NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
कश्मीरी के प्रमुख समाचार संपादक शुजात बुखारी निर्मम हत्या ने , पत्रकारों को हिलाकर रख दिया है
वरिष्ठ पत्रकार की हत्या ने एकबार फिर पत्रकारों द्वारा सामना किए जाने वाले खतरों को उज़ागर करता है | इस घटना ने एक बार फिर से घाटी के भाईचारे में दरार पैदा की हैं।
सागरिका किस्सू
15 Jun 2018
कश्मीर

जम्मू -कश्मीर के एक स्थानीय दैनिक अख़बार राजनिंग कश्मीर के अनुभवी पत्रकार और मुख्य संपादक  शुजात बुखारी को गुरुवार की शाम को श्रीनगर के प्रेस कॉलोनी में अपने अख़बार कार्यालय के बाहर अज्ञात बंदूकधारियों ने गोली मार दी थी। वरिष्ठ पत्रकार की हत्या ने एकबार फिर पत्रकारों द्वारा सामना किए जाने वाले खतरों को उज़ागर करता है | इस घटना ने  एक बार फिर से घाटी के भाईचारे में दरार पैदा की हैं। प्रेस कॉलोनी - कश्मीर में मीडिया संगठनों का केंद्र ने कल यंहा पत्रकारों की एक बड़ी सभा की , जिन्होंने इस घटना पर सदमे का जिक्र किया और हत्या की निंदा की। स्थानीय लोगों के लिए, इस घटना ने कश्मीर पर "होने वाले विनाश" का प्रतिनिधित्व कर रही है ।

बुखारी को कई बार गोली मारी गई जब वह अपने कार्यालय से बाहर निकल रहे थे । एक स्थानीय समाचार रिपोर्ट के अनुसार, उन्हें सिर और पेट में कई बार गोली मार गई । बुखारी को पास के अस्पताल ले जाया गया जहाँ उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। उनके दो व्यक्तिगत सुरक्षा अधिकारी (पीएसओ), जो गंभीर रूप से घायल हो गए थे, उन्हें भी अस्पताल में भर्ती कराया गया । बुखारी को वर्ष 2000 में उनके ऊपर हुए हमले के बाद सुरक्षा प्रदान की गई थी। कश्मीर मॉनिटर के एक संवाददाता न्यूजक्लिक से बात करते हुए सैयद नशीर अली गिलानी ने कहा, "जब मैं गोलियों की आवाज सुना तब मैं कार्यालय के अंदर था। जब मेने आवज़ सुनी तो मैं, अपने सहयोगियों के साथ, शुजात को कार से बहर निकलने पहुंचे | फिर पुलिस मदद से बाहर निकला गया था उसके बाद उन्होंने घायलों  को अस्पताल ले जाया गया"।

"कश्मीर

एक और युवा पत्रकार जो अपनी पहचान नही बताना चाहता था, उसने कहा, "बुखारी साहब सर्वश्रेष्ठ पत्रकार और बहुत विनम्र व्यक्ति थे। यह हमला, मेरे लिए ये हमला  पत्रकारिताके लिए  खतरा है। मैं अभी भी विश्वास  नहीं कर सका हूँ कि उन्हें इतनी  क्रूरता से मारा गया है। हम, कश्मीर के पत्रकार, अब और असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। यह कल हम पर भी  हो सकते हैं। "

दुखद घटना से दुखी , पत्रकार सनम एजाज़  ने कहा, "बुखारी कश्मीर में किए गए अपने सभी कार्यों के बाद इस तरह की मौत के हकदार नही थे। मैं सदमे की स्थिति में हूं। उन्होंने एक गहरी शून्य स्थिति छोड़ी है जिसे भरा नहीं जा सकता है। "

जम्मू-कश्मीर पुलिस प्रमुख एसपी वैद ने एनडीटीवी से कहा, "हत्यारे शुजात बुखारी के भवन  से बाहर निकलने की प्रतीक्षा कर रहे थे और ऐसा लगता है कि ये हमला एक योजनाबद्ध तरीके से किया गया है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है , हमले के लिए जिम्मेदार कौन हैं । "

इस बीच, पुलिस द्वारा एक सीसीटीवी को अपने कब्ज़े में लिया गया है जिसमे मोटरसाइकिल पर तीन हमलावरों को देखा जा सकता  है। यह हमला ईद त्यौहार से कुछ दिन पहले हुआ है। यह भी ध्यान दिया जाना चाहिए कि त्यौहार समारोह के साथ संघर्षविराम की समाप्त होने की उम्मीद थी।

पत्रकारों पर हमले

 

कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स (सीपीजे) के अनुसार, 1992 से 2018 के बीच भारत में 47 पत्रकार मारे गए हैं। कश्मीर में, घाटी में चल रहे संघर्ष के कारण बुखारी को छोड़कर 18 पत्रकार मारे गए हैं। द हूट द्वारा जारी रिपोर्ट के मुताबिक, 2018 में भारत में प्रेस स्वतंत्रता पहले चार महीनों में पत्रकारों की हत्या के साथ और भी खराब हुई है। विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक रिपोर्ट 2018 के अनुसार भारत 180 देशों में से 138 वें स्थान पर है।

पत्रकारों को मौत की धमकी की श्रृंखला में 2018 में वृद्धि देखी गई है, जिसमें रविश कुमार , राणा अयूब और निधि रजदन जैसे प्रसिद्ध पत्रकार को सोशल मीडिया साइटों पर खुले तौर पर धमकी दी जा रही है।

 

Shujaat Bukhari
Rising Kashmir
Kashmir Crisis
जम्मू कश्मीर

Related Stories

क्यों बदल जाएगी जम्मू-कश्मीर की डेमोग्राफ़ी

मिलिट्री राज में क़ैद कश्मीर की कहानी

“कश्मीरी पंडितों के बारे में क्या कहना है” से उनका संकट हल होने नहीं जा रहा है

कश्मीर: अभावों और पहरेदारी के बीच जूझती घाटी

कश्मीर प्रशासन कर रहा है इन्टरनेट पर सुप्रीम कोर्ट फ़ैसले की अवहेलना?

कश्मीर: संविधान के मूल्यों को कैसे बनाकर रख पाएगी सेना

कश्मीर टूरिज्म निचले पायदान पर पहुंचा

दर्द में गुजरे कश्मीर के चार महीने !

क्यों भारतीय मुस्लिमों को लगता है कि उनके नेताओं ने उन्हें धोखा दिया?

क्या सिर्फ़ सांस लेने और खाना खाने को सामान्य स्थिति कहेंगे?


बाकी खबरें

  • Ukraine
    सी. सरतचंद
    यूक्रेन युद्ध की राजनीतिक अर्थव्यवस्था
    01 Mar 2022
    अन्य सभी संकटों की तरह, यूक्रेन में संघर्ष के भी कई आयाम हैं जिनकी गंभीरता से जांच किए जाने की जरूरत है। इस लेख में, हम इस संकट की राजनीतिक अर्थव्यवस्था की पृष्ठभूमि की जांच करने की कोशिश करेंगे।
  • Chamba Tunnel
    सीमा शर्मा
    जाने-माने पर्यावरणविद् की चार धाम परियोजना को लेकर ख़तरे की चेतावनी
    01 Mar 2022
    रवि चोपड़ा के मुताबिक़, अस्थिर ढलान, मिट्टी के कटाव और अनुक्रमित कार्बन(sequestered carbon) में हो रहे नुक़सान में बढ़ोत्तरी हुई है।
  • UP Election
    न्यूज़क्लिक टीम
    उत्तर प्रदेश चुनाव: 'कमंडल' पूरी तरीके से फ़ेल: विजय कृष्ण
    28 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश चुनाव में इन दिनों सत्ताधारी भाजपा जनता पार्टी के राज्य बिगड़ते जातीय समीकरणों पर काफी चर्चा चल रही है. विशेषज्ञों के अनुसार जिन जातीय समीकरणों ने भाजपा को 2017 में सत्ता दिलाने में…
  • Manipur Elections
    न्यूज़क्लिक टीम
    मणिपुर चुनावः जहां मतदाता को डर है बोलने से, AFSPA और पानी संकट पर भी चुप्पी
    28 Feb 2022
    ग्राउंड रिपोर्ट में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने नौजवानों की राजनीतिक आकांक्षाओं और उम्मीदों को टटोला, साथ ही सामाजिक कार्यकर्ता ओनिल से जाना पानी संकट और ड्रग्स पर भाजपा की चुप्पी का सबब। साथ ही भारत…
  • Modi
    सोनिया यादव
    काशी में पीएम मोदी ने 'राजनीतिक गिरावट' की कही बात, लेकिन भूल गए ख़ुद के विवादित बोल
    28 Feb 2022
    चुनावी रैलियों में पीएम मोदी ने भले ही बीजेपी के स्टार प्रचारक के तौर पर अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं और अपने समर्थकों को ख़ुश किया होगा, लेकिन एक पीएम के तौर पर वो इस पद की गरिमा को गिराते ही नज़र आते…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License