NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
क्रांति यात्रा : दिल और जिस्म पर घाव लेकर लौटे किसान
मांगों के स्तर पर देखें तो किसान क्रांति यात्रा बहुत सफल नहीं कही जा सकती। लेकिन संदेश के स्तर पर इस यात्रा ने वाकई संघर्ष का एक नया संदेश दिया है। इस आंदोलन की तस्वीरें आने वाले आंदोलनों की प्रेरणा बनेंगी और साल 2019 के आम चुनाव का पोस्टर भी।
न्यूजक्लिक रिपोर्ट
03 Oct 2018
किसान क्रांति यात्रा

अपने शरीरों पर लाठी-गोली के ज़ख़्म और दिलों में ग़म और गुस्सा लिए किसान अपने घरों को लौट गए हैं।

इस पूरी यात्रा का हासिल क्या हुआ? न्यूज़क्लिक ने यही सवाल भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता और दिवंगत नेता महेंद्र सिंह टिकैत के बेटे राकेश टिकैत से पूछा तो उनका कहना था कि “इस पूरी यात्रा का हासिल यही था कि जो किसानों के मुद्दे थे वो मुद्दे उठे, काम सरकारों को करना है। हम तो आंदोलन कर सकते हैं। बात रख सकते हैं। हमने बात रखी और सरकारों ने वादा किया है कि हम करेंगे। कर दें तो अच्छा है, वरना हमारा आंदोलन तो जारी ही रहता है।”  

मांगों के स्तर पर देखें तो किसान क्रांति यात्रा बहुत सफल नहीं कही जा सकती। सरकार ने किसानों की कर्ज माफ़ी और स्वामीनाथ रिपोर्ट लागू करने जैसी प्रमुख मांगों पर साफ-साफ कुछ भी नहीं कहा है। राकेश टिकैत ने भी इसे माना कि इन मांगों पर सरकार ने फिलहाल कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया है। लेकिन संदेश के स्तर पर देखें तो इस क्रांति यात्रा ने वाकई संघर्ष का एक नया संदेश दिया है। इस आंदोलन की तस्वीरें आने वाले आंदोलनों की प्रेरणा बनेंगी और साल 2019 के आम चुनाव का पोस्टर भी।

kisan1_0.jpg

(तस्वीर : सोशल मीडिया से साभार)

गांधी जयंती के मौके पर पुलिस से टकराते बेख़ौफ बुजुर्ग किसानों की तस्वीरों ने पूरे देश को एक नया हौसला दिया है। ये तस्वीरें यह भी बता रही हैं कि साल 2014 से लेकर 2019 तक काफी कुछ बदल गया है। 2014 में जो किसान नरेंद्र मोदी से बड़ी आस लिए हुए थे वे आज उनकी मुर्दाबाद बोल रहे थे। ये किसान मोदी और योगी दोनों सरकारों से निराश हैं। इनका साफ कहना है कि बीजेपी सरकार किसान विरोधी है।

भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के स्तर पर देखें तो इस संगठन के पीछे आज भी हज़ारों किसान हैं, इस यात्रा में भी यूपी के अलावा पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश आदि के किसान शामिल थे। लेकिन बहुत किसानों का मानना है कि नेतृत्व के स्तर पर महेंद्र सिंह टिकैत के दोनों बेटे राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत और राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत अपने पिता जैसा जोश नहीं जगा पा रहे हैं और उनकी तरह सत्ता से नहीं टकरा पा रहे हैं। 

इस बात को इससे भी समझा जा सकता है कि सरकार ने बड़ी चालाकी से 10 दिन से चल रहा इन किसानों का आंदोलन खत्म करा दिया। गांधी जयंती के पूरे दिन सरकार ने पुलिस के बल पर किसानों को यूपी गेट पर रोके रखा और दिल्ली में प्रवेश नहीं करने दिया और जब किसानों ने आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया तो सरकार ने बुधवार तड़के राजधानी दिल्ली में किसानों को प्रवेश की अनुमति देकर आंदोलन समाप्त करा दिया।

