NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
मणिपुरः राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम लागू करने में सामने आई कई ख़ामियाँ
सीएजी की रिपोर्ट में 2.97 करोड़ की अनियमितताओं का हुआ खुलासा। ये रिपोर्ट 23 जुलाई को पेश की गई थी।

विवान एबन
02 Aug 2018
manipur

भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की एक रिपोर्ट ने मणिपुर में राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम (एनआरडीडब्ल्यूपी) के कार्यान्वयन में अनियमितताओं का खुलासा किया है। सीएजी ने साल 2012 से 2017 तक की अवधि में एनआरडीडब्ल्यूपी को लागू करने में 3 करोड़ के हेर फेर को उजागर किया था। ये रिपोर्ट 23 जुलाई को पेश की गई थी।

इस रिपोर्ट के अनुसार पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट (पीएचईडी) पेयजल योजनाओं को निष्पादन करने वाली प्राथमिक एजेंसी है। पीएचईडी के मुख्य तथा अतिरिक्त मुख्य सचिव के अधीन राज्य जल तथा स्वच्छता मिशन (एसडब्ल्यूएसएम) काम करता है। नियमों के मुताबिक़ एसडब्ल्यूएसएम की सर्वोच्च समिति साल में कम से कम दो बार बैठक करना चाहिए, हालांकि मणिपुर के मामले में इस समिति ने साल में एक बार ही बैठक की जबकि वित्तीय वर्ष 2013-2014 में कोई बैठक नहीं हुई। इस रिपोर्ट के अनुसार अन्य कार्यान्वयन प्रक्रिया में ऐसी ही स्थिति पाई गई है। अगर बैठक नियमित रूप से नहीं की जाती है तो योजना के सफल होने पर किसी को कैसे पता चलेगा?

पीएचईडी की योजना - राज्य तकनीकी एजेंसी (एसटीए) - में समस्या निवारण अंतर को लेकर इस एजेंसी को काम सौंपा गया था जो कभी गठित नहीं की गई। हालांकि पीएचईडी ने कहा कि विभाग के भीतर मौजूद बड़ी संख्या में योग्य लोगों की वजह से उसने एसटीए का गठन कभी नहीं किया, सीएजी ने उसके तर्क को स्वीकार नहीं किया। पीएचईडी ने योजना को लागू करने के लिए योजना तैयार नहीं की थी।

जहां तक वित्तीय अनियमितताओं का सवाल है सीएजी को 2.97 करोड़ रुपए के ख़र्च पर शक था। राज्य के सेनापति और चुराचंदपुर ज़़िलों में पाइप के लिए 41.61लाख रूपए का किया गया भुगतान अवितरित पाया गया था। जो काम पूरे नहीं हुए उसके लिए 42.68 लाख रुपए का भुगतान पहले ही किए जा चुके हैं। इस तरह टोपोकपी और नोंगमाखोंग गांव के लोगों को पीने के पानी से वंचित कर दिया गया था। थौबल डिवीजन के पीएचई को साल 2010 में लैंगमेडोंग को पानी उपलब्ध कराने के लिए टेंडर दिया गया था। ये टेंडर 48.8 9 लाख रूपए का था और बताया गया कि साल 2013 में ये काम भी पूरा हो गया था। साल 2016 में इस काम के लिए ठेकेदार को 47.68 लाख रुपए का भुगतान कर दिया गया था। हालांकि, सीएजी ने पाया कि पाइपलाइन आदि डालने के लिए साल 2012 और 2015 के बीच एक अन्य ठेकेदार को अतिरिक्त ख़र्च के लिए 18.44 लाख रूपए का भुगतान किया गया था। मौक़े की जांच में पाया गया कि वास्तव में काम पूरा ही नहीं हुआ था और सीएजी को इन पाइपों के बिछाने का कोई सबूत ही नहीं मिला।

साल 2013 और 2015 के बीच इस विभाग ने केकमाई में एक टैंक को पुनरूद्धार करने का प्रयास किया जिसे छोड़ दिया गया था। इस विभाग ने 5.17 लाख रुपए पाइप बिछाने के साथ-साथ चौकीदार कार्वार्टर पर भी ख़र्च किया। सीएजी के स्थानों की जांच में पाया कि उक्त जगह अभी भी वैसी ही है और इस बात का कोई सबूत नहीं था कि यहां काम का किया गया था।

