NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
नज़रिया
समाज
भारत
राजनीति
कितना स्वच्छ है देश में चल रहा स्वच्छता अभियान?
स्वच्छता के प्रति हमें अपने नज़रिये को पूरी तरह बदलने की ज़रूरत है। अपने घर का कचरा बुहारकर गली में कर देने से घर तो साफ़ हो सकता है, पर देश या दुनिया स्वच्छ नहीं बनेगी। हमें दिखावटी या सजावटी स्वच्छता की जगह वास्तविक स्वच्छता को अपनाना होगा। 
सरोजिनी बिष्ट
06 Aug 2019
swachchta abhiyan
Image courtesy: deccanchronicle.com

हाल ही में सिलीगुड़ी से लखनऊ लौट रही थी। न्यू जलपाईगुड़ी स्टेशन पर एनजेपी-नई दिल्ली एक्सप्रेस में सवार हुई। ट्रेन की सफ़ाई ने मन मोह लिया। लगा कि 'स्वच्छ भारत' अभियान साकार हो रहा है। लेकिन समस्तीपुर तक पहुंचते-पहुंचते यह भ्रम टूट गया। मैं टॉयलेट जाने के लिए डिब्बे के दरवाज़े के पास पहुंची तो देखा कि वहां लगे डस्टबिन से कचरा निकाला जा रहा था। सफ़ाईकर्मी आपस में बात कर रहे थे कि समस्तीपुर में चेकिंग होगी, जल्दी-जल्दी साफ़ करो। लेकिन यह क्या! सारा कचरा जमा करने के बाद उन्होंने डिब्बे के दरवाज़े से रेल लाइन के किनारे फेंकना शुरू कर दिया। शायद ऐसा रोज़ ही होता होगा, क्योंकि रेल लाइन के किनारे भारी तादाद में प्लास्टिक की बोतलें, डिस्पोज़ेबल कप-गिलास-प्लेट, एल्युमिनियम फॉयल बिखरे हुए थे और उड़-उड़ कर पास के खेतों व ताल-तलैयों में पहुंच रहे थे।

रेलवे की यह हरकत घर का कचरा बुहारकर गली में फेंक देने की मानसिकता का ही विस्तार लगती है। असल में, रेलवे का स्वच्छता अभियान सिर्फ़ ट्रेनों और स्टेशनों को साफ़ रखने तक ही सीमित है। वहां से निकलने वाला कचरा कहां जाता है, सफ़ाई का ठेका लेने वाली संस्थाएं उसका क्या करती हैं, इससे किसी को मतलब नहीं दिखता। कचरा प्रबंधन (वेस्ट मैनेजमेंट) के लिए रेलवे के पास ज्यादातर जगहों पर कोई बुनियादी ढांचा ही नहीं है। ऐसे में, रेलवे अपनी ट्रेनें और स्टेशन तो साफ कर ले रहा है, लेकिन उससे निकले कचरे को दूसरे को भुगतना पड़ रहा है।

ऐसा नहीं है कि यह काम केवल रेलवे कर रहा है, बल्कि विभिन्न नगरपालिकाएं और नगर निगम भी यही कर रहे हैं। सिलीगुड़ी यात्रा के दौरान मेरी निगाह मालदा शहर की इंगलिशबाजार नगरपालिका से जुड़ी एक ख़बर पर गयी। इस नगरपालिका को कचरा डालने के लिए कोई जगह नहीं मिल पा रही है। पुरानी जगह छोटी पड़ गयी है और नयी जगह पर कचरा डाल रहे नगरपालिका कर्मचारियों को स्थानीय लोगों ने खदेड़ दिया। स्थानीय लोग जानते हैं कि एक बार अगर उनके इलाके में डंपिंग ग्राउंड (कचरा भराव क्षेत्र) बना तो ज़िन्दगी नरक बन जानी है, क्योंकि कचरा प्रबंधन के नाम पर केवल कचरे का पहाड़ बनाया जायेगा और हर तरफ गंदगी का राज होगा। इंगलिशबाज़ार तो मिसाल भर है, देश की राजधानी दिल्ली तक में कचरा प्रबंधन का यही हाल है। दिल्ली के गाजीपुर में कचरे के पहाड़ तो अपनी ऊंचाई के लिए साल-दर-साल नये रिकॉर्ड बनाने में लगे हुए हैं।

इस प्रवृत्ति का विस्तार अंतरराष्ट्रीय स्तर तक है। अमीर देश बेलगाम उपभोक्तावाद से उपजे बेहिसाब कचरे (जिसमें भारी धातु और तरह-तरह के रसायनिक पदार्थों से युक्त बेहद जहरीला कचरा भी है) को रिसाइक्लिंग के नाम पर गरीब देशों में डंप कर रहे हैं। मतलब उनके देश का कूड़ा-कबाड़ दूसरे देश में गया, जहां उसका क्या होगा, उनकी बला से! यहां नोट करने लायक बात यह है कि सामाजिक व आर्थिक ताने-बाने में जिसकी हैसियत जितनी कम है उसके हिस्से में उतना ही ज्यादा कचरा आता है। यानी जो सबसे कम उपभोग करते हैं या यूं कहें कि जो सबसे कम कचरा उत्पादित करते हैं, उन्हें ही कचरे का खमियाजा सबसे ज्यादा भुगतना पड़ता है। शहरों का कचरा पास के गांव-बस्तियों में, और गांव का कचरा दलित टोलों में।

