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भारत
राजनीति
मोबाइल कनेक्शन, बैंक खाते और स्कूलों में दाखिले के लिए आधार की ज़रूरत नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने सामाजिक कल्याण योजना के लाभ के लिए भी आधार की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया है, हालांकि पूरी तरह आधार को समाप्त नहीं किया गया है बल्कि कुछ संशोधनों के साथ उसकी संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा है।
न्यूजक्लिक रिपोर्ट
26 Sep 2018
सांकेतिक तस्वीर

नई दिल्ली। अब मोबाइल कनेक्शन, बैंक खाते खोलने और स्कूलों में दाखिले के लिए आधार की ज़रूरत नहीं होगी। इसके साथ ही सामाजिक कल्याण योजना के लाभ के लिए भी आधार की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया गया है।

सर्वोच्च न्यायालय ने बुधवार को संशोधनों के साथ आधार की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा है। प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए.के. सीकरी और न्यायमूर्ति ए.एम. खानविलकर ने यह फैसला दिया। 
शीर्ष अदालत ने आधार अधिनियम की धारा 57 को रद्द कर दिया है, जो निजी कंपनियों को उसकी सेवा तक पहुंच के लिए आधार की मांग की इजाजत देती थी।
शीर्ष अदालत ने कहा कि बैंक खाते खोलने, स्कूलों में दाखिले और मोबाइल कनेक्शन के लिए इसकी जरूरत नहीं होगी।

पीठ ने कहा, "आधार के माध्यम से सत्यापन में विफल रहने पर किसी भी व्यक्ति को सामाजिक कल्याण योजना के लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता।"
पीठ ने कहा, "विशिष्टता, आधार और पहचान के अन्य सबूत के बीच का एक मौलिक अंतर है।"
न्यायाधीश ने कहा कि आधार की नकल नहीं की जा सकती और यह एक विशिष्ट पहचान है।
उन्होंने कहा, "हम आधार योजना के तहत जुटाए गए डेटा को सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपायों पर नजर बनाएं हैं।" 
उन्होंने कहा, "हम सरकार को निर्देश देते हैं कि वह सुनिश्चित करे कि किसी अवैध प्रवासी को आधार जारी न हो।" 
उन्होंने कहा कि आज तक हमने आधार अधिनियम में ऐसा कुछ नहीं पाया है जिससे किसी व्यक्ति की निजता के अधिकार का उल्लंघन हुआ हो।

(इनपुट आईएएनएस)

Aadhaar
Supreme Court

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