NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
महाराष्ट्र गंभीर सूखे की चपेट में, लेकिन कोई खबर लेने वाला नहीं
महाराष्ट्र में 136 तालुकों में से, जिन्होंने मांग की थी कि उन्हें 'सूखा प्रभावित' घोषित किया जाए, 2016 के मैनुअल के अनुसार, केवल तीन ही सुखे की श्रेणी में आने के "योग्य" हैं।
शिल्पा शाजी
15 Nov 2018
Translated by महेश कुमार
drought in india

हालांकि भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने एक महीने पहले घोषित किया था कि दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान देश के 255 ज़िलों में वर्षा में 20 से 59 प्रतिशत की कमी आई है, लेकिन कई राज्यों को इसके बावजुद सूखा पीड़ित घोषित नहीं किया गया है। इस लापरवाही के कारण, इन क्षेत्रों के किसान काफी पीड़ित हैं।

दक्षिणपश्चिम मानसून के दौरान, 1 जून 2018 और 30 सितंबर 2018 के बीच, देश भर में लंबी अवधि के औसत (एलपीए) की तुलना में बारिश में नौ प्रतिशत का घाटा दर्ज किया गया था। दक्षिणी प्रायद्वीप और उत्तरपश्चिम भारत को एलपीए का 98 प्रतिशत प्राप्त हुआ है, जबकि मध्य भारत को एलपीए का 93 प्रतिशत प्राप्त हुआ है। हालांकि, पूर्व और पूर्वोत्तर भारत को एलपीए का केवल 76 प्रतिशत प्राप्त हुआ है।

भारत के सभी ज़िलों में से लगभग 35 प्रतिशत जिले प्रभावित हैं। डाउन टू अर्थ की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, गुजरात, तमिलनाडु, मेघालय, कर्नाटक, अरुणाचल प्रदेश और गोवा के 50 प्रतिशत से अधिक ज़िलों में बारिश में कमी आई है।

महाराष्ट्र, कर्नाटक, बिहार, ओडिशा, मेघालय, आंध्र प्रदेश और झारखंड समेत राज्यों ने सूखा घोषित कर दिया है, जिससे इससे निपटने के लिए कदम उठाए जा सकें। हालांकि, गुजरात, असम और उत्तर प्रदेश में अभी तक सूखा घोषित नहीं किया गया है।

गुजरात में, सौराष्ट्र और कच्छ क्षेत्रों में बारिश 34 प्रतिशत कम दर्ज हुई है। जबकि, पूर्वी और दक्षिण गुजरात में 24 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। असम राज्य के 10 ज़िलों में 26 प्रतिशत कम बारिश हुई है। उत्तर प्रदेश के बड़े हिस्से में 40 प्रतिशत वर्षा कम हुई है, फिर भी राज्य में अभी तक सूखा घोषित नहीं किया गया है। पश्चिम बंगाल के दस ज़िलों में भी वर्षा में कमी देखी गई है।

क्या 2016 में सूखा प्रबंधन के लिए अद्द्तन मैनुअल की वजह से सुखा घोषित करने के लिए कड़े पैरामीटर बनाए हैं?

ऑल इंडिया किसान सभा (एआईकेएस) के राज्य महासचिव अजीत नवले ने कहा कि स्थिति खराब हो गई है क्योंकि केंद्र ने सूखा मूल्यांकन के लिए मानकों को बदल दिया है। 2016 के नए मैनुअल ने राज्यों को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए केंद्र के दायरे को भी सीमित कर दिया है।

2009 के सूखे प्रबंधन मैनुअल के मुताबिक, सूखे का मूल्यांकन पांच अलग-अलग मानकों पर किया जाएगा - पेयजल, सिंचाई के पानी, चारा और अनाज, और ऊर्जा क्षेत्र की आवश्यकता की उपलब्धता। हालांकि, 2015 में, केंद्र ने एक व्यापक सूखा संकट प्रबंधन योजना जारी की थी, जिसे दिसंबर 2016 में "सूखे का अधिक सटीक मूल्यांकन" प्राप्त करने के इरादे से जारी किया गया था।

वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए केंद्र की जिम्मेदारी को निरस्त करने के लिए, 2016 मैनुअल में कहा गया कि राहत उपायों को संबंधित राज्य सरकारों द्वारा केंद्र की सक्रिय भागीदारी के साथ लागू किया जाना चाहिए।

2009 के मैनुअल में राहत व्यय वित्तपोषण की दो धाराएं थीं - आपदा राहत निधि (सीआरएफ) और राष्ट्रीय आपदा आकस्मिक निधि (एनसीसीएफ)। केंद्र और संबंधित राज्य सरकारों का योगदान सीआरएफ के लिए 3:1 के अनुपात में था। इस नीति ने राहत कार्यों के लिए धन का वितरण सुनिश्चित किया था।

नया मैनुअल चार प्रभाव संकेतक चित्रित करता है और 13 उप-सूचकांक जिन्हें 'ट्रिगर संकेतक' कहा जाता है। संकेतकों की संख्या के आधार पर, सूखे की परिमाण को 'गंभीर' या 'मध्यम' के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है।

यदि क्षेत्र में चार में से दो प्रभाव संकेतक लागू होते हैं, तो उस क्षेत्र को 'मामूली रूप से प्रभावित' घोषित किया जाएगा। जबकि, किसी एक क्षेत्र में चार में से तीन प्रभाव संकेतक मिलते है तो वह 'गंभीर रूप से प्रभावित' श्रेणी के अंतर्गत जाएगा। हालांकि, नए मैनुअल में महत्वपूर्ण कारकों के रूप में वर्षा और भुमी की जांच  सूचीबद्ध नहींं हैं, जबकि वनस्पति, जलविद्युत सूचकांक, फसल स्थिति सूचकांक इत्यादि प्रभाव संकेतक के रूप में सूचीबद्ध हैं। इसके अलावा, मिट्टी में नमी पर संकेतक कहता है कि केवल अगर नमी की मात्रा 25 प्रतिशत से कम है, तो केवल सूखे को 'गंभीर' माना जा सकता है। हालांकि सभी फसलों के लिए नमी सामग्री को सामान्य बनाना मुश्किल होगा, कुछ फसलों में उच्च नमी की मात्रा की आवश्यकता होती है और यदि यह कम हो जाती है, तो इसका उत्पादन पर गंभीर असर पड़ेगा।

इसके जारी होने के समय से, किसानों के नेताओं और विशेषज्ञों ने संकेत दिया है कि सूखे की घोषणा के लिए सख्त मानदंड देश भर के किसानों के लिए स्थिति को ओर खराब कर देगा।

 "शुरुआत में, नए मैनुअल ने स्वीकार किया कि सूखे में जटिल प्रकृति और अलग-अलग विशेषताएं हैं जो विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों में विभिन्न तरीकों से प्रकट होती हैं। लेकिन, यह देश में छह जलवायु क्षेत्रों में सूखे की घोषणा के लिए बहुत सख्त सूचकांक निर्धारित करने के लिए आगे बढ़ता है, " ग्राम स्क्वायर.इन के साथ बात करते हुए सहभागिता पारिस्थितिक तंत्र प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए सोसाइटी के के जे जॉय ने ऐसा कहा। "यदि नये मैनुअल का पालन किया जाता है, तो देश में कई सूखे बिना रिपोर्ट किए रह जाएंगे।" 

इस साल जनवरी में, महाराष्ट्र राज्य सरकार ने 2016 के मैनुअल में सूखे की घोषणा के लिए निर्धारित शर्तों की छूट के लिए केंद्र से आग्रह किया था। राज्य में 136 तालुकों में से, जिन्होंने मांग की थी कि उन्हें 'सूखा प्रभावित' घोषित किया जाना चाहिए, 2016 की मैनुअल की परिभाषा के अनुसार इस श्रेणी में केवल तीन "योग्य" तालुक आते हैं, जो कि 'मध्यम' श्रेणी में दर्ज़ किए गए थे।

