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भारत
राजनीति
ममता बनर्जी ने पेश किया अंतरिम बजट, कई लोकलुभावन घोषणाएं कीं
लेफ़्ट फ्रंट की सरकार में वित्तमंत्री रहे असीम दासगुप्ता ने बनर्जी सरकार द्वारा घोषित चार महीने के बजट की संवैधानिकता पर सवाल उठाए, जिसमें अगले 10 सालों के लिए कई कार्यक्रमों की घोषणा की गई है।
संदीप चक्रवर्ती
10 Feb 2021
ममता बनर्जी

कोलकाता: सोमवार को ममता बनर्जी ने चुनाव तक अगले चार महीनों के लिए पश्चिम बंगाल का अंतरिम बजट (वोट ऑन अकाउंट- लेखा) पेश किया। इसके तहत कोलकाता में 10 फ्लाईओवर्स, 6 लेन वाले बड़े राजमार्ग, अगले पांच सालों में 1.5 करोड़ लोगों को रोज़गार देने के वायदे को अंतरिम बजट की सबसे अहम घोषणाओं के तौर पर प्रचारित किया जा रहा है। ममता बनर्जी ने वित्तमंत्री अमित मित्रा की गैरमौजूदगी में बजट को पेश किया। मित्रा का स्वास्थ्य ठीक ना होने की ख़बर है। 

अगले विधानसभा चुनावों के ठीक पहले पेश हुए इस बजट में अगले पांच सालों के लिए बहुत सारे वायदे किए गए हैं। इनमें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए 20 लाख घरों का निर्माण, पुलिस और प्रशासन में एक लाख दस हजार पदों पर भर्ती, मुफ़्त राशन व्यवस्था को बरकरार रखना, जन रसोई की शुरुआत, स्वास्थ्य साथी कार्यक्रम के तहत 10 करोड़ लोगों को हितग्राही बनाना, तीन सालों के लिए सरकारी विभागों में 10000 छात्रों को इंटर्नशिप उपलब्ध करवाना, 12वीं के बच्चों को टेबलेट उपलब्ध करवाना, स्वसहायता समूहों को मदद और जिन मदरसों को सहायता उपलब्ध नहीं होती है, उन्हें मदद उपलब्ध कराये जाने जैसे कई वायदे शामिल हैं।

यहां यह दिलचस्प है कि मौजूदा सरकार अब तक कोलकाता और उसके आसपास के क्षेत्रों में एक भी फ्लाईओवर का निर्माण नहीं करवा पाई है। लेकिन बजट में 10 फ्लाईओवर के निर्माण का प्रस्ताव दिया है।

स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में बनर्जी ने राज्य के सभी भाषायी समूहों के लिए अलग-अलग अंग्रेजी भाषी स्कूल खोलने का प्रस्ताव दिया है। 

बजट से पता चलता है कि शराब से होने वाले उत्पाद शुल्क में भारी बढ़ोत्तरी हुई। एक तरफ क्लबों को बजट में छूट दी गई, वहीं सरकार को अपनी FRBM (फिस्कल रिस्पांसिबिलिटी एंड बजट मैनेजमेंट) सीमा 3 फ़ीसदी से बढ़ाकर 5 फ़ीसदी करनी पड़ी, ताकि कर्ज़ लिया जा सके। 

2011 में जब लेफ़्ट फ्रंट ने मुख्यमंत्री कार्यालय छोड़ था, तब पश्चिम बंगाल की सरकारों ने आज़ादी से लेकर तब तक 1,93,000 करोड़ रुपये का कर्ज़ लिया गया था। लेकिन बीते 10 सालों में ही यह राशि बढ़कर दोगुनी हो गई है और राज्य एक कर्ज़ संकट में फंस गया है। एक तरफ बजट ने अपनी सीमा पार कर दी, वहीं दूसरी तरफ इसके ज़रिए करों और छूटों की घोषणा की गई, जिसकी एक चुनावी वर्ष में अनुमति नहीं होती।

