NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
संस्कृति
भारत
राजनीति
कुंभ 2019 : श्रद्धालु पूछ रहे हैं, कहां हैं सरकार की बहुप्रचारित सुविधाएं?
शौचालयों में पानी नहीं है। महिलाओं को स्नान के बाद कपड़े बदलने के उचित जगह नहीं मिल रही। और शिकायत निवारण के लिए भी कोई नहीं। कुंभ मेले में शामिल होने वाले कई लोगों ने इस तरह की शिकायतें की हैं।
सौरभ शर्मा
18 Jan 2019
Translated by महेश कुमार
कुंभ 2019
Image Coutesy: The Sentinel

विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक स्नान पर्व- कुंभ- उत्तर प्रदेश में गंगा, यमुना और पौराणिक सरस्वती नदी के संगम पर शुरू हुआ है, जिसे सभी हिंदू पवित्र मानते हैं। संगम में डुबकी लगाने के लिए बड़ी संख्या में भक्त उमड़ पड़े हैं, लेकिन अब प्रयागराज के नाम से पहचाने जाने वाले इलाहाबाद के विशाल मेला मैदान में सुविधाओं की कमी के कारण भक्त लोग निराश लौट रहे हैं।

इस धार्मिक आयोजन को सफल बनाने के लिए, उत्तर प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी की अगुआई वाली सरकार विभिन्न योजनाओं पर 4,236 करोड़ रुपये खर्च कर रही है, सुविधाओं का उन्नयन और इस आधार पर व्यवस्थाएं तैयार की जा रही हैं, जिसमें रैन बसेरा (रात्रि प्रवास तंबू) और शौचालय शामिल हैं।

पहला शाही स्नान प्रयागराज के संगम में गत 15 जनवरी को आयोजित किया गया था और देश और दुनिया के विभिन्न हिस्सों के 2.5 करोड़ से अधिक लोग उस दिन नदी के तट पर इकट्ठा हुए थे, लेकिन अधिकांश मेला मैदान में मूलभूत सुविधाओं के अभाव से निराश थे।

इस जमावड़े को देखने के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका से आई 25 वर्षीया रोजा एल मार्क का कहना है कि वह इस कार्यक्रम में भाग लेने को लेकर वास्तव में काफी उत्साहित थीं, लेकिन लगता है कि सरकार ने इस त्योहार के प्रति लापरवाही कर रही है, क्योंकि मेला मैदान में शायद ही कोई सुविधा मौजूद है और शिकायत निवारण के लिए कोई नहीं है।

“मैं अपने कुछ दोस्तों के साथ यहां आयी थी। हमने एक तम्बू बुक किया था, लेकिन देखो क्या झेलना पड़ा? दिन के समय शौचालय में पानी नहीं था। अगले दिन सुबह पानी आया। वह व्यक्ति, जो कमोबेश डेरे का केयरटेकर था, हमें भरोसा दिलाता रहा कि पानी की आपूर्ति जल्द ही शुरू हो जाएगी, लेकिन जब हमारे सामने एक वरिष्ठ अधिकारी ने उसका अपमान किया तो वह भी शर्मिंदा हो गया। उसने आखिरकार हमें दो बोतल पानी दिया, जिसे उसने खुद के लिए स्टॉक किया था।”

रोजा, जो भगवान शिव की भक्त हैं, आगे शिकायत करती हैं कि वह अगले दिन सुबह 6 बजे नदी में स्नान करने गईं थीं, लेकिन उन्हें तब बड़ी निराशा का सामना करना पड़ा जब उन्हें अपने कपड़े बदलने के लिए कोई जगह नहीं मिली।

रोजा ने बताया “स्नान करने के बाद, मुझे कपड़े बदलने की अस्थायी व्यवस्था भी नहीं मिली। मैं भारत में लगातार आती रही हूं और मैंने वाराणसी में इन सुविधाओ के साथ घाटों को देखा है, लेकिन यहां के अधिकारियों और सरकार ने कुछ नहीं किया है। शुक्र है कि अच्छे भारतीयों का एक समूह था, जिन्होंने एक छोटा सा घेरा बनाकर हमारी मदद की।”

उन्होंने कहा, "मैं समझती हूं कि यह एक बहुत बड़ा अवसर है और हर चीज की व्यवस्था करना संभव नहीं है, लेकिन महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों के बारे में तो सोचना चाहिए।"

29 वर्षीय, ललित वर्मा, जो एक इंजीनियर है, जो लखनऊ से बस में बैठकर कुंभ गए थे, उनका कहना है कि उनकी बस को कार्यक्रम स्थल से आठ किलोमीटर पहले ही रोक दिया गया था और सुबह-सुबह कोई शटल सेवा भी नहीं चल रही थी।

ललित ने बताया “मुझे पाँच किलोमीटर से अधिक चलना पड़ा और मेला स्थल पर पहुँचने से पहले ही मेरी ऊर्जा खत्म हो गई थी। मैं किसी तरह से कार्यक्रम स्थल पर पहुँच गया, लेकिन बड़ी समस्या तब आई जब पता चला कि वहाँ स्थापित कोई भी शौचालय काम का नहीं था। कोई सफाई कर्मचारी नहीं था। कुछ शौचालयों में सीट नहीं थी और कुछ का उपयोग करने बेहद मुश्किल था क्योंकि वे बहुत गंदे थे। इसलिए, मुझे एक अच्छे शौचालय का उपयोग करने के लिए सिविल लाइंस में पांच किलोमीटर दूर जाना पड़ा।” वे कहते हैं कि दिन के समय शटल बस सेवा खोज पाने के लिए वह काफी भाग्यशाली रहे।

