NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
उत्पीड़न
भारत
राजनीति
'कोर्ट' अभिनेता वीरा साठीदार ने गुज़ारा था शोषण के ख़िलाफ़ आंदोलन भरा जीवन
इप्टा, नागपुर के संयोजक और विद्रोही मैगज़ीन के संपादक रह चुके फ़िल्म 'कोर्ट' के अभिनेता वीरा साठीदार का जीवन फ़िल्म में दर्शाए गए उनके किरदार जैसा ही बीता, जिसमें न्याय व्यवस्था के साथ उनके अनुभव भी शामिल थे।
अरित्री दास
14 Apr 2021
'कोर्ट' अभिनेता वीरा साठीदार
तस्वीर सौजन्य : द हिन्दू

सांस्कृतिक कार्यकर्ता और बेहद पसंद की गई  मराठी फ़िल्म 'कोर्ट' के अभिनेता वीरा साठीदार की मंगलवार को एक अस्पताल में कोविड-19 से जुड़ी बीमारियों की वजह से मौत हो गई।

चैतन्य तम्हाने के निर्देशन में बनी राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फ़िल्म 'कोर्ट' में साठीदार ने एक लोकगायक का किरदार निभाया था जिसकी वजह से वे काफ़ी चर्चा में रहे। हाशिये के लोगों की न्याय के लिए असंभव सी लड़ाई के बारे में बनी इस फ़िल्म में साठीदार ने नारायण कांबले का किरदार निभाया था जिनपर इल्ज़ाम था कि उन्होंने अपने लोक गीतों के ज़रिये एक सफ़ाई कर्मचारी को आत्महत्या करने के लिए उकसाया।

दिलचस्प बात है कि निजी ज़िंदगी में भी साठीदार नारायण कांबले जैसे ही थे - एक लोग गायक जो प्रतिरोध के गीत गाता था। कवि-कार्यकर्ता साठीदार इप्टा नागपुर के कन्वेनर रहे थे, और मराठी मैगज़ीन विद्रोही के संपादक रहे थे जो सामाजिक ग़ैर-बराबरी के बारे में बात करती है।

फ़िल्म 'कोर्ट' की रिलीज़ के बाद इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत करते हुए साठीदार ने कहा था कि फ़िल्म में काम करने से उन्हें जो लोकप्रियता मिली उससे उनका एक्टिविज़्म मज़बूत ही होगा। उन्होंने यह भी कहा कि नारायण कांबले का किरदार निभाना उनके लिए मुश्किल नहीं था, क्योंकि उन्हें न्याय व्यवस्था की कमियों का पहले से अनुभव था।

कवि-कार्यकर्ता को पहली बार 2005 में नागपुर में एक बिजली चोरी मामले में बुक किया गया था, जिसके लिए उन्हें चार साल के लिए पुलिस और अदालत से निपटना पड़ा था। फिर, 2006 में, उन्हें और उनके बेटे को "आपत्तिजनक" साहित्य के साथ किताबें बेचने के लिए कठोर गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत बुक किया गया था। बाद में, पुलिस ने मामले में क्लोजर रिपोर्ट दायर की थी।

न्यू इंडियन एक्सप्रेस में 2015 की रिपोर्ट के अनुसार, साठीदार ने कहा था कि नागपुर पुलिस द्वारा कथित माओवादी लिंक के लिए परेशान किया जा रहा था, जबकि 'कोर्ट’ द्वारा उन्हें महत्वपूर्ण प्रशंसा मिली रही और फिल्म को ऑस्कर के लिए भी नामांकित किया गया था। उन्होंने कहा कि पुलिस ने कई बार उनके घर पर छापा मारा था और उनपर फ़र्ज़ी मामले दर्ज करने की कोशिश करते हुए कई बार उनकी किताबें ज़ब्त की थीं।

इससे पहले, विद्रोही पत्रिका में, उनके करीबी सहयोगी सुधीर धावले, जो पत्रिका के संपादक और दलित कार्यकर्ता भी थे, को नक्सलियों के साथ कथित संबंधों के लिए गिरफ्तार किया गया था। नागपुर जेल में साढ़े तीन साल बाद धावले को अदालत ने बरी कर दिया।

जीवन जीने और जाति उत्पीड़न के ख़िलाफ़ संघर्ष कर रहे साठीदार महाराष्ट्र में अंबेडकरवादी आंदोलन में भी शामिल थे।

2017 में इंडियन कल्चरल फ़ोरम के साथ एक साक्षात्कार में, साठीदार ने कहा था कि बचपन से ही उन्हें पता था कि जातिगत भेदभाव क्या है और उन्होंने जाति-आधारित अत्याचारों का भी अनुभव किया। उन्होंने बताया कि जब वह बड़े हो रहे थे, तो उन्होंने भारतीय रिपब्लिकन पार्टी को कम्युनिस्टों के साथ भूमि के सवाल पर कई विरोधों का नेतृत्व करते देखा। वह मराठी गायकों से भी प्रेरित थे जिन्होंने बी आर अंबेडकर और उनकी शिक्षाओं पर गीत गाए थे।

इस साक्षात्कार में साठीदार ने दलित और बंबई मिल श्रमिकों की हड़ताल में अपनी भागीदारी के साथ श्रमिक अधिकारों के आंदोलनों में अपनी यात्रा को याद किया। साठीदार ने दलित लेखकों और कवियों द्वारा लिखे गए साहित्य और महाराष्ट्र के पारंपरिक लोक प्रदर्शनों जैसे तमाशा और डंडार के प्रभाव को भी रेखांकित किया।

