NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
शिक्षा
भारत
राजनीति
जेएनयू - विचारों का संघर्ष | #हमलोग कारवां-ए-मोहब्बत
जेएनयू के छात्रों की बहुत सिम्पल सी मांग है- सस्ती शिक्षा की. वे कहते हैं कि शिक्षा व्यापार का जरिया नहीं है. इसे देश के ग़रीबों-वंचितों तक पहुंचाने के लिए इसका सस्ता होना जरूरी है.
न्यूज़क्लिक टीम
29 Nov 2019

जेएनयू के छात्रों की बहुत सिम्पल सी मांग है- सस्ती शिक्षा की. वे कहते हैं कि शिक्षा व्यापार का जरिया नहीं है. इसे देश के ग़रीबों-वंचितों तक पहुंचाने के लिए इसका सस्ता होना जरूरी है. पर सरकार इन्हें सुनने की बजाय इनके ऊपर डंडे बरसा रही है. कारवां-ए-मोहब्बत की टीम ने जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष आइशी घोष और अन्य छात्र नेताओं से बात की. हमें इनकी बातों और मांगों को सुननी चाहिए. प्रोपगैंडा और फ़ेक न्यूज़ फैलानी वाली मीडिया की बातों से सावधान रहते हुए हमें छात्रों की तकलीफ़ें सुननी चाहिए. हमें महसूस करना चाहिए कि जेएनयू के विकलांग छात्र शशिभूषण पाण्डेय पर जब दिल्ली पुलिस लात-घूसे बरसा रही होगी, उस समय वे क्या सोच रहे होंगे? क्या शशिभूषण पाण्डेय यह स्वीकार कर पा रहे होंगे कि वो एक लोकतंत्र में रह रहे हैं और कभी महात्मा गांधी ने इसे अपने अहिंसा से सींचा था?

JNU
JNU Fee Hike
JNUSU
JNUTA
SFI
AISA
DSF
AISF
Aishe Ghosh
MHRD
BJP

Related Stories

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

दिल्ली : पांच महीने से वेतन व पेंशन न मिलने से आर्थिक तंगी से जूझ रहे शिक्षकों ने किया प्रदर्शन

जेएनयू: अर्जित वेतन के लिए कर्मचारियों की हड़ताल जारी, आंदोलन का साथ देने पर छात्रसंघ की पूर्व अध्यक्ष की एंट्री बैन!

आईपीओ लॉन्च के विरोध में एलआईसी कर्मचारियों ने की हड़ताल

जहाँगीरपुरी हिंसा : "हिंदुस्तान के भाईचारे पर बुलडोज़र" के ख़िलाफ़ वाम दलों का प्रदर्शन

दिल्ली: सांप्रदायिक और बुलडोजर राजनीति के ख़िलाफ़ वाम दलों का प्रदर्शन

आंगनवाड़ी महिलाकर्मियों ने क्यों कर रखा है आप और भाजपा की "नाक में दम”?


बाकी खबरें

  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटे में 14,306 नए मामले, 443 मरीज़ों की मौत
    25 Oct 2021
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर आधा फ़ीसदी से भी कम यानी 1 लाख 67 हज़ार 695 हो गयी है।
  • fact check
    पूजा चौधरी
    प्रकाश जावड़ेकर ने कोयला ले जाती ट्रेन का जो वीडियो ट्वीट किया, वो 8 महीने पुराना है
    25 Oct 2021
    राज्यसभा सदस्य और पूर्व पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कोयला ले जा रही एक ट्रेन का वीडियो ट्वीट करते हुए दावा किया कि पॉवर प्लांट्स के कोयले की आपूर्ति के लिए चार इंजन वाली 4 किलोमीटर लंबी रैक…
  • christians
    सबरंग इंडिया
    इस साल ईसाइयों पर 300 से ज्यादा हमले हुए, 2000 से अधिक महिलाएं, आदिवासी और दलित घायल हुए
    25 Oct 2021
    हाल की फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्टें बताती हैं कि कैसे ईसाई समुदाय को देश भर में निगरानी, बर्बरता, हमलों और सामाजिक बहिष्कार के साथ निशाना बनाया गया है।
  • Savarkar and Gandhi
    न्यूज़क्लिक टीम
    क्या था गांधी और सावरकर का रिश्ता?
    24 Oct 2021
    'इतिहास के पन्ने मेरी नज़र से' के इस अंग में वरिष्ठ पत्रकार नीलांजन बात की शुरुआत करते हैं राजनाथ सिंह के दावे से कि गाँधी के कहने पर सावरकर ने अंग्रेज़ों को माफ़ी नामा दिया था, और इसके बाद वे सावरकर…
  • fertilizer
    अजय कुमार
    खाद की किल्लत में कहीं सब्सिडी पर खेल न हो जाए?
    24 Oct 2021
    खाद की दुकानों पर ताला लटका है। खाद की मांग है लेकिन खाद नहीं मिल पा रही। इसलिए खाद की कालाबाजारी हो रही है। मगर वाकई देश में खाद कम है। अगर खाद कम है तो क्यों कम है?
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License