NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
“कर्फ्यू टाइमिंग” के खिलाफ देशभर में छात्र लामबंद, तमिलनाडु में निष्कासन के खिलाफ आंदोलन तेज़
राजीव गाँधी राष्ट्रीय युवा विकास संस्थान, श्रीपेरुम्बदूर में कर्फ्यू टाइमिंग का विरोध करने पर संस्थान के प्रशासन ने वहाँ 5 छात्र -छात्राओं को निष्कासित कर दिया। इसके खिलाफ अब वहाँ के छात्र-छात्राएं प्रदर्शन कर रहें हैं।
अंकित पांडेय
12 Oct 2018
राजीव  गाँधी  राष्ट्रीय  युवा  विकास  संस्थान, श्रीपेरुम्बदूर
Image Courtesy: ESD AIR

“कर्फ्यू  टाइमिंग” के  विरोध  में  छात्र-छात्राओं का आंदोलन  अब पूरे  देश में  फ़ैल  रहा  है। दिल्ली यूनिवर्सिटी  से लेकर

तमिलनाडु तक। तमिलनाडु में तो राजीव  गाँधी  राष्ट्रीय  युवा  विकास  संस्थान में  पांच छात्र-छात्राओं को वीसी  के  खिलाफ  प्रदर्शन करने पर निष्कासित भी कर दिया गया है। कई दूसरी जगह चेतावनी जारी की गई हैं। लेकिन छात्र-छात्राएं अपनी आज़ादी की इस लड़ाई में अब पीछे हटने को तैयार नहीं है और उन्होंने इसके खिलाफ पूरी मजबूती से मोर्चा खोल लिया है।

पिंजरा तोड़ कहें या कर्फ्यू तोड़ना या जेल ब्रेक...ये शब्दावली अब छात्रों खासकर महिला छात्रों के बीच काफी लोकप्रिय है। इस माध्यम से वे विश्वविद्यालय या कॉलेज प्रशासन की ओर से उनके ऊपर लादी गईं कई पाबंदियों का विरोध कर रही हैं। इन छात्राओं के मुताबिक ये बराबरी और आज़ादी की लड़ाई है।   

आपको बताएं कि दरअसल ज़्यादातर कैंपस में छात्रों के आने-जाने खासकर महिला छात्रों को लेकर बहुत तरह की पाबंदियां हैं। जैसे रात आठ बजे के बाद हॉस्टल में छात्राओं की एंट्री मना है। इस दौरान वे इमरजेंसी होने पर भी बाहर नहीं जा सकती हैं। उनसे मिलने आने-जाने वालों को लेकर भी कई तरह के सवाल और प्रतिबंध हैं। कई जगह लाइब्रेरी को लेकर भी बेहद सीमित समय है। उसमें भी लड़कियों के लिए तो और भी कम पढ़ाई का समय मिल पाता है। इसके अलावा भी कई मुश्किलें जिसे छात्र-छात्राएं हल करना चाहते हैं और इसके लिए उन्होंने कहीं “पिंजरा तोड़” तो कहीं “कर्फ्यू तोड़” आंदोलन शुरू किया है।  

पंजाब, राजस्थान  और देश  के  अन्य  कोनों में  यह  आंदोलन  बड़ी  तेज़ी  से  जोर  पकड़  रहा है। हाल ही में  “पिंजरा तोड़” अभियान के तहत दिल्ली यूनिवर्सिटी में छात्राओं ने विरोध  किया। इस  प्रदर्शन  में  छात्राओं  ने  माल  रोड (दिल्ली यूनिवर्सिटी  नार्थ कैंपस ) को  जाम करते  हुए अपनी  मांगो  को  उठाया। पुलिस ने उन्हें हटाने के लिए ज़ोर-ज़बरदस्ती की और इस दौरान कई छात्राओं को चोट भी आयीं।

राजस्थान  यूनिवर्सिटी  में  भी  छात्र-छात्राओं  ने  9 सितम्बर को  हॉस्टल में बॉयोमेट्रिक सिस्टम से रखी  जा रही निगरानी  के  खिलाफ  रात  भर  धरना  दिया। इन  छात्र - छात्राओं के  मुताबिक महिला हॉस्टलों में छात्राओं को बाहर या अंदर जाने के लिए बॉयोमेट्रिक सिस्टम में पंच करना पड़ता है। जिसके बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन उनके माता पिता को उनकी बेटी के बाहर जाने या अंदर आने के समय की सूचना देता है। लेकिन पुरुष छात्रों के लिए इस तरह के कोई नियम नहीं हैं। पुरुष छात्रों के लिए जहाँ रात 12 बजे तक लाइब्रेरी खुली रहती है वहीं महिलाएं केवल 10 बजे तक पढ़ सकती हैं।

पंजाब  यूनिवर्सिटी  में  भी  इसी  तरह  छात्र  छात्राओं ने हॉस्टल  की  कर्फ्यू  टाइमिंग  के  खिलाफ  पिछले  दिनों  प्रदर्शन  किया। यहाँ  पर  छात्राओं  को  रात  में  8 बजे  के  बाद  घुसने  नहीं  दिया  जाता है। प्रदर्शन  में  शामिल  कई  छात्राओं  के  घर  पर  यूनिवर्सिटी  प्रसाशन   ने  फ़ोन  करते हुए  धमकाने  की  कोशिश की।