इस रिपोर्ट में एक विचित्र मामले पर प्रकाश डाला गया जिसमें एक ठेकेदार ने काम की अनुमानित लागत से अधिक लागत का ख़र्च किया और किए गए काम के क़ीमत से कम भुगतान किया गया। साल 2010 में थौबल डिवीजन के पीएचई ने बित्रा के लिए पेयजल योजना शुरू की थी। अनुमानित लागत 12.88लाख रुपए था। ठेकेदार को इस काम के लिए 13.23 लाख रूपए का भुगतान किया गया जबकि इसकी लागत 13.92 लाख रूपए थी। हालांकि वास्तव में ये काम पूरा नहीं हुआ था।

सेनापति ज़िले के कंगपोक्की डिवीजन के पीएचई ने पाइप बिछाने और निर्माण सामग्री खरीदने के लिए 43.02 लाख रूपए ख़र्च कर दिया। इस योजना के ज़रिए227 सरकारी स्कूलों और 108 आंगनवाड़ी केंद्रों को पेयजल मुहैया कराना था। टेंडर आमंत्रित किए बिना ये काम दो गैर-सरकारी संगठनों और चार ठेकेदारों के माध्यम से कराया गया था। सीएजी ने पाया कि इस अनियमितता के अलावा इस योजना के निष्पादन या किए गए भुगतान को लेकर कोई दस्तावेज़ दिखाने को नहीं था।

इसी तरह की घटनाएं थौबल में हुई थी। पीएचई ने 100 आंगनवाड़ी केंद्रों को पेयजल मुहैया कराने के लिए साल 2013 में 19 .69 लाख रुपए का काम शुरू किया था। यह दिखाया गया कि ये काम को उसी साल पूरा हो गया। हालांकि, सीएजी को प्रदान किए गए डेटाबेस से पता चला कि थौबल में केवल 72 आंगनवाड़ी केंद्र थे।

सीएजी ने यह भी दर्ज किया कि इस कार्यक्रम के तहत शामिल न किए जाने वाले ख़र्च को इस पर लगाया गया। कार्यालय के बुनियादी ढांचे के विकास के लिए ख़र्च किए गए 16.38 लाख रूपए का भार चुराचंदपुर पीएचई ने उठाया। ये कार्यक्रम प्रयोगशालाओं के निर्माण के लिए ख़र्च करने की अनुमति नहीं देता है। हालांकि,लंफेलपत में विभागीय प्रयोगशालाओं के निर्माण के लिए 10 लाख रूपए लगा दिए गए। बिष्णूपुर पीएचई डिवीजन ने एक कॉन्फ्रेंस हॉल बनाने के लिए 12.34 लाख लगा दिया। ये ख़र्च कॉन्फ्रेंस माइक्रोफोन, एलईडी टीवी, मोबाइल फोन, अलमिराह और टेबल खरीदने के लिए किए गए। थौबल पीएचई डिवीजन ने दो वाहनों को ख़रीदने के लिए 27.15 लाख ख़र्च किए। पीएचईडी मंत्री को एक वाहन जारी किया गया था और दूसरा वाहन पीएचईडी के चीफ इंजीनियर को जारी किया गया था।

रिपोर्ट में कहा गया है कि पीएचईडी ने हेड ऑफ सस्टेनेबिलिटी के तहत स्कूलों और आंगनवाड़ी के लिए वर्षा जल संचयन प्रणाली स्थापित किया था। स्टोरेज टैंक300, 500, और 1000 लीटर वाले मुहैया कराए गए थे। सीएजी ने इसे अनसस्सटेनेबेल पाया।

चिंताजनक बात यह भी थी कि सहायक गतिविधियों के संदर्भ में ये कार्यक्रम अव्यवस्थित था। जल की गुणवत्ता और इस कार्यक्रम के निगरानी पहलू में स्टाफ की कमी थी साथ ही बुनियादी ढ़ांचे नहीं थे। राज्य प्रयोगशाला में क्षमता से कम स्टाफ थें। स्वीकृत चौदह पदों में केवल सात पदों पर ही स्टाफ थें। इसके अलावा जांच किए जाने वाले 78 मापदंडों में से उक्त प्रयोगशाला ने केवल 14 का ही जांच किया।

manipur

उपरोक्त तालिका ज़िला प्रयोगशालाओं में कामकाज की स्थिति को बयां करती है। किसी भी ज़िला प्रयोगशालाओं में स्वीकृत क्षमता के अनुसार काम नहीं हो रहा है। आधे से अधिक प्रयोगशालाओं में आधी क्षमता या उससे कम से काम हो रहा है। यह कल्पना करना मुश्किल होगा कि ये प्रयोगशालाएं रोगजनकों की पहचान करने में सक्षम हैं।