'मध्यम' दर्ज़े के सूखे के मामले में, राज्य सरकारें वित्तीय सहायता देने के लिए जिम्मेदार हैं, और केंद्र को इस परिदृश्य में कदम उठाने की जरूरत नहींं है। हालांकि बीजेपी के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र सरकार के राहत और पुनर्वास विभाग को केंद्र को एक पत्र लिखने के लिए मजबूर होना पड़ा कि 2016 मैनुअल में अधिकांश संकेतक अप्रासंगिक हैं।

anti-farmer BJP
agrarian crisis
Maharashtra
drought
drought in India
Gujarat drought
IMD
Rainfall
centre vs farmers

Related Stories

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा

हिसारः फसल के नुक़सान के मुआवज़े को लेकर किसानों का धरना

महाराष्ट्र : एएसआई ने औरंगज़ेब के मक़बरे को पांच दिन के लिए बंद किया

महाराष्ट्र में गन्ने की बम्पर फसल, बावजूद किसान ने कुप्रबंधन के चलते खुदकुशी की

2023 विधानसभा चुनावों के मद्देनज़र तेज़ हुए सांप्रदायिक हमले, लाउडस्पीकर विवाद पर दिल्ली सरकार ने किए हाथ खड़े

खबरों के आगे-पीछे: अंदरुनी कलह तो भाजपा में भी कम नहीं

अब राज ठाकरे के जरिये ‘लाउडस्पीकर’ की राजनीति

महाराष्ट्र सरकार का एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम को लेकर नया प्रस्ताव : असमंजस में ज़मीनी कार्यकर्ता

कोविड-19 टीकाकरण : एक साल बाद भी भ्रांतियां और भय क्यों?

महाराष्ट्र सरकार पर ख़तरे के बादल? क्यों बाग़ी मूड में नज़र आ रहे हैं कांग्रेस के 25 विधायक


बाकी खबरें

  • Goa
    न्यूज़क्लिक टीम
    गोवा चुनावः क्या है मछली बेचने वालों के मुद्दे और भाजपा का रिपोर्ट कार्ड?
    04 Feb 2022
    गोवा एक तटीय प्रदेश है। बड़ी आबादी मछली कारोबार से जुड़ी हैं। लेकिन बावजूद इसके इनके मुद्दे पूरी चुनाव चर्चा से गायब हैं। हमने मापसा की मछली मार्केट में कुछ मछली बेचने वालों के साथ बात की है कि उनके…
  • journalist bodies
    ऋत्विका मित्रा
    प्रेस की आजादी खतरे में है, 2021 में 6 पत्रकार मारे गए: रिपोर्ट 
    04 Feb 2022
    छह पत्रकारों में से कम से कम चार की कथित तौर पर उनकी पत्रकारिता से संबंधित कार्यों की वजह से हत्या कर दी गई थी। 
  • Modi
    नीलांजन मुखोपाध्याय
    उत्तर प्रदेश चुनाव: बिना अपवाद मोदी ने फिर चुनावी अभियान धार्मिक ध्रुवीकरण पर केंद्रित किया
    04 Feb 2022
    31 जनवरी को अपनी "आभासी रैली" में प्रधानमंत्री मोदी ने उत्तर प्रदेश में पिछले समाजवादी पार्टी के "शासनकाल के डर का जिक्र" छेड़ा, जिसके ज़रिए कुछ जातियों और उपजातियों को मुस्लिमों के साथ मिलने से…
  • russia china
    एम. के. भद्रकुमार
    रुस-चीन साझेदारी क्यों प्रभावी है
    04 Feb 2022
    व्लादिमीर पुतिन और शी जिनपिंग के बीच शुक्रवार को होने वाली मुलाक़ात विश्व राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण होने जा रही है।
  •  Lucknow
    असद रिज़वी
    यूपी चुनाव: लखनऊ में इस बार आसान नहीं है भाजपा की राह...
    04 Feb 2022
    वैसे तो लखनऊ काफ़ी समय से भगवा पार्टी का गढ़ रहा है, लेकिन 2012 में सपा की लहर में उसको काफ़ी नुक़सान भी हुआ था। इस बार भी माना जा रहा है, भाजपा को कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License