NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
लद्दाख के निवासियों के मिले नौकरी के विशेष अधिकार, प्रशासन ने ‘निवासियों’ को परिभाषित करने को कहा 
लद्दाख प्रशासन ने नए क़ानून की घोषणा की है, तो कई लोगों ने कहा है कि यह लेह और करगिल दोनों स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषदों से पूछे बगैर लिया फ़ैसला है।
अनीस ज़रगर
10 Jun 2021
लद्दाख के निवासियों के मिले नौकरी के विशेष अधिकार, प्रशासन ने ‘निवासियों’ को परिभाषित करने को कहा 
छवि सौजन्य: दि इंडियन एक्सप्रेस 

श्रीनगर: केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के प्रशासन ने कहा है कि इस क्षेत्र के स्थानीय लोगों को खास तौर पर नौकरियां उपलब्ध कराने के लिए भर्ती के नए नियम बनाए हैं। 

केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासन द्वारा जारी सरकारी अधिसूचना के मुताबिक ये नए नियम उप राज्यपाल आर के माथुर द्वारा बनाए गए हैं, जो सरकारी गैजेट के प्रकाशन की तिथि से लागू हो जाएंगे। 

लद्दाख के श्रम और नियोजन द्वारा जारी अधिसूचना के उपबंध11 में कहा गया है कि “कोई व्यक्ति जो केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख का निवासी नहीं होगा, वह नियुक्ति के योग्य नहीं होगा।”

आदेश में यह भी कहा गया है कि “ऐसा व्यक्ति जो पहले से जम्मू-कश्मीर रोजगार (अधीनस्थ) सेवा संवर्ग  में नियुक्त हैं और उन्हें अंतिम रूप से जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 की धारा 89 (2) के प्रावधान के मुताबिक केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख  कैडर दिया गया है, उसे प्रारंभिक संविधान/संघटन में सेवा में नियुक्त किया गया समझा जाएगा।”

प्रशासन ने मंगलवार को जब इसकी घोषणा की कि, तो कई लोगों ने कहा कि यह फैसला दोनों स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषदों -लेह और करगिल-से पूछे बिना लिया गया, जिनके जिम्मे इन डिविजनों के प्रशासन का जिम्मा है।  लेह और करगिल दोनों ही पहले जम्मू-कश्मीर के हिस्सा थे। 

लद्दाख स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद के कई लोगों ने कहा कि उन्होंने अभी अधिसूचना के नियमों को ठीक से पढ़ा नहीं है तो कुछेक इस नियम को क्षेत्र के लोगों की मांगों के संदर्भ में “गैर अहम” बताया। कई लोग विकास को लेकर चुप रहे और इसका स्वागत करने के लिए तैयार नहीं लगे। 

यह अधिसूचना केंद्र शासित प्रदेश के ऐसे किसी भी व्यक्ति को यहां के निवासी के रूप में परिभाषित करती है, जो यहां निवास करने की अर्हता को पूरी करते हैं, जो केंद्र शासित प्रदेश में “लागू” किसी भी अधिनियम, नियम या नियमन के अंतर्गत क्षेत्रीय प्रशासन के अधीन रोजगार के उद्देश्य से लिए विहित हैं। 

टाइगर रिगज़िन लुंडुपु से लद्दाख के काउंसिलर ने न्यूज क्लिक से बात करते हुए कहा, “जब तक आरक्षण नहीं है, तब इसके उपयोगी होने की संभावना बहुत कम है। एक संवैधानिक गारंटी होनी चाहिए जो इस मामले में और स्पष्टता लाएगी,जिसकी हम सभी मांग कर रहे हैं।”

करगिल के कार्यकर्ता सज्जाद करगिली ने कहा कि यह अभी तक स्पष्ट नहीं है कि लद्दाख का निवासी कौन है और ताजा आदेश पर्वतीय विकास परिषद को दरकिनार रख कर लाया गया है, जो “दुर्भाग्यपूर्ण” है। 

उन्होंने कहा, “लद्दाख के निवासी को लेकर दुविधा है। यह भी कि हमारे पास विधायिका नहीं है तो ऐसी स्थिति में उसकी जगह पर पर्वतीय विकास परिषद से इस बारे में विचार-विमर्श किया जाना चाहिए था। यह कानून बिना उसकी राय लिए बना दिया गया है।”

सज्जाद ने कहा कि यह डर है कि लद्दाख के बाशिंदों को परिभाषित करने का फैसला यहां के लोगों पर ऐसे ही थोपा जाएगा जैसा कि 5 अगस्त 2019 को संविधान के अनुच्छेद 370  के उन्मूलन और जम्मू-कश्मीर के विभाजन का निर्णय हम पर लाद दिया गया था। 

अनुच्छेद 370 के निरस्तीकरण के बाद से ही करगिल और लेह दोनों क्षेत्रों में लोग “नौकरियों और भर्ती में भेदभाव” के रूप में इसका विरोध करते रहे हैं। स्थानीय लोग अपनी भूमि, नौकरी और अत्यंत नाजुक पारिस्थितिकी वाले भूभाग की पर्यावरणीय चिंताओं के संदर्भ में रक्षक नए कानून बनाने की मांग करते रहे हैं।

अपनी मांग पर जोर देने के लिए, स्थानीय नागरिक समाज, धार्मिक समूहों और राजनीतिकों दलों ने गत वर्ष अपेक्स कमेटी ऑफ दि पीपुल्स मूवमेंट ऑफ लद्दाख का गठन किया है, जो संविधान की 6ठी अनुसूची की वकालत करती है। यह अनुसूची स्थानीय हितों की रक्षा का प्रावधान करती है। 