इंटरव्यू में उन्होंने कहा, “जब मैं विरोध आंदोलनों, विशेष रूप से श्रम और दलित आंदोलनों में आया, और जब मैं शुरुआत में दलित पैंथर्स के साथ संक्षिप्त रूप से जुड़ा हुआ था, तो हम लोगों को संगठित करने के लिए संघर्ष में नुक्कड़ नाटकों और गीतों को हथियार के रूप में इस्तेमाल करते थे और बैठकें भी करते थे। गाने और नाटक हमारी चाल में हथियार होते थे और हम अब भी इन हथियारों का इस्तेमाल कर रहे हैं।"

वाम-अम्बेडकरवादी कार्यकर्ता ने यह भी दावा किया कि फ़िल्मों में काम करने के बावजूद उन्होंने ख़ुद को वह अभिनेता नहीं माना, समाज जिन्हें अभिनेता समझता है। उन्होंने समाज को पूंजीवाद के प्रमुख मूल्यों के साथ प्रस्तुत करने वाली कॉर्पोरेट-वित्त पोषित फ़िल्मों के विपरीत 'लोगों के सिनेमा' की आवश्यकता को भी रेखांकित किया।

इस लेख को मूल अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें।

Late ‘Court’ Actor and Cultural Activist Vira Sathidar Lived a Life of Resistance against Oppression

Vira Sathidar
Actor and Cultural Activist
IPTA
Vidrohi magazine
Marathi film
COVID-19
passed away

Related Stories

दिल्लीः एलएचएमसी अस्पताल पहुंचे केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मंडाविया का ‘कोविड योद्धाओं’ ने किया विरोध

दिल्ली : नौकरी से निकाले गए कोरोना योद्धाओं ने किया प्रदर्शन, सरकार से कहा अपने बरसाये फूल वापस ले और उनकी नौकरी वापस दे

दिल्ली: कोविड वॉरियर्स कर्मचारियों को लेडी हार्डिंग अस्पताल ने निकाला, विरोध किया तो पुलिस ने किया गिरफ़्तार

देशव्यापी हड़ताल को मिला कलाकारों का समर्थन, इप्टा ने दिखाया सरकारी 'मकड़जाल'

किसान आंदोलन@378 : कब, क्या और कैसे… पूरे 13 महीने का ब्योरा

नीट-पीजी 2021 की काउंसलिंग की मांग को लेकर रेजीडेंट डॉक्टरों की हड़ताल को देश भर से मिल रहा समर्थन

यूपी: शाहजहांपुर में प्रदर्शनकारी आशा कार्यकर्ताओं को पुलिस ने पीटा, यूनियन ने दी टीकाकरण अभियान के बहिष्कार की धमकी

दिल्ली: महंगाई के ख़िलाफ़ मज़दूरों, महिलाओं, छात्र-नौजवानों व कलाकारों ने एक साथ खोला मोर्चा

दिल्ली: बढ़ती महंगाई के ख़िलाफ़ मज़दूर, महिला, छात्र, नौजवान, शिक्षक, रंगकर्मी एंव प्रोफेशनल ने निकाली साईकिल रैली

पश्चिम बंगाल: ईंट-भट्ठा उद्योग के बंद होने से संकट का सामना कर रहे एक लाख से ज़्यादा श्रमिक


बाकी खबरें

  • covid
    संदीपन तालुकदार
    जानिए ओमिक्रॉन BA.2 सब-वैरिएंट के बारे में
    24 Feb 2022
    IISER, पुणे के प्रख्यात प्रतिरक्षाविज्ञानी सत्यजित रथ से बातचीत में उन्होंने ओमिक्रॉन सब-वैरिएंट BA.2 के ख़तरों पर प्रकाश डाला है।
  • Himachal Pradesh Anganwadi workers
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    हिमाचल प्रदेश: नियमित करने की मांग को लेकर सड़कों पर उतरीं आंगनबाड़ी कर्मी
    24 Feb 2022
    प्रदर्शन के दौरान यूनियन का प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से मिला व उन्हें बारह सूत्रीय मांग-पत्र सौंपा। मुख्यमंत्री ने आगामी बजट में कर्मियों की मांगों को पूर्ण करने का आश्वासन दिया। यूनियन…
  • Sulaikha Beevi
    अभिवाद
    केरल : वीज़िंजम में 320 मछुआरे परिवारों का पुनर्वास किया गया
    24 Feb 2022
    एलडीएफ़ सरकार ने मठीपुरम में मछुआरा समुदाय के लोगों के लिए 1,032 घर बनाने की योजना तैयार की है।
  • Chandigarh
    सोनिया यादव
    चंडीगढ़ के अभूतपूर्व बिजली संकट का जिम्मेदार कौन है?
    24 Feb 2022
    बिजली बोर्ड के निजीकरण का विरोध कर रहे बिजली कर्मचारियों की हड़ताल के दौरान लगभग 36 से 42 घंटों तक शहर की बत्ती गुल रही। लोग अलग-अलग माध्यम से मदद की गुहार लगाते रहे, लेकिन प्रशासन पूरी तरह से लाचार…
  • Russia targets Ukraine
    एपी
    रूस ने यूक्रेन के वायुसेना अड्डे, वायु रक्षा परिसम्पत्तियों, सैन्य आधारभूत ढांचे को बनाया निशाना, अमेरिका-नाटो को चेताया
    24 Feb 2022
    रूस के रक्षा मंत्रालय का कहना है कि सेना ने घातक हथियारों का इस्तेमाल यूक्रेन के वायुसेना अड्डे, वायु रक्षा परिसम्पत्तियों एवं अन्य सैन्य आधारभूत ढांचे को निशाना बनाने के लिये किया है। उसने आगे दावा…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License