NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
केजरीवाल जी, भ्रष्टाचार के खिलाफ यह कैसी लड़ाई?
महेश कुमार
08 Aug 2015

जब भी दिल्ली में चुनाव होगा और अगर मुझे कांग्रेस या भाजपा के विरुद्ध कोई ओर अच्छा विकल्प नहीं होगा तो में आम आदमी पार्टी को ही वोट दूंगा. क्योंकि मेरा मानना है कि कांग्रेस और भाजपा की नीतियाँ हमेशा ही गरीब विरोधी होती है. इसलिए में ही नहीं बल्कि पूरे देश और दिल्ली शहर में मेरे जैसे लाखों लोग हमेशा एक ऐसे विकल्प की तलाश में रहते हैं भाजपा और कांग्रेस को पछाड़ सके. इसी समझ को ध्यान में रखकर में दिल्ली में हमेशा वोट देता रहूँगा लेकिन में आम आदमी पार्टी की जनविरोधी नीतियों या फैसलों की तब तक मुखालफत करता रहूँगा जब तक कि मुझे जनता के पक्ष में खडा होने वाला सच्चा विकल्प नहीं मिल जाता. वह विकल्प जो आम जनता की तकलीफों को सच्चे मायने में दूर कर सके. उसके फैंसले ऐसे हो जिनके द्वारा गरीब और मेहनतकश का साथ और उन्हें लूटने वालों के खिलाफ कार्यवाही.

                                                                                                                                      

जनता ने भरोसा किया

केजरीवाल का सत्ता में आने के लिए सबसे बड़ा नारा दिल्ली को भ्रष्टाचार मुक्त दिल्ली बनाने का था. उन्होंने इस लड़ाई को आगे बढाने के लिए भ्रष्टाचार हेल्प लाइन भी खोली और बड़े-बड़े विज्ञापनों के जरिए दिल्ली की जनता को बताया कि उनकी सरकार ने अभी तक १३५ भ्रष्ट अफसरों को गिरफ्तार कर लिया है और उनके विरुद्ध कार्यवाही की जा रही है. अगर कोई भी सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ इतनी तत्परता से काम करती है तो हमें सबको उसकी तारीफ़ करनी चाहिए होंसला अफजाई करनी चाहिए ताकि आने वाले दिनों उनकी भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़ाई और मज़बूत हो सके. दिल्ली की जनता ने बावजूद कांग्रेस और भाजपा के ‘आप’ की सरकार के खिलाफ दुष्प्रचार करने को नज़रंदाज़ किया और केजरीवाल सरकार पर पूरा भरोसा जताया.

 

वर्गीय भटकाव की शिकार सरकार 

भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़ाई का जब हम नतीजा देखते हैं केजरीवाल सरकार भी दूसरी सरकारों से अलग नज़र नहीं आती है. अभी तक की गयी कार्यवाहियों में जो भी अफसर गिरफ्तार किये हैं उनमे ज्यादातर छोटे ओहदे पर काम करने वाले कर्मचारी या निजी नागरिक हैं. इंडियन एक्सप्रेस की विस्तृत खबर के अनुसार ज्यादातर गिरफ्तार लोगों का कसूर बहुत मामूली था यानी 10 रूपए के लिए गिरफ्तार किया गया और उसके खिलाफ मुकदमा लाड दिया गया. इन गिरफ्तारियों में सुरक्षा गार्ड से लेकर बेलदार तक शामिल है. एक मामले को छोड़ दे जिसमें मुख्य अभियंता शामिल है तो बाकी सभी मामले अपने आकर में बहुत ही मामूली है. लेकिन अगर सिद्धांत की बात की जाए तो भ्रष्टाचार छोटा हो या बड़ा कार्यवाही तो होनी चाहिए. लेकिन यहाँ सवाल कुछ और है. जब आप सत्ता में होते हैं तो आपको यह तय करना होता है कि आप किस के पक्ष में काम करेंगे और किसके विरोध में. केजरीवाल सरकार ने अभी तक भ्रष्टाचार के नाम पर कोई भी बड़ा काम नहीं किया है. ऐसा कोई मामला सामने नहीं जिसमें कहा जा सके कि ये बड़ी मिसाल है जिसको देखकर भ्रष्टाचार करने वालों के दिलों में दहशत बैठे. अभी उनकी सरकार की पूरी की पूरी कार्यवाही मजदूर और मेहनतकश तबके के खिलाफ रही है. यानी केजरीवाल सरकार पहले से वर्गीय भेदभाव की शिकार हो चुकी है वर्ना इसका उनके पास क्या जवाब है कि जितने खुलासे उन्होंने चुनाव से पहले किये थे उनके खिलाफ कार्यवाही क्यों नहीं हो रही है? क्यों गरीब तबके पर भ्रष्टाचार का डंडा चलाकर बेमतलब की वाह-वाही बटोरने पर तुली ये सरकार?

