाकर एक संसदीय क्षेत्र बनाया गया है।

इसी तरह की चिंताएं सीपीआई (एम) के नेता मोहम्मद युसुफ तारागामी ने जताई हैं। उन्होंने आयोग की अनुशंसाओं को "मौजूदा क्षेत्रवार विधानसभा क्षेत्रों को मनमाने ढंग से पूरी तरह बदलने वाला बताया, जिसमें आबादी तो छोड़िए, भौगोलिक स्थितियों की भी परवाह नहीं की गई है।"

तारिगामी ने कहा "सहायक सदस्यों के साथ साझा किया गया मसौदा, आयोग द्वारा पहले दिए गए तर्क कि विधानसभा सीटों के पुनर्गठन के लिए भौगोलिक बनावट और दूर-दराज के इलाकों को ध्यान में रखा जाएगा, उससे भी पूरी तरह अलग दिखाई देता है।"

तारागामी पीएडीजी (पीपल्स अलायंस फॉ़र गुपकार डिक्लेरेशन) के भी प्रवक्ता हैं। यह क्षेत्रीय राजनीतिक पार्टियों का एक समूह है, जिसकी मुख्य मांग राज्य में 5 अगस्त, 2019 के पहले का दर्जा वापस किए जाने की है। अनुमान है कि समूह 13 फरवरी को एक बैठक करेगा, जिसमें परिसीमन रिपोर्ट पर एक संयुक्त प्रतिक्रिया जारी की जाएगी। 

इस पूरी कवायद के खिलाफ़ जम्मू कश्मीर के दल गंभीर चिंताएं जताते रहे हैं। इन दलों का विश्वास है कि यह कवायद नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी का स्थानीय प्रतिनिधित्व अस्थिर करने की कोशिश है। पीडीपी के भीतरी मामलों से परिचित एक शख़्स ने न्यूज़क्लिक को बताया कि अभी तक परिसीमन इस तरीके से किया गया है कि पीडीपी और नेशनल कॉन्फ्रेंस का आधार कमज़ोर हो। नाम ना छापने की शर्त पर शख़्स ने कहा, "ऐसे बदलाव किए जा रहे हैं जिनसे सिर्फ़ बीजेपी को अपने हित साधने और पारंपरिक तौर पर अपने प्रत्याशियों को जिताने में नाकामयाब रहे बीजेपी के साथियों को मदद मिलेगी।" 

लेकिन पीडीपी के सदस्य नेशनल कॉन्फ्रेंस के साथ नाराज़ हैं, जिनके तीन सांसद आयोग के सहायक सदस्य हैं। बता दें पहले बॉयकाट करने के बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस ने दिसंबर 2020 में आयोग की बैठक में हिस्सा लिया था।

इस लेख को मूल अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें।

J&K Parties Rage Against Delimitation Panel's Proposal, Term it ‘Disempowering’

Delimitation Commission
J&K Delimitation
mehbooba mufti
PDP
NC
J&K Elections

Related Stories

जम्मू-कश्मीर: अधिकारियों ने जामिया मस्जिद में महत्वपूर्ण रमज़ान की नमाज़ को रोक दिया

कश्मीर में एक आर्मी-संचालित स्कूल की ओर से कर्मचारियों को हिजाब न पहनने के निर्देश

फ़ेसबुक पर 23 अज्ञात विज्ञापनदाताओं ने बीजेपी को प्रोत्साहित करने के लिए जमा किये 5 करोड़ रुपये

जम्मू-कश्मीर: परिसीमन आयोग ने प्रस्तावों को तैयार किया, 21 मार्च तक ऐतराज़ दर्ज करने का समय

जम्मू-कश्मीर में मीडिया का गला घोंट रही सरकार : प्रेस काउंसिल

परिसीमन आयोग के जम्मू क्षेत्र पर ताजा मसौदे पर बढ़ता विवाद

SSC अभ्यर्थियों का विरोध प्रदर्शन, संसद में विपक्षी सांसदों का विरोध मार्च और अन्य ख़बरें

खोज ख़बरः गुप्त मतदान और लोकतंत्र पर हमला है आधार को वोटर i-card से जोड़ने वाला क़ानून

जम्मू-कश्मीर परिसीमन : जम्मू में 6, कश्मीर में 1 विधानसभा सीट बढ़ाने के मसौदे पर राजनीतिक दलों का विरोध

हैदरपुरा मामला : कश्मीर में शटडाउन के बीच तीसरे निवासी के शव की मांग तेज़


बाकी खबरें

  • नीलांजन मुखोपाध्याय
    यूपी: योगी 2.0 में उच्च-जाति के मंत्रियों का दबदबा, दलितों-पिछड़ों और महिलाओं की जगह ख़ानापूर्ति..
    02 Apr 2022
    52 मंत्रियों में से 21 सवर्ण मंत्री हैं, जिनमें से 13 ब्राह्मण या राजपूत हैं।
  • अजय तोमर
    कर्नाटक: मलूर में दो-तरफा पलायन बन रही है मज़दूरों की बेबसी की वजह
    02 Apr 2022
    भारी संख्या में दिहाड़ी मज़दूरों का पलायन देश भर में श्रम के अवसरों की स्थिति को दर्शाता है।
  • प्रेम कुमार
    सीबीआई पर खड़े होते सवालों के लिए कौन ज़िम्मेदार? कैसे बचेगी CBI की साख? 
    02 Apr 2022
    सवाल यह है कि क्या खुद सीबीआई अपनी साख बचा सकती है? क्या सीबीआई की गिरती साख के लिए केवल सीबीआई ही जिम्मेदार है? संवैधानिक संस्था का कवच नहीं होने की वजह से सीबीआई काम नहीं कर पाती।
  • पीपल्स डिस्पैच
    लैंड डे पर फ़िलिस्तीनियों ने रिफ़्यूजियों के वापसी के अधिकार के संघर्ष को तेज़ किया
    02 Apr 2022
    इज़रायल के क़ब्ज़े वाले क्षेत्रों में और विदेशों में रिफ़्यूजियों की तरह रहने वाले फ़िलिस्तीनी लोग लैंड डे मनाते हैं। यह दिन इज़रायली क़ब्ज़े के ख़िलाफ़ साझे संघर्ष और वापसी के अधिकार की ओर प्रतिबद्धता का…
  • मोहम्मद सज्जाद, मोहम्मद ज़ीशान अहमद
    भारत को अपने पहले मुस्लिम न्यायविद को क्यों याद करना चाहिए 
    02 Apr 2022
    औपनिवेशिक काल में एक उच्च न्यायालय के पहले मुस्लिम न्यायाधीश, सैयद महमूद का पेशेवराना सलूक आज की भारतीय न्यायपालिका में गिरते मानकों के लिए एक काउंटरपॉइंट देता है। 
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License