आलोचकों के मुताबिक़, बजट में सबसे ज़्यादा 'छेड़खानी' रोज़गार के आंकड़ों से की गई। बजट के मुताबिक़ बंगाल में बेरोज़गारों की संख्या 34 लाख थी, जो 2020 में बढ़कर 35 लाख हो गई। संयोग है कि स्कूली शिक्षातंत्र में अभी 1 लाख पद खाली हैं, कुलमिलाकर अभी 2 लाख सरकारी पदों पर रिक्तियां हैं।

सरकार ने समूह-4 की नौकरियों में 6 लाख लोगों को रोज़गार देने की बात कही, जबकि अब तक सिर्फ़ 5000 लोगों को ही इस वर्ग में नौकरियां दी गई हैं।

खोखला बजट: असीम दासगुप्ता

लेफ़्ट सरकार में वित्तमंत्री रहे असीम दासगुप्ता ने सरकार के प्रस्तावों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह 'खोखला' बजट है, जो केवल उधार और शराब से आय पर टिका है।

दासगुप्ता ने कहा कि चार महीने का बजट ही अपनी कानूनी सीमा पार कर चुका है, तो यह अगले 10 साल तक किसी कार्यक्रम की घोषणा नहीं कर सकता। 

दासगुप्ता ने न्यूज़क्लिक से कहा, "किसी पार्टी का राजनीतक मेनीफेस्टो बजट नहीं हो सकता।" दासगुप्ता ने कहा कि यह बजट गैर संवैधानिक है।

बजट के दौरान ममता बनर्जी सरकार ने दावा किया कि पिछले 10 सालों में राज्य में 1.12 करोड़ रोज़गार का सृजन हुआ। लेकिन इसके लिए किसी तरह के क्षेत्रवार आंकड़े या विश्लेषण पेश नहीं किया गया। यह भी कहा गया कि अगले पांच सालों में 1.5 करोड़ रोज़गार का सृजन होगा, इस दौरान वृद्धि दर 100 फ़ीसदी से भी ज़्यादा होगी। बजट के साथ ही प्रकाशित इससे संबंधित दस्तावेजों में बताया गया है कि योजनागत खर्च में सिर्फ़ 17 फ़ीसदी की बढ़ोत्तरी की गई है। अगर हम महंगाई को भी तस्वीर में ले लें, तो यह बढ़ोत्तरी सिर्फ़ 10 फ़ीसदी ही हो पाती है। आलोचकों का कहना है कि इसलिए 100 फ़ीसदी रोज़गार के बढ़ने की बात सिर्फ़ एक छलावा है, साथ ही सदन के सामने जो दस्तावेज़ पेश किए गए, उनमें कई सवालों के जवाब ही नहीं मिल पाए।

दासगुप्ता ने यह ध्यान दिलाया कि ममता बनर्जी सरकार लेफ़्ट सरकार द्वारा पीछे छोड़े गए कर्ज़ की बात करती हैं, लेकिन वह कर्ज़ सिर्फ़ 1.93 लाख करोड़ था, जिसमें छोटे स्तर के कर्ज़ शामिल थे, क्योंकि उस वक़्त बंगाल छोटी बचतों में पहले पायदान पर था, जबकि इससे पहले के कर्ज़ केंद्र सरकार की नीतियों के चलते लिए गए थे। दासगुप्ता ने बताया कि मौजूदा सरकार खुले बाज़ार से कर्ज़ उठा रही है, जो इस सरकार के 10 सालों में 5.26 लाख करोड़ रुपये पहुंच सकता है।

दासगुप्ता ने यह भी कहा कि बजट भ्रष्टाचार के मुद्दे का समाधान करने में नाकामयाब रहा और यही भ्रष्टाचार सरकारी पैसे का भक्षण कर रहा है।

इस लेख को मूल अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें।

Mamata Banerjee’s Vote on Account Showers Sops in Poll Year 

West Bengal
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Bengal unemployment
Asim Dagupta

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