NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
कर्नाटक संकट : सुप्रीम कोर्ट ने संवैधानिक संतुलन बनाया, लेकिन ऊहापोह बरकरार
न्यायालय ने कहा बागी विधायकों को सदन की कार्यवाही में शिरकत के लिये बाध्य नहीं किया जाये। साथ ही विधानसभा अध्यक्ष को ये अधिकार दिया कि वे इस्तीफों पर ऐसी समय सीमा के भीतर निर्णय लेने के लिये स्वतंत्र हैं जो उन्हें उचित लगता हो।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
17 Jul 2019
Karnataka Crisis
Image Courtesy: Live Law

कर्नाटक का सियासी संकट अब एक नये दौर में पहुंच गया है। आज सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी बहुत कुछ साफ नहीं हो पाया है, हालांकि एक संतुलन ज़रूर बनाने की कोशिश की गई है। अब सबकी निगाहें गुरुवार को सदन में होने वाले कुमारस्वामी सरकार के विश्वासमत पर टिक गई हैं।

उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को निर्देश दिया कि कर्नाटक में कांग्रेस-जेडीएस के 15 बागी विधायकों को विधानसभा की कार्यवाही में हिस्सा लेने के लिये बाध्य नहीं किया जायेगा। विधानसभा की कार्यव़ाही में एचडी कुमारस्वामी के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार को विश्वास मत हासिल करना है।

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति अनिरूद्ध बोस की पीठ ने कहा कि कर्नाटक विधानसभा के अध्यक्ष के आर रमेश कुमार बागी विधायकों के इस्तीफों पर ऐसी समय सीमा के भीतर निर्णय लेने के लिये स्वतंत्र हैं जो उन्हें उचित लगता हो।

पीठ ने कहा कि 15 विधायकों के इस्तीफों पर निर्णय लेने के अध्यक्ष के विशेषाधिकार पर न्यायलाय के निर्देश या टिप्पणियों की बंदिश नहीं होनी चाहिए और वह इस विषय पर फैसला लेने के लिये स्वतंत्र होने चाहिए।

बागी विधायकों की याचिका पर आदेश पारित करते हुये पीठ ने कहा कि इस मामले में संवैधानिक संतुलन बनाये रखना आवश्यक है।

इसके साथ ही न्यायालय ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष के फैसले को उसके समक्ष पेश किया जाये। न्यायालय ने कहा कि इस मामले में उठाये गये बाकी सभी मुद्दों पर बाद में फैसला लिया जायेगा।

न्यायालय ने मंगलवार को राज्य विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने वाले विधायकों, विधानसभा अध्यक्ष के आर रमेश कुमार और मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी की दलीलों को सुना था।

सुनवाई के दौरान राज्य के मुख्यमंत्री कुमारस्वाी और विधानसभा अध्यक्ष ने बागी विधायकों की याचिका पर विचार करने के न्यायालय के अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाये थे। दूसरी ओर इन विधायकों का आरोप था कि राज्य में बहुमत खो चुकी गठबंधन सरकार को बचाने के प्रयास किये जा रहे हैं।

कुमारस्वामी और अध्यक्ष रमेश कुमार की दलील थी कि इन विधायकों के इस्तीफों पर पहले फैसला करने और इसके बाद उन्हें अयोग्य घोषित करने के आवेदन पर निर्णय करने के लिये अध्यक्ष से कह कर न्यायलाय उनके अधिकार क्षेत्र में दखल नहीं दे सकता है।

हालांकि न्यायालय ने कहा था कि दशकों पहले दल बदल कानून की व्याख्या करते हुये उसने अध्यक्ष को काफी ऊंचा स्थान दिया है और संभवत: इतने साल के बाद अब इस पर फिर से गौर करने की आवश्यकता है।

शीर्ष अदालत ने संकेत दिया था कि बागी विधायकों के इस्तीफे और अयोग्यता के मुद्दे पर परस्पर विरोधी दावे हैं, इसलिए इसमें संतुलन बनाने की आवश्यकता होगी।

न्यायालय ने इन विधायकों की अयोग्यता के मसले पर पहले निर्णय लेने की अध्यक्ष की इस दलील पर सवाल उठाते हुये जानना चाहा था कि वह 10 जुलाई तक क्या कर रहे थे जबकि विधायकों ने छह जुलाई को इस्तीफे दे दिये थे।

कुमारस्वामी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव धवन ने कहा था कि विधानसभा अध्यक्ष को एक समय सीमा के भीतर इस मुद्दे पर निर्णय के लिये बाध्य नहीं किया जा सकता।