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के विधायक मोहम्मद यूसुफ़ तारिगामी ने भाजपा सरकार के इस फैसले को एक “दूसरा आधा-अधूरा प्रयास” बताया, जो दोनों पर्वतीय विकास परिषदों की राय के बगैर लिया गया है। 

तारिगामी ने एक वक्तव्य में कहा, “उपराज्यपाल की ओर से जारी ताजा आदेश में कोई स्पष्टता ही नहीं है कि वे लोग जो नौकरियों के लिए आवेदन देंगे, उन्हें क्या यहां के स्थायी निवास होने का प्रमाण पत्र सौंपना होगा, जैसा कि 2019 के पहले चलन में था। लद्दाख के विपरीत, पिछले साल जम्मू-कश्मीर में भर्ती के जो नियम बनाए गए थे, उनमें सभी निवासियों को इसके लिए अनुमति दी गई थी, यहां तक कि वे लोग भी जो सात साल से अधिक समय से जम्मू-कश्मीर में रह रहे थे या जिन्होंने (अब) केंद्र शासित प्रदेश में 12वीं कक्षा तक की पढ़ाई की है, वे भी नौकरियों के लिए आवेदन करने के योग्य हैं।”

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल ख़बर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें-

Ladakh Residents Get Exclusive Job Rights, Admin Asked to Define 'Residents'

ladakh
Ladakh Jobs
Domicile Certificate
Job Reservation
Article 370

Related Stories

कश्मीर में हिंसा का नया दौर, शासकीय नीति की विफलता

क्यों अराजकता की ओर बढ़ता नज़र आ रहा है कश्मीर?

कैसे जम्मू-कश्मीर का परिसीमन जम्मू क्षेत्र के लिए फ़ायदे का सौदा है

जम्मू-कश्मीर: बढ़ रहे हैं जबरन भूमि अधिग्रहण के मामले, नहीं मिल रहा उचित मुआवज़ा

जम्मू-कश्मीर: अधिकारियों ने जामिया मस्जिद में महत्वपूर्ण रमज़ान की नमाज़ को रोक दिया

केजरीवाल का पाखंड: अनुच्छेद 370 हटाए जाने का समर्थन किया, अब एमसीडी चुनाव पर हायतौबा मचा रहे हैं

जम्मू-कश्मीर : रणनीतिक ज़ोजिला टनल के 2024 तक रक्षा मंत्रालय के इस्तेमाल के लिए तैयार होने की संभावना

जम्मू-कश्मीर में उपभोक्ता क़ानून सिर्फ़ काग़ज़ों में है 

कश्मीर को समझना क्या रॉकेट साइंस है ?  

वादी-ए-शहज़ादी कश्मीर किसकी है : कश्मीर से एक ख़ास मुलाक़ात


बाकी खबरें

  • Ashok Gehlot and Sachin Pilot
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    राजस्थान: क्या एक हो गए हैं अशोक गहलोत और सचिन पायलट?
    22 Nov 2021
    नए मंत्रिमंडल फेरबदल को लेकर अशोक गहलोत और सचिन पायलट दोनों ही संतुष्ट नज़र आ रहे हैं और इसी से उम्मीद की जा रही है कि दोनों के बीच जारी अंदरूनी कलह फिलहाल शांत हो गई है।
  • Rajasthan: Rape accused along with friends attacked Dalit girl with knife
    एम.ओबैद
    राजस्थान: रेप के आरोपी ने दोस्तों के साथ मिलकर दलित लड़की पर चाकू से किया हमला
    22 Nov 2021
    अलवर में शुक्रवार की रात रेप करने वाले शख्स और उसके साथियों द्वारा कथित रूप से 20 वर्षीय दलित लड़की पर हमला किया गया। जिसमें उसकी आंख में गंभीर चोटें आईं। पीड़िता को जयपुर रेफर कर दिया गया है जहां…
  • Tribal Pride Week
    रूबी सरकार
    जनजातीय गौरव सप्ताह में करोड़ों खर्च, लेकिन आदिवासियों को क्या मिला!
    22 Nov 2021
    प्रदेश के आदिवासियों के लिए सवाल बरकरार है कि 52 करोड़, कुछ जानकारों के अनुसार 100 करोड़ सरकारी खर्च से इतिहास के साथ छेड़छाड़ कर जो सम्मेलन किया गया, क्या वह भाजपा के एजेंडे का हिस्सा भर था? क्योंकि…
  • farmers
    अब्दुल अलीम जाफ़री
    क़ानूनों की वापसी से मृत लोग वापस नहीं आएंगे- लखीमपुर हिंसा के पीड़ित परिवार
    22 Nov 2021
    बीजेपी को क़ानूनों की वापसी से राजनीतिक फ़ायदे का अनुमान है, जबकि मूल बात यह है कि राज्य मंत्री अजय मिश्रा अब भी खुलेआम घूम रहे हैं, जो आने वाले दिनों में सरकार और किसानों के बीच टकराव की वजह बन सकता…
  • South region leader
    पार्थ एस घोष
    अपने क्षेत्र में असफल हुए हैं दक्षिण एशियाई नेता
    22 Nov 2021
    क्षेत्रीय नेताओं के लिए शुरूआती बिंदु होना चाहिए कि, वे इस मूल वास्तविकता को आंतरिक करें कि दक्षिण एशिया दुनिया के सबसे असमान और संघर्षग्रस्त क्षेत्रों में से एक है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License