NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
लोकसभा चुनाव में बड़ी हार के बावजूद जोश में बंगाल सीपीएम!
अलीपुरद्वार, जलपाईगुड़ी, कूचबिहार आदि जिलों में दर्जनभर से ज्यादा अपने पुराने कार्यालयों को सीपीएम ने दोबारा हासिल किया है। जलपाईगुड़ी जिले के मेटेली ब्लॉक के धूपझोड़ा में एक साल चार महीने बाद सीपीएम कार्यकर्ता अपने कार्यालय को तृणमूल के कब्जे से मुक्त करा पाये हैं।
सरोजिनी बिष्ट
07 Jun 2019
सांकेतिक तस्वीर
फोटो साभार : Inkhabar

34 सालों के लगातार शासन के बाद जब वर्ष 2011 के विधानसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन हुआ तो मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) राज्य इकाई की हालत दुनिया उजड़ जाने जैसी थी। शुरुआती झटके से उबरने में ही महीनों लग गये। और उसके बाद जब संभले तो पाया कि उनके जनाधार के एक बड़े हिस्से, पार्टी कार्यालयों, मजदूर संगठनों पर तृणमूल कांग्रेस लगातार कब्जा करती जा रही है। धीरे-धीरे तृणमूल ने ऐसे हालात पैदा कर दिये कि किसी भी विपक्षी पार्टी खासकर वामपंथी दलों का बंगाल में काम करना ही मुश्किल हो गया। 2016 में फिर विधानसभा चुनाव हुए और इस बार सीपीएम की हार व तृणमूल की जीत पहले से कहीं बड़ी थी। नतीजा हुआ कि तृणमूल सरकार का अहंकार इतना बढ़ गया कि उसने किसी तरह के विपक्षी स्वर को नकाबिले बर्दाश्त मान लिया। जिन पंचायतों या नगर पालिकाओं पर वाम का कब्जा था, उनके पंचायत सदस्यों, नगर पार्षदों को तृणमूल में शामिल होने को बाध्य किया गया। 

इन हालात में बहुत से लोगों ने पश्चिम बंगाल से वाम की विदाई की घोषणा शुरू कर दी। खासकर भाजपा के हालिया उभार के बाद ऐसी अटकलें और तेज हो गयीं, लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद बंगाल की तस्वीर राजनीतिक विश्लेषकों के अनुमान से ठीक उलट नजर आ रही है। वाम मोर्चा भले ही अपना खाता नहीं खोल सका हो और तृणमूल ने 22 व भाजपा ने 18 सीटें जीती हों, पर सीपीएम में हताशा की जगह जोश दिख रहा है। बदले हालात में तृणमूल की वर्चस्व की राजनीति छिन्न-भिन्न हो गयी है और सीपीएम कार्यकर्ता पूरी तरह सक्रिय हो उठे हैं। भय के वातावरण में जिन समर्थकों ने पार्टी से दूरी बना ली थी, एक बार फिर वे पुरानी पार्टी की ओर आकर्षित हुए हैं। 

लोकसभा चुनाव में राज्य के जिन इलाकों में तृणमूल की हार हुई है वहां सीपीएम कार्यकर्ता अपने उन कार्यालयों को फिर से हासिल कर रहे हैं, जिन पर कभी तृणमूल ने कब्जा कर लिया था। जिन कॉलेजों से एसएफआई का नामोनिशान मिटा दिया गया था वहां एसएफआई के सदस्यों ने फिर से अपने बैनर-पोस्टर लगाने के साथ ही छात्रों के हक के लिए आवाज बुलंद करना शुरू कर दिया है। कूचबिहार जिले के दिनहाटा कॉलेज की बात करें तो यहां पूरे सात साल बाद एसएफआई अपना झंडा लगा पायी। दिनहाटा में सीपीएम के श्रमिक संगठन सीटू के कार्यालय पर तृणमूल के श्रमिक संगठन ने कब्जा कर लिया था। अब यह कार्यालय सीटू ने हासिल कर लिया है।
उत्तर बंगाल में आठ लोकसभा सीटें हैं, जिनमें से एक भी तृणमूल नहीं जीत पायी है, इसलिए इस अंचल में उसका आतंक पूरी तरह छू हो गया है। अलीपुरद्वार, जलपाईगुड़ी, कूचबिहार आदि जिलों में दर्जनभर से ज्यादा अपने पुराने कार्यालयों को सीपीएम ने दोबारा हासिल किया है। जलपाईगुड़ी जिले के मेटेली ब्लॉक के धूपझोड़ा में एक साल चार महीने बाद सीपीएम कार्यकर्ता अपने कार्यालय को तृणमूल के कब्जे से मुक्त करा पाये हैं।

स्थानीय सीपीएम नेता वीरेंद्र नाथ राय ने कहा कि हमारे कार्यालय पर तृणमूल के कब्जे के खिलाफ कई बार पुलिस से गुहार लगायी गयी, लेकिन कोई मदद नहीं मिली। अब बदले हालात में हम अपना कार्यालय वापस लेने में सफल रहे। 