धवन ने कहा था, ‘‘जब इस्तीफे की प्रक्रिया नियमानुसार नहीं है तो न्यायालय अध्यक्ष को शाम छह बजे तक निर्णय करने का निर्देश नहीं दे सकता।’’

उन्होंने कहा कि अध्यक्ष इस तथ्य से आंख नहीं मूंद सकते कि इन विधायकों की मंशा गठबंधन सरकार को अस्थिर करने की है।

उनका कहना था कि यह अध्यक्ष बनाम न्यायालय का मामला नहीं है। यह मुख्यमंत्री बनाम अज्ञात व्यक्ति है जो मुख्यमंत्री बनना चाहता है और इस सरकार को गिराना चाहता है। उन्होंने न्यायालय से उन अंतरिम आदेश को वापस लेने का अनुरोध किया था जिनमें अध्यक्ष को इस्तीफों पर निर्णय लेने और यथास्थिति बनाये रखने का निर्देश दिया था।

इन बागी विधायकों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने इन विधायकों के त्यागपत्र स्वीकार नहीं करने की वजह से अध्यक्ष पर ‘पक्षपातपूर्ण’ और ‘दुर्भावना’ से तरीके से काम करने का आरोप लगाया था। उनका तर्क था कि ऐसा करके इस्तीफा देने के उनके मौलिक अधिकार को प्रभावित किया जा रहा है।

रोहतगी का कहना था कि नियमों के अनुसार विधानसभा अध्यक्ष को इस्तीफों पर ‘अभी निर्णय’ लेना होगा।’’

उन्होंने अध्यक्ष के इस तरह के आचरण पर सवाल उठाते हुये कहा था कि इस्तीफे स्वीकार नहीं करके वह नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं।

अध्यक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी का कहना था कि बागी विधायकों द्वारा 11 जुलाई को, जब वे व्यक्तिगत रूप से अध्यक्ष के समक्ष पेश हुये थे, इस्तीफा देने से पहले उन्हें अयोग्य घोषित करने की याचिका दायर की गयी थी।

सिंघवी ने कहा था कि यह सर्वविदित है कि 15 विधायकों में से 11 ने व्यक्तिगत रूप से अपने इस्तीफे 11 जुलाई को अध्यक्ष को सौंपे और इन त्यागपत्रों को अयोग्यता की कार्यवाही को निरर्थक बनाने का आधार नहीं बनाया जा सकता।

उन्होंने कहा था कि अध्यक्ष, यदि उनसे कहा गया, अयोग्यता और इस्तीफे के मुद्दे पर बुधवार को निर्णय ले सकते हैं।

विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने वाले पहले दस बागी विधायकों में प्रताप गौडा पाटिल, रमेश जारकिहोली, बी बसवराज, बी सी पाटिल, एस टी सोमशेखर, ए शिवराम हब्बर, महेश कुमाथल्ली, के गोपालैया, ए एच विश्वनाथ और नारायण गौड़ा शामिल हैं। इसके बाद कांग्रेस के पांच अन्य विधायकों आनंद सिंह, के सुधाकर, एन नागराज, मुनिरत्न और रोशन बेग - ने 13 जुलाई को शीर्ष अदालत में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि विधानसभा अध्यक्ष उनके त्यागपत्र स्वीकार नहीं कर रहे हैं। इन विधायकों में शामिल हैं।

इससे पहले, शीर्ष अदालत ने 12 जुलाई को विधानसभा अध्यक्ष के आर रमेश कुमार को कांग्रेस और जद (एस) के बागी विधायकों के इस्तीफे और उन्हें अयोग्य घोषित करने के लिये दायर याचिका पर 16 जुलाई तक कोई भी निर्णय लेने से रोक दिया था।

संवैधानिक सिद्धांतों का पालन करुंगा : स्पीकर

कर्नाटक विधानसभा अध्यक्ष के आर रमेश कुमार ने असंतुष्ट विधायकों के इस्तीफों पर फैसला करने की जिम्मेदारी उन्हें देने के उच्चतम न्यायालय के फैसले का बुधवार को स्वागत किया और कहा कि वह संविधान के सिद्धांतों के अनुसार अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे।

विधायकों के इस्तीफे पर उच्चतम न्यायालय का फैसला आने के फौरन बाद कुमार ने कहा, ‘‘मैं पूरी विनम्रता के साथ उच्चतम न्यायालय के फैसले का स्वागत और सम्मान करता हूं।’’

