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जेएनयू - विचारों का संघर्ष | #हमलोग कारवां-ए-मोहब्बत
जेएनयू के छात्रों की बहुत सिम्पल सी मांग है- सस्ती शिक्षा की. वे कहते हैं कि शिक्षा व्यापार का जरिया नहीं है. इसे देश के ग़रीबों-वंचितों तक पहुंचाने के लिए इसका सस्ता होना जरूरी है.
न्यूज़क्लिक टीम
29 Nov 2019

जेएनयू के छात्रों की बहुत सिम्पल सी मांग है- सस्ती शिक्षा की. वे कहते हैं कि शिक्षा व्यापार का जरिया नहीं है. इसे देश के ग़रीबों-वंचितों तक पहुंचाने के लिए इसका सस्ता होना जरूरी है. पर सरकार इन्हें सुनने की बजाय इनके ऊपर डंडे बरसा रही है. कारवां-ए-मोहब्बत की टीम ने जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष आइशी घोष और अन्य छात्र नेताओं से बात की. हमें इनकी बातों और मांगों को सुननी चाहिए. प्रोपगैंडा और फ़ेक न्यूज़ फैलानी वाली मीडिया की बातों से सावधान रहते हुए हमें छात्रों की तकलीफ़ें सुननी चाहिए. हमें महसूस करना चाहिए कि जेएनयू के विकलांग छात्र शशिभूषण पाण्डेय पर जब दिल्ली पुलिस लात-घूसे बरसा रही होगी, उस समय वे क्या सोच रहे होंगे? क्या शशिभूषण पाण्डेय यह स्वीकार कर पा रहे होंगे कि वो एक लोकतंत्र में रह रहे हैं और कभी महात्मा गांधी ने इसे अपने अहिंसा से सींचा था?

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CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License