NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
भारत
राजनीति
महाराष्ट्र : दूध की गिरती क़ीमतों के ख़िलाफ़ प्रदेश भर में प्रदर्शन करेंगे किसान
महाराष्ट्र के दुग्ध उत्पादक किसानों का कहना है कि लॉकडाउन के दौरान उनके साथ धोखा किया जा रहा है। डेयरियों का दावा है कि मांग में कमी आई है, लेकिन किसानों का कहना है कि यह "संगठित लूट" है, जिसके ख़िलाफ़ वे प्रदर्शन करेंगे।
अमेय तिरोदकर
17 Jun 2021
महाराष्ट्र : दूध की गिरती क़ीमतों के ख़िलाफ़ प्रदेश भर में प्रदर्शन करेंगे किसान

महाराष्ट्र में अकोला के रहने वाले सूर्यकांत पंधारे दूध विक्रेता हैं। उनकी तीन गायें करीब 35 लीटर दूध देती हैं। कोरोना की दूसरी लहर के पहले वे हर दिन करीब 1300 रुपये कमा रहे थे। लेकिन अब एक महीने बाद दूध के दाम कम हो चुके हैं और सूर्यकांत की आय भी कम होकर 750 रुपये हो चुकी है। जिस निजी डेयरी में सूर्यकांत अपना दूध देते हैं, उसने बताया कि लॉ़कडाउन के चलते दूध की मांग करीब़ 30 फ़ीसदी तक कम हो चुकी है।

नाराज़ सूर्यकांत कहते हैं, "मुझे लगता है यह लोग हमें धोखा दे रहे हैं। क्या घरों में लोगों ने दूध पीना बंद कर दिया है? आखिर मांग इतनी ज़्यादा कम कैसे हो सकती है?" सूर्यकांत और उनकी तरह के दूध विक्रेताओं का गुस्सा 17 जून को महाराष्ट्र की सड़कों पर देखने को मिलेगा। किसानों ने उस दिन प्रदेशव्यापी प्रदर्शन करने का फ़ैसला लिया है।

अखिल भारतीय किसान सभा की महाराष्ट्र शाखा ने 17 जून को विरोध प्रदर्शन करने का आह्वान किया है। इसके प्रदेश महासचिव डॉ अजित नवाले ने किसानों से एकजुट होकर हर तहसील कार्यालय पहुंचने की अपील की है। वह कहते हैं, "राज्य सरकार और निजी डेयरियों में मौजूद गिरोह किसानों के साथ धोखा कर रहा है। यह लोग हर लीटर पर 20 रुपये का भारी मुनाफ़ा कमा रहे हैं। यह खुली लूट है। इसे रोकना होगा और इसलिए हम किसानों ने सड़कों पर आने का फ़ैसला किया है।"

महाराष्ट्र में हर रोज़ 1 करोड़ 30 लाख लीटर से भी ज़्यादा दूध इकट्ठा होता है। इसमें से करीब 40 लाख लीटर दूध का इस्तेमाल दूध पॉउडर बनाने और इसी तरह के उद्योगों में खप जाता है। बाकी दूध पैकटों में पैक करवाकर बेच दिया जाता है। डॉ नवाले सवाल पूछते हुए कहते हैं, "अगर हम मान भी लें कि होटलों के बंद होने से मांग में कमी आई है, लेकिन ऐसे में घरेलू मांग में कमी कैसे आ सकती है। लोग अब भी दूध खरीद रहे हैं। दूध की दुकानें खुली हुई हैं। घर तक दूध पहुंचाने की सुविधा अनिवार्य सेवाओं में शामिल है। इसका मतलब है कि मांग में कोई बहुत बड़ी कमी नहीं आई है। फिर दूध के दाम 45 फ़ीसदी तक कम क्यों कर दिए गए हैं?"

ओस्मानाबाद की भूम तहसील के रहने वाले बाजीराव पाटिल ने राज्य सरकार और डेयरियों के खिलाफ़ एक पूरे दिन धरना प्रदर्शन करने का फ़ैसला किया है। वह कहते हैं, "यह सरकार का कर्तव्य है कि वह हमारे हितों की रक्षा करे। लेकिन बहुत सारे नेता निजी डेयरियों के मालिक हैं या सहकारी डेयरियों पर नियंत्रण करते हैं, यह लोग इस खुली लूट पर चुप रहते हैं। इसलिए हम राज्य सरकार के खिलाफ़ प्रदर्शन करने जा रहे हैं।"

बता दें यह दूसरा साल है जब "महाराष्ट्र में दूध की मांग में कमी हो रही है।" पिछले लॉकडाउन में भी किसानों को इसी तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ा था। बाद में जब अक्टूबर, 2020 में बाज़ार खुले, तो राज्य सरकार ने हस्तक्षेप करते हुए दूध के दामों को सामान्य किया। लेकिन तब तक चार महीनों में किसानों को बहुत नुकसान हो चुका था।