महंगाई और भ्रष्टाचार

महंगाई और भ्रष्टाचार का चौली दामन का रिश्ता है. पिछले कुछ वर्षों में भ्रष्टाचार ने और महंगाई ने अपने लिए नए आयाम ढूंढ लिए हैं. अब भ्रष्टाचार नए ढंग से होता है जैसे आजकल हो रहा है. हर हफ्ते कई सौ करोड़ रुपया दिल्ली में भ्रष्टाचार के जरिए गबन कर लिया जाता है और सरकार को पता भी नहीं चलता है. में इसका एक उद्धरण पेश करना चाहता हूँ. करीब-करीब सभी सरकारों और उनके संस्थानों को यह पता था कि देश में सब्जियों के दाम बढ़ने वाले हैं, खासतौर पर प्याज के. लेकिन क्या किसी भी सरकार केंद्र या दिल्ली ने इस स्थिति को संभालने के लिए कदम उठाया? कों नहीं जानता कि प्याज और अन्य खाद्य वस्तूओं का भंडारण कर वस्तुओं की कीमतें बह्दा दी जाती है और उन्हें फिर मन-माने ढंग से बेचा जाता है. अब अंदाजा लगाइए कि कितने हज़ार करोड़ रुपया केवल सरकारों की लापरवाही के चलते आम जनता की जेब से निकल जाता है. हर घर के बजट में अचानक इजाफा हो जाता भाई और वह पैसा बड़े-बड़े कालाबाजारियों की जेब में पहुँच जाता है. केजरीवाल सरकार इस तरह के कदम उठाने पड़ेंगे ताकि आम आदमी को कम-से-कम सब्जी रोटी तो खाने को मिले. जनता को बचाना है तो इस तरह के भ्रष्टाचार से लड़ना पड़ेगा. मजदूरों से जयादा काम करवाकर उनको कम पगार देने वाले उद्योगपतियों के खिलाफ कार्यवाही करनी होगी. मजदूरों का न्यूनतम वेतन बढ़ती महंगाई को ध्यान में रखकर बढ़ाना होगा और वह वेतन उसे मिले इसे भी सुनिश्चित करना होगा.

भ्रष्टाचार की परिभाषा

केजरीवाल सरकार को भ्रष्टाचार की परिभाषा को बदलती परिस्थितियों के आधार पर समझना होगा. व्यवस्थित ढंग से महंगाई के जरिए, कालाबाजारी के जरिए, भंडारण के जरिए, लोगों उनके काम के बदले पूर्ण वेतन न देना आदि केवल भ्रष्टाचार ही नहीं बल्कि मानवता के खिलाफ अन्याय है क्योंकि इन सबसे आम आदमी पूरी तरह प्रभावित हो रहा है. उसे अपना जीवन जीना मुश्किल हो रहा है. अगर महंगाई की वजह से माँ अपने बच्चे को दूध नहीं पिला सकती तो इससे बड़ा अन्याय क्या होगा. मुझे पूर्व न्यायधीश, सर्वोच्च न्यायलय के वे कथन याद आते हैं कि “ आम आदमी के लिए न्याय नहीं है. गरीब निर्दोष होने के बावजूद दोषी करार दिए जाते हैं. वे खुद को निर्दोष साबित नहीं कर पाते. पैसे वाले शातिर लोग महंगे वकीलों की फौज से हारी हुयी बाज़ी भी जीत जाते हैं”. केजरीवाल जी थोडा गरीब आदमी के साथ खड़े हो जाइए. अगर आप ऐसा करेंगे तो आने चुनाव में आपको वोट इस मजबूरी में नहीं दूंगा कि मुझे भाजपा और कांग्रेस के विरुद्ध वोट करना है, बल्कि में आपको वोट एक सच्ची आम आदमी की पार्टी के रूप में दूंगा.