उन्होंने अपने गृह नगर कोलार में पत्रकारों से कहा, ‘‘उच्चतम न्यायालय ने मुझ पर अतिरिक्त जिम्मेदारी डाल दी है, मैं संवैधानिक सिद्धांतों के अनुसार अपनी जिम्मेदारी निभाऊंगा।’’

अंसतुष्ट विधायकों की नैतिक जीत: येद्दियुरप्पा

कर्नाटक भाजपा प्रमुख बी एस येद्दियुरप्पा ने सियासी संकट पर उच्चतम न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह असंतुष्ट विधायकों के लिए ‘‘नैतिक जीत’’ है। इन विधायकों के इस्तीफे के कारण सत्तारूढ़-कांग्रेस गठबंधन सरकार गिरने की कगार पर पहुंच गई है।

येद्दियुरप्पा ने कहा कि राजनीतिक दल 15 असंतुष्ट विधायकों को व्हिप जारी नहीं कर सकते जिन्होंने अपनी विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया और उन्हें सदन की कार्यवाही में भाग लेने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।

उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने कर्नाटक के बारे में सभी तथ्यों पर गौर करते हुए अपना फैसला दिया।

येद्दियुरप्पा ने यहां पत्रकारों से कहा कि मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी बृहस्पतिवार को जब विधानसभा में विश्वास मत का सामना करेंगे तो उन्हें इस्तीफा देना पड़ेगा।

उन्होंने कहा, ‘‘जब बहुमत नहीं रहेगा तो वह (मुख्यमंत्री) स्वत: कल इस्तीफा दे देंगे।’’

येद्दियुरप्पा ने कहा, ‘‘यह केवल अंतरिम आदेश है और भविष्य में उच्चतम न्यायालय अध्यक्ष की शक्ति पर फैसला करेगा। यह संसदीय लोकतंत्र में नया दौर शुरू करेगा।’’

(समाचार एजेंसी भाषा के इनपुट के साथ)

Karnataka Crisis
Supreme Court
kumarswami
B S Yeddyurappa
CONG-JDS
BJP
KUMARSWAMI GOVT
BAGI MLA

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

ज्ञानवापी मस्जिद के ख़िलाफ़ दाख़िल सभी याचिकाएं एक दूसरे की कॉपी-पेस्ट!

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

आर्य समाज द्वारा जारी विवाह प्रमाणपत्र क़ानूनी मान्य नहीं: सुप्रीम कोर्ट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 


बाकी खबरें

  • Ukraine Russia
    पार्थ एस घोष
    यूक्रेन युद्ध: क्या हमारी सामूहिक चेतना लकवाग्रस्त हो चुकी है?
    14 Mar 2022
    राष्ट्रीय सुरक्षा का प्रश्न उस पवित्र गाय के समान हो गया है जिसमें हर सही-गलत को जायज ठहरा दिया जाता है। बड़ी शक्तियों के पास के छोटे राष्ट्रों को अवश्य ही इस बात को ध्यान में रखना होगा, क्योंकि बड़े…
  • Para Badminton International Competition
    भाषा
    मानसी और भगत चमके, भारत ने स्पेनिश पैरा बैडमिंटन अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में 21 पदक जीते
    14 Mar 2022
    भारत ने हाल में स्पेनिश पैरा बैडमिंटन अंतरराष्ट्रीय (लेवल दो) प्रतियोगिता में 11 स्वर्ण, सात रजत और 16 कांस्य से कुल 34 पदक जीते थे।
  • भाषा
    बाफ्टा 2022: ‘द पावर ऑफ द डॉग’ बनी सर्वश्रेष्ठ फिल्म
    14 Mar 2022
    मंच पर सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार देने आए ‘द बैटमैन’ के अभिनेता एंडी सर्किस ने विजेता की घोषणा करने से पहले अफगानिस्तान और यूक्रेन के शरणार्थियों के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार के लिए सरकार पर निशाना…
  • उपेंद्र स्वामी
    दुनिया भर की: दक्षिण अमेरिका में वाम के भविष्य की दिशा भी तय करेंगे बोरिक
    14 Mar 2022
    बोरिक का सत्ता संभालना सितंबर 1973 की सैन्य बगावत के बाद से—यानी पिछले तकरीबन 48-49 सालों में—चिली की राजनीतिक धारा में आया सबसे बड़ा बदलाव है।
  • indian railway
    बी. सिवरामन
    भारतीय रेल के निजीकरण का तमाशा
    14 Mar 2022
    यह लेख रेलवे के निजीकरण की दिवालिया नीति और उनकी हठधर्मिता के बारे में है, हालांकि यह अपने पहले प्रयास में ही फ्लॉप-शो बन गया था।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License