दरअसल, स्वच्छता के प्रति हमें अपने नज़रिये को पूरी तरह बदलने की ज़रूरत है। अपने घर का कचरा बुहारकर गली में कर देने से घर तो साफ़ हो सकता है, पर देश या दुनिया स्वच्छ नहीं बनेगी। हमें दिखावटी या सजावटी स्वच्छता की जगह वास्तविक स्वच्छता को अपनाना होगा। मतलब कि सबसे पहले कचरा उत्पादन न्यूनतम स्तर पर लाया जाये। और फिर, जो कचरा निकले उसकी रिसाइक्लिंग हो, उसे वैज्ञानिक तरीक़े से ठिकाने लगाया जाये। ट्रेन चकाचक रहे, यह अच्छी बात है, मगर उससे भी ज़्यादा ज़रूरी है ट्रेनों से निकले कचरे का रेलवे सही ढंग से निपटारा करे। कहा जाता है कि आस्ट्रेलिया की आबादी के बराबर लोग रोज़ भारतीय रेल में सफ़र करते हैं। अगर रेलवे समय रहते नहीं चेता उससे निकला कचरा न जाने कितने गांवों, जलाशयों, खेतों को प्रदूषित कर डालेगा।

Swachchh Bharat Abhiyan
Garbage
Waste Management
Municipalities
Narendra modi
BJP

Related Stories

PM की इतनी बेअदबी क्यों कर रहे हैं CM? आख़िर कौन है ज़िम्मेदार?

ख़बरों के आगे-पीछे: मोदी और शी जिनपिंग के “निज़ी” रिश्तों से लेकर विदेशी कंपनियों के भारत छोड़ने तक

ख़बरों के आगे-पीछे: केजरीवाल के ‘गुजरात प्लान’ से लेकर रिजर्व बैंक तक

यूपी में संघ-भाजपा की बदलती रणनीति : लोकतांत्रिक ताकतों की बढ़ती चुनौती

बात बोलेगी: मुंह को लगा नफ़रत का ख़ून

इस आग को किसी भी तरह बुझाना ही होगा - क्योंकि, यह सब की बात है दो चार दस की बात नहीं

ख़बरों के आगे-पीछे: क्या अब दोबारा आ गया है LIC बेचने का वक्त?

ख़बरों के आगे-पीछे: भाजपा में नंबर दो की लड़ाई से लेकर दिल्ली के सरकारी बंगलों की राजनीति

बहस: क्यों यादवों को मुसलमानों के पक्ष में डटा रहना चाहिए!

ख़बरों के आगे-पीछे: गुजरात में मोदी के चुनावी प्रचार से लेकर यूपी में मायावती-भाजपा की दोस्ती पर..


बाकी खबरें

  • लाल बहादुर सिंह
    सावधान: यूं ही नहीं जारी की है अनिल घनवट ने 'कृषि सुधार' के लिए 'सुप्रीम कमेटी' की रिपोर्ट 
    26 Mar 2022
    कारपोरेटपरस्त कृषि-सुधार की जारी सरकारी मुहिम का आईना है उच्चतम न्यायालय द्वारा गठित कमेटी की रिपोर्ट। इसे सर्वोच्च न्यायालय ने तो सार्वजनिक नहीं किया, लेकिन इसके सदस्य घनवट ने स्वयं ही रिपोर्ट को…
  • भरत डोगरा
    जब तक भारत समावेशी रास्ता नहीं अपनाएगा तब तक आर्थिक रिकवरी एक मिथक बनी रहेगी
    26 Mar 2022
    यदि सरकार गरीब समर्थक आर्थिक एजेंड़े को लागू करने में विफल रहती है, तो विपक्ष को गरीब समर्थक एजेंडे के प्रस्ताव को तैयार करने में एकजुट हो जाना चाहिए। क्योंकि असमानता भारत की अर्थव्यवस्था की तरक्की…
  • covid
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 1,660 नए मामले, संशोधित आंकड़ों के अनुसार 4,100 मरीज़ों की मौत
    26 Mar 2022
    बीते दिन कोरोना से 4,100 मरीज़ों की मौत के मामले सामने आए हैं | जिनमें से महाराष्ट्र में 4,005 मरीज़ों की मौत के संशोधित आंकड़ों को जोड़ा गया है, और केरल में 79 मरीज़ों की मौत के संशोधित आंकड़ों को जोड़ा…
  • अफ़ज़ल इमाम
    सामाजिक न्याय का नारा तैयार करेगा नया विकल्प !
    26 Mar 2022
    सामाजिक न्याय के मुद्दे को नए सिरे से और पूरी शिद्दत के साथ राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में लाने के लिए विपक्षी पार्टियों के भीतर चिंतन भी शुरू हो गया है।
  • सबरंग इंडिया
    कश्मीर फाइल्स हेट प्रोजेक्ट: लोगों को कट्टरपंथी बनाने वाला शो?
    26 Mar 2022
    फिल्म द कश्मीर फाइल्स की स्क्रीनिंग से पहले और बाद में मुस्लिम विरोधी नफरत पूरे देश में स्पष्ट रूप से प्रकट हुई है और उनके बहिष्कार, हेट स्पीच, नारे के रूप में सबसे अधिक दिखाई देती है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License