NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
रूस की नए बाज़ारों की तलाश, भारत और चीन को दे सकती  है सबसे अधिक लाभ
रूस की नए बाज़ारों की खोज से भारत और चीन को सबसे अधिक लाभ होगा। 
एम. के. भद्रकुमार
06 May 2022
Translated by महेश कुमार
Tianjin
टियांजिन, चीन में एक टर्मिनल पर रूसी तरलीकृत प्राकृतिक गैस टैंकर खड़ा है 

यूरोप और रूस, ऊर्जा व्यापार के मामले में एक घातक प्रतिस्पर्धा में प्रवेश कर रहे हैं। यूरोप, रूस से परे हटकर अपने ऊर्जा के स्रोतों में विविधता ला रहा है। रूस, यूरोपीय बाजार पर अपनी निर्भरता को कम करने के लिए यूरोप के साथ दौड़ लगा रहा है और वह "पूर्व की ओर देखो" नीति के साथ इसमें बदलाव ला रहा है जिसके ज़रिए वह एशियाई ऊर्जा बाजार की विशाल संभावनाओं का दोहन कर सकता है।

वाशिंगटन को भी इससे लाभ मिलने उम्मीद है। वह रूसी गैस और तेल को यूरोपीय बाजार में अपने निर्यात को बढ़ाकर कर इस स्थिति को बदलने की नीति पर काम कर सकता है; क्योंकि उसका मानना है यदि यूरोप के ऊर्जा बाजार से रूस की आय में कमी आती है तो उसकी अर्थव्यवस्था को झटका लग सकता है; और, इस तरह एक कमजोर रूस, चीन का छोटा भागीदार बन सकता है। 

अभी रूस बढ़त में है ऐसा इसले भी कहा जा सकता है क्योंकि रूस, यूरोप को तेल और गैस कम कीमतों पर उपलब्ध करा रहा है, जिसकी आपूर्ति रूस लंबी अवधि के अनुबंधों के आधार पर  पाइपलाइनों के माध्यम से कर रहा है।

रूस इस अंतराल का इस्तेमाल कर, नए बाजारों को विकसित करने की योजना बना रहा है। भारत और चीन, नए बाजारों के मामले में रूस की खोज का सबसे अधिक लाभ उठा सकते हैं। रूस ने उन्हें और अन्य को, स्थानीय मुद्राओं में भुगतान प्रणालियों के लिए रियायती कीमतों की पेशकश की है।

हालांकि, भारत और चीन की प्रतिक्रिया इस सब के विपरीत एक अध्ययन पेश करती है। भारत एक रक्षात्मक रुख अपना रहा है कि रूस से उसका ऊर्जा आयात बहुत कम है। लेकिन ठोस पश्चिमी दबाव में आकर, दिल्ली को पश्चिम से किसी तरह के सौदे की उम्मीद है। भारत की यूरोपीय कूटनीति चरम पर है।

भारतीय गणना में हर चीज में "चीन का कोण" अनिवार्य रूप से होता है। भारत को यूक्रेन संकट के परिणाम के रूप में यूरोपीयन यूनियन-चीन संबंधों में किसी भी गिरावट को भुनाने की उम्मीद है। उम्मीदें बहुत अधिक लगाई जा रही हैं, लेकिन यूक्रेन संकट ने यूरोप के भविष्य पर ही बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है।

सिन्हुआ ने अपनी एक टिप्पणी में कहा है: कि “आर्थिक मंदी, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और कोविड-19 की पृष्ठभूमि के चलते, और दो साल से अधिक समय के बाद कमजोर उपभोक्ता मनोबल, रूस-यूक्रेन संघर्ष और रूस पर बाद के प्रतिबंध यूरोप में अधिक कहर बरपा रहे हैं, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा पर व्यापक दहशत फैल गई है, खाद्य और ऊर्जा की बढ़ती कीमतें और जीवन स्तर में भारी गिरावट आई है।"

भारतीय मत का एक प्रभावशाली वर्ग यह मानता है कि भारत को "इतिहास के सही तरफ" खड़ा होना चाहिए - अर्थात्, पश्चिम के साथ गठजोड़ करना चाहिए। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने रियायती रूसी तेल या वस्तुओं को खरीदने के खिलाफ लिखा है। उन्होंने लिखा है कि "लंबे समय में, भारत को स्थापित व्यापारिक आदेश के तहत भारतीय निर्यात के लिए पश्चिमी ब्लॉक बाजारों तक निर्बाध पहुंच से नई द्विपक्षीय मुद्रा व्यवस्था के तहत रूस से खरीदी गई रियायती वस्तुओं की तुलना में अधिक लाभ मिल सकता है, जो एक नया और समानांतर वैश्विक व्यापार संरचना बनाना चाहते हैं।" 