डिस्क्लेमर:- उपर्युक्त लेख में वक्त किए गए विचार लेखक के व्यक्तिगत हैं, और आवश्यक तौर पर न्यूज़क्लिक के विचारों को नहीं दर्शाते ।

 

 

आम आदमी पार्टी
अरविन्द केजरीवाल
भाजपा
नरेन्द्र मोदी
न्यूनतम वेतन

Related Stories

#श्रमिकहड़ताल : शौक नहीं मज़बूरी है..

पेट्रोल और डीज़ल के बढ़ते दामों 10 सितम्बर को भारत बंद

आपकी चुप्पी बता रहा है कि आपके लिए राष्ट्र का मतलब जमीन का टुकड़ा है

अबकी बार, मॉबलिंचिग की सरकार; कितनी जाँच की दरकार!

दिल्ली: 20 जुलाई को 20 लाख मज़दूर हड़ताल पर जायेंगे

आरक्षण खात्मे का षड्यंत्र: दलित-ओबीसी पर बड़ा प्रहार

झारखंड बंद: भूमि अधिग्रहण बिल में संशोधन के खिलाफ विपक्ष का संयुक्त विरोध

झारखण्ड भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल, 2017: आदिवासी विरोधी भाजपा सरकार

यूपी: योगी सरकार में कई बीजेपी नेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोप

मोदी के एक आदर्श गाँव की कहानी


बाकी खबरें

  • Colombia
    पीपल्स डिस्पैच
    कोलंबिया में साल 2021 का 91वां नरसंहार दर्ज
    16 Dec 2021
    इंस्टीट्यूट ऑफ़ डेवलपमेंट एंड पीस स्टडीज (INDEPAZ) ने आगाह किया है कि 2021 में हुए नरसंहारों की संख्या 2020 में हुए नरसंहारों की कुल संख्या को पार कर सकती है। फ़िलहाल, दोनों ही आंकड़े बराबर हैं। 
  • bank strike
    अब्दुल अलीम जाफ़री
    यूपी : निजीकरण के ख़िलाफ़ 900 बैंकों के 10,000 से ज़्यादा कर्मचारी 16 दिसम्बर से दो दिन की हड़ताल पर
    16 Dec 2021
    बैंक कर्मचारियों की यूनियन का दावा है कि कॉरपोरेट घरानों की नज़र जनता द्वारा बड़ी मेहनत से कमाए गए 157 लाख करोड़ रुपयों पर है, जो सरकारी बैंकों में जमा है।
  • Advocate Manavi of ALF, YJ Rajendra of PUCL and Pastor Lucas present the report.
    निखिल करिअप्पा
    नई रिपोर्ट ने कर्नाटक में ईसाई प्रार्थना सभाओं के ख़िलाफ़ हिंसा को दर्ज किया
    16 Dec 2021
    पीयूसीएल की रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि ज़्यादातर मामलों में पुलिस पीड़ितों को सुरक्षा प्रदान करने में विफल रही है, यहां तक कि उन मामलों में भी पुलिस सुरक्षा नहीं दे पाई जहां उन्हें खुफ़िया…
  • modi
    सबरंग इंडिया
    काशी-विश्वनाथ कॉरिडोर का उद्घाटन: मंदिर और राज्य के विकास में अंतर क्यों नहीं?
    16 Dec 2021
    क्या पीएम को औरंगजेब का जिक्र ऐसे चुनावी राज्य में लाना था जहां अयोध्या फैसले के बाद से मंदिर की राजनीति गर्म हो रही है?
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 7,974 नए मामले, 343 मरीज़ों की मौत
    16 Dec 2021
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 87 हज़ार 245 हो गयी है।वही कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन के मामलों की संख्या बढ़कर 73 हो गई है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License