दिल्ली प्रवेश की अनुमति मिलने के बाद भारतीय किसान संघ (भाकियू) के प्रमुख नरेश टिकैत के नेतृत्व में 400 ट्रैक्टरों में सवार हजारों किसान किसान घाट पहुंचे और अपनी किसान क्रांति यात्रा की समाप्ति की घोषणा कर दी। 

नरेश टिकैत ने इसे किसानों की जीत बताया और कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के इरादे नाकाम हो गए हैं। 

किसान घाट पर नरेश टिकैत ने आईएएनएस को बताया, "किसान सभी कठिनाइयों के बावजूद डटे रहे। हम 12 दिनों से मार्च कर रहे थे। किसान थके हुए भी हैं। हम अपने अधिकारों की मांग जारी रखेंगे लेकिन फिलहाल के लिए हम मार्च को समाप्त कर रहे हैं।" 

हालांकि इससे पहले सार्वजनिक तौर पर मीडिया को दिए गए बयानों में नरेश टिकैत ने कहा था कि “किसान सरकार के आश्वासन से संतुष्ट नहीं हैं। हम इस पर बातचीत करेंगे और आगे का रुख तय करेंगे। हम अकेले कोई फैसला नहीं कर सकती, हमारी समिति इसपर फैसला करेगी।”

लेकिन रात होते-होते सरकार ने किसान नेताओं को मना लिया। आधी रात बाद उन्हें दिल्ली में प्रवेश की अनुमति दी गई और सुबह होते-होते उनकी दिल्ली से वापसी कर दी गई। 

भाजपा विरोधी नारों के बीच किसान आधी रात करीब दो बजे किसान घाट पहुंचे। किसान नेताओं ने कहा कि वे केंद्र सरकार के साथ एक समझौते पर पहुंच गए हैं और उनके अनुसार उनकी कई मांगे स्वीकार कर ली गई हैं। उन्होंने बताया कि फसलों का मूल्य बढ़ाने की उनकी मुख्य मांग भी सरकार ने मान ली है। 

भारतीय किसान संघ के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा, "इस मामले में आधिकारिक घोषणा सरकार द्वारा छह दिनों के अंदर कर दी जाएगी।" 

सरकार ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश-दिल्ली सीमा पर पुलिस बल के साथ संघर्ष के दौरान क्षतिग्रस्त हुए ट्रैक्टरों की मरम्मत की लागत भी किसानों को देने का आश्वासन दिया है। लेकिन घायल किसानों के इलाज या मुआवज़े के बारे में कुछ नहीं कहा गया है। इस बारे में पूछने पर राकेश टिकैत का कहना था कि किसान इतना कमज़ोर नहीं है कि अपने इलाज के लिए मुआवज़ा मांगें।
प्रदर्शनकारी किसानों के शीर्ष नेतृत्व ने बाद में किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें भविष्य के संघर्षो में भी एकजुट होना होगा। बुधवार सुबह करीब 5.30 बजे किसानों ने किसान घाट से लौटना शुरू कर दिया। 
हालांकि इस तरह आंदोलन समाप्त करने पर बहुत किसान खुश नहीं हैं। उनका कहना थी कि अगर इसी तरह सिर्फ आश्वासन और लाठी-गोली खाकर लौटना था तो फिर इस यात्रा का मकसद क्या था। हालांकि भाकियू नेता राकेश टिकैत ने ज़ोर देकर कहा है कि ये आंदोलन सफल रहा है। क्या इन मांगों को पूरा करने के लिए कोई समय सीमा दी गई है और मांगें न माने जाने पर वे क्या करेंगे इस सवाल के जवाब में राकेश टिकैत ने न्यूज़क्लिक से कहा कि “कोई समय सीमा नहीं दी गई है, लेकिन ये जनता है और जनता सब जानती है। ये सरकार किसानों के लिए कुछ करेगी तो किसान इसे वोट देंगे, वरना नहीं देंगे।”