एसडीएम कुंभ, राजीव राय से जब भक्तों को होने वाली समस्याओं के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि सुधारात्मक उपाय किए जा रहे हैं और दो या तीन दिनों के भीतर सबकुछ ठीक हो जाएगा।

“मैं स्वीकार करता हूं कि पहले शाही स्नान पर सुविधाओं में कुछ खामियां थीं और हमने तुरंत इस पर काम करना शुरू कर दिया है। हम शौचालय और अन्य सेवाओं के ठेकेदारों को बदलने पर भी विचार कर रहे हैं। परिवहन विभाग को इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए रात के समय बसों को चलाने के लिए भी निर्देशित किया गया है।

यह ध्यान देने की बात है कि योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार और कुंभ मेला प्राधिकरण का दावा है कि उन्होंने अस्थायी टेंट शहर में 1.22 लाख से अधिक शौचालय स्थापित किए हैं और इस पर एक विशाल बजट खर्च किया गया है।

KUMBH
KUMBH 2019
PRYAGRAJ KUMBH 2019
प्रयागराज कुंभ 2019
UttarPradesh
BJP Govt
Yogi Adityanath
Hindutva

Related Stories

सांप्रदायिक घटनाओं में हालिया उछाल के पीछे कौन?

क्यों आदित्यनाथ और खट्टर को नौजवान महिलाओं को लेक्चर नहीं देना चाहिये?

बनारस: ‘अच्छे दिन’ के इंतज़ार में बंद हुए पावरलूम, बुनकरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल

UP: हिंदी में फेल 8 लाख स्टूडेंट हमारी जीवन चिंतन का हिंदी से दूर हो जाने का रिजल्ट है !

अयोध्या केस को गलत तरीके से हिंदू-मुस्लिम विवाद के तौर पर पेश किया गया: हिलाल अहमद

आख़िर भारतीय संस्कृति क्या है?

निक्करधारी आरएसएस और भारतीय संस्कृति

रैपर हार्ड कौर के ख़िलाफ़ राजद्रोह का मुक़दमा दर्ज

वाराणसी: कारमाइकल लाइब्रेरी ढहाए जाने पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, योगी सरकार से मांगा जवाब

आतिशी के ख़िलाफ़ पर्चा अदब ही नहीं इंसानियत के ख़िलाफ़ है


बाकी खबरें

  • अनिल सिन्हा
    उत्तर प्रदेशः हम क्यों नहीं देख पा रहे हैं जनमत के अपहरण को!
    12 Mar 2022
    हालात के समग्र विश्लेषण की जगह सरलीकरण का सहारा लेकर हम उत्तर प्रदेश में 2024 के पूर्वाभ्यास को नहीं समझ सकते हैं।
  • uttarakhand
    एम.ओबैद
    उत्तराखंडः 5 सीटें ऐसी जिन पर 1 हज़ार से कम वोटों से हुई हार-जीत
    12 Mar 2022
    प्रदेश की पांच ऐसी सीटें हैं जहां एक हज़ार से कम वोटों के अंतर से प्रत्याशियों की जीत-हार का फ़ैसला हुआ। आइए जानते हैं कि कौन सी हैं ये सीटें—
  • ITI
    सौरव कुमार
    बेंगलुरु: बर्ख़ास्तगी के विरोध में ITI कर्मचारियों का धरना जारी, 100 दिन पार 
    12 Mar 2022
    एक फैक्ट-फाइंडिंग पैनल के मुतबिक, पहली कोविड-19 लहर के बाद ही आईटीआई ने ठेके पर कार्यरत श्रमिकों को ‘कुशल’ से ‘अकुशल’ की श्रेणी में पदावनत कर दिया था।
  • Caste in UP elections
    अजय कुमार
    CSDS पोस्ट पोल सर्वे: भाजपा का जातिगत गठबंधन समाजवादी पार्टी से ज़्यादा कामयाब
    12 Mar 2022
    सीएसडीएस के उत्तर प्रदेश के सर्वे के मुताबिक भाजपा और भाजपा के सहयोगी दलों ने यादव और मुस्लिमों को छोड़कर प्रदेश की तकरीबन हर जाति से अच्छा खासा वोट हासिल किया है।
  • app based wokers
    संदीप चक्रवर्ती
    पश्चिम बंगाल: डिलीवरी बॉयज का शोषण करती ऐप कंपनियां, सरकारी हस्तक्षेप की ज़रूरत 
    12 Mar 2022
    "हम चाहते हैं कि हमारे वास्तविक नियोक्ता, फ्लिपकार्ट या ई-कार्ट हमें नियुक्ति पत्र दें और हर महीने के लिए हमारा एक निश्चित भुगतान तय किया जाए। सरकार ने जैसा ओला और उबर के मामले में हस्तक्षेप किया,…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License