इसी  कड़ी  में  राजीव  गाँधी  राष्ट्रीय  युवा  विकास  संस्थान, श्रीपेरुम्बदूर , तमिलनाडु  में  छात्र-छात्राओं  ने  कर्फ्यू  टाइमिंग  व  अन्य  मांगो  को  लेकर  वीसी  के  खिलाफ  प्रदर्शन किया। जिस पर यूनिवर्सिटी  प्रशासन  ने  वहाँ  5  छात्र -छात्राओं  को  निष्कासित  कर  दिया। इसके   खिलाफ अब  वहाँ  के  छात्र -छात्राएं  प्रदर्शन  कर  रहें।  भारी  संख्या  में  छात्र- छात्राएं  वीसी  ऑफिस  के  बाहर  बैठ  कर  निष्कासित  हुए  छात्र -छात्राओं  के  निष्कासन  को  वापस  लेने व  कर्फ्यू  टाइमिंग  हटाने  की  माँग  कर रहे हैं।

अब  सवाल  यह कि  यूनिवर्सिटी एक  ऐसी  जगह  जहाँ  हम बराबरी  को  लेकर  बात करते  है  तब  ऐसी  जगह  में  छात्राओं  के  साथ  यूनिवर्सिटी  प्रशासन का यह  दोहरा  रवैया  उचित है? आज जब देश  हर  कोने  में  छात्र -छात्राएं  कर्फ्यू  टाइमिंग  व  अन्य  माँगो  को  लेकर  आवाज़  उठा रहे  है तब  उनकी  मांगो  को  पूरा  करने  के  बजाय  यूनिवर्सिटी  प्रशासन  छात्र -छात्राओं  पर  उल्टा  कार्रवाई  कर रहे हैं।

pinjara tod
Rajiv Gandhi National Institute
Sriperumbudur
tamil nadu
RGNIYD
Student Protests
University
FREEDOM

Related Stories

दिल्ली: रामजस कॉलेज में हुई हिंसा, SFI ने ABVP पर लगाया मारपीट का आरोप, पुलिसिया कार्रवाई पर भी उठ रहे सवाल

तमिलनाडु : विकलांग मज़दूरों ने मनरेगा कार्ड वितरण में 'भेदभाव' के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया

सीपीआईएम पार्टी कांग्रेस में स्टालिन ने कहा, 'एंटी फ़ेडरल दृष्टिकोण का विरोध करने के लिए दक्षिणी राज्यों का साथ आना ज़रूरी'

क्या ट्विटर के पास केवल शिकायतों के आधार पर सामग्री को हटाने और यूज़र्स को ब्लॉक करने की शक्ति है?

तमिलनाडु राज्य और कृषि का बजट ‘संतोषजनक नहीं’ है

तमिलनाडु के चाय बागान श्रमिकों को अच्छी चाय का एक प्याला भी मयस्सर नहीं

उत्तराखंड : हिमालयन इंस्टीट्यूट के सैकड़ों मेडिकल छात्रों का भविष्य संकट में

यूपी चुनाव: प्रदेश में नहीं टिक सकी कोई भी मुस्लिम राजनीतिक पार्टी

यूपी चुनाव: पिछले 5 साल के वे मुद्दे, जो योगी सरकार को पलट सकते हैं! 

रेलवे भर्ती मामला: बर्बर पुलिसया हमलों के ख़िलाफ़ देशभर में आंदोलनकारी छात्रों का प्रदर्शन, पुलिस ने कोचिंग संचालकों पर कसा शिकंजा


बाकी खबरें

  • Hijab controversy
    भाषा
    हिजाब विवाद: बेंगलुरु के कॉलेज ने सिख लड़की को पगड़ी हटाने को कहा
    24 Feb 2022
    सूत्रों के अनुसार, लड़की के परिवार का कहना है कि उनकी बेटी पगड़ी नहीं हटायेगी और वे कानूनी राय ले रहे हैं, क्योंकि उच्च न्यायालय और सरकार के आदेश में सिख पगड़ी का उल्लेख नहीं है।
  • up elections
    असद रिज़वी
    लखनऊ में रोज़गार, महंगाई, सरकारी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन रहे मतदाताओं के लिए बड़े मुद्दे
    24 Feb 2022
    लखनऊ में मतदाओं ने अलग-अलग मुद्दों को लेकर वोट डाले। सरकारी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन की बहाली बड़ा मुद्दा था। वहीं कोविड-19 प्रबंधन, कोविड-19 मुफ्त टीका,  मुफ्त अनाज वितरण पर लोगों की अलग-अलग…
  • M.G. Devasahayam
    सतीश भारतीय
    लोकतांत्रिक व्यवस्था में व्याप्त खामियों को उजाकर करती एम.जी देवसहायम की किताब ‘‘चुनावी लोकतंत्र‘‘
    24 Feb 2022
    ‘‘चुनावी लोकतंत्र?‘‘ किताब बताती है कि कैसे चुनावी प्रक्रियाओं की सत्यता को नष्ट करने के व्यवस्थित प्रयासों में तेजी आयी है और कैसे इस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
  • Salempur
    विजय विनीत
    यूपी इलेक्शनः सलेमपुर में इस बार नहीं है मोदी लहर, मुकाबला मंडल-कमंडल के बीच होगा 
    24 Feb 2022
    देवरिया जिले की सलेमपुर सीट पर शहर और गावों के वोटर बंटे हुए नजर आ रहे हैं। कोविड के दौर में योगी सरकार के दावे अपनी जगह है, लेकिन लोगों को याद है कि ऑक्सीजन की कमी और इलाज के अभाव में न जाने कितनों…
  • Inequality
    प्रभात पटनायक
    आर्थिक असमानता: पूंजीवाद बनाम समाजवाद
    24 Feb 2022
    पूंजीवादी उत्पादन पद्धति के चलते पैदा हुई असमानता मानव इतिहास में अब तक पैदा हुई किसी भी असमानता के मुकाबले सबसे अधिक गहरी असमानता है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License