NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अर्थव्यवस्था
क्या जीडीपी के आंकड़ें बदलकर ज़मीनी हालात बदल जाएंगे मोदी जी?
देश बदलाव के दौर से गुज़र रहा है। कभी नाम बदले जा रहे हैं तो कभी आंकड़े। सरकारें भरसक प्रयास कर रही हैं कि बदलाव को 'सकारात्मक' दिखाया जाए, पर क्या यह सभी बदलाव सकारात्मक हैं?
नवीन कुमार वर्मा
29 Nov 2018
सांकेतिक तस्वीर

केंद्र सरकार ने यूपीए सरकार के कार्यकाल के दौरान जीडीपी में बढ़ोतरी के आंकड़ों को घटा दिया है। यह बदलाव लोकसभा चुनाव से ठीक पहले के आंकड़ों में किया गया है। जिसकी वजह से यूपीए सरकार के दौरान जीडीपी के आंकड़ों में एक से दो फीसदी से ज्यादा की कमी आ गई है। मोदी सरकार ने आंकड़ों को 2004-05 के आधार वर्ष के स्थान पर वर्ष 2011-12 के आधार वर्ष से बदल दिया है, जिस कारण विकासदर के आंकड़ों में बदलाव आ गया है। 

केंद्र की मोदी सरकार का मानना है कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह सरकार के कार्यकाल के दौरान के आंकड़े अर्थव्यवस्था की सही तस्वीर पेश नहीं करते और अर्थव्यवस्था को बेहतर तरीके से जानने के लिए यह किया जाना अति आवश्यक था ताकि अर्थव्यवस्था की एक बेहतर तस्वीर सामने आ सके। 

फैसले का आंकड़ों पर प्रभाव

मोदी सरकार के आंकड़ों में किए गए बदलाव के कारण यूपीए सरकार के कार्यकाल के वर्षों के विकासदर के आंकड़ों में गंभीर गिरावट देखने को मिल रही है। यह गिरावट इतनी ज्यादा है कि इससे भारतीय अर्थव्यवस्था के इतिहास का सबसे ज्यादा विकास दर का आंकड़ा भी बच न सका। 
वर्ष 2010-11 नव उदारवादी नीतियों के बाद वह पहला वर्ष था जब भारतीय अर्थव्यवस्था ने दहाई के आंकड़े को पार किया। वर्ष 2010-11 में जीडीपी की विकास दर 10.3 फीसदी दर्ज की गई थी जिसे मोदी सरकार ने बदलकर 8.5 फीसदी कर दिया है। इसके अलावा 9 फीसदी से अधिक की वृद्धि दर वाले तीन वर्षों के आंकड़ों में भी एक फीसदी की कमी की गई है। 

केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) द्वारा जारी ताजा संशोधित आंकड़ों के अनुसार 2005-06 और 2006-07 के 9.3 और 9.3 फीसदी के विकास दर के आंकड़ों को घटाकर क्रमश: 7.9 और 8.1 प्रतिशत किया गया है। इसी तरह 2007-08 के 9.8 फीसदी के विकास दर के आंकड़े को घटाकर 7.7 फीसदी किया गया है। 

आख़िर क्या होती है जीडीपी?

ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट (जीडीपी) कहें या सकल घरेलू उत्पाद यह किसी भी देश की आर्थिक सेहत को मापने का पैमाना होता है। जीडीपी का आंकड़ा अर्थव्यवस्था के प्रमुख उत्पादन क्षेत्रों में उत्पादन की विकास दर पर आधारित होता है। जीडीपी मापन में कृषि, उद्योग व सेवा क्षेत्र तीन प्रमुख घटक आते हैं। इन क्षेत्रों में उत्पादन बढ़ने या घटने के आधार पर जीडीपी दर तय होती है। क्‍योंकि उत्‍पादन की कीमतें महंगाई के साथ घटती बढ़ती रहती हैं इसलिए जीडीपी को दो तरह से प्रस्‍तुत किया जाता है। एक है आधार मूल्य, जिसके अंतर्गत जीडीपी की दर का मापन एक आधार वर्ष में उत्‍पादन की कीमत को आधार मानकर तय होता है जबकि दूसरा पैमाना वर्तमान मूल्य है जिसमें उत्‍पादन वर्ष की महंगाई दर शामिल होती है।

भारतीय सांख्यिकी विभाग उत्‍पादन व सेवाओं के मूल्‍यांकन के लिए एक आधार वर्ष तय करता है और इस वर्ष के दौरान की कीमतों को आधार बनाकर उत्‍पादन की कीमतों की तुलनात्‍मक वृद्धि दर तय की जाती है। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि जीडीपी की दर को महंगाई से अलग रखकर सही ढ़ंग से मापा जा सके। यूपीए के शासन काल में आधार वर्ष 2004-05 था जिसे वर्तमान मोदी सरकार ने बदलकर 2011-12 कर दिया है।

