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मेरिट को सिर्फ परीक्षा में प्रदर्शन से मत आंकिए : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने एससी-एसटी पदोन्नति में आरक्षण पर कर्नाटक के कानून को सही ठहराया है। कोर्ट ने कहा कि केंद्र या राज्य के मामलों में प्रशासन की दक्षता को समग्रता के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
11 May 2019
Supreme Court

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कर्नाटक सरकार के 2018 के उस कानून को बरकरार रखा जिसमें अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के कर्मचारियों को पदोन्नति एवं वरिष्ठता क्रम में आरक्षण की व्यवस्था की गई है।

शीर्ष अदालत ने कहा कि उन्हें शासन में प्रतिभागी बनाना ‘एक समान नागरिकता को अंतर्निहित करना है।’ न्यायमूर्ति यू यू ललित और न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की पीठ ने कहा कि यह नहीं कहा जा सकता कि एससी-एसटी वर्गों से पदोन्नति पाने वाले दक्ष नहीं हैं या उनकी नियुक्ति से दक्षता कम हो जाएगी क्योंकि यह ‘रुढ़िवादी संकल्पना’ है।

पीठ ने कहा कि केंद्र या राज्य के मामलों में प्रशासन की दक्षता को समग्रता के संदर्भ में देखा जाना चाहिए जहां समाज के अलग अलग वर्ग जनता द्वारा और जनता के लिए शासन की सच्ची महत्वाकांक्षा का प्रतिनिधित्व करते हैं।

अपने फैसले में जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा, 'अनुसूचित जाति एवं जनजाति को आरक्षण दिया जाना मेरिटोक्रेसी यानी मेरिट को प्राथमिकता वाली व्यवस्था के सिद्धांत के खिलाफ नहीं है। मेरिट को संकुचित दायरे में नहीं रखा जा सकता और इसे महज परीक्षा में रैंक के तौर पर ही नहीं देख सकते। इसे समाज में समानता को बढ़ाने के तौर पर भी देखना चाहिए। इसके अलावा लोक प्रशासन में विविधता का ख्याल भी रखा जाना चाहिए।' 

जस्टिस चंद्रचूड़ ने अपने फैसले में अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन के एक आलेख का भी जिक्र किया है। इस लेख में कहा गया है कि जो लोग कट ऑफ मार्क्स से अधिक अंक लेते हैं, वही मेधावी हैं, बाकी नहीं, तो यह विकृत सोच है। अगर विविधता और अनेकता को तरजीह नहीं दी गई तो हमारा समाज असमानता के चुंगल से नहीं निकल पाएगा। 

शीर्ष अदालत ने यह फैसला उन याचिकाओं पर सुनाया जिनमें कर्नाटक सरकार के एससी-एसटी कर्मचारियों को पदोन्नति में आरक्षण से संबंधित2018 के कानून की वैधता को चुनौती दी गई थी।

आपको बता दें कि कर्नाटक से पहले कई अन्य राज्यों ने भी एससी-एसटी वर्ग को प्रोन्नति में आरक्षण का नियम बनाया था, लेकिन अदालत से मंजूरी नहीं मिल सकी थी।

 (समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

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