संभ्रांतवादी दृष्टिकोण यह मानता है कि भारत को चीन के मुकाबले मजबूत बनाने में अमेरिकी  पश्चिम का रणनीतिक हित है। भारत में प्रचलित कथा यह भी है कि "फ्री वेस्ट" निरंकुशता की रूस-चीन धुरी के खिलाफ युद्ध जीत रहा है।

अब चीन पर रुख करते हैं। संक्षेप में कहें तो चीनी दृष्टिकोण, रूस का दृढ़ता से समर्थन करता है साथ ही सावधानी से पश्चिमी प्रतिबंधों के मामले में अनावश्यक उलझाव से भी बचता है। वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी, रूस के प्रति चीन के लंबे समय से चल रहे समर्थन के बारे में सावधान रहते हैं, लेकिन उनका कहना है कि उन्होंने रूस को चीनी सैन्य और आर्थिक समर्थन या रूस को हमारे प्रतिबंधों से बचने में मदद करने के व्यवस्थित प्रयासों का पता नहीं लगाया है न ही ऐसा कुछ अभी देखा गया है - कम से कम अभी के लिए तो ऐसा नहीं देखा गया है। पश्चिम के लिए सबसे अच्छा परिणाम यह होगा कि वह, बीजिंग पर रूस और पश्चिम के बीच एक संतुलित संतुलन बनाए रखने का दबाव बनाए रखे। 

यूक्रेन मुद्दे पर अतिसक्रिय राष्ट्रपति जो बाइडेन ने चीन द्वारा रूस की मदद करने की बात नहीं की है। पिछले हफ्ते, विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने अमेरिकी सीनेट की विदेश संबंध समिति के सामने कहा कि चीन, रूस के सहयोगी होने के "महत्वपूर्ण प्रतिष्ठा वाले जोखिम" से निपट रहा है और "अभी हम रूस को सैन्य गतिविधियों के लिए चीन से महत्वपूर्ण समर्थन भी नहीं दिख रहा है। "बाइडेन का जापान और दक्षिण कोरिया का आगामी एशिया दौरा, राष्ट्रपति के रूप में उनका पहला, और महत्वपूर्ण कार्यक्रम होगा।

इसका बतलब साफ है कि तथ्य खुद बोलते हैं। चीन को रूस का प्राकृतिक गैस का निर्यात 2021 की अवधि से वर्ष के पहले चार महीनों में 60 प्रतिशत बढ़ गया है। गज़प्रोम ने रविवार को एक बयान में कहा कि आगामी सुदूर पूर्व मार्गों के माध्यम से चीन को रूसी गैस शिपमेंट 2026 तक 48 बिलियन क्यूबिक मीटर तक पहुंच सकता है जो 2021 में प्रति वर्ष लगभग 10 बिलियन क्यूबिक मीटर था। 

इस बीच, गज़प्रोम एक अन्य पाइपलाइन जिसका नाम - सोयुज वोस्तोक है - की योजना पर भी काम कर रहा है - जो रूस से चीन तक - मंगोलिया के माध्यम से जाएगी, जिसका मतलब होगा कि हर साल अतिरिक्त 50 बिलियन क्यूबिक मीटर गैस चीन को दी जा सकती है।

स्पष्ट रूप से, दुनिया का सबसे बड़ा ऊर्जा उपभोक्ता चीन अपने इरादों पर अड़ा हुआ है कि वह प्रतिबंधों का विरोध करता है और तेल और गैस पर सहयोग सहित रूस के साथ उसका व्यापार जारी रहेगा। वैश्विक मांग अधिक बनी हुई है और प्राकृतिक गैस और तेल के साथ-साथ कोयले की कीमतों में पिछले साल से तेजी से वृद्धि हुई है और विश्व बाजारों तक पहुंच में रूसी ऊर्जा की कठिनाई को देखते हुए कीमतें अधिक बढ़ सकती है।

