NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
दिवंगत फोटो पत्रकार दानिश सिद्दीकी को दूसरी बार मिला ''द पुलित्ज़र प्राइज़''
अपनी बेहतरीन फोटो पत्रकारिता के लिए पहचान रखने वाले दिवंगत पत्रकार दानिश सिद्दीकी और उनके सहयोगियों को ''द पुल्तिज़र प्राइज़'' से सम्मानित किया गया है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
10 May 2022
danish
Image courtesy : The Indian Express

हिन्दोस्तां के मशहूर दिवंगत फोटो पत्रकार दानिश सिद्दीकी को फीचर फोटोग्राफी श्रेणी में प्रतिष्ठित पुलित्ज़र पुरस्कार 2022 से सम्मानित किया गया है। ''द पुलित्ज़र प्राइज़'' की वेबसाइट के अनुसार समाचार एजेंसी रायटर्स के सिद्दीकी और उनके सहयोगियों अदनान आबिदी, सना इरशाद मट्टू, और अमित दवे को इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

दानिश सिद्दीकी को ये पुरस्कार कोविड के दौरान उनके द्वारा खींची गई तस्वीरों के लिए दिया गया है। साल 2021 के जुलाई महीने में दानिश की अफगानिस्तान में शहादत हो गई थी। दरअसल अफगानिस्तान के सपीन बोल्दक ज़िले में अफगान सैनिकों और तालिबान के बीच हिंसक संघर्ष की तस्वीरें लेते समय वह मारे गए थे। आपको बता दें कि पुलित्ज़र अवॉर्ड दानिश सिद्दीकी को दूसरी बार मिला है। साल 2018 में भी रायटर्स के साथ काम करते हुए उन्हें रोहिंग्या शरणार्थी संकट संबंधी तस्वीरों के लिए इस अवॉर्ड से नवाज़ा गया था।

दानिश सिद्दीकी ने अफगानिस्तान और ईरान में युद्ध, हांगकांग में प्रदर्शन और नेपाल में भूकंप जैसी महत्वपूर्ण घटनाओं की तस्वीरें ली थीं।

कौन थे दानिश सिद्दीकी?

दानिश सिद्दीकी ने जाने माने समाचार संस्थानों से जुड़कर दिल्ली में सालों तक काम किया। सिद्दीकी ने अपने पत्रकारिता पेशे की शुरुआत टेलीविजन से की। उन्होंने कुछ समय तक संवाददाता के रूप में काम किया इसके बाद साल 2010 में रायटर्स से एक इंटर्न के रूप में जुड़ गए। रायटर्स के लिए काम करते हुए साल 2018 में उन्हें और उनके सहयोगी अदनान आबिदी को फीचर फोटोग्राफी के लिए पुलित्जर पुरस्कार मिला।

कोरोना महामारी के दौरान खींची गई दानिश की तस्वीरें दिल्ली के अस्पतालों और ऑक्सीज़न बेड व इलाज के अभाव में भटकते लोगों के दर्द बयां करती हैं। दिल्ली की सीमाओं पर किसान के संघर्ष को फोटोग्राफी में बखूबी देखा जा सकता है।

दिल्ली में दानिश के द्वारा खींची गई तस्वीरों की खूब चर्चा हुई थी जिसमें लॉकडाउन के वक्त पैदल जाते मज़दूरों की तस्वीरें, दिल्ली दंगें के दौरान धार्मिक आधार पर दो पक्षों के बीच हुई हिंसा की तस्वीर, जामिया के छात्रों पर एक युवक द्वारा पिस्तौल से फायरिंग करने की तस्वीर, सीमापुरी के श्मशानघाट पर दानिश के द्वारा लिया गया एरियल शॉट लोगों के बीच खास चर्चा का विषय बना रहा।

दानिश की हत्या के बाद जामिया के प्रोफेसर ने उन्हें बताया था आदर्श छात्र

दानिश ने दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में स्नातक की डिग्री ली। साल 2007 में उन्होंने जामिया के ही एजेके मास कम्यूनिकेशन रिसर्च सेंटर से मास कम्युनिकेशन की डिग्री हासिल की। जामिया में पत्रकारिता विभाग की निदेशक प्रो. शोहिनी घोष कहती हैं कि दानिश बुद्धिमान होने के साथ-साथ काफी विनम्र भी थे। पढ़ाई के दौरान ही उनकी कैमरे पर अच्छी पकड़ थी। प्रो. घोष बताती हैं कि एक ऑनलाइन सत्र आयोजित किया गया था जिसमें दानिश ने छात्रों को कैमरे की बारीकियां सिखाई थीं।

