NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
क्या इंटरनेट बैन है मणिपुर विश्वविद्यालय की समस्या का हल?
यूनिस्को की रिपोर्ट पर गौर करें तो दुनिया के सभी देशों में इंटरनेट बैन करने के मामले में भारत अव्वल नंबर पर रहा है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
21 Jul 2018
Internet Ban in Manipur University

मणिपुर विश्वविद्यालय के छात्रों और पुलिस के बीच शुक्रवार को झड़प होने के बाद मणिपुर सरकार ने पाँच दिनों के लिए इंटरनेट और एस.एम.एस सेवा पर  प्रतिबंध लगा दिया है। गौरतलब है कि मणिपुर विश्वविद्यालय के छात्रों ने कुलपति आद्दा प्रसाद पांडे को पद से हटाने के लिए मंगलवार  को दो दिन के लिए राज्य बंद की घोषणा की थी जिसके बाद राज्य भर में इसका असर देखा गया।

बंद के दौरान सभी अन्तर्राज्यीय और अंतर-ज़िला बस व टैक्सी एवं ऑटो रिक्शा सेवाएँ बंद रहीं। बाज़ार, होटल एवं मॉल सहित तमाम व्यापारिक प्रतिष्ठान भी बंद रहे।  हड़ताल के चलते स्कूल, कॉलेज और शैक्षणिक संस्थान भी ठप्प रहे। वहीं राजधानी के प्रमुख स्थानों पर बड़ी संख्या में सुरक्षाबल तैनात किए गए थे।

यह भी पढ़ें- मणिपुर विश्वविद्यालय: कुलपति के खिलाफ छात्र और शिक्षक भूख हड़ताल पर

मणिपुर राज्य के गृह सचिव के.एच रघुमानी सिंघ ने ओडर लैटर में कहा है कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल राज्य की जनता को भड़काने के लिए किया जा रहा है। जिस कारण राज्य भर में कानून व्यवस्था के लिए ख़तरा खड़ा हो रहा हैI

गौरतलब है कि मणिपुर विश्वविद्यालय के छात्र पिछले 43 दिनों से धरने पर हैं। 30 मई के बाद से वहाँ पढ़ाई ठप्प है। छात्रों की माँग है कि कुलपती आद्दा प्रसाद पांडे को तत्काल प्रभाव उनके पद से हटाया जाए। छात्रों का आरोप है कि कुलपती महीने में  केवल 10 दिन ही कैंपस में आते है जिसके कारण विश्वविद्यालय के कई ज़रूरी कामों में  देरी हो रही है। वहीं छात्रों ने कुलपती पर विश्वविद्यालय के भगवाकरण का भी आरोप लगाया था।

यह पहली बार नहीं है जब समस्या का समाधान करने की बजाए सरकार ने जन-संचार के माध्यम जैसे कि इंटरनेट, एस.एम.एस सेवाओं पर ही प्रतिबंध लगाया दिया गया हो। हाल ही में त्रिपुरा सरकार ने भी मॉब लिंचिंग की घटनाओं को रोकने लिए कोई उचित कदम उठाने के बजाए इंटनेट को प्रतिबंधित करके अपना पल्ला झाड़ने की कोशिश की थी।

हाल ही में जारी हुई यूनिस्को की रिपोर्ट पर गौर करें तो दुनिया के सभी देशों में इंटरनेट बैन करने के मामले में भारत अव्वल नंबर पर रहा है। 2017-18 में जारी यूनिस्को की रिपोर्ट के मुताबिक दक्षिणी एशियाई देशों में इंटरनेट बैन के कुल 97 मामले सामने आए हैं, जिनमें 82 मामलें अकेले भारत के हैं। वहीं इस रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान में इंटरनेट बैन के कुल 12 मामले ही सामने आए हैं। पाकिस्तान के अलावा बांग्लादेश, श्रीलंका और अफगानिस्तान से एक-एक मामले सामने आए हैं।

भारत के इन 82 इंटरनेट बैन मामलों में आधे से ज़्यादा मामले कश्मीर के हैं। जहाँ सेना ने आतंकवादी गतिविधियों पर नियंत्रण पाने के नाम पर कई शहरों में इंटरनेट बैन किया। पिछले साल घाटी में आतंकवदी और अन्य नागरिकों के मारे जाने के बाद होने वाले दंगों पर लगाम लगाने के बहाने से आमूमन कई बार इंटरनेट बैन किया गया। रिपोर्ट के अनुसार कश्मीर घाटी में 31 दिनों तक वीडियो और फोटो के शेयर करने पर भी रोक लगाई गई थी।

