NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
क्या आधार एक डूबता जहाज़ है ?
UIDAI कब तक आधार डेटा लीक के मुद्दे से आँखें फेर सकता है ?
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
05 May 2018
Translated by ऋतांश आज़ाद
आधार

कुछ दिनों पहले दो बड़ी वेबसाइटों एशिया टाइम्स और मीडियम ने आधार प्रणाली में सुरक्षा सम्बंधित खामियों का खुलासा किया था I सैकत दत्ता ने लिखा कि बहुत लोगों ने इन खामियों के बारे में UID को लिखा है, लेकिन वहाँ से कोई जवाब नहीं आया I कल फ्रांस के सुरक्षा विशेषज्ञ इलियट एल्डरसन @fs0c131y, जो पहले भी आधार और सरकार की वेबसाइटों पर सुरक्षा उल्लंघनो के बारे में बता चुके हैं, ने एक यूट्यूब विडियो का लिंक ट्वीट किया I इस विडियो में दिखाया गया कि किस तरह एक सॉफ्टवेर से आधार प्रणाली में मौजद लोगों के निजी डेटा को बदला जा सकता है और वह भी बिना किसी सुरक्षा जाँच के I इसके साथ ही UIDAI के  जले पर नमक छिड़कते हुए विडियो में ये भी कहा गया कि जिस भी व्यक्ति को विडियो पसंद आये वह PayTM के ज़रिये पैसे भेज सकता है I

क्या ये विडियो नकली है ? अगर है तो हमें चैन की सांस लेनी चाहिए I लेकिन परेशानी ये है कि इस तरह की शिकायतें पहले भी UIDAI के पास आ चुकी है, लेकिन इसपर कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है I काफी सारी शिकायतों में बताया गया है कि इस तरह का सॉफ्टवेर मात्र 500 रुपये में मिल रहा है I आनंद वेंकटनारायनन ने अपने लेख में बताया है कि कैसे ECMP (Aadhaar Enrolment Client Multiplatform) सॉफ्टवेयर जो कि ई-केन्द्रों में रहता है तो आसानी से हैक किया जा सकता है I अगर वो हैक हो जाता है तो जिस व्यक्ति का आधार डेटा वहाँ मौजूद है उसे बदला जा सकता है I इसका अर्थ है बायोमेट्रिक और निजी डेटा के बीच की मैपिंग को बदला जा सकता है I

UIDAI के अनुसार बायोमेंट्रिक डेटाबेस को हैक नहीं किया जा सकता है क्योंकि वह सुरक्षा दीवारों (अटोर्नी जनरल के हिसाब से ये 13 फीट की दीवारे हैं ) के पीछे हैं I परेशानी ये नहीं है कि क्या नाम और ऊँगली के निशान सुरक्षित हैं या नहीं परेशानी ये है कि क्या ऊँगली के निशान से जो नाम और बाकि जानकारी जुड़ीं हैं वो मेरी है या नहीं I अगर वो नहीं है तो उन्हें सिर्फ 500 रुपये का सॉफ्टवेयर खरीद के बदला जा सकता है I जितने ज़्यादा लोगों को आधार प्रणाली से जोड़ा जायेगा उतना ही ज़्यादा चोरी का खतरा बढ़ जायेगा I ये आधार प्रणाली का सबसे बड़ा खतरा है और हमारा सबसे डरावना सपना I

हम काफी समय से सरकार को अपने लेखों और वीडियोज़ से ये बताने की कोशिश कर रहे हैं कि कैसे आधार प्रणाली बहुत ख़राब है और ये पहचांन की जाँच करने की मज़बूत प्रणाली नहीं है I अगर बायोमेट्रिक्स को वहाँ इस्तेमाल किया जाता है जहाँ ख़राब कनेक्टिविटी, बिजली की कम पहुँच और बायोमेट्रिक्स में ऊँगली के निशान के ना मिलने की 10% दर होना इस सिस्टम को नाकाम कर देगा I अगर बायोमेट्रिक्स को समाप्त कर दिया जाता है तो आधार खुदको स्तायापित करने जैसा होगा I तो फिर इस प्रणाली पर हज़ारों करोड़ रुपये क्यों खर्च किये जा रहे हैं I

इस सिस्टम का तर्क कुछ और है I ये सच हा कि आधार सीवर की तरह लीक कर रहा है I उससे बचकर निकलने के बहुत से तरीके हैं I लेकिन जिन लोगों को इसका फायदा होना चाहिए था उन्हें हो नहीं रहा क्योंकि बायोमेट्रिक्स हर जगह ढंगसे काम नहीं कर रहा I

तो आधार का मकसद क्या है ? सरकार के लिए वो एक ज़रिया है बड़े पैनामे पर आम जनता के बारे में जानकारी इक्कट्ठा करने का I इस जानकारी में नागरिकों की जाति, धर्म , घर का पता, उनका वेतन और उनके खर्चे आदि शामिल हैं I एक सरकार जो एक सम्प्रदाय के खिलाफ है , इसका इस्तेमाल उनके इलाके को छोड़कर बाकि इलाकों में विकास करने के लिए कर सकती है I बड़े पूंजीपतियों जैसे अम्बानी के लिए ये उन्हें सरकारी खर्चे पर डेटा देना है I जैसे ही ये डेटा किसी पूंजीपति के हाथ लग गया वह इसे विभिन्न तरीकों से नज़र रखने के लिए इस्तेमाल कर सकती है I इसी लिए अम्बानी और निलेकानी आधार को लागू कराना चाहते हैं I

लेकिन सरकार और पूंजीपतियों के लिए आधार का पारिस्थितिकी तंत्र इतने ख़राब तरीके से बनाया और लागू किया गया है कि इसका नाकाम होना लाज़मी है I अगर सुप्रीम कोर्ट भी इसे निजता के अधिकार का उल्लंघन नहीं मानता I

आधार प्रणाली एक ऐसे जहाज़ की तरह है जिसमें बहुत से छेद हैं I कैप्टिन UIDAI कब तक इससे आँखें फेर सकता है ?और कब तक इतनी ख़राब प्रणाली के लिए पैसे खर्च किये जायेंगे ?

आधार कार्ड
आधार डेटा लीक
UIDAI
BJP

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

गुजरात: भाजपा के हुए हार्दिक पटेल… पाटीदार किसके होंगे?


बाकी खबरें

  • Ukrain
    रवीश कुमार
    सुनिए सरकार: इस वक्त हेडलाइन मैनेजमेंट छोड़कर छात्रों को निकालने के मैनजमेंट पर ध्यान दें
    27 Feb 2022
    जब सारे बच्चे सुरक्षित आ जाएंगे और आपके प्रयासों से आ जाएंगे, तो यह देश इतना कृपालु है कि आपको श्रेय देगा। लेकिन चंद सौ को निकाल कर इस वक्त जहाज़ के आते ही मंत्री भेज कर फोटो खींचाने की ज़रूरत नहीं…
  • ECI
    अनिल जैन
    ख़बरों के आगे-पीछे: विपक्ष को पोस्टल बैलेट में खेल होने का डर
    27 Feb 2022
    हर हफ़्ते की ऐसी चुनिंदा ख़बरें जिन पर कम ध्यान जाता है लेकिन वो होती महत्वपूर्ण हैं, ऐसी ही ख़बरों को लेकर आए हैं अनिल जैन..
  • BIG FACES
    रवि शंकर दुबे
    यूपी चुनाव, पांचवां चरण: दांव पर है कई दिग्गजों की प्रतिष्ठा
    27 Feb 2022
    यूपी चुनावों के पांचवें चरण में बड़े-बड़े नेताओं की सीट शामिल हैं, ऐसे में राजा भैया से लेकर पीएम पुनिया के बेटे तक की साख दांव पर है। अयोध्या, अमेठी और प्रयागराज की महत्वपूर्ण सीटों पर भी सभी की…
  • cartoon
    डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
    तिरछी नज़र: सरकार-जी, बम केवल साइकिल में ही नहीं लगता
    27 Feb 2022
    सरकार जी, एक बम और है। और वह बम भी आपको याद नहीं है। सोचा मैं ही याद दिला दूं। वह बम आपने ही, आपकी पार्टी ने ही लगाया है, प्लांट किया है। वह बम है, घृणा का, वैमनस्य का, दो समुदायों में अलगाव का। वह…
  • न्यूज़क्लिक डेस्क
    इतवार की कविता : 'ऐ शरीफ़ इंसानो, जंग टलती रहे तो बेहतर है...'
    27 Feb 2022
    यूक्रेन पर रूस पर हमला जारी है। और इन हमलों के चलते आम नागरिकों की परेशानियाँ भी बढ़ती जा रही हैं। ऐसे में पढ़िये साहिर लुधियानवी की जंग के ख़िलाफ़ लिखी यह नज़्म जिसमें वह कहते हैं कि 'जंग टलती रहे तो ब
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License