किसान घाट से लौटते किसानों ने भाजपा सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ खूब नारे लगाए। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की भी प्रशंसा की जिन्हें व्यापक रूप से देश के किसानों के नायक के रूप में जाना जाता है और किसानों के एकजुट आने की सराहना की।
किसान 15 मांगों के चार्टर के साथ आए थे जिसमें ऋण माफी और फसलों के लिए उचित कीमतें शामिल हैं, जिन्हें वे बिना देरी के लागू करवाना चाहते हैं।

प्रदर्शन कर रहे किसानों ने अपना मार्च 10 दिन पहले भाकियू के नेतृत्व में हरिद्वार से शुरू किया था और सोमवार को वे उत्तर प्रदेश-दिल्ली सीमा पर पहुंचे थे, जहां उन्हें रोकने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई थी।
मंगलवार गांधी जयंती पर जब हजारों किसानों ने दिल्ली में प्रवेश की कोशिश की तो पुलिस ने उन्हें उत्तर प्रदेश-दिल्ली सीमा पर ही रोक दिया और उनकी पुलिस से झड़प हो गई, जिसमें कई किसान घायल हो गए। किसान राजघाट पर आकर संसद मार्च करना चाहते थे। लेकिन उन्हें इसकी इजाज़त नहीं मिली। पुलिस ने किसानों को रोकने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े। लाठीचार्ज भी किया और गोली भी चलाई। पुलिस से टकराते और लहूलुहान किसानों की तस्वीरें कल दिन भर मीडिया और सोशल मीडिया पर तैरती रहीं।

पुलिस जवानों के सामने अपनी लाठी लिए एक बुजुर्ग किसान की तस्वीर बहुत लंबे समय तक याद रखी जाएगी और आने वाले दिनों में आंदोलन और चुनावों का पोस्टर भी बनेंगी। जैसे नासिक से मुंबई मार्च के दौरान पांव में फफोले लिए किसानों की तस्वीरों ने पूरे देश को झकझोर दिया था और सरकार भी घबरा गई थी, कुछ इसी तरह इन तस्वीरों ने असर डाला। लेकिन अब बात तब है जब किसानों की हक़ की आवाज़ वाकई सुनी जाए और उनके पक्ष में एक बड़ी राष्ट्रीय गोलबंदी हो। वैसे इस क्रांति यात्रा का भी एक बड़ा हासिल यह भी रहा कि हरिद्वार से दिल्ली के करीब 250 किलोमीटर के सफ़र में इन्हें हर धर्म, जाति और वर्ग का समर्थन मिला। रास्ते भर हिन्दू-मुसलमान सभी ने आगे बढ़कर इनका स्वागत किया, और आज के के हिन्दुस्तान के लिए ये एक बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि राजनीतिक तौर पर सारी कोशिशें इसी एकता को तोड़ने की चल रही हैं। भारतीय किसान यूनियन के गढ़ मुजफ़्फ़रनगर में इसी एकता को 2013 के दंगों ने काफी नुकसान पहुंचाया था। हालांकि तब से काफी पानी गंगा में बह चुका है और कैराना उपचुनाव ने इस एकता की एक बार फिर पुष्टि की जिसमें जिन्ना की जगह गन्ना का मुद्दा चला। ये सब घटनाएं बताती हैं कि जब-जब गरीब, किसान-मज़दूर की राजनीति आगे आती है हिन्दू-मुसलमान की राजनीति कमज़ोर होती है और आज सबसे ज़्यादा इसी की ज़रूरत है।

 

(कुछ इनपुट आईएएनएस से)