अलीपुरद्वार जिले के कुमारग्राम ब्लॉक के कामाख्यागुड़ी में सीपीएम समर्थकों ने तीन साल बाद अपने कार्यालय पर कब्जा किया। इसके बाद कुमारग्राम पश्चिम एरिया कमेटी की बैठक इसी कार्यालय में हुई। सीपीएम के स्थानीय नेता विद्युत गुण ने बताया कि 2016 के विधानसभा चुनाव के बाद तृणमूल समर्थकों ने विजय के उन्माद में उनके कार्यालय पर कब्जा कर लिया था। अब हमें अपना कार्यालय वापस मिलने से स्थानीय लोग भी काफी खुश हैं। 

हालांकि कई खेमों से इस तरह की समालोचना भी हो रही है कि भाजपा का संरक्षण लेकर सीपीएम यह कर पा रही है। ऐसे लोगों को कूचबिहार के तूफानगंज शहर की यह घटना जाननी चाहिए। यहां के न्यू टाउन इलाके में सीपीएम ने जमीन खरीदकर अपना कार्यालय बनाया था लेकिन 2011 में सीपीएम नेताओं पर एक के बाद एक हमला करके तृणमूल ने पार्टी कार्यालय बंद करवा दिया। इसी 2 जून को जब सीपीएम के लोग अपना कार्यालय वापस खोलने लगे तो भाजपा व आरएसएस के लोगों ने पार्टी ऑफिस घेरकर जय श्रीराम की नारेबाजी शुरू कर दी। वे लोग कार्यालय बंद करने के लिए धमकाने लगे लेकिन इलाके के आम लोगों ने दखल दिया और सीपीएम का कार्यालय दोबारा खुल गया, लेकिन जैसे ही कार्यालय से सीपीएम के लोग गये भाजपाइयों ने उनका झंडा फाड़ डाला। यह बताता है कि भले सीपीएम को तृणमूल के गुंडाराज से आजादी मिली हो, पर उसके सामने भाजपा की चुनौती खड़ी है।

(लेखिका बंगाल की राजनीति पर करीब से नज़र रखे हुए हैं। उन्होंने एक लंबा समय पश्चिम बंगाल में गुज़ारा है।)

West Bengal
Left politics
left parties
Left unity
CPIM
TMC
mamta banerjee
BJP

Related Stories

राज्यपाल की जगह ममता होंगी राज्य संचालित विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति, पश्चिम बंगाल कैबिनेट ने पारित किया प्रस्ताव

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !


बाकी खबरें

  • lakshmibai college teacher Dr Neelam
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    डीयू : दलित शिक्षक का आरोप विभागाध्यक्ष ने मारा थप्पड़, विभागाध्यक्ष का आरोप से इनकार
    18 Aug 2021
    "शिक्षण संस्थानों में यह कोई पहली ऐसी घटना नहीं है बल्कि इससे पहले भी समाज के निचले तबके से आने वाले छात्र और शिक्षक इस प्रकार के जातिगत हमलों और जातिसूचक टिप्पणियों का सामना करते आये हैं।…
  • Farmers
    रूबी सरकार
    प्रधानमंत्री फसल बीमा के नाम पर किसानों से लूट, उतना पैसा दिया नहीं जितना ले लिया
    18 Aug 2021
    कृषि पर संसद की स्थायी समिति की रिपोर्ट कहती है कि निजी बीमा कंपनियों को प्रीमियम के तौर पर जितनी राशि मिली और कंपनियों द्वारा नुकसान के एवज में जो राशि किसानों को दी गई, अगर इसकी तुलना की जाए तो…
  • taiban
    पीपल्स डिस्पैच
    तालिबान द्वारा दिए गए आश्वासनों के बावजूद अफ़ग़ानवासियों को अपने भविष्य की चिंता
    18 Aug 2021
    कई मीडिया संगठनों की रिपोर्ट के मुताबिक़, अमेरिका ने रविवार को देश में अरबों डॉलर की अफ़ग़ान संपत्ति को फ्रीज़ कर दिया है।
  • संदीपन तालुकदार
    नया शोध बताता है कि सबसे पहले चीन में बने थे सिक्के
    18 Aug 2021
    शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि उन्होंने कांसे से बने छोटे फावड़े के आकार के सिक्कों की खोज की है जो लगभग 2,600 साल पहले चीन में बड़े पैमाने पर बनाए गए थे।
  • afgan
    अजय कुमार
    कैसे अमेरिका का अफ़ग़ानिस्तान में खड़ा किया गया 20 साल का झूठ भरभरा कर ढह गया?
    18 Aug 2021
    सबसे गहरी सच्चाई तो यही है कि भले ही अमेरिकी राष्ट्रपति कुछ भी कहें कि उन्होंने अफगानिस्तान की कई स्तर पर मदद की। लेकिन हकीकत यह है कि बम, बारूद, गोली और सेना के बलबूते समाज को नहीं बदला जा सकता।…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License