वरिष्ठ पत्रकार मारूति कनाडले कहते हैं, "डेयरी किसानों के लिए नगद का व्यापार है। यह उन्हें घरेलू और कृषि जरूरतों की पूर्ति के लिए नगद उपलब्ध करवाता है। इसलिए दूध के दामों में कमी से किसानों को दैनिक आधार पर झटका लगता है। इसलिए सरकार का आपात हस्तक्षेप इस क्षेत्र में जरूरी हो जाता है।"

महाराष्ट्र में 60 लाख से ज़्यादा किसान दूध उत्पादक हैं। इनमें से 40 लाख के करीब सीधे निजी या सहकारी डेयरियों से जुड़े हुए हैं। यह एक बड़ी संख्या है। कोई भी राज्य सरकार लंबे वक़्त तक किसानों के इतने बड़े वर्ग को नाराज नहीं रख सकती।

इस लेख को मूल अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें।

Maharashtra: Milk Producing Farmers to Hold Statewide Protest Against Fall in Prices

milk farmers
Milch Farmers
Maharashtra Farmers
Milk Prices
AIKS
farmers protest
maharashtra government

Related Stories

राम सेना और बजरंग दल को आतंकी संगठन घोषित करने की किसान संगठनों की मांग

यूपी चुनाव: किसान-आंदोलन के गढ़ से चली परिवर्तन की पछुआ बयार

कृषि बजट में कटौती करके, ‘किसान आंदोलन’ का बदला ले रही है सरकार: संयुक्त किसान मोर्चा

केंद्र सरकार को अपना वायदा याद दिलाने के लिए देशभर में सड़कों पर उतरे किसान

किसानों ने 2021 में जो उम्मीद जगाई है, आशा है 2022 में वे इसे नयी ऊंचाई पर ले जाएंगे

ऐतिहासिक किसान विरोध में महिला किसानों की भागीदारी और भारत में महिलाओं का सवाल

महाराष्ट्र: किसानों की एक और जीत, किसान विरोधी बिल वापस लेने को एमवीए सरकार मजबूर

पंजाब : किसानों को सीएम चन्नी ने दिया आश्वासन, आंदोलन पर 24 दिसंबर को फ़ैसला

लखीमपुर कांड की पूरी कहानी: नहीं छुप सका किसानों को रौंदने का सच- ''ये हत्या की साज़िश थी'’

इतवार की कविता : 'ईश्वर को किसान होना चाहिये...


बाकी खबरें

  • punjab
    भाषा सिंह
    पंजाब चुनावः परदे के पीछे के खेल पर चर्चा
    19 Feb 2022
    पंजाब में जिस तरह से चुनावी लड़ाई फंसी है वह अपने-आप में कई ज़ाहिर और गुप्त समझौतों की आशंका को बलवती कर रही है। पंजाब विधानसभा चुनावों में इतने दांव चले जाएंगे, इसका अंदाजा—कॉरपोरेट मीडिया घरानों…
  • Biden and Boris
    जॉन पिलगर
    युद्ध के प्रचारक क्यों बनते रहे हैं पश्चिमी लोकतांत्रिक देश?
    19 Feb 2022
    हाल के हफ्तों और महीनों में युद्ध उन्माद का ज्वार जिस तरह से उठा है वह इसका सबसे ज्वलंत उदाहरण है
  • youth
    असद रिज़वी
    भाजपा से क्यों नाराज़ हैं छात्र-नौजवान? क्या चाहते हैं उत्तर प्रदेश के युवा
    19 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश के नौजवान संगठनों का कहना है कि भाजपा ने उनसे नौकरियों के वादे पर वोट लिया और सरकार बनने के बाद, उनको रोज़गार का सवाल करने पर लाठियों से मारा गया। 
  • Bahubali in UP politics
    विजय विनीत
    यूपी चुनाव: सियासी दलों के लिए क्यों ज़रूरी हो गए हैं बाहुबली और माफ़िया?
    19 Feb 2022
    चुनाव में माफ़िया और बाहुबलियों की अहमियत इसलिए ज्यादा होती है कि वो वोट देने और वोट न देने,  दोनों चीज़ों के लिए पैसा बंटवाते हैं। इनका सीधा सा फंडा होता है कि आप घर पर ही उनसे पैसे ले लीजिए और…
  • Lingering Colonial Legacies
    क्लेयर रॉथ
    साम्राज्यवादी विरासत अब भी मौजूद: त्वचा के अध्ययन का श्वेतवादी चरित्र बरकरार
    19 Feb 2022
    त्वचा रोग विज्ञान की किताबों में नस्लीय प्रतिनिधित्व की ऐतिहासिक कमी ना केवल श्वेत बहुल देशों में है, बल्कि यह पूरी दुनिया में मौजूद है
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License