दानिश सिद्दीकी के अलावा गेटी इमेजेज़ के विन मैकनेमी, डू एंगरर, स्पेंसर प्लैट, सैमुअल कोरम और जॉन चेरी को भी ब्रेकिंग न्यूज़ फोटोग्राफी श्रेणी में पुलित्ज़र पुरस्कार मिला है। इन लोगों ने अमेरिकी संसद पर हमले से जुड़ी तस्वीरें ली थीं। साल 1912 में कोलंबिया विश्वविद्यालय ने विभिन्न श्रेणियों में पुलित्ज़र पुरस्कार देने की योजना को मंज़ूरी दी थी। इसकी स्थापना हंगरी मूल के अमेरिकी फोटो पत्रकार जोसेफ पुलित्ज़र ने की थी। 1917 में पहली बार पुलित्ज़र पुरस्कार दिए गए थे।

इसे भी पढ़ें--दिवंगत दानिश सिद्दीकी सहित चार भारतीय पुलित्ज़र पुरस्कार से सम्मानित

इसे भी पढ़ें: दानिश का कैमरा: दानिश से मोहब्बत और नफ़रत के मायने

Danish Siddiqui
pultizser award
Coronavirus
danish siddiqui murder

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में आज फिर कोरोना के मामलों में क़रीब 27 फीसदी की बढ़ोतरी

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के घटते मामलों के बीच बढ़ रहा ओमिक्रॉन के सब स्ट्रेन BA.4, BA.5 का ख़तरा 

कोरोना अपडेट: देश में फिर से हो रही कोरोना के मामले बढ़ोतरी 

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना मामलों में 17 फ़ीसदी की वृद्धि

कोरोना अपडेट: अभी नहीं चौथी लहर की संभावना, फिर भी सावधानी बरतने की ज़रूरत

कोरोना अपडेट: दुनियाभर के कई देशों में अब भी क़हर बरपा रहा कोरोना 

दिवंगत दानिश सिद्दीकी सहित चार भारतीय पुलित्ज़र पुरस्कार से सम्मानित

कोरोना अपडेट: देश में एक्टिव मामलों की संख्या 20 हज़ार के क़रीब पहुंची 

प्रधानमंत्री जी... पक्का ये भाषण राजनीतिक नहीं था?

देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, PM मोदी आज मुख्यमंत्रियों संग लेंगे बैठक


बाकी खबरें

  • Farmers Protest
    न्यूज़क्लिक टीम
    किसानों की जीत: “यह आज़ादी का दूसरा आंदोलन रहा है”
    20 Nov 2021
    शुक्रवार, 19 नवंबर को गुरु नानक जी की जयंती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन कृषि क़ानून वापस लेने की घोषणा की और कहा कि संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में इन तीनों कानूनों को निरस्त करने की…
  • Srinagar Encounter
    अजय सिंह
    मुद्दा: कश्मीर में लिंचिंग के दिन आने वाले हैं
    20 Nov 2021
    पिछले दिनों चीफ़ ऑफ़ डिफ़ेंस स्टाफ़ (सेना, नौसेना व वायुसेना के मुखिया) जनरल बिपिन रावत ने जो सार्वजनिक बयान दिया, वह बहुत चिंताजनक है।
  • farmers
    अब्दुल अलीम जाफ़री
    MSP और लखीमपुर खीरी के किसानों के न्याय तक जारी रहेगा आंदोलन, लखनऊ में महापंचायत की तैयारी तेज़
    20 Nov 2021
    विवादास्पद कृषि कानूनों को निरस्त किये जाने की घोषणा के बावजूद, किसानों के द्वारा उत्तर प्रदेश में आगामी महापंचायतों के मद्देनजर लामबंदी और तैयारी जारी है।
  • farmers celebrating
    विक्रम सिंह
    किसान जानता है कि फसल पकना तो शुरुआत है, मंडी में दाम मिलने तक उसका काम पूरा नहीं होता
    20 Nov 2021
    मोदी जी ने तो अपने चिरपरिचित अंदाज़ में किसानों से घर वापस जाने के लिए कहा परन्तु किसान जानता है कि खेत में फसल पकना तो शुरुआत है लेकिन जब तक फसल का मंडी में उचित मूल्य नहीं मिल जाता तब तक काम पूरा…
  • farmers’ movement
    रौनक छाबड़ा
    दिल्ली के बॉर्डर पर जश्न के बीच किसानों के होंठों पर एक ही सवाल: 'सरकार ने क्यों की इतनी देर'
    20 Nov 2021
    किसान आंदोलन के केंद्र सिंघु और टिकरी बॉर्डर पर मौजूद प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे तब तक घर नहीं लौटेंगे, जब तक कि संसद में विवादास्पद कृषि क़ानूनों को वापस लेने के लिए एक विधेयक पारित नहीं हो…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License