मोदी सरकार के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले लिए इस फैसले ने एक नए राजनीतिक विवाद को जन्म दे दिया है। पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने एक के बाद एक कई सारे ट्वीट करके पीएम मोदी और नीति आयोग पर निशाना साधाते हुए संशोधित जीडीपी आंकड़ों को एक मज़ाक बताया, वहीं वर्तमान वित्तमंत्री अरुण जेटली इस फैसले के बचाव करते हुए कहते हैं कि विश्व के सबसे अच्छे मापदंडों के आधार पर आंकड़ों को बदला गया।

लोकसभा चुनाव से ठीक पहले लिए इस फैसले से कई सवाल तो उठते हैं। पहला सवाल तो यह उठता है कि क्या आंकड़ों को बदलकर मोदी सरकार अपने शासनकाल में भारतीय अर्थव्यवस्था की खस्ताहाल हालत को छिपाने का प्रयास कर रही है? या आने वाले लोकसभा चुनाव में होने वाले तुलनात्मक अध्ययन को बदलना चाहती है ताकि वह यूपीए सरकार से आंकड़ों के आधार पर ज्यादा पिछड़ती नज़र न आए। वजह चाहे जो हो परन्तु आंकड़ों में बदलाव महज आंकड़ों तक सीमित है ज़मीनी स्तर पर इससे अर्थव्यवस्था की खस्ता हालत को नहीं छिपाया जा सकता।

GDP
GDP growth
Jobless growth
unemployment
development
Narendra modi
Modi Govt
UPA Regime

Related Stories

डरावना आर्थिक संकट: न तो ख़रीदने की ताक़त, न कोई नौकरी, और उस पर बढ़ती कीमतें

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

GDP से आम आदमी के जीवन में क्या नफ़ा-नुक़सान?

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

आर्थिक रिकवरी के वहम का शिकार है मोदी सरकार

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

उत्तर प्रदेश: "सरकार हमें नियुक्ति दे या मुक्ति दे"  इच्छामृत्यु की माँग करते हजारों बेरोजगार युवा


बाकी खबरें

  • Gujarat Riots
    बादल सरोज
    गुजरात दंगों की बीसवीं बरसी भूलने के ख़तरे अनेक
    05 Mar 2022
    इस चुनिन्दा विस्मृति के पीछे उन घपलों, घोटालों, साजिशों, चालबाजियों, न्याय प्रबंधन की तिकड़मों की याद दिलाने से बचना है जिनके जरिये इन दंगों के असली मुजरिमों को बचाया गया था।
  • US Army Invasion
    रॉजर वॉटर्स
    जंग से फ़ायदा लेने वाले गुंडों के ख़िलाफ़ एकजुट होने की ज़रूरत
    05 Mar 2022
    पश्चिमी मीडिया ने यूक्रेन विवाद को इस तरह से दिखाया है जो हमें बांटने वाले हैं। मगर क्यों न हम उन सब के ख़िलाफ़ एकजुट हो जाएं जो पूरी दुनिया में कहीं भी जंगों को अपने फ़ायदे के लिए इस्तेमाल करते हैं?
  • government schemes
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना के दौरान सरकारी योजनाओं का फायदा नहीं ले पा रहें है जरूरतमंद परिवार - सर्वे
    05 Mar 2022
    कोरोना की तीसरी लहर के दौरान भारत के 5 राज्यों (दिल्ली, झारखंड, छत्तीसगढ, मध्य प्रदेश, ओडिशा) में 488 प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना हेतु पात्र महिलाओं के साथ बातचीत करने के बाद निकले नतीजे।
  • UP Elections
    इविता दास, वी.आर.श्रेया
    यूपी चुनाव: सोनभद्र और चंदौली जिलों में कोविड-19 की अनसुनी कहानियां हुईं उजागर 
    05 Mar 2022
    ये कहानियां उत्तर प्रदेश के सोनभद्र और चंदौली जिलों की हैं जिन्हे ऑल-इंडिया यूनियन ऑफ़ फ़ॉरेस्ट वर्किंग पीपल (AIUFWP) द्वारा आयोजित एक जन सुनवाई में सुनाया गया था। 
  • Modi
    लाल बहादुर सिंह
    यूपी चुनाव : क्या पूर्वांचल की धरती मोदी-योगी के लिए वाटरलू साबित होगी
    05 Mar 2022
    मोदी जी पिछले चुनाव के सारे नुस्खों को दुहराते हुए चुनाव नतीजों को दुहराना चाह रहे हैं, पर तब से गंगा में बहुत पानी बह चुका है और हालात बिल्कुल बदल चुके हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License