इसलिए, पश्चिमी खेल वास्तव में रूसी निर्यात को इतना कम या कमज़ोर करना नहीं है जितना कि रूसी तेल और गैस राजस्व को कम करना है। चीनी नीति निर्माताओं ने इस महत्वपूर्ण अंतर को समझ लिया है।

दिलचस्प बात यह है कि जापान भी ऐसा ही कर रहा है, जिसने मास्को पर सख्त जी7 प्रतिबंधों में शामिल होने के बावजूद, रूस के सुदूर पूर्व में सखालिन-2 में अपनी 27.5 प्रतिशत हिस्सेदारी पर टिके रहने के इरादे की घोषणा की है। प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा ने कहा कि यह परियोजना जापान को "दीर्घकालिक, सस्ती और स्थिर एलएनजी आपूर्ति" प्रदान करने में मदद करेगी और "हमारी ऊर्जा सुरक्षा के मामले में एक अत्यंत महत्वपूर्ण परियोजना है।"

यह वह मौका है जहां भारत के लिए भी के बड़ा अवसर हैं, जिसमें व्यापक रिफाइनरी उद्योग हैं जो आमतौर पर रूसी कच्चे तेल में रुचि रखते हैं। (रूस से भारत के लिए प्राकृतिक गैस का स्रोत कठिन होने जा रहा है।)

चीनी कंसल्टेंसी फेनवेई एनर्जी इंफॉर्मेशन सर्विस ने इस महीने की शुरुआत में कहा था कि युआन में भुगतान किए गए रूसी कोयले और तेल का चीन में प्रवाह शुरू होने वाला है और इस महीने पहला कार्गो पहुंच जाएगा। यह युआन में भुगतान किया गया पहला कमोडिटी शिपमेंट होगा क्योंकि अमेरिका और यूरोप ने कई रूसी बैंकों को अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली से काट दिया था।

वास्तव में, चीन पश्चिमी प्रतिबंधों के प्रतिमान को मनमोहन सिंह से बहुत अलग दृष्टिकोण से देख रहा है – कि प्रतिबंधों का बेहतर तरीके से लाभ कैसे उठाया जाए, साथ ही इसमें और अधिक सामग्री जोड़कर रूस के साथ साझेदारी को बढ़ाया जाए। इसके विपरीत भारत का रिकॉर्ड यह रहा है कि पिछली सरकार (2004-2014) के नेतृत्व में रूस के साथ भारत के संबंध ठहराव पर आ गए थे। 

भारतीय रिजर्व बैंक ने हाल ही में अनुमान लगाया है कि भारत के 2034-35 में ही कोविड-19 के नुकसान से उबर पाने की उम्मीद है। लेकिन यह सब सकल घरेलू उत्पाद की निरंतर 7.5 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि की बड़ी धारणा पर आधारित है। अंतरराष्ट्रीय अर्थशास्त्रियों की सर्वसम्मत  राय है कि अगले साल भारत की जीडीपी वृद्धि दर, और संभवतः उससे आगे, 6 प्रतिशत के करीब रहने की उम्मीद है।

स्पष्ट रूप से, भारत को रूस के खिलाफ यूरोपीयन यूनियन और अमेरिकी प्रतिबंधों के एल्गोरिदम की जांच करने की जरूरत है ताकि एक महत्वपूर्ण मोड़ पर व्यापार के अवसरों का पूरा लाभ उठाया जा सके, क्योंकि देश की आर्थिक रिकवरी किसी भी सरकार की सर्वोच्च राष्ट्रीय प्राथमिकता होनी चाहिए। अत्यधिक भू-राजनीतिक उतार-चढ़ाव के मामले में अधिक स्मार्ट होना एक नशे का एहसास देता है। 

हाल ही में दिल्ली में, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयन ने हमसे चाँद का वादा किया था। लेकिन हमें यथार्थवादी होना चाहिए। यूरोपीयन यूनियन का विश्व स्तरीय शक्तियों के निर्माण का कोई इतिहास नहीं है। प्रमुख अमेरिकी थिंक टैंक, यूक्रेन संकट के कारण यूरोप पर बढ़ते आर्थिक और सामाजिक दबाव के पहले ही यूरोपीयन यूनियन के भविष्य के बारे में ही संशय में था।  

एमके भद्रकुमार एक पूर्व राजनयिक हैं। वे उज्बेकिस्तान और तुर्की में भारत के राजदूत रह चुके हैं। व्यक्त विचार व्यक्तिगत हैं।