एनआरडीडब्ल्यूपी के कार्यान्वयन की स्थिति अनावश्यक ख़र्च के लिए अपना रास्ता बनाने के परिणामस्वरूप हो सकती है। यह योजना की कमी का एक प्राकृतिक परिणाम भी हो सकता है। स्पष्ट है कि इन सभी बड़े योजनाओं के लाभार्थियों को कुछ ही पीने का पानी मिल पाता है। हालांकि, जिनके पास पहुंच है वे बहुत मुश्किल से हासिल कर रहे हैं, क्योंकि परीक्षण की प्रयोगशालाओं में स्टाफ की कमी है और बेहतर उपकरण नहीं हैं। क्या राज्य सरकार कोई कार्रवाई करेगी या कम से कम इस रिपोर्ट का संज्ञान लेगी जिसपर ग़ौर करना अभी बाकी है।

manipur
CAG
NRDWP

Related Stories

पूर्वोत्तर के 40% से अधिक छात्रों को महामारी के दौरान पढ़ाई के लिए गैजेट उपलब्ध नहीं रहा

मुद्दा: नई राष्ट्रीय पेंशन योजना के ख़िलाफ़ नई मोर्चाबंदी

त्वरित टिप्पणी: जनता के मुद्दों पर राजनीति करना और जीतना होता जा रहा है मुश्किल

मणिपुर में भाजपा सरकार बनाने की प्रबल दावेदार केवल बहुमत का इंतज़ार

Election Results : जनादेश—2022, 5 राज्यों की जंग : किसकी सरकार

EXIT POLL: बिग मीडिया से उलट तस्वीर दिखा रहे हैं स्मॉल मीडिया-सोशल मीडिया

मणिपुर के बहाने: आख़िर नीतीश कुमार की पॉलिटिक्स क्या है...

मणिपुरः जो पार्टी केंद्र में, वही यहां चलेगी का ख़तरनाक BJP का Narrative

मणिपुर में पहले चरण का चुनाव, 5 ज़िलों की 38 सीटों के लिए 67 फ़ीसदी से ज़्यादा मतदान

मुद्दा: महिला सशक्तिकरण मॉडल की पोल खोलता मणिपुर विधानसभा चुनाव


बाकी खबरें

  • up elections
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूपी में न Modi magic न Yogi magic
    06 Mar 2022
    Point of View के इस एपिसोड में पत्रकार Neelu Vyas ने experts से यूपी में छठे चरण के मतदान के बाद की चुनावी स्थिति का जायज़ा लिया। जनता किसके साथ है? प्रदेश में जनता ने किन मुद्दों को ध्यान में रखते…
  • poetry
    न्यूज़क्लिक डेस्क
    इतवार की कविता : 'टीवी में भी हम जीते हैं, दुश्मन हारा...'
    06 Mar 2022
    पाकिस्तान के पेशावर में मस्जिद पर हमला, यूक्रेन में भारतीय छात्र की मौत को ध्यान में रखते हुए पढ़िये अजमल सिद्दीक़ी की यह नज़्म...
  • yogi-akhilesh
    प्रेम कुमार
    कम मतदान बीजेपी को नुक़सान : छत्तीसगढ़, झारखण्ड या राजस्थान- कैसे होंगे यूपी के नतीजे?
    06 Mar 2022
    बीते कई चुनावों में बीजेपी को इस प्रवृत्ति का सामना करना पड़ा है कि मतदान प्रतिशत घटते ही वह सत्ता से बाहर हो जाती है या फिर उसके लिए सत्ता से बाहर होने का खतरा पैदा हो जाता है।
  • modi
    डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
    तिरछी नज़र: धन भाग हमारे जो हमें ऐसे सरकार-जी मिले
    06 Mar 2022
    हालांकि सरकार-जी का देश को मिलना देश का सौभाग्य है पर सरकार-जी का दुर्भाग्य है कि उन्हें यह कैसा देश मिला है। देश है कि सरकार-जी के सामने मुसीबत पर मुसीबत पैदा करता रहता है।
  • 7th phase
    रवि शंकर दुबे
    यूपी चुनाव आख़िरी चरण : ग़ायब हुईं सड़क, बिजली-पानी की बातें, अब डमरू बजाकर मांगे जा रहे वोट
    06 Mar 2022
    उत्तर प्रदेश में अब सिर्फ़ आख़िरी दौर के चुनाव होने हैं, जिसमें 9 ज़िलों की 54 सीटों पर मतदान होगा। इसमें नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी समेत अखिलेश का गढ़ आज़मगढ़ भी शामिल है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License