KISAN KRANTI YATRA
BKU
farmer crises
GANNA KISAN
TIKAIT

Related Stories

यूपी चुनाव: छुट्टा पशुओं की बड़ी समस्या, किसानों के साथ-साथ अब भाजपा भी हैरान-परेशान

किसानों और सरकारी बैंकों की लूट के लिए नया सौदा तैयार

पंजाब : किसानों को सीएम चन्नी ने दिया आश्वासन, आंदोलन पर 24 दिसंबर को फ़ैसला

मुंबई महापंचायत: किसानों का लड़ाई जारी रखने का संकल्प  

यूपी: बुंदेलखंड में ‘उर्वरक संकट’ ने एक सप्ताह में ली 5 किसानों की जान

लखीमपुर हत्याकांड: जब तक मंत्री की बर्ख़ास्तगी नहीं तब तक आंदोलन चलता रहेगा

यूपी: केंद्र ने चुनाव से पहले गन्ने की एफआरपी बढ़ाई; किसान बोले विफलताओं को छुपाने का ढकोसला

मुज़फ़्फ़रनगर में 'ऐतिहासिक' महापंचायत के लिए प्रचार, 2 लाख से अधिक किसान लेंगे भाग

किसान ट्रैक्टर मार्च : बिजनौर से 200 ट्रैक्टर ग़ाज़ीपुर बॉर्डर जाने को तैयार

आसमान छू रहीं ईंधन क़ीमतों के ख़िलाफ़ हुए अखिल भारतीय प्रदर्शन में शामिल हुए किसान संगठन


बाकी खबरें

  • श्रुति एमडी
    ‘तमिलनाडु सरकार मंदिर की ज़मीन पर रहने वाले लोगों पर हमले बंद करे’
    05 Apr 2022
    द्रमुक के दक्षिणपंथी हमले का प्रतिरोध करने और स्वयं को हिंदू की दोस्त पार्टी साबित करने की कोशिशों के बीच, मंदिरों की भूमि पर रहने वाले लोगों की आजीविका पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। 
  • भाषा
    श्रीलंका में सत्ता पर राजपक्षे की पकड़ कमज़ोर हुई
    05 Apr 2022
    "सरकारी बजट पर मतदान के दौरान गठबंधन के पास 225 सांसदों में से 157 का समर्थन था, लेकिन अब 50 से 60 सदस्य इससे अलग होने वाले हैं। इसके परिणामस्वरूप सरकार न सिर्फ दो-तिहाई बहुमत खो देगी, बल्कि सामान्य…
  • विजय विनीत
    एमएलसी चुनाव: बनारस में बाहुबली बृजेश सिंह की पत्नी के आगे दीन-हीन क्यों बन गई है भाजपा?
    05 Apr 2022
    पीएम नरेंद्र मोदी का दुर्ग समझे जाने वाले बनारस में भाजपा के एमएलसी प्रत्याशी डॉ. सुदामा पटेल ऐलानिया तौर पर अपनी ही पार्टी के दिग्गज नेताओं, पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं पर आरोप जड़ रहे हैं कि वो…
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: आज दूसरे दिन भी एक हज़ार से कम नए मामले 
    05 Apr 2022
    देश में कोरोना से पीड़ित 98.76 फ़ीसदी यानी 4 करोड़ 24 लाख 96 हज़ार 369 मरीज़ों को ठीक किया जा चुका है। और एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.03 फ़ीसदी यानी 12 हज़ार 54 रह गयी है।
  • मुकुल सरल
    नफ़रत की क्रोनोलॉजी: वो धीरे-धीरे हमारी सांसों को बैन कर देंगे
    05 Apr 2022
    नज़रिया: अगर किसी को लगता है कि ये (अ)धर्म संसद, ये अज़ान विवाद, ये हिजाब का मुद्दा ये सब यूं ही आक्समिक हैं, आने-जाने वाले मुद्दे हैं तो वह बहुत बड़ा नादान है। या फिर मूर्ख या फिर धूर्त। यह सब यूं…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License