इस लेख को मूल अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए नीचे दिये गए लिंक पर क्लिक करें।

Make Hay While Sun Shines — Indian, Chinese Ways

Russia
India
China
Energy Markets
Russian Oil
Europe and Russia
Russia-Ukraine Conflict

Related Stories

भारत में धार्मिक असहिष्णुता और पूजा-स्थलों पर हमले को लेकर अमेरिकी रिपोर्ट में फिर उठे सवाल

भारत में तंबाकू से जुड़ी बीमारियों से हर साल 1.3 मिलियन लोगों की मौत

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में आईपीईएफ़ पर दूसरे देशों को साथ लाना कठिन कार्य होगा

UN में भारत: देश में 30 करोड़ लोग आजीविका के लिए जंगलों पर निर्भर, सरकार उनके अधिकारों की रक्षा को प्रतिबद्ध

वर्ष 2030 तक हार्ट अटैक से सबसे ज़्यादा मौत भारत में होगी

लू का कहर: विशेषज्ञों ने कहा झुलसाती गर्मी से निबटने की योजनाओं पर अमल करे सरकार

वित्त मंत्री जी आप बिल्कुल गलत हैं! महंगाई की मार ग़रीबों पर पड़ती है, अमीरों पर नहीं

प्रेस फ्रीडम सूचकांक में भारत 150वे स्थान पर क्यों पहुंचा

गुटनिरपेक्षता आर्थिक रूप से कम विकसित देशों की एक फ़ौरी ज़रूरत

‘जलवायु परिवर्तन’ के चलते दुनियाभर में बढ़ रही प्रचंड गर्मी, भारत में भी बढ़ेगा तापमान


बाकी खबरें

  • Rajasthan: Rape accused along with friends attacked Dalit girl with knife
    एम.ओबैद
    राजस्थान: रेप के आरोपी ने दोस्तों के साथ मिलकर दलित लड़की पर चाकू से किया हमला
    22 Nov 2021
    अलवर में शुक्रवार की रात रेप करने वाले शख्स और उसके साथियों द्वारा कथित रूप से 20 वर्षीय दलित लड़की पर हमला किया गया। जिसमें उसकी आंख में गंभीर चोटें आईं। पीड़िता को जयपुर रेफर कर दिया गया है जहां…
  • Tribal Pride Week
    रूबी सरकार
    जनजातीय गौरव सप्ताह में करोड़ों खर्च, लेकिन आदिवासियों को क्या मिला!
    22 Nov 2021
    प्रदेश के आदिवासियों के लिए सवाल बरकरार है कि 52 करोड़, कुछ जानकारों के अनुसार 100 करोड़ सरकारी खर्च से इतिहास के साथ छेड़छाड़ कर जो सम्मेलन किया गया, क्या वह भाजपा के एजेंडे का हिस्सा भर था? क्योंकि…
  • farmers
    अब्दुल अलीम जाफ़री
    क़ानूनों की वापसी से मृत लोग वापस नहीं आएंगे- लखीमपुर हिंसा के पीड़ित परिवार
    22 Nov 2021
    बीजेपी को क़ानूनों की वापसी से राजनीतिक फ़ायदे का अनुमान है, जबकि मूल बात यह है कि राज्य मंत्री अजय मिश्रा अब भी खुलेआम घूम रहे हैं, जो आने वाले दिनों में सरकार और किसानों के बीच टकराव की वजह बन सकता…
  • South region leader
    पार्थ एस घोष
    अपने क्षेत्र में असफल हुए हैं दक्षिण एशियाई नेता
    22 Nov 2021
    क्षेत्रीय नेताओं के लिए शुरूआती बिंदु होना चाहिए कि, वे इस मूल वास्तविकता को आंतरिक करें कि दक्षिण एशिया दुनिया के सबसे असमान और संघर्षग्रस्त क्षेत्रों में से एक है।
  • water pump
    शिवम चतुर्वेदी
    हरियाणा: आज़ादी के 75 साल बाद भी दलितों को नलों से पानी भरने की अनुमति नहीं
    22 Nov 2021
    रोहतक के ककराणा गांव के दलित वर्ग के लोगों का कहना है कि ब्राह्मण समाज के खेतों एवं अन्य जगह पर लगे नल से दलित वर्ग के लोगों को पानी भरने की अनुमति नहीं है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License