कश्मीर के अलावा कई ऐसे भी राज्य हैं जहाँ सांप्रदायिक तनावों को देखते हुए इंटरनेट बैन किया गया। इंटरनेट बैन के 10 से ज़्यादा मामले राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों के हैं। बिहार के नवादा जिले में तो 40 दिनों तक लगातार इंटरनेट सेवाएँ बंद कर दी गयीं थीं। वहीं पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग में अलग गोरखालैंड राज्य के माँग को लेकर हुई हिंसा की वजह से 45 दिनों तक इंटरनेट सेवा बाधित की गई थी।

ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या सरकार इन्टरनेट सेवा बंद कर असल मुद्दों को सुलझा पाने में अपनी नाकामी को छिपाने की कोशिश कर रही है?

Manipur university
internet ban
manipur
students'Protest

Related Stories

पूर्वोत्तर के 40% से अधिक छात्रों को महामारी के दौरान पढ़ाई के लिए गैजेट उपलब्ध नहीं रहा

त्वरित टिप्पणी: जनता के मुद्दों पर राजनीति करना और जीतना होता जा रहा है मुश्किल

मणिपुर में भाजपा सरकार बनाने की प्रबल दावेदार केवल बहुमत का इंतज़ार

Election Results : जनादेश—2022, 5 राज्यों की जंग : किसकी सरकार

EXIT POLL: बिग मीडिया से उलट तस्वीर दिखा रहे हैं स्मॉल मीडिया-सोशल मीडिया

मणिपुर के बहाने: आख़िर नीतीश कुमार की पॉलिटिक्स क्या है...

मणिपुरः जो पार्टी केंद्र में, वही यहां चलेगी का ख़तरनाक BJP का Narrative

मणिपुर में पहले चरण का चुनाव, 5 ज़िलों की 38 सीटों के लिए 67 फ़ीसदी से ज़्यादा मतदान

मुद्दा: महिला सशक्तिकरण मॉडल की पोल खोलता मणिपुर विधानसभा चुनाव

मणिपुर चुनाव: भाजपा के 5 साल और पानी को तरसती जनता


बाकी खबरें

  • punjab
    रवि कौशल
    पंजाब चुनाव: पार्टियां दलित वोट तो चाहती हैं, लेकिन उनके मुद्दों पर चर्चा करने से बचती हैं
    12 Feb 2022
    दलित, राज्य की आबादी का 32 प्रतिशत है, जो जट्ट (25 प्रतिशत) आबादी से अधिक है। फिर भी, राजनीतिक दल उनके मुद्दों पर ठीक से चर्चा नहीं करते हैं क्योंकि वे आर्थिक रूप से कमज़ोर, सामाजिक रूप से उत्पीड़ित…
  • union budget
    बी. सिवरामन
    केंद्रीय बजट 2022-23 में पूंजीगत खर्च बढ़ाने के पीछे का सच
    12 Feb 2022
    क्या पूंजीगत खर्च बढ़ने से मांग और रोजगार में वृद्धि होती है?
  • Rana Ayyub
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट/भाषा
    जनता के पैसे का इस्तेमाल ख़ुद के लिए नहीं किया : राना अय्यूब
    12 Feb 2022
    सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक बयान जारी करते हुए अय्यूब ने कहा कि उन्होंने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और आयकर विभाग के अधिकारियों को ‘‘स्पष्ट रूप से दिखाया’’ है कि ‘‘राहत अभियान के धन का कोई भी हिस्सा…
  • sc and yogi
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    सुप्रीम कोर्ट की यूपी सरकार को चेतावनी; सीएए विरोधी प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ वसूली नोटिस वापस लें या हम इसे रद्द कर देंगे
    12 Feb 2022
    शीर्ष अदालत ने कहा कि दिसंबर 2019 में शुरू की गई यह कार्यवाही उच्चतम न्यायालय द्वारा प्रतिपादित कानून के खिलाफ है और इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती है।
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 50 हज़ार नए मामले सामने आए 
    12 Feb 2022
    देश में 24 घंटों में कोरोना के 50,407 नए मामले सामने आए हैं। देश में कोरोना संक्रमण के मामलों की संख्या बढ़कर 4 करोड़ 25 लाख 86 हज़